Mahabharat shlok

Real Rahasyamayi Bharat
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3 days ago
भीष्म का आखिरी राज! 😲#shortfeed #shorts #youtubeshorts महाभारत के युद्ध में भीष्म पितामह ने अपने अंतिम क्षणों में ऐसा राज खोला, जिसे जानकर युधिष्ठिर और पांडव हक्का-बक्का रह गए। 😲 भीष्म ने शकुनी की छुपी चालों और उसकी साजिशों का असली राज बताया, जो केवल युद्ध नहीं बल्कि पूरी हस्तिनापुर की तक़दीर बदल सकता था। इस गुप्त रहस्य को जानना हर महाभारत प्रेमी के लिए जरूरी है। वीडियो अंत तक देखें और जानें कि कैसे भीष्म के खुलासे ने पांडवों की रणनीति और युद्ध की दिशा को बदल दिया। ✅ अगर आपको वीडियो पसंद आए तो लाइक करें, सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएं। 💬 कमेंट में बताइए – क्या आप सोचते हैं कि शकुनी जैसा चालाक व्यक्ति सिर्फ राजनीति में ही काम आता है या जीवन में भी? #भीष्म #महाभारत #शकुनी #गुप्तराज #रहस्यमयीभारत #पांडव #कौरव #महाभारतरहस्य #इतिहास #युद्ध Disclaimer: इस वीडियो में दी गई जानकारी महाभारत, पुराणों और ऐतिहासिक कथाओं पर आधारित है। इसमें दर्शाई गई घटनाएँ और पात्र वास्तविक इतिहास और मिथक का मिश्रण हो सकते हैं। वीडियो का उद्देश्य केवल जानकारी और मनोरंजन है। #माहाभरत
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6 days ago
क्या भीष्म की प्रतिज्ञा थी सबसे बड़ी भूल?💥#shortfeed #shorts #youtubeshorts 📖 Description: क्या आपने कभी सोचा है कि भीष्म पितामह जैसे महान योद्धा को अपनी ही प्रतिज्ञा पर पछताना पड़ा था? इस वीडियो में जानिए वह सच्ची कहानी, जब उनका लिया हुआ वचन ही उनके लिए सबसे बड़ा बंधन बन गया। महाभारत युद्ध के दौरान उन्होंने देखा कि उनकी प्रतिज्ञा ने उन्हें अन्याय के खिलाफ खड़े होने से रोक दिया। इस रहस्यमयी और भावुक कहानी में जानिए— 👉 भीष्म की भयानक प्रतिज्ञा 👉 द्रौपदी चीरहरण के समय उनकी मजबूरी 👉 और आखिर क्यों उन्हें अपने फैसले पर पछतावा हुआ अगर आपको ऐसी ही धार्मिक, रहस्यमयी और ज्ञानवर्धक कहानियाँ पसंद हैं, तो वीडियो को LIKE 👍 करें, SHARE 📲 करें और चैनल Real Rahasyamayi Bharat को SUBSCRIBE 🔔 जरूर करें। 🙏 धन्यवाद! #Mahabharat #Bhishma #BhishmaPitamah #HinduHistory #MythologyFacts #IndianMythology #MahabharatStory #SpiritualIndia #DharmikKahani #RealRahasyamayiBharat ⚠️ Disclaimer: इस वीडियो में प्रस्तुत जानकारी महाभारत और विभिन्न धार्मिक ग्रंथों व मान्यताओं पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल ज्ञान, शिक्षा और मनोरंजन प्रदान करना है। हम किसी भी प्रकार की अंधविश्वास या धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का समर्थन नहीं करते। दर्शक अपनी समझ और विवेक का उपयोग करें। #माहाभरत
sn vyas
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1 months ago
