vastushastra

Akshay Jamdagni
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3 दिन पहले
🔥 🔱 नव संवत्सर 2083 का महाफलादेश: नवरात्रि की शुरुआत किस नक्षत्र, राशि और लग्न में हुई? जानें सभी राशियों पर असर 🔮✨ 🔮✨शुभ हिंदू नव संवत्सर 2083 एवं चैत्र नवरात्रि की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं। आज 19 मार्च 2026 को एक अत्यंत दुर्लभ और शुभ संयोग के साथ नए वर्ष का आगाज़ हुआ है। इस वर्ष की ग्रह स्थिति ज्योतिषीय दृष्टिकोण से बहुत ही प्रभावशाली है, जो आने वाले समय में बड़े बदलावों का संकेत दे रही है। ✨ नक्षत्र, राशि और लग्न की स्थिति इस नवसंवत्सर की शुरुआत उत्तर भाद्रपद नक्षत्र और मीन राशि के साथ हुई है। संवत्सर के आरंभ के समय शुक्ल योग के साथ मीन लग्न विद्यमान है। मीन लग्न का अर्थ है कि इस वर्ष की नींव आत्मचिंतन, मोक्ष की आकांक्षा और उच्च आदर्शों पर टिकी है। यह लग्न देवगुरु बृहस्पति के प्रभाव में आता है, और चूंकि इस वर्ष के राजा भी बृहस्पति हैं, इसलिए यह संयोग धर्म, शिक्षा और न्याय के क्षेत्र में विशेष शुभ फल देने वाला सिद्ध होगा। 🏛️📖 👑 संवत्सर 2083 का मंत्रिमंडल इस संवत के राजा बृहस्पति और मंत्री मंगल हैं। राजा बृहस्पति: इनके प्रभाव से सामाजिक व्यवस्था, कानून और शिक्षा के मामलों में सकारात्मक सुधार देखने को मिलेंगे। ⚖️ मंत्री मंगल: मंगल के मंत्री होने से जनसाधारण को कुछ चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। अग्नि, युद्ध और आकस्मिक दुर्घटनाओं की आशंका बनी रह सकती है। 🔥⚔️ सेनाधिपति चंद्रदेव: राजा, मंत्री और सेनाधिपति की यह त्रयी बताती है कि पूरे वर्ष ज्ञान और पराक्रम के बीच एक संतुलन बना रहेगा, हालांकि आम जनता को धैर्य और संयम से काम लेना होगा। 🌙 📅 13 महीनों का विशेष वर्ष (अधिकमास) हिंदू नववर्ष 2083 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इस बार ज्येष्ठ का महीना बढ़ रहा है। इसके कारण इस वर्ष 12 के बजाय कुल 13 महीने होंगे। अधिकमास आरंभ: 17 मई 2026 अधिकमास समापन: 15 जून 2026 धार्मिक दृष्टि से यह समय जप, तप और दान के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। 🙏✨ 🌙 मां दुर्गा की सवारी: पालकी ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब नवरात्रि गुरुवार से शुरू होती है, तो मां दुर्गा की सवारी पालकी (डोली) मानी जाती है। देवी का पालकी पर आगमन सुख, शांति और आशीर्वाद का प्रतीक है, जो भक्तों के जीवन में सौम्यता लेकर आता है। 🌸🌺 🔮 सभी राशियों पर महाफलादेश (2083) यह वर्ष समग्र रूप से औसत बारिश, थोड़ी महंगाई और अंतरराष्ट्रीय तनाव वाला हो सकता है, लेकिन आध्यात्मिक रूप से बहुत मजबूत रहेगा। मेष (Aries): करियर में दबाव रहेगा, लेकिन साल के अंत में सुधार होगा। खर्चों पर नियंत्रण रखें। 📉 वृषभ (Taurus): मेहनत से बड़ी सफलता मिलेगी। वाहन या विलासिता पर खर्च बढ़ सकता है। 🚗 मिथुन (Gemini): अप्रैल के बाद वित्त और करियर में अचानक लाभ के योग हैं। 💰 कर्क (Cancer): स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहें (पाचन/BP)। भावनात्मक स्थिरता बनाए रखें। 