Astrology vastu online classes
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... Acharya Rajesh kumar
514 views 2 months ago
#🔯वास्तु दोष उपाय वास्तु शास्त्र:# महान #विज्ञान या #महंगा व्यापार? 🤔 । -----------------------------# ‌📰 वास्तु शास्त्र: महान ज्ञान या महँगा व्यापार? एक तार्किक विश्लेषण मित्रों, मेरे पिछले लेख की तरह यह भी वास्तु पर ही आधारित है। मेरी कोशिश है कि मैं ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को इसके बारे में जागरूक कर सकूं ताकि वे लूट का शिकार न हो सकें। आप लोग इसे ज़्यादा से ज़्यादा शेयर करके उन लोगों तक पहुंचा सकते हैं, यही आपसे मेरी गुज़ारिश है। वास्तु शास्त्र हमारे प्राचीन भारत का एक महान स्थापत्य विज्ञान है। यह वास्तुकला (Architecture) और डिज़ाइन की एक समझदार प्रणाली है, जिसका मूल दर्शन बहुत सीधा है: घर को प्रकृति के साथ तालमेल कैसे बिठाना चाहिए। यह वैज्ञानिक लेआउट, सही माप और इंजीनियरिंग सिद्धांतों पर ज़ोर देता था, ताकि रहने वालों को सूर्य की रोशनी, हवा का बहाव और पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से अच्छी सेहत और सकारात्मक ऊर्जा मिले। 🚨 लेकिन, आज यह ज्ञान एक महँगा और डर पर आधारित व्यापार बन गया है। यहाँ उन तीन बड़ी सच्चाइयों का सरल विश्लेषण है जो इस ज्ञान को एक उद्योग में बदल रही हैं: 1. 🔍 आधुनिक 'वास्तु कंसल्टेंट': डर का व्यापार और 'झोला छाप' ज्ञान आजकल आप जिसे 32-पद64पद वाले तरह-तरह के रंगीन 'वास्तु चक्र' और सुंदर चार्ट देख रहे हैं, वह इसी आधुनिक धंधे का प्रतीक है। * असली ज्ञान की कमी: बहुत से सलाहकार, जिन्हें आप 'झोला छाप' कह सकते हैं, उनके पास प्राचीन वास्तु के वास्तविक सिद्धांतों का ज्ञान नहीं है। वे केवल किताबी जानकारी या सस्ते ऑनलाइन कोर्स पर निर्भर हैं। * डर का इंजेक्शन: ये लोग तर्कसंगत लाभों (अच्छी हवा, रोशनी) को छोड़कर, अंधविश्वास और छद्म-विज्ञान (Fake Science) को बढ़ावा देते हैं। वे आपके मन में डर पैदा करते हैं कि आपके घर में 'नकारात्मक ऊर्जा' है या कोई 'अशुभ दोष' है। * महँगे 'उपाय': डर पैदा करने के बाद, वे आपको महँगे 'उपाय' या उत्पाद बेचने की कोशिश करते हैं—जैसे क्रिस्टल, पिरामिड, रंगीन टेप या धातु के यंत्र। कलर टेप जो प्लास्टिक की होती है, अब प्लास्टिक को आप जानते हैं कि किस तरह से आपको लाभ दे सकता है? यह एक बिल्कुल ही धोखाधड़ी है आपको लूटने के लिए। और जो यंत्र वग़ैरह (जैसे पिरामिड) आपके यहाँ लगाए जाते हैं, वे भी गंदे मेटल से तैयार किए जाते हैं, वे भी आपको लाभ की बजाय नुकसान ही देंगे। > 💡 प्राचीन वास्तु की सच्चाई: प्राचीन वास्तु में उपाय घर की संरचना में बदलाव होते थे (जैसे खिड़की का स्थान बदलना), न कि ये महँगे गैजेट। > 2. 