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★संदीप मौर्या★
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★संदीप मौर्या★
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#👉 लोगों के लिए सीख👈 रात को सोने का तरीका आपकी दवा से ज़्यादा असरदार हो सकता है। जब आप बाईं करवट सोते हैं, तो आपके पेट की बनावट और गुरुत्वाकर्षण मिलकर एसिड को नीचे ही रखते हैं। पेट हमारे शरीर में थोड़ा बाईं तरफ झुका होता है, इसलिए इस पोज़िशन में पेट का एसिड ऊपर ग्रासनली में वापस नहीं जाता। यही वजह है कि एसिडिटी, जलन और हार्टबर्न कम हो जाते हैं। साइंस बताती है कि दाईं करवट सोने पर एसिड को ऊपर जाने का रास्ता मिल जाता है, जिससे रिफ्लक्स की समस्या बढ़ सकती है। लेकिन बाईं करवट सोने पर पाचन बेहतर होता है, पेट जल्दी खाली होता है और नींद भी गहरी आती है। इसी कारण डॉक्टर GERD, अपच और एसिडिटी वाले लोगों को बाईं करवट सोने की सलाह देते हैं। एक छोटा सा बदलाव, लेकिन असर पूरी रात और पूरे शरीर पर पड़ता है। Source: Journal of Clinical Gastroenterology, Cleveland Clinic, American Gastroenterological Association #ब्रह्मांडज्ञान #brahmandgyan #ScienceFacts #HealthScience #SleepScience #Digestion #GERD #HealthyHabits #BodyScience #🌙 गुड नाईट #🌃 तारों संग शुभ रात्रि ✨ #👍All The Best #😇मन शांत करने के उपाय
★संदीप मौर्या★
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#🤩पॉजिटिव स्टोरी✌ राजपाल ने 20 चेक दिए, सभी बाउंस हुएः जिस फिल्म में पैसा लगाया वह 42 लाख कमा सकी; कर्ज न लौटाया तो दोगुनी संपत्ति कुर्क होगी... बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव साल-2010 तक अपने करियर के पीक पर थे। धमाल, फिर हेरा-फेरी, गोलमाल, ढोल और भूलभुलैया जैसी सुपरहिट फिल्में कर चुके थे। इंडस्ट्री में उनकी डिमांड थी। 2010 में उन्होंने तय किया कि अता-पता लापता नाम की फिल्म बनाएंगे। पैसे कम थे, इसलिए एक कारोबारी से 5 करोड़ रुपए उधार ले लिए। 11 करोड़ की लागत से बनी फिल्म रिलीज हुई, तो बुरी तरह से फ्लॉप हो गई। महज 42 लाख कमा सकी। #rajpalyadav #indian #actor #😍 बॉलीवुड लवर्स 🎵 #🎬 एक्शन मूवीज़ #😍मेरा फेवरेट सेलिब्रिटी #😍मेरा फेवरेट सेलिब्रिटी #😍बॉलीवुड के सितारे
★संदीप मौर्या★
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#🌷शुभ सोमवार #🔱ॐ नमः शिवाय🔱 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🙏शिव पार्वती #🙏जय महाकाल📿 || ॐ सर्वेभ्यो देवेभ्यो नमः || --- :: x :: --- “प्रकीर्णस्तोत्राणि” {श्रीमृत्युञ्जयस्तोत्रम्} --- :: x :: --- पोस्ट—६ भेषजं भवरोगिणामखिलापदामपहारिणं दक्षयज्ञविनाशिनं त्रिगुणात्मकं त्रिविलोचनम् | भुक्तिमुक्तिफलप्रदं निखिलाघसंघनिबर्हणं चन्द्रशेखरमाश्रये मम किं करिष्यति वै यमः || ६ || * जो जन्म-मरणके रोगसे ग्रस्त पुरुषोंके लिये औषधरूप हैं, समस्त आपत्तियोंका निवारण और दक्ष-यज्ञका विनाश करनेवाले हैं, सत्त्व आदि तीनों गुण जिनके स्वरूप हैं, जो तीन नेत्र धारण करते, भोग और मोक्षरूपी फल देते तथा सम्पूर्ण पापराशिका संहार करते हैं, उन भगवान् चन्द्रशेखरकी मैं शरण लेता हूँ | यमराज मेरा क्या करेगा? | हरिःशरणम् ! हरिःशरणम् ! हरिःशरणम् ! हरिःशरणम् ! --- :: x :: ------ :: x :: ------ :: x :: ------ :: x :: ---