🧘 सिंह (Leo): शनि की ढैय्या का असर रहेगा। मार्च से नवंबर के बीच नई योजनाओं में देरी संभव है। ⏳ कन्या (Virgo): फरवरी से मई तक करियर में दबाव, लेकिन उसके बाद स्थितियां सुधरेंगी। ✅ तुला (Libra): जून तक महत्वपूर्ण फैसले लेंगे। नेटवर्क बढ़ेगा और आर्थिक लाभ होगा। 🤝 वृश्चिक (Scorpio): आय के नए स्रोत बनेंगे। रक्त और पाचन संबंधी स्वास्थ्य का ध्यान रखें। 🩺 धनु (Sagittarius): मानसिक तनाव रह सकता है, पर अंत में आध्यात्मिक उन्नति और शुभ फल मिलेंगे। ✨ मकर (Capricorn): खर्च अप्रत्याशित हो सकते हैं। सितंबर से नवंबर के बीच मान-सम्मान मिलेगा। 🏆 कुंभ (Aquarius): जून तक अच्छी प्रगति होगी। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी। 🏡 मीन (Pisces): शुरुआत में पारिवारिक जिम्मेदारियां बढ़ेंगी। साल के अंत में सामाजिक मान्यता मिलेगी। 🌟 💡 विशेष सलाह इस मीन लग्न और उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के प्रभाव से यह वर्ष आध्यात्मिक मजबूती का है। नवरात्रि में मां दुर्गा की विशेष पूजा और गुरु/शनि की उपासना से कष्टों का निवारण होगा। धैर्य रखें और दान-पुण्य करते रहें। जय माता दी! शुभ नववर्ष! 🙏🚩 #नवरात्रि2026 #हिंदू_नववर्ष #संवत्सर2083 #ज्योतिष #ChaitraNavratri #AstroVastuKosh #Rashifal2026 #AstroUpdate #VedicAstrology #akshayjamdagni #astrovastukosh क्या आप अपनी कुंडली के अनुसार इस अधिकमास में किए जाने वाले विशेष दान या उपायों के बारे में विस्तार से जानना चाहेंगे? #🙏 माँ वैष्णो देवी #❤️जीवन की सीख ##akshayjamdagni #🙏शाम की आरती🪔 #astrovastukosh
Akshay Jamdagni
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3 दिन पहले
*卐~ आज का वैदिक हिन्दू पंचांग by Astro Vastu Kosh~卐* *🌸 🚩 ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि रचना के पावन पर्व 'रौद्र' नामक नूतन संवत्सर 2083 एवं हिंदू नव वर्ष की मंगलमयी शुभकामनाएँ! 🌸✨ 🌸* *🔱 आज का वैदिक पंचांग एवं वास्तु विशेष 🔱* *​प्रतिदिन शुभ मुहूर्त, राहुकाल और धर्म-शास्त्रों की विशेष जानकारी के लिए हमारे आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल हों।* ​Join Now: https://chat.whatsapp.com/BsWPoSt9qSj7KwBvo9zWID *🌞दिनांक - 19 मार्च 2026* *⛅दिन - गुरुवार* *⛅विक्रम संवत् - 2083* *⛅अयन - उत्तरायण* *⛅ऋतु - वसंत* *⛅मास - चैत्र* *⛅पक्ष - शुक्ल* *⛅तिथि - अमावस्या प्रातः 06:52 तक, तत्पश्चात् प्रतिपदा प्रातः 04:52 मार्च 20 तक, तत्पश्चात् द्वितीया* *⛅नक्षत्र - उत्तर भाद्रपद प्रातः 04:05 मार्च 20 तक तत्पश्चात् रेवती* *⛅योग - शुक्ल मध्यरात्रि 01:17 तक तत्पश्चात् ब्रह्म* *⛅राहुकाल - दोपहर 02:05 से दोपहर 03:36 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅सूर्योदय - 06:32* *⛅सूर्यास्त - 06:37 (सूर्योदय एवं सूर्यास्त उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅दिशा शूल - दक्षिण दिशा में* *⛅ब्रह्ममुहूर्त - प्रातः 04:57 से प्रातः 05:44 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅अभिजीत मुहूर्त - दोपहर 12:11 से दोपहर 12:59 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *⛅निशिता मुहूर्त - मध्यरात्रि 12:11 से मध्यरात्रि 12:58 तक (उज्जैन मानक समयानुसार)* *🌥️व्रत पर्व विवरण - चैत्री नूतन वर्ष वि. सं.