🧭 दिशा का सबसे बड़ा तकनीकी धोखा: 'चुंबकीय से उत्तर' दिशा की गलती वास्तु में दिशा जानना सबसे ज़रूरी है, लेकिन यहीं पर सबसे बड़ी तकनीकी ग़लती की जाती है, जिसे नज़रअंदाज़ किया जाता है: | पहलू | प्राचीन और सही तरीका ('सही ध्रुवीय उत्तर') | आधुनिक और गलत तरीका ('चुंबकीय उत्तर') | |---|---|---| | आधार | पृथ्वी के ध्रुवीय अक्ष पर आधारित। प्राचीन काल में सूर्य की छाया और 'शंकु' (Gnomon) से दिशा निकाली जाती थी, जो हमेशा स्थिर रहती है। | साधारण चुंबकीय कम्पास का उपयोग। यह कम्पास 'चुंबकीय उत्तर' (Magnetic North) दिखाता है। | | समस्या | यह तरीका दोषरहित था। | 'चुंबकीय उत्तर' हमेशा बदलता रहता है और सही 'उत्तर' से 20 डिग्री तक अलग हो सकता है। इसे चुंबकीय झुकाव (Magnetic Declination) कहते हैं। | | परिणाम | जब आप कम्पास के हिसाब से वास्तु चक्र सेट करते हैं, तो झुकाव के कारण आपके घर के सभी 32 ज़ोन अपनी सही जगह से खिसक जाते हैं। | | इसका फायदा: यह तकनीकी ग़लती सलाहकार को लगभग हर जगह 'कृत्रिम वास्तु दोष' (Fake Dosh) खोजने का मौका देती है, जिससे वे महंगे समाधान आसानी से बेच पाते हैं। 3. 🔮 छद्म-वैज्ञानिक उपकरणों का मिथक तरह-तरह के दिखावे के लिए प्रभावित करने के लिए यंत्र : स्कैनर अपने दोषों को 'सत्य' साबित करने के लिए, सलाहकार 'यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर' (UAS) या 'एनर्जी स्कैनर' जैसे उपकरणों का इस्तेमाल करते हैं। * दावा: ये उपकरण 'सूक्ष्म ऊर्जा' या 'जियोपैथिक स्ट्रेस' मापने का दावा करते हैं। * और क्या है सच: वैज्ञानिकों ने इनका कोई समर्थन नहीं किया है। यूएस फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (US FDA) जैसी संस्थाएँ इन्हें छद्म-विज्ञान मानती हैं। * वास्तविकता: स्कैनर की कार्यप्रणाली 'डॉवसिंग रॉड' के समान है। यह बाहर की ऊर्जा नहीं, बल्कि उपकरण पकड़ने वाले व्यक्ति के हाथ और मांसपेशियों की सूक्ष्म क्रिया (Ideomotor Effect) का परिणाम है। इसमें कुछ भी नहीं होता, एक बैटरी लगी होती है, एक हल्का सा बल्ब रोशनी देने वाला। इसको आप तोड़ कर देखिए, इसके अंदर कुछ भी नहीं होता। > निष्कर्ष: ये स्कैनर केवल ग्राहकों को डराकर महँगे क्रिस्टल, यंत्र और 'कट/एक्सटेंशन' के दोषों को 'सत्य' साबित करना आसान बनाते हैं। > यहां तक की इसके द्वारा रतन भी सजेस्ट किए जाते हैं। एक समझदार उपभोक्ता के लिए सुझाव धोखाधड़ी से बचने और वास्तु के तर्कसंगत सिद्धांतों को अपनाने के लिए ये कदम उठाएँ: * सटीक दिशा पता करें: दिशाचक्र आपको चक्कर में डालने के लिए है, आपको लूटने के लिए है। आप इसका उपयोग न करें। जीपीएस-आधारित डिजिटल कम्पास या विशेषज्ञ की मदद लें जो 'चुंबकीय झुकाव' (Magnetic Declination) को सही करना जानता हो। * हर दावे पर सवाल करें: किसी भी 'उपाय' या महँगे उत्पाद को खरीदने से पहले, सलाहकार से उसके पीछे का वैज्ञानिक