✍🏽 माझ्या लेखणीतून
891K Posts • 2147M views
-
553 views
212 212 212 212 जीस्त जिनके लिये आज कुर्बान है है मिली उनसे ही मुझे पहचान है सिलसिले प्यार के ख़त्म ना हो कभी दिल में बस इक यही मेरे अरमान है घर बनाने में गुजर गयी उम्र जब किस लिये ज़िन्दगी आज हैरान है दर्द कागज पे बिकता रहा उम्र भर बस वही दर्द से मेरे अनजान है गम करे क्यों अगर वो हमें ना मिले दिल में तो मेरे अब भी मेहमान है वक्त - ऐ - मौत तक साथ हो ये इमां ज़िन्दगी की मेरी जो सदा शान है ( लक्ष्मण दावानी ✍ ) 9/1/2017 #📜मेरी कलम से✒️ #✒ शायरी #💝 शायराना इश्क़ #शायरी #📚कविता-कहानी संग्रह
7 likes
7 shares