‌ 2083 प्रारम्भ, गुडी पड़वा, चैत्री नवरात्रि प्रारंभ* *🌥️विशेष - प्रतिपदा को कूष्माण्ड (कुम्हड़ा, पेठा) न खाये क्योंकि यह धन का नाश करने वाला है। (ब्रह्मवैवर्त पुराण, ब्रह्म खंड: 27.29-34)* *🔹गृह के समीपस्थ वृक्ष 🔹* *🔸 ईशान में आँवला शुभदायक है ।* *🔸 ईशान - पूर्व में कटहल एवं आम शुभदायक हैं ।* *🔸 (३) घरके पास काँटेवाले, दूधवाले तथा फलवाले वृक्ष स्त्री और सन्तान की हानि करनेवाले हैं । यदि इन्हें काटा न जा सके तो इनके पास शुभ वृक्ष लगा दें ।* *🔸 काँटेवाले वृक्ष शत्रु से भय देनेवाले, दूधवाले वृक्ष धनका नाश करनेवाले और फलवाले वृक्ष सन्तानका नाश करनेवाले हैं । इनकी लकड़ी भी घरमें नहीं लगानी चाहिये-* *आसन्नाः कण्टकिनो रिपुभयदाः क्षीरिणोऽर्थनाशाय ।* *फलिनः प्रजाक्षयकरा दारूण्यपि वर्जयेदेषाम् ॥* *(बृहत्संहिता ५३। ८६)* *(४) बदरी कदली चैव दाडिमी बीजपूरिका।* *प्ररोहन्ति गृहे यत्र तद्गृहं न प्ररोहति ॥* *🔸 (समरांगणसूत्रधार ३८ । १३१) 'बेर, केला, अनार तथा नींबू जिस घरमें उगते हैं, उस घर की वृद्धि नहीं होती । '* *🔸 अश्वत्थं च कदम्बं च कदलीबीजपूरकम् । गृहे यस्य प्ररोहन्ति स गृही न प्ररोहति ॥* *🔸 (बृहद्दैवज्ञ० ८७ ९) 'पीपल, कदम्ब, केला, बीजू नींबू ये जिस घरमें होते हैं, उसमें रहनेवाले की वंशवृद्धि नहीं होती ।'* *🔸 (५) घर के भीतर लगायी हुई तुलसी मनुष्यों के लिये कल्याणकारिणी, धन-पुत्र प्रदान करनेवाली, पुण्यदायिनी तथा हरिभक्ति देनेवाली होती है । प्रातःकाल तुलसीका दर्शन करनेसे सुवर्ण दानका फल प्राप्त होता है ।* *(ब्रह्मवैवर्तपुराण, कृष्ण० १०३ । ६२-६३ )* https://chat.whatsapp.com/BsWPoSt9qSj7KwBvo9zWID?mode=gi_t #astrovastukosh #🙏शाम की आरती🪔 #❤️जीवन की सीख ##akshayjamdagni #🙏 माँ वैष्णो देवी
Akshay Jamdagni
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4 दिन पहले
Chaitra Navratri 2026: हर इच्छा पूरी करने वाला Shubh Muhurat और घटस्थापना की Puja Vidhi विधि! 🌸✨ कल 19 मार्च 2026, गुरुवार से Chaitra Navratri 🌸 का पावन पर्व शुरू हो रहा है। इसी दिन से Hindu New Year (Vikram Samvat 2083) 🚩 का भी मंगलमय आरंभ होगा। Ghatasthapana (कलश स्थापना) के Shubh Muhurat 🏺✨ माता की चौकी सजाने और कलश स्थापना के लिए ये समय सबसे Best हैं: 🌅 Main Muhurat (Morning): सुबह 06:52 से 07:43 तक। (यह सबसे श्रेष्ठ समय है) ☀️ Abhijit Muhurat (Afternoon): दोपहर 12:05 से 12:53 तक। (सबसे शुभ घड़ी) ⏰ Choghadiya Muhurat: सुबह 06:52 से 10:10 तक। Mata Ka Vahan: डोली (Palki) 🧘‍♀️🏮 चूंकि नवरात्रि Thursday 🗓️ से शुरू हो रही है, इसलिए शास्त्रों के अनुसार मां दुर्गा का आगमन Doli (पालकी) पर हो रहा है। "शशिसूर्ये गजारूढ़ा शनिभौमे तुरंगमे। गुरौ शुक्रे च दोलायां बुधे नौका प्रकीर्त्तिता॥" 📜 Doli पर आगमन का क्या होगा फल? 🧐 देवी भागवत पुराण के अनुसार, माता का डोली पर आना कुछ विशेष संकेत (Indications) देता है: 🤒 Health Care: इसे बीमारियों के प्रति सतर्क रहने का संकेत माना जाता है। 📉 Economic Status: देश-दुनिया की Economy में थोड़ी उथल-पुथल रह सकती है। 🌪️ Natural Alerts: यह समय अपनी सुरक्षा और स्वास्थ्य के प्रति सावधान रहने का है। Mata Ki Vidai: हाथी (Gaj) 🐘🌊 नवरात्रि का समापन 27 मार्च, शुक्रवार को होगा। शुक्रवार को विदाई होने के कारण माता Elephant पर सवार होकर जाएंगी। ✅ Result: हाथी पर विदाई Extremely Lucky मानी जाती है! 