कहानियां

sn vyas
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4 months ago
#कहानियां विजयनगर साम्राज्य में तेनालीराम अपनी बुद्धि, हास्य और चतुराई के लिए प्रसिद्ध था। वह महाराज कृष्णदेव राय का प्रिय दरबारी और सलाहकार था। यद्यपि उसकी बुद्धि अनुपम थी, पर उन दिनों उसकी आर्थिक स्थिति ठीक नहीं चल रही थी। घरेलू खर्च, कुछ पुराने दायित्व और आय के सीमित साधनों के कारण वह धन की तंगी से जूझ रहा था। अंततः विवश होकर तेनालीराम को महाराज कृष्णदेव राय से क़र्ज़ लेना पड़ा। महाराज दयालु और उदार स्वभाव के थे। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के तेनालीराम को क़र्ज़ दे दिया। क़र्ज़ लेते समय तेनालीराम ने महाराज को वचन दिया कि जैसे ही उसकी स्थिति सुधरेगी, वह शीघ्र ही पूरा धन लौटा देगा। समय बीतता गया। तेनालीराम की आर्थिक दशा पहले से कुछ बेहतर अवश्य हुई, परंतु इतनी नहीं कि वह महाराज का क़र्ज़ एकमुश्त चुका सके। क़र्ज़ का विचार उसे दिन-रात परेशान करने लगा। वह हर समय इसी चिंता में डूबा रहता कि महाराज का धन कैसे लौटाए। उसके सामने दो ही रास्ते थे। पहला, किसी तरह धन जुटाकर क़र्ज़ चुका दे। दूसरा, किसी उपाय से क़र्ज़ से मुक्ति पा ले। पहला रास्ता कठिन था, जबकि दूसरा उसे सरल प्रतीत हो रहा था। किंतु समस्या यह थी कि वह महाराज से सीधे क़र्ज़ माफ़ करने की बात कैसे कहे। काफी सोच-विचार के बाद तेनालीराम ने एक योजना बनाई। उसने इस योजना में अपनी पत्नी को भी शामिल किया। योजना के अनुसार एक दिन उसकी पत्नी के माध्यम से महाराज को संदेश भिजवाया गया कि तेनालीराम का स्वास्थ्य अचानक बिगड़ गया है और वह कुछ दिनों तक दरबार में उपस्थित नहीं हो पाएगा। संदेश भेजने के बाद तेनालीराम ने दरबार जाना पूरी तरह बंद कर दिया। कई दिन बीत गए। दरबार में तेनालीराम की अनुपस्थिति महाराज को खटकने लगी। वे चिंतित हो उठे कि कहीं तेनालीराम की बीमारी गंभीर तो नहीं हो गई। अंततः उन्होंने स्वयं उसके घर जाकर हालचाल जानने का निश्चय किया। एक शाम महाराज तेनालीराम के घर पहुँचे। महाराज को देखते ही तेनालीराम की पत्नी ने उसे संकेत कर दिया। तेनालीराम तुरंत बिस्तर पर जाकर कंबल ओढ़कर लेट गया और बीमार होने का अभिनय करने लगा। महाराज उसके पास आए और स्नेहपूर्वक बोले, “तेनालीराम, तुम्हारी तबीयत कैसी है?” तेनालीराम चुप रहा, मानो बोलने की शक्ति भी न बची हो। तभी उसकी पत्नी भावुक स्वर में बोली, “महाराज! जब से इन्होंने आपसे क़र्ज़ लिया है, तभी से अत्यंत चिंतित रहते हैं। आपका धन लौटाना चाहते हैं, पर असमर्थ हैं। क़र्ज़ का बोझ इनके मन और शरीर दोनों को खाए जा रहा है। उसी चिंता के कारण ये बीमार पड़ गए हैं।” महाराज को यह सुनकर दया आ गई। उन्होंने स्नेह से कहा, “अरे तेनालीराम! इतनी छोटी-सी बात के लिए चिंता क्यों करते हो? चलो, मैं तुम्हें इस क़र्ज़ के बोझ से मुक्त करता हूँ। अब चिंता छोड़ो और शीघ्र स्वस्थ हो जाओ।” यह सुनते ही तेनालीराम ने कंबल एक ओर फेंक दिया और फुर्ती से उठ बैठा। उसके चेहरे पर मुस्कान फैल गई। उसने हाथ जोड़कर कहा, “आपका बहुत-बहुत धन्यवाद महाराज! आपने तो मुझे नया जीवन दे दिया।” तेनालीराम को एकदम स्वस्थ देखकर महाराज को बहुत क्रोध आया। वे बोले, “यह क्या तेनालीराम! तुम तो बिल्कुल स्वस्थ हो। इसका अर्थ है कि तुमने क़र्ज़ माफ़ करवाने के लिए बीमारी का नाटक किया। यह छल है। तुम दंड के पात्र हो।” तेनालीराम ने विनम्रता से हाथ जोड़ते हुए कहा, “महाराज! मैंने कोई छल नहीं किया। मैं सचमुच क़र्ज़ के बोझ से बीमार हो गया था। जैसे ही आपने मुझे उस बोझ से मुक्त किया, मेरी बीमारी भी दूर हो गई।” तेनालीराम की इस चतुराई और भोलेपन से भरी बात सुनकर महाराज निःशब्द रह गए। वे उसकी बुद्धि पर मुस्कुरा उठे और बिना कुछ कहे लौट गए। --- सीख 1. चिंता और मानसिक बोझ मनुष्य को भीतर से बीमार कर देते हैं। 