जब माता देवकी को पता लगा कि उनके पुत्र कृष्ण को सभी भगवान् मानते हैं और उन्होंने अपनी गुरुमाता के पुत्र को यमलोक से वापस लाकर अपनी गुरुदक्षिणा दी थी। तो उन्होंने ने भी श्रीकृष्ण से अपने 6 पुत्रों जिन्हें कंस ने पैदा होते ही मार दिया था एक बार दर्शन करने के लिए प्रार्थना की। भगवान् ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और उनके 6 पुत्रों को सुतल से लाकर अपनी माता से मिलवाया और उन सभी को देवलोक में स्थान दिया।
श्रीमद्भागवत-महापुराण/१०/८५
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