★संदीप मौर्या★
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#🌺 श्री गणेश #🙏🏻 गणपति भजन 🌺 #📝गणपति भक्ति स्टेटस🌺 #🙏प्रातः वंदन #🔯🙏शुभ बुधवार🙏🔯 🚩सीताराम -सीताराम🚩 =============== 🚩जो सुमिरत सिधि होइ गन नायक करिबर बदन। 🚩 🚩करउ अनुग्रह सोइ बुद्धि रासि सुभ गुन सदन।। 🚩 अर्थ :- ===vi जिनके स्मरण मात्र से ही सिद्धियां प्राप्त होती हैं। जो गुणों के अधिपति और सुंदर हाथी के मुख वाले हैं, बुद्धि के समूह और गुणों के भंडार हैं।वे श्री गणेश जी मेरे ऊपर कृपा करें।
★संदीप मौर्या★
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#🛕महाशिवरात्रि की शुभकामनाएं🚩 . शिवरात्रि व्रत कथा प्राचीन काल में, किसी जंगल में एक गुरुद्रुह नाम का एक शिकारी रहता था जो जंगली जानवरों का शिकार करता तथा अपने परिवार का भरण-पोषण किया करता था। एक बार शिव-रात्रि के दिन जब वह शिकार के लिए निकला, पर संयोगवश पूरे दिन खोजने के बाद भी उसे कोई शिकार न मिला। उसके बच्चों, पत्नी एवं माता-पिता को भूखा रहना पड़ेगा इस बात से वह चिंतित हो गया। सूर्यास्त होने पर वह एक जलाशय के समीप गया, और वहाँ एक घाट के किनारे एक पेड़ पर थोड़ा सा जल पीने के लिए लेकर, चढ़ गया। उसे पूरी उम्मीद थी कि कोई न कोई जानवर अपनी प्यास बुझाने के लिए यहाँ जरूर आयेगा। वह पेड़ ‘बेल-पत्र’ का था और उसी पेड़ के नीचे शिवलिंग भी था जो सूखे बेलपत्रों से ढके होने के कारण दिखाई नहीं दे रहा था। रात का पहला प्रहर बीतने से पहले एक हिरणी वहाँ पर पानी पीने के लिए आई। उसे देखते ही शिकारी ने अपने धनुष पर बाण साधा। ऐसा करने में, उसके हाथ के धक्के से कुछ पत्ते एवं जल की कुछ बूँदे नीचे बने शिवलिंग पर गिरीं और अनजाने में ही शिकारी की पहले प्रहर की पूजा हो गयी। हिरणी ने जब पत्तों की खड़खड़ाहट सुनी, तो घबरा कर ऊपर की ओर देखा, और भयभीत हो कर, शिकारी से, काँपते हुए स्वर में बोली–मुझे मत मारो।’ शिकारी ने कहा–‘‘वह और उसका परिवार भूखा है इसलिए वह उसे नहीं छोड़ सकता।’ हिरणी ने वादा किया कि वह अपने बच्चों को अपने स्वामी को सौंप कर लौट आयेगी। तब वह उसका शिकार कर ले। ऐसी ही अनेकानेक पोस्ट पढ़ने के लिये हमारा फेसबुक पेज ‘श्रीजी की चरण सेवा’ को लाईक एवं फॉलो करें। अब आप हमारी पोस्ट व्हाट्सएप चैनल पर भी देख सकते हैं। चैनल लिंक हमारी फेसबुक पोस्टों में देखें। शिकारी को उसकी बात का विश्वास नहीं हो रहा था। उसने फिर से शिकारी को यह कहते हुए अपनी बात का भरोसा करवाया कि जैसे सत्य पर ही धरती टिकी है; समुद्र मर्यादा में रहता है और झरनों से जल-धाराएँ गिरा करती हैं वैसे ही वह भी सत्य बोल रही है। क्रूर होने के बावजूद भी, शिकारी को उस पर दया आ गयी और उसने ‘जल्दी लौटना’ कहकर, उस हिरनी को जाने दिया। थोड़ी ही देर बाद एक और हिरनी वहाँ पानी पीने आई, शिकारी सावधान हो गया, तीर साधने लगा और ऐसा करते हुए, उसके हाथ के धक्के से फिर पहले की ही तरह थोडा जल और कुछ बेलपत्र नीचे शिवलिंग पर जा गिरे और अनायास ही शिकारी की दूसरे प्रहर की पूजा भी हो गयी। इस हिरनी ने भी भयभीत हो कर, शिकारी से जीवनदान की याचना की लेकिन उसके अस्वीकार कर देने पर, हिरनी ने उसे लौट आने का वचन, यह कहते हुए दिया