2. बुद्धि और सूझ-बूझ से कठिन से कठिन परिस्थिति को भी सरल बनाया जा सकता है। 3. सच्ची चतुराई वह है, जो बिना किसी का अपमान किए समस्या का समाधान कर दे। ...✍️
Suman sharma
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5 months ago
एक महिला रोज मंदिर जाती थी.! एक दिन उस महिला ने पुजारी से कहा :- अब मैं मंदिर नही आया करूँगी.! 🕑🕑🕑य्य्🕑 इस पर पुजारी ने पूछा :- क्यों.? तब महिला बोली :- मैं देखती हूँ लोग मंदिर परिसर में अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते हैं.! कुछ ने तो मंदिर को ही गपशप करने का स्थान चुन रखा है.! कुछ पूजा कम पाखंड, दिखावा ज्यादा करते हैं.! इस पर पुजारी कुछ देर तक चुप रहे फिर कहा :- सही है.! परंतु अपना अंतिम-निर्णय लेने से पहले क्या आप मेरे कहने से कुछ कर सकती हैं.! महिला बोली :- आप बताइए क्या करना है.? पुजारी ने कहा :- एक गिलास पानी भर लीजिए और 2 बार मंदिर परिसर के अंदर परिक्रमा लगाइए.! शर्त ये है कि गिलास का पानी गिरना नहीं चाहिये.! महिला बोली :- मैं ऐसा कर सकती हूँ.! फिर थोड़ी ही देर में उस महिला ने ऐसा ही कर दिखाया.! उसके बाद मंदिर के पुजारी ने महिला से 3 सवाल पूछे :- 1 :- क्या आपने किसी को फोन पर बात करते देखा.? 2 :- क्या आपने किसी को मंदिर में गपशप करते देखा.? 3 :- क्या आपने किसी को पाखंड करते देखा.? महिला बोली :- नहीं मैंने कुछ भी नहीं देखा.! फिर पुजारी बोले :- जब आप परिक्रमा लगा रही थीं तो आपका पूरा ध्यान गिलास पर था कि इसमें से पानी न गिर जाए इसलिए आपको कुछ दिखाई नहीं दिया.! अब जब भी आप मंदिर आयें तो अपना ध्यान सिर्फ़ परम पिता परमात्मा में ही लगाना फिर आपको कुछ दिखाई नहीं देगा.! सिर्फ भगवान ही सर्वत्र दिखाई देगें। ''जाकी रही भावना जैसी.. प्रभु मूरत देखी तिन तैसी|'' जीवन मे दुःखो के लिए कौन जिम्मेदार है.? 👉🏻ना भगवान, 👉🏻ना गृह-नक्षत्र, 👉🏻ना भाग्य, 👉🏻ना रिश्तेदार, 👉🏻ना पडोसी, 👉🏻ना सरकार, जिम्मेदार आप स्वयं है। 1 :- आपका सरदर्द, फालतू विचार का परिणाम है। 2 :- पेट दर्द, गलत खाने का परिणाम है। 3 :- आपका कर्ज, जरूरत से ज्यादा खर्चे का परिणाम है। 4 :- आपका दुर्बल/मोटा/बीमार शरीर, गलत जीवन शैली का परिणाम है। 5 :- आपके कोर्ट केस, आप के अहंकार का परिणाम है। 6 :- आपके फालतू विवाद, ज्यादा व् व्यर्थ बोलने का परिणाम है. उपरोक्त कारणों के अलावा सैकड़ों कारण है और बेवजह दोषारोपण दूसरों पर करते रहते हैं.! इसमें ईश्वर दोषी नहीं है.! अगर हम इन कष्टों के कारणों पर बारिकी से विचार करें तो पाएंगे की कहीं न कहीं हमारी मूर्खताएं ही इनके पीछे है.! _गिले-शिकवे सिर्फ़ साँस लेने तक ही चलते हैं,बाद में तो सिर्फ़ पछतावे रह जाते हैं..!!_ 🙏🏻🙏🏻🙏🏻 #कहानियां
sn vyas
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6 months ago
