✍🏽 माझ्या लेखणीतून
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1222 1222 1222 न कोई अब मुझे मंजिल नज़र आये तेरे बिन कोई ना साहिल नजर आये मुकम्मल ना हुआ कोई मेरा अरमां सभी मरते हुऐ तिल तिल नजर आये कभी उफ ना किया दुख दर्द सह कर भी अकेले अब सफर मुश्किल नजर आये सुलगता है मेरा दिल , आँखे बहती है न कोई मुझे अब महफ़िल नजर आये करूँ क्या अब में इस दिल का बताओ तो मुझे जब मेरा दिल कातिल नज़र आये नज़र आता है मेरे आँसुओ में जो उसी को हम सदा बेदिल नज़र आये ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 4/2/2018 #📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️
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