🌧️ यह अच्छी बारिश और जीवन में Prosperity 💰 का प्रतीक है। Maa Shailputri Puja (Day 1) 🏔️🙏 💛 Lucky Color: कल पूजा के लिए Yellow Color के कपड़े पहनना बहुत अच्छा रहेगा। 🍯 Bhog: मां को गाय का शुद्ध घी अर्पित करें, इससे अच्छी सेहत (Good Health) का आशीर्वाद मिलता है। कलश स्थापना की अत्यंत सरल विधि (Ghatasthapana Step-by-Step) 🏺🙌 तैयारी: उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा को साफ कर गंगाजल छिड़कें। 🧭 ज्वारे बोना: मिट्टी के बर्तन में साफ मिट्टी भरकर जौ (Barley) के बीज डालें। 🌾 कलश तैयार करें: तांबे या मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाएं और मौली बांधें। कलश में जल, सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें। 💧 पल्लव और नारियल: कलश पर आम के 5 पत्ते रखें। एक नारियल को लाल चुनरी में लपेटकर कलश के ऊपर स्थापित करें। 🥥 स्थापना: कलश को जौ वाले पात्र के बीच में रखें और वरुण देव का आह्वान करें। सच्चे मन और सही मुहूर्त में की गई यह पूजा आपकी हर मनोकामना पूर्ण करने वाली होगी। ✨ #AkshayJamdagni #AstroVastuKosh #ChaitraNavratri2026 #Ghatasthapana #ShubhMuhurat #MataKaVahan #VedicAstrology #HinduNewYear2083 #NavratriSpecial #VastuTips #🙏 माँ वैष्णो देवी ##akshayjamdagni #🙏शाम की आरती🪔 #❤️जीवन की सीख #astrovastukosh
Akshay Jamdagni
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6 दिन पहले
*🔱 🌞 खरमास 2026: 14 मार्च से 14 अप्रैल तक क्यों रुक जाते हैं विवाह और शुभ कार्य? जानें नियम, महत्व और उपाय 🪔📿* *✨ 🌼 खरमास 2026 14 मार्च से 14 अप्रैल तक रहेगा। इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य क्यों नहीं किए जाते? जानें खरमास का ज्योतिषीय कारण, धार्मिक महत्व, व्रत-पूजन विधि और पौराणिक कथा। 🌞📖🪔* https://whatsapp.com/channel/0029Va51s5wLtOj7SaZ6cL2E 🌞 खरमास 2026 विशेष 14 मार्च से 14 अप्रैल 2026 तक सूर्य देव को ग्रहों का राजा कहा जाता है। वे वर्ष भर में क्रमशः 12 राशियों में गोचर करते हैं और हर गोचर का पृथ्वी तथा मानव जीवन पर विशेष प्रभाव पड़ता है। जब सूर्य देव बृहस्पति की राशियों, यानी धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तब उस अवधि को खरमास या मलमास कहा जाता है। साल में दो बार खरमास आता है। एक बार जब सूर्य धनु राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे धनुर्मास कहा जाता है, और दूसरी बार जब सूर्य मीन राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मीन खरमास कहा जाता है। 📅 वर्ष 2026 में खरमास का समय आरम्भ: 14 मार्च 2026, रात 01:01 बजे, सूर्य का मीन राशि में प्रवेश समाप्ति: 14 अप्रैल 2026, सुबह 09:33 बजे, सूर्य का मेष राशि में प्रवेश इस अवधि में सूर्य बृहस्पति की राशि में होने के कारण विवाह जैसे मंगल कार्यों के लिए अनुकूल नहीं माने जाते। 