#कहानियां फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली ​ फिनलैंड में, बच्चे सात साल की उम्र में स्कूल जाना शुरू करते हैं। कोई जल्दी नहीं है। क्योंकि फिनलैंड में, वे समझते हैं कि बचपन पवित्र है, और सीखने का सबसे अच्छा विकास तभी होता है जब उसकी प्राकृतिक लय का सम्मान किया जाता है। ​फिनलैंड की शिक्षा प्रणाली की प्रशंसा पूरी दुनिया में की जाती है। यह इसलिए नहीं कि वहाँ परीक्षाएँ या दबाव है, बल्कि इसलिए क्योंकि इसका दृष्टिकोण मानवीय और संतुलित है। प्रत्येक कक्षा 60 मिनट की होती है, लेकिन केवल 45 मिनट पढ़ाई के लिए समर्पित होते हैं। शेष 15 मिनट आराम के लिए होते हैं, क्योंकि सीखना खेल, साँस लेने और बस एक बच्चा होने से भी होता है। ​सोमवार से गुरुवार तक, स्कूल का दिन आठ घंटे तक चल सकता है, लेकिन शुक्रवार को यह दोपहर 1 बजे समाप्त हो जाता है। और शनिवार को कोई कक्षाएँ नहीं होती हैं। क्योंकि शिक्षा को जीवन चुराना नहीं चाहिए। ​फिनलैंड में, सब कुछ मुफ्त है। परिवारों को किताबों, सामग्री या उपकरणों के लिए भुगतान नहीं करना पड़ता है। प्रत्येक छात्र को एक टैबलेट मिलता है जिसमें उसकी सभी सीखने की सामग्री डिजिटल प्रारूप में होती है। कोई भारी बैग नहीं है और कोई छिपा हुआ खर्च नहीं है। और कक्षा में कोई भूखा नहीं रहता: हर छात्र को असीमित, विविध और स्वस्थ भोजन मिलता है - वह भी पूरी तरह से मुफ्त। ​फिनलैंड के लिए, शिक्षा में निवेश का अर्थ है भविष्य में निवेश। और वे इसे दृढ़ विश्वास के साथ करते हैं। वे जानते हैं कि एक शिक्षित लोग न केवल अधिक उत्पादक होते हैं, बल्कि अधिक न्यायसंगत, स्वस्थ और स्वतंत्र भी होते हैं। समान अवसर सिर्फ एक नारा नहीं है - यह राज्य की नीति है। ​जबकि कई जगहों पर स्कूल एक बोझ बन गया है, फिनलैंड में यह वही बना हुआ है जो इसे हर जगह होना चाहिए: भविष्य का एक वादा।
sn vyas
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6 months ago
प्रथम अवसर #कहानियां एक किसान की बहुत ही सुन्दर बेटी थी। एक नौजवान लड़का उस किसान की बेटी से शादी की इच्छा लेकर किसान के पास आया। उसने किसान की बेटी से शादी करने की इच्छा जताई। किसान ने उसकी ओर देखा और कहा, युवक तुम खेत में जाओ, मैं एक एक करके तीन बैल छोड़ने वाला हूँ। यदि तुम तीनों बैलों में से किसी एक की भी पूँछ पकड़ लो तो मैं अपनी बेटी की शादी तुमसे कर दूंगा। नौजवान इस आसान शर्त को सुनकर खुश हो गया और खेत में बैल की पूँछ पकड़ने की मुद्रा लेकर खडा हो गया। किसान ने खेत में स्थित घर का दरवाजा खोला। तभी एक बहुत ही बड़ा और खतरनाक बैल उसमे से निकला। नौजवान ने ऐसा बैल पहले कभी नहीं देखा था। अतः उससे डर कर नौजवान ने निर्णय लिया कि वह अगले बैल का इंतज़ार करेगा और वह एक तरफ हो गया जिससे बैल उसके पास से होकर निकल गया। दरवाजा फिर खुला। आश्चर्यजनक रूप से इस बार पहले से भी बड़ा और भयंकर बैल निकला। नौजवान ने सोचा कि इससे तो पहला वाला बैल ठीक था। फिर उसने एक ओर होकर बैल को निकल जाने दिया। दरवाजा तीसरी बार खुला। नौजवान के चहरे पर मुस्कान आ गई। इस बार एक छोटा और मरियल बैल निकला। जैसे ही बैल नौजवान के पास आने लगा, नौजवान ने उसकी पूँछ पकड़ने के लिए मुद्रा बना ली ताकि उसकी पूँछ सही समय पर पकड़ ले। पर यह क्या उस बैल की तो पूँछ ही नहीं थी। हर एक इंसान कि जिन्दगी अवसरों से भरी हुई है। कुछ सरल हैं और कुछ कठिन। पर अगर एक बार अवसर गवां दिया तो फिर वह अवसर दुबारा नहीं मिलेगा। अतः हमेशा प्रथम अवसर को हासिल करने का प्रयास करना चाहिए *(PC- CA Rajiv Chandak 9881098027)*