प्रमाण या तर्कसंगत कारण पूछें। यदि समाधान केवल क्रिस्टल, पिरामिड या धातु के यंत्र पर आधारित है, तो सावधान रहें। * योग्य पेशेवर चुनें: डिज़ाइन या निर्माण के लिए, किसी योग्य आर्किटेक्ट या सिविल इंजीनियर से सलाह लें, जो वास्तविक वास्तुकला विज्ञान को समझते हों। * तर्कसंगत वास्तु पर ध्यान दें: * ऊर्जा दक्षता: घर को सही दिशा में बनाने से प्राकृतिक प्रकाश, हवादारता और ऊर्जा की बचत होती है। * मनोविज्ञान: स्वच्छ, हवादार और धूप वाला स्थान मानसिक शांति देता है, जिसे आधुनिक विज्ञान भी मानता है। यही वास्तु का वास्तविक और सबसे बड़ा लाभ है। > निष्कर्ष: आधुनिक वास्तु चक्र एक तकनीकी रूप से दोषपूर्ण और डर पर आधारित व्यापारिक रणनीति है। वास्तु को एक उन्नत स्थापत्य कला के रूप में देखें, न कि डरने वाली ज्योतिषीय प्रणाली के रूप में। > #vasthu/gruha vastu svpso org #vastu #vastu tips #Astrology vastu online classes
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... Acharya Rajesh kumar
760 views 2 months ago
#🔯वास्तु दोष उपाय सही वास्तु और शौचालय: पुराना ज्ञान बनाम नई तकनीक डर नहीं, विज्ञान और समझदारी ज़रूरी है! वास्तु शास्त्र का मुख्य लक्ष्य हमें स्वस्थ और आरामदायक जीवन देना था। इसके पुराने नियम उस समय की साफ-सफाई और इंजीनियरिंग की कमी को देखते हुए बनाए गए थे। आज, हमारे पास बेहतरीन सीवेज सिस्टम और वेंटिलेशन (हवा निकालने) की सुविधा है। इसलिए, शौचालय के वास्तु को पुराने और नए समय के संदर्भ में तर्क और समझदारी से समझना चाहिए। 1. दिशाओं का नियम: पुरानी ज़रूरत बनाम आज की सुविधा वास्तु में टॉयलेट की दिशा को लेकर जो भी नियम बनाए गए, वे उस समय की खास ज़रूरतों के कारण थे: | नियम/निषेध | पुराने समय का कारण (ज़रूरी क्यों था) | आज के समय का तर्क (आसान क्यों है) | |---|---|---| | ईशान/केंद्र में वर्जित | ईशान (उत्तर-पूर्व) पानी का प्रवेश और पूजा की जगह थी, और केंद्र खुला आंगन। खुले गंदे पानी को इन जगहों से दूर रखना संक्रमण और बदबू से बचने के लिए बहुत ज़रूरी था। | गंदगी तुरंत सील-बंद पाइपों से बाहर निकल जाती है। अब दिशा से ज़्यादा ज़रूरी वेंटिलेशन (हवा निकासी) और अच्छे ड्रेनेज की व्यवस्था है। | | पश्चिम/उत्तर-पश्चिम उत्तम | ये दिशाएँ घर से गंदगी को सबसे दूर फेंकने/निकालने के लिए सबसे सही थीं, ताकि इसका असर कम हो। | आज की इंजीनियरिंग में गंदगी का निकास हर दिशा में पूरी तरह सील और नियंत्रित होता है। अब दिशा का प्रभाव न के बराबर रह गया है। | > निष्कर्ष: पुराने समय में, दिशाओं का ध्यान महामारी और साफ-सफाई के लिए बहुत ज़रूरी था। आज, बेहतरीन ड्रेनेज, वॉटरप्रूफिंग, और वेंटिलेशन किसी भी दिशा में उतनी ही सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। > 2. शौचालय का डिज़ाइन: