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. नानक जी का अयोध्या भ्रमण
एक दिन गुरू नानक जी के परम शिष्य भाई बाला व मरदाना ने नानक जी से कहा कि हमने अयोध्या नही देखी जिधर रामचंद्र जी का जन्म हुआ था। तब नानक जी भाई बाला और मरदाना के साथ अयोध्या नगरी पहुंच गये।
गुरु जी ने जैसे ही अयोध्या नगरी में प्रवेश किया, लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई। गुरु जी ने एक पण्डित से पूछा कि हमने सुना है कि अयोध्या नगरी को श्रीराम जी अपने साथ बैकुण्ठ में ले गए थे, फिर यह तो यहीं के यहीं हैं।
पंडितों ने कहा वह केवल अयोध्या नगरी के जीवों को ही साथ लेकर गए थे, महल-माडिया तो सब यहीं हैं। गुरु जी ने कहा उन लोगों ने श्री राम चन्द्र जी के दर्शन व सेवा किए थे जिसके लिए वह उनके साथ बैकुण्ठ चले गए थे।
परन्तु तुम बैकुण्ठ नहीं जा सकते, जब तक गुरु उपदेश के द्वारा भक्ति धारण नहीं करोगे। गुरु जी से उन्होंने प्रश्न किया कि हम कौन सा गुरु धारण करें। गुरु जी ने बताया कि जिसको पूर्ण ज्ञान हो, मोह-माया से निलौप हो। वह जो शास्त्रानुकुल साधना करवाये। वह उस परमात्मा का अंश होता है।
वह सतगुरु आप भी मुक्त हो जाता है। और दूसरे भी उसके साथ चलते है। जो परम धाम को प्राप्त करते हैं। पंडितों के कहने कहने पर आपने उन्हें नाम मंत्र का उपदेश देकर भाग्यशाली बनाया। पण्डित समाज को कहा कि नाम जपना , दान देना व संतो साधु की सेवा करना।
नानक जी ने अयोध्या नगरी के लोगों को बताया कि मै उसका हुक्म से नाम मंत्र का उपदेश देने आया हू। वह खुद सचखण्ड का मालिक है।उसके नूर से सब नूर है।
Baakhabar Sant Rampal Ji