🚫 खरमास में कौन-कौन से कार्य नहीं किए जाते खरमास को परंपरागत रूप से शुभ कार्यों के लिए विराम का समय माना गया है। इस दौरान सामान्यतः निम्न कार्य नहीं किए जाते: विवाह और सगाई गृह प्रवेश मुंडन संस्कार यज्ञोपवीत (जनेऊ) संस्कार नए घर या भवन का शुभारम्भ विवाह मुहूर्त निर्धारित करते समय वर के लिए सूर्य का बल, वधू के लिए बृहस्पति का बल और दोनों के लिए चंद्रमा का अनुकूल होना आवश्यक माना जाता है। खरमास में यह संतुलन नहीं बनता, इसलिए विवाह से परहेज किया जाता है। 🪔 खरमास में क्या करना शुभ माना गया है यह महीना धार्मिक साधना और आध्यात्मिक अभ्यास के लिए बहुत उत्तम माना गया है। इस दौरान विशेष रूप से इन कार्यों का महत्व बताया गया है: भगवान विष्णु या पुरुषोत्तम भगवान की पूजा रामायण या भगवद्गीता का पाठ विष्णु सहस्रनाम या विष्णु स्तोत्र का जप रुद्राभिषेक या शिव पूजा अन्न, वस्त्र, गुड़ और घी का दान जो लोग पूरे महीने व्रत करते हैं, वे सामान्यतः एक समय सात्विक भोजन लेते हैं और साधना पर ध्यान देते हैं। 📖 खरमास से जुड़ी पौराणिक कथा लोकमान्यता के अनुसार इस मास के पीछे एक रोचक कथा भी बताई जाती है। कहा जाता है कि सूर्य देव अपने सात घोड़ों के रथ से निरंतर ब्रह्मांड की परिक्रमा करते रहते हैं। एक बार लंबे समय तक यात्रा करने के कारण उनके घोड़े अत्यंत थक गए और प्यास से व्याकुल हो गए। सूर्य देव उन्हें पानी पिलाने के लिए एक सरोवर के पास रुक गए। रुकने की अनुमति न होने के कारण सूर्य देव ने थोड़ी देर के लिए अपने रथ में घोड़ों की जगह गधों को जोड़ लिया। गधों के कारण रथ की गति धीमी हो गई। इसी कारण उस अवधि को खरमास कहा जाने लगा, क्योंकि संस्कृत में गधे को “खर” कहा जाता है। #astrovastukosh ##akshayjamdagni #🙏शाम की आरती🪔 #❤️जीवन की सीख #🙏 माँ वैष्णो देवी
sohum Bhagwati spritual Astrologer and vastu
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8 दिन पहले
श्री दत्तात्रेय उपासना / तोडगे आपल्या खोलीत उत्तराभिमुख असा आपल्या आवडत्या दत्तमहाराजांचा फोटो लावावा. तेथील जागा स्वच्छ असावी. हा फोटो रोज ओल्या फडक्याने पुसून स्वच्छ ठेवावा. सकाळ / संध्याकाळी किंवा दोन्हीही वेळ त्यास न चुकता चाफ्याचे अथवा गुलाबाचे फुल वाहून उदबत्ती लावीत जावी. यापुढील अतिशय महत्त्वाची गोष्ट म्हणजे या देवतास आपल्या घरातील कर्ता पुरुष मानून आपण त्याच्या आश्रयाखालील लेकरे आहोत, असा दृढभाव ठेवावा. काही कामासाठी बाहेर जाताना या दैवताला भक्तिभावाने नमस्कार करून यश प्राप्तीबद्दल प्रार्थना करावी. भोजनाच्या अगोदर ताटास स्पर्श करून या देवतेस आवाहन करावे व तिचा तो प्रसाद आहे असे समजून भोजन करावे , हे मागे सांगितलेच आहे. सणावारी अगर इतर मंगलप्रसंगी या देवतेची विशेष पूजाअर्चा करावी. रात्र - दिवस हा संसार माझा नसून तो याच देवतेचा आहे व त्याची सर्व सुत्रे तिच्या हातात आहेत हा भाव जितका जास्त दृढ होईल तितक्या प्रमाणात आपल्याला आश्चर्यकारक अनुभव येतील. - ज्ञानेद्रनाथ नाथपंथी Spritual astrologer and vastu consultant 9323946187 8691992086 #VastuConsultant #gyanendranath #vastushastra #hawanpooja #dattaguru #dattatreya #dattamaharaj #dattajayanti #DattaBhakti #दत्त #girnar #तोडगे #vastu #Havan #vasthu/gruha vastu svpso org
Digital Pratibha
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9 दिन पहले
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