खुले सिस्टम से सीलबंद सिस्टम तक वास्तु शास्त्र तब बना जब साफ-सफाई का विज्ञान इतना विकसित नहीं था: | विशेषता | पुराना शौचालय (कच्चा/घर से बाहर) | आधुनिक अटैच टॉयलेट (सीलबंद) | |---|---|---| | गंदगी का निपटान | मैन्युअल (हाथ से), गंदगी इकट्ठी होती थी, संक्रमण का खतरा बहुत ज़्यादा। | फ्लश सिस्टम से गंदगी तुरंत और असरदार तरीके से बाहर निकाल दी जाती है। | | गंध/बदबू | खुली हवा और कीटाणुओं के कारण बहुत ज़्यादा बदबू (यही नकारात्मक ऊर्जा का मुख्य कारण था)। | एग्जॉस्ट फैन और सीलबंद पाइपों से तुरंत कंट्रोल हो जाती है। | | वास्तु का लक्ष्य | गंदगी, जमाव और संक्रमण को मुख्य घर से दूर रखना। | गंदगी, सीलन, और दुर्गंध को तुरंत खत्म करना। | > निष्कर्ष: प्राचीन वास्तु का मुख्य लक्ष्य गंदगी को घर से दूर रखना था। आज के अटैच टॉयलेट की डिज़ाइन ही इस तरह की गई है कि वह गंदगी और बदबू को तुरंत खत्म कर दे, जिससे वह वास्तु के मूल उद्देश्य को पूरी तरह से पूरा करता है। > 3. सीट की दिशा: परंपरा बनाम पाइप की व्यवस्था टॉयलेट सीट के बैठने की दिशा को लेकर जो नियम हैं, वे आजकल की कम जगह और पाइपलाइन बिछाने की ज़रूरतों के सामने अव्यावहारिक हैं। * पुरानी बात: सीट का मुख किसी खास दिशा में रखने का कोई पक्का वैज्ञानिक या स्वास्थ्य से जुड़ा कारण साबित नहीं हुआ है। यह नियम शरीर विज्ञान से ज़्यादा सामाजिक परंपरा पर आधारित लगता है। * आज की सच्चाई: सीट की दिशा अब मुख्य रूप से जगह की उपलब्धता और ड्रेनेज पाइप को सबसे सीधा और छोटा रास्ता देने पर निर्भर करती है। यदि थोड़ी सी दिशा इधर-उधर है, तो आपके स्वास्थ्य या पैसे पर कोई बुरा असर पड़ेगा, इसका कोई तार्किक सबूत नहीं है। 4. मन की शांति और स्वच्छता: सबसे बड़ा सकारात्मक वास्तु वास्तु का मतलब डर पैदा करना नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन के लिए अच्छी व्यवस्था बनाना है। आधुनिक तकनीक ने दिशाओं के डर को कम कर दिया है। आज के वास्तु का ध्यान इन तीन वैज्ञानिक और भौतिक बातों पर होना चाहिए: * स्वच्छता (साफ-सफाई): टॉयलेट हमेशा साफ़-सुथरा और सूखा रहना चाहिए। सीलन और फंगस ही नकारात्मक ऊर्जा का असली कारण हैं। * वायु संचार (वेंटिलेशन): एक शक्तिशाली एग्जॉस्ट फैन ज़रूर लगवाएं जो बदबू और नमी को तुरंत बाहर खींच ले। यह किसी भी वास्तु दोष का सबसे बड़ा समाधान है। * अनुशासन (दरवाज़ा/ढक्कन): टॉयलेट का दरवाज़ा और कमोड का ढक्कन हमेशा बंद रखें, ताकि गंदी हवा घर में न फैले। यदि आपका आधुनिक टॉयलेट साफ़, सूखा और हवादार है, तो आप वास्तु के मूल उद्देश्य को पूरी तरह निभा रहे हैं। अनावश्यक भ्रम से बचें और अपनी बुद्धि का उपयोग करें। #Astrology vastu online classes #vasthu/gruha vastu svpso org #vastu tips #vastu
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