#महाभारत महाभारत में कौरवों की हार का कारण? 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ दुर्योधन की मृत्यु के समय श्रीकृष्ण ने किया था इस रहस्य का खुलासा, पांडव एवं उनकी सम्पूर्ण सेना सिर्फ एक दिन में ही हो सकती थी पराजित ! महाभारत के युद्ध समाप्ति के बाद जब कुरुक्षेत्र के मैदान में दुर्योधन मरणासन अवस्था में अपनी अंतिम सासे ले रहा था तब भगवान श्री कृष्ण उससे मिलने गए. हालाँकि भगवान श्री कृष्ण को देख दुर्योधन क्रोधित नहीं हुआ परन्तु उसने श्री कृष्ण को ताने जरूर मारे. श्री कृष्ण ने दुर्योधन से उस समय कुछ न कहा परन्तु जब वह शांत हुआ तब श्री कृष्ण ने दुर्योधन को उसकी युद्ध में की गई उन गलतियों के बारे में बताया जो वह न करता तो आज महाभारत का युद्ध वह जीत चुका होता. कुरुक्षेत्र में लड़े गए युद्ध में कौरवों के सेनापति पहले दिन से दसवें दिन तक भीष्म पितामह थे, वहीं ग्याहरवें से पंद्रहवे तक गुरु दोणाचार्य ने ये जिम्मेदारी संभाली. लेकिन द्रोणाचार्य के मृत्यु के बाद दुर्योधन ने कर्ण को सेनापति बनाया. यही दुर्योधन के महाभारत के युद्ध में सबसे बड़ी गलती थी इस एक गलती के कारण उसे युद्ध में पराजय का मुख देखना पड़ा. क्योकि कौरवों सेना में स्वयं भगवान शिव के अवतार मौजूद थे जो समस्त सृष्टि के संहारक है. अश्वत्थामा स्वयं महादेव शिव के रूद्र अवतार है और युद्ध के सोलहवें दिन यदि दुर्योधन कर्ण के बजाय अश्वत्थामा को सेनापति बना चुका होता तो शायद आज महाभारत के युद्ध का परिणाम कुछ और ही होता. इसके साथ ही दुर्योधन ने अश्वथामा को पांडवो के खिलाफ भड़काना चाहिए था जिससे वह अत्यधिक क्रोधित हो जाए. परन्तु कहा जाता है की ”विनाश काले विपरीत बुद्धि ” दुर्योधन अपने मित्र प्रेम के कारण इतना अंधा हो गया था की अश्वत्थामा अमर है यह जानते हुए भी उसने कर्ण को सेनापति चुना. कृपाचार्य अकेले ही एक समय में 60000 योद्धाओं का मुकाबला कर सकते थे लेकिन उनका भांजा ( कृपाचर्य की बहन कृपी अश्वत्थामा की बहन थी ) अश्वत्थामा में इतना समार्थ्य था की वह एक समय में 72000 योद्धाओं के छक्के छुड़ा सकता था. अश्वत्थामा ने युद्ध कौशल की शिक्षा केवल अपने पिता से ही गृहण नहीं करी थी बल्कि उन्हें युद्ध कौशल की शिक्षा इन महापुरषो परशुराम, दुर्वासा, व्यास, भीष्म, कृपाचार्य आदि ने भी दी थी. ऐसे में दुर्योधन ने अश्वत्थामा की जगह कर्ण को सेनापति का पद देकर महाभारत के युद्ध में सबसे बड़ी भूल करी थी. भगवान श्री कृष्ण के समान ही अश्वत्थामा भी 64 कलाओं और 18 विद्याओं में पारंगत था. युद्ध के अठारहवे दिन भी दुर्योधन ने रात्रि में उल्लू और कौवे की सलाह पर अश्वत्थामा को सेनापति बनाया था. उस एक रात्रि में ही अश्वत्थथामा ने पांडवो की बची लाखो सेनाओं और पुत्रों को मौत के घाट उतार दिया था। अतः अगर दुर्योधन ऐसा पहले कर चुका होता था तो वह खुद भी न मरता और पांडवो पर जीत भी दर्ज कर चुका होता, हालाँकि यह काम अश्वत्थामा ने युद्ध की समाप्ति पर किया था. जब अश्वत्थामा का यह कार्य दुर्योधन को पता चला था तो उसे शकुन की मृत्यु प्राप्त हुई थी । साभार~ पं देव शर्मा💐 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️