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सुचिता जामगावकर जैन
@suchitaj
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सुचिता जामगावकर जैन
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2 days ago
अथांग पसरलेला समुद्र किती खोल आहे ते पहात बसत नाही त्यासाठी तळाशी असलेले काही कीटक वगैरे शंखशिंपले समुद्र किनारा उद्योगपती जर असेल तर मोती दागीने बनवेल पण मनशी गुंतागूंत काही प्रश्न निर्माण झाले तर पाय सोडून समुद्र तटावर बसल्यावर सुटू शकतील खारे वारे वाहू लागले की वाट ते समुद्राचे पणी खरे असेल खरे वरे पूर्व कडुन पश्चिम कडे वाहतात तर पवन चककी नुसार कळते.पवनचक्की साधन साध्य काय करते साध्यता सिद्ध करते साधनातून साधन असे प्रवाहात जाते समुद्रा वरुन खारे वारे वाहू लागले की स्ल्फर आॅक्साइड़ मुळे गंधक निर्माण होवुन पाणी पिवळे होवू शकते समुद्राच्या पाण्यातून मीठ तयार होते या मीठा चा वापर शुद्ध करुन गृहिनी स्वयंपाकात करतात मीठाशिवाय चव नसते या उक्ती प्रमाणे खारे वारे प्रमाण किती आहे हे तपमान वातावरन निर्मीती वरुन कळले या पाण्यातून आयन्स निर्मित होतात ते अपायकारक नसतात हे आयन्स भगवंता वर जलध्रारा बरसल्यावर जास्त निर्माण होतात नमन करुन मी नमन घेत असते.🙏गंध + उदक =गंधोदक 🙏🙏💦🙏🙏प्रणाम.
सौ सुचिता सुनिल जामगावकर. जैन.
अथांग पसरलेला समुद्र किती खोल आहे ते पहात बसत नाही त्यासाठी तळाशी असलेले काही कीटक वगैरे शंखशिंपले समुद्र किनारा उद्योगपती जर असेल तर मोती दागीने बनवेल पण मनशी गुंतागूंत काही प्रश्न निर्माण झाले तर पाय सोडून समुद्र तटावर बसल्यावर सुटू शकतील खारे वारे वाहू लागले की वाट ते समुद्राचे पणी खरे असेल खरे वरे पूर्व कडुन पश्चिम कडे वाहतात तर पवन चककी नुसार कळते.पवनचक्की साधन साध्य काय करते साध्यता सिद्ध करते साधनातून साधन असे प्रवाहात जाते समुद्रा वरुन खारे वारे वाहू लागले की स्ल्फर आॅक्साइड़ मुळे गंधक निर्माण होवुन पाणी पिवळे होवू शकते समुद्राच्या पाण्यातून मीठ तयार होते या मीठा चा वापर शुद्ध करुन गृहिनी स्वयंपाकात करतात मीठाशिवाय चव नसते या उक्ती प्रमाणे खारे वारे प्रमाण किती आहे हे तपमान वातावरन निर्मीती वरुन कळले या पाण्यातून आयन्स निर्मित होतात ते अपायकारक नसतात हे आयन्स भगवंता वर जलध्रारा बरसल्यावर जास्त निर्माण होतात नमन करुन मी नमन घेत असते.🙏गंध + उदक =गंधोदक 🙏🙏💦🙏🙏प्रणाम. जैन युवा मंच महाराष्ट्र राज्य का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App https://primetrace.com/group/2874/post/1188112642?utm_source=android_post_share_web&referral_code=P6BRH&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=ADMIN ##जैन धर्म
सुचिता जामगावकर जैन
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5 days ago
ऋषभअजित संभव अभीनंदन सुमती पद्म सुपार्श्व जिनराय चंद्र पुष्प शितल श्रेयांस वासुपूज्य पुजित सुरराय विमल अनंत धर्मजस उज्वल शान्ती कुन्थु अरि मल्ली मनाय मुनीसुव्रत नमी नेमी पार्श्वनाथ वर्धमान पद पुष्प चढाय🌹🌼🙏🙏🙏 ##जैन धर्म
सुचिता जामगावकर जैन
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13 days ago
राग और शुभाशुभ भव दोनोही संसार भ्रमण के लिये जो राग हम अपनते है वो मुक्ति केलिये अशुभ भाव लगता है मुक्ति पाने के लिये शुभ कर्मो का उदय आना चाहीये. वस्तू स्वभाव जुगुप्सा जुग्नू चमकते त्याला पर्याय असु शकत नही जुगुप्सा वृत्ती जर प्राप्त होत असते तर सिद्धांत शास्त्र काय सांगते हे माहित होत नसते पण वृत्तीत बदल घडवत असतो तर ज्ञान वृद्धी चिकित्सक बुद्धी निर्माण होते. धर्म के प्रती शुद्ध भाव होकर समयक दृष्टी बन जाते है.🙏नमो जीनानम 🙏प्रणाम सर्वाना जैन युवा मंच महाराष्ट्र राज्य का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App https://primetrace.com/group/2874/post/1187278839?utm_source=android_post_share_web&referral_code=P6BRH&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=ADMIN ##जैन धर्म
