जय श्री गणेशा

sn vyas
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3 days ago
#जय श्री गणेश गणेश जी के स्वरूप और उनके जीवन दर्शन से यह स्पष्ट होता है कि दुख में भी प्रसन्न रहने का रहस्य मानसिक संतुलन और आत्म-बोध में छिपा है। उनके अनुसार प्रसन्नता बाहरी परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि हमारे आंतरिक दृष्टिकोण पर निर्भर करती है। * स्वीकार्यता का भाव: गणेश जी का गज-मुख (हाथी का मुख) इस बात का प्रतीक है कि जीवन में जो भी परिस्थितियां आएं, उन्हें सहजता से स्वीकार करना चाहिए। जब मनुष्य अनचाही स्थितियों का विरोध करना छोड़ देता है और उन्हें ईश्वरीय विधान मानकर स्वीकार कर लेता है, तो आधे दुख स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं। * विशाल दृष्टिकोण (गज कर्ण): उनके बड़े कान यह सिखाते हैं कि संसार की बातों और आलोचनाओं को सुनें, लेकिन केवल काम की बातों को ही भीतर उतारें। व्यर्थ की बातों को अनसुना कर देने से मन अशांत नहीं होता, जिससे कठिन समय में भी प्रसन्नता बनी रहती है। * बुद्धि और विवेक का प्रयोग: गणेश जी 'बुद्धि विधाता' हैं। दुख में प्रसन्न रहने का रहस्य यह है कि हम भावनाओं में बहने के बजाय अपनी बुद्धि का उपयोग करें। जब हम समस्या के बजाय समाधान पर ध्यान केंद्रित करते हैं, तो मन में सकारात्मकता का संचार होता है। * पाचन शक्ति (लंबोदर): उनका बड़ा पेट इस बात का संकेत है कि जीवन के अच्छे और बुरे, दोनों अनुभवों को 'पचाना' सीखें। जैसे वे संसार के विघ्नों को अपने भीतर समा लेते हैं, वैसे ही मनुष्य को दुख के कड़वे अनुभवों को मन में गांठ बनाने के बजाय उन्हें भुला देना चाहिए। * वर्तमान में जीना: गणेश जी मंगलमूर्ति हैं। वे सिखाते हैं कि बीते हुए कल के दुख और आने वाले कल की चिंता को छोड़कर वर्तमान क्षण में आनंद खोजना ही प्रसन्नता का असली रहस्य है। छोटी-छोटी चीजों में खुशियां ढूंढना ही जीवन को उत्सव बनाता है।
Himkar prasad singh
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7 days ago
🍁🍁जब आप अच्छे कर्म करते है। तो आप को भगवान् के पास जाने की आवस्यकता नही होती............. बल्कि भगवान् को ही आप की पास आना परता है.!!!! तेरी बातों में वो जादू है जो मुझे मोह लेता है,तेरा खामोश रहना भी मेरा चैन छीन लेता है, गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:। नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।। धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:। गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।शुभ प्रभात , सुंदरबुधवार #जय श्री गणेश