यह मंत्र शांति का सबसे मौलिक आह्वान है।
उत्पत्ति: इसका मूल उपनिषदों में मिलता है। वेदों के अंत में अक्सर "शांति पाठ" किया जाता है।
इतिहास और अर्थ: * ओम: ब्रह्मांड की पहली ध्वनि या परमात्मा का प्रतीक।
शांति: इसे अक्सर तीन बार कहा जाता है (ओम शांति, शांति, शांति) ताकि आदिदैविक, आदिभौतिक और आध्यात्मिक—इन तीनों प्रकार के ताप (दुखों) से मुक्ति मिले।
आधुनिक संदर्भ: बीसवीं सदी में ब्रह्माकुमारीज़ संस्था ने इसे एक अभिवादन के रूप में लोकप्रिय बनाया, जिसका अर्थ है "मैं एक शांत स्वरूप आत्मा हूँ।"
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