सुचिता जामगावकर जैन
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18 days ago
🚩सनातन धर्म के चार युग: सत्य से कलियुग तक मानव चेतना, धर्म और समय का अद्भुत चक्र 🚩भारतीय सनातन परंपरा में समय को केवल घड़ी की सूइयों या वर्षों की गणना से नहीं देखा गया, बल्कि उसे चेतना, धर्म, संस्कार और मानव प्रवृत्तियों के क्रमिक उत्थान-पतन के रूप में समझा गया है। यही कारण है कि हमारे ऋषियों ने समय को चार महान युगों—सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग—में विभाजित किया। यह केवल पौराणिक कथा नहीं, बल्कि मानव सभ्यता, नैतिकता, आध्यात्मिकता और सामाजिक संरचना के गहरे मनोवैज्ञानिक तथा दार्शनिक विश्लेषण का अद्भुत प्रतिरूप है। वेदों, पुराणों और महाभारत में वर्णित यह युगचक्र आज भी भारतीय मानस को दिशा देता है और यह समझने में सहायता करता है कि मानवता किन आदर्शों से दूर हुई और किन मूल्यों की ओर उसे पुनः लौटना चाहिए। 🚩सनातन धर्म में समय को रेखीय नहीं, बल्कि चक्रीय माना गया है। जिस प्रकार ऋतुएँ बार-बार लौटती हैं, उसी प्रकार युग भी निरंतर परिवर्तनशील चक्र में प्रवाहित होते हैं। श्रीमद्भागवत महापुराण और विष्णु पुराण के अनुसार धर्म को एक चार पैरों वाले वृषभ के रूप में चित्रित किया गया है। सतयुग में धर्म अपने चारों चरणों पर स्थिर रहता है, किंतु प्रत्येक अगले युग में उसका एक-एक चरण क्षीण होता जाता है। यही कारण है कि सतयुग पूर्ण सत्य और सात्त्विकता का प्रतीक माना गया, जबकि कलियुग में धर्म केवल एक चरण पर टिकता दिखाई देता है। 🚩सतयुग को कृतयुग भी कहा जाता है। यह मानव चेतना की सर्वोच्च अवस्था का युग माना गया है। इस युग में सत्य, तप, करुणा, संयम और आध्यात्मिकता मानव जीवन का स्वाभाविक अंग थे। मनुष्य का अंतःकरण निर्मल था, प्राणशक्ति अत्यंत प्रबल थी और जीवन पूर्णतः सात्त्विक प्रवृत्तियों से संच जैन युवा मंच महाराष्ट्र राज्य का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App https://primetrace.com/group/2874/post/1186641953?utm_source=android_post_share_web&referral_code=P6BRH&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=ADMIN #🌞 Good Morning🌞
सुचिता जामगावकर जैन
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26 days ago
द्रव्य संग्रह हा एक वितरनाचा भाग असेल तर द्रव्यात जावून पदार्थाचे मुल्यांकन करुन मग त्यामध्ये जीव ओतून काही कर्म करु शकतो तर ती म्हणजे प्रकृतीचा विकास घडतो जिवन द्रव्य द्रव्यानी धर्मानी सधनानी सा धन वितरण कृपाभिलाशी बनने म्हणजे उत्सुकता निर्माण होते वन विभागात जावुन काही कर्म करयचे म्हणले तर वृक्ष लागवड .आत्मोन्नती साठी आत्म साधक बन ने चै त्यन्य जागृत करने etc 🙏प्रणाम जय जिनेंद्र एवरीवन जैन युवा मंच महाराष्ट्र राज्य का app आ गया है । सभी सदस्य नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके तुरंत ही जुड़ें और अपना सदस्य Community कार्ड प्राप्त करे - Powered by Kutumb App https://primetrace.com/group/2874/post/1186315310?utm_source=android_post_share_web&referral_code=P6BRH&utm_screen=post_share&utm_referrer_state=ADMIN ##जैन धर्म