2122 1212 22
रात दिन आहें भर रहा हूँ मै
याद बस तुम्हें कर रहा हूँ मै
हो रही खत्म ज़िन्दगी मेरी
रेत बनकर बिखर रहा हूँ मै
थम रही धीरेधीरे धड़कन भी
लम्हे लम्हे में मर रहा हूँ मै
छोड़कर साथ तुम गये जबसे
हर सफर दर - बदर रहा हूँ मै
भाग जाती है छोड़ कर खुशी
गर्दिशे वो बशर रहा हूँ मै
फिर मिलादे उसीसे खुदाअब
गम के सायों से डर रहा हूँ मै
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
23/3/2018
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