📜मेरी कलम से✒️

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15 days ago
2122 1212 22 रात दिन आहें भर रहा हूँ मै याद बस तुम्हें कर रहा हूँ मै हो रही खत्म ज़िन्दगी मेरी रेत बनकर बिखर रहा हूँ मै थम रही धीरेधीरे धड़कन भी लम्हे लम्हे में मर रहा हूँ मै छोड़कर साथ तुम गये जबसे हर सफर दर - बदर रहा हूँ मै भाग जाती है छोड़ कर खुशी गर्दिशे वो बशर रहा हूँ मै फिर मिलादे उसीसे खुदाअब गम के सायों से डर रहा हूँ मै ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 23/3/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️