कि उसे ज्ञात है कि जो वचन दे कर पलट जाता है, उसका अपने जीवन में संचित पुण्य नष्ट हो जाया करता है। उस शिकारी ने पहले की तरह, इस हिरनी के वचन का भी भरोसा कर उसे जाने दिया। अब तो वह इसी चिन्ता से व्याकुल हो रहा था कि उनमें से शायद ही कोई हिरनी लौट के आये और अब उसके परिवार का क्या होगा। इतने में ही उसने जल की ओर आते हुए एक हिरण को देखा, उसे देखकर शिकारी बड़ा प्रसन्न हुआ। अब फिर धनुष पर बाण चढाने से उसकी तीसरे प्रहर की पूजा भी स्वतः ही सम्पन्न हो गयी लेकिन पत्तों के गिरने की आवाज से वह हिरन सावधान हो गया। उसने शिकारी को देखा और पूछा–‘तुम क्या करना चाहते हो ?’ शिकारी बोला–‘अपने कुटुम्ब को भोजन देने के लिए तुम्हारा वध करूँगा।’ वह मृग प्रसन्न हो कर कहने लगा–‘मैं धन्य हूँ कि मेरा यह शरीर किसी के काम आएगा, परोपकार से मेरा जीवन सफल हो जायेगा पर कृपया कर अभी मुझे जाने दो ताकि मैं अपने बच्चों को उनकी माता के हाथ में सौंप कर और उन सबको धीरज बँधा कर यहाँ लौट आऊँ।’ शिकारी का हृदय, उसके पापपुंज नष्ट हो जाने से अब तक शुद्ध हो गया था इसलिए वह विनय पूर्वक बोला–‘जो-जो यहाँ आये, सभी बातें बनाकर चले गये और अभी तक नहीं लौटे, यदि तुम भी झूठ बोलकर चले जाओगे, तो मेरे परिजनों का क्या होगा ?’ अब हिरन ने यह कहते हुए उसे अपने सत्य बोलने का भरोसा दिलवाया कि यदि वह लौटकर न आये; तो उसे वह पाप लगे जो उसे लगा करता है जो सामर्थ्य रहते हुए भी दूसरे का उपकार नहीं करता। शिकारी ने उसे भी यह कहकर जाने दिया कि ‘शीघ्र लौट आना।’ रात्रि का अन्तिम प्रहर शुरू होते ही उस शिकारी के हर्ष की सीमा न थी क्योंकि उसने उन सब हिरन-हिरनियों को अपने बच्चों सहित एकसाथ आते देख लिया था। उन्हें देखते ही उसने अपने धनुष पर बाण रखा और पहले की ही तरह उसकी चौथे प्रहर की भी शिव-पूजा सम्पन्न हो गयी। अब उस शिकारी के शिव कृपा से सभी पाप भस्म हो गये इसलिए वह सोचने लगा–‘ओह, ये पशु धन्य हैं जो ज्ञानहीन हो कर भी अपने शरीर से परोपकार करना चाहते हैं लेकिन धिक्कार है मेरे जीवन को कि मैं अनेक प्रकार के कुकृत्यों से अपने परिवार का पालन करता रहा।’ अब उसने अपना बाण रोक लिया तथा मृगों से कहा की वे सब धन्य है तथा उन्हें वापिस जाने दिया। उसके ऐसा करने पर भगवान् शंकर ने प्रसन्न हो कर तत्काल उसे अपने दिव्य स्वरूप का दर्शन करवाया तथा उसे सुख-समृद्धि का वरदान देकर ‘गुह’ नाम प्रदान किया। शिवजी जटाओं में गंगाजी को धारण करने वाले, सिर पर चन्द्रमा को सजाने वाले, मस्तक पर त्रिपुण्ड तथा तीसरे नेत्र वाले, कण्ठ में कालपाश (नागराज) तथा रुद्राक्ष-माला से सुशोभित, हाथ में डमरू और त्रिशूल है। भक्तगण बड़ी श्रद्धा से जिन्हें शिवशंकर, शंकर, भोलेनाथ, महादेव, भगवान् आशुतोष, उमापति, गौरीशंकर, सोमेश्वर, महाकाल, ओंकारेश्वर, वैद्यनाथ, नीलकण्ठ, त्रिपुरारि, सदाशिव तथा अन्य सहस्त्रों नामों से सम्बोधित कर उनकी पूजा-अर्चना किया करते हैं। ऐसे भगवान् शिव एवं शिवा हम सबके चिन्तन को सदा-सदैव सकारात्मक बनायें एवं सबकी मनोकामनाएँ पूरी करें। ० ० ० ॥ॐ नमः शिवाय्॥ ******************************************** #💐फूलों वाली शुभकामनाएं🌹 #🙏चारधाम यात्रा🛕 #🛕बाबा केदारनाथ📿 #🕉️सनातन धर्म🚩
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