#🙏श्री नृसिंह जयंती🪷
नरसिंह जयंती भगवान नरसिंह के प्राकट्य का पावन दिवस है, जो भगवान विष्णु के चौथे अवतार माने जाते हैं। इस दिन धर्म की रक्षा और भक्त की विजय का संदेश मिलता है। कथा की शुरुआत असुर राजा हिरण्यकश्यप से होती है, जिसने कठोर तप करके ऐसा वरदान पाया कि उसे न मनुष्य मार सके, न पशु; न दिन में, न रात में; न धरती पर, न आकाश में; न किसी अस्त्र-शस्त्र से। इस वरदान से अहंकारी होकर उसने स्वयं को भगवान घोषित कर दिया और विष्णु भक्ति पर रोक लगा दी। लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद अटूट श्रद्धा से विष्णु का नाम जपता रहा। अनेक प्रयासों के बाद भी हिरण्यकश्यप उसे मार न सका। अंततः एक दिन क्रोधित होकर उसने पूछा—क्या तुम्हारा विष्णु इस खंभे में भी है? प्रह्लाद के “हाँ” कहते ही खंभा फट गया। संध्या समय, खंभे से प्रकट हुए नरसिंह ने उसे द्वार पर, अपनी जंघा पर रखकर, नाखूनों से उसका वध किया—इस प्रकार वरदान की हर शर्त टूट गई। यह कथा सिखाती है कि सच्ची भक्ति और विश्वास के आगे अधर्म टिक नही�
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