आदरणीय संत गरीबदास जी महाराज ने परमेश्वर कबीर साहेब जी द्वारा माघ माह शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी विक्रमी संवत 1575 (सन् 1518) को मगहर से लाखों लोगों के सामने से सशरीर सतलोक जाने का वर्णन करते हुए कहा है कि -
देख्या मगहर जहूरा सतगुरु, देख्या मगहर जहूरा हो।
काशी में कीर्ति कर चाले, झिलमिल देही नूरा हो।
कीन्हा मगहर पियाना सतगुरु, कीन्हा मगहर पियाना हो।
दोनो दीन चले संग जाके, हिन्दू-मुसलमाना हो।।
माघ महीने की शुक्ल पक्ष तिथि एकादशी वि.सं. 1575 सन् 1518 को अविनाशी परमात्मा कबीर साहेब जी मगहर से सशरीर सतलोक गये। उनके शरीर के स्थान पर केवल सुगन्धित पुष्प मिले थे।
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