har har Ganga Maiya

sn vyas
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16 days ago
गंगा को "जाह्नवी" क्यों कहते हैं... #हर हर गंगे मां🙏🙏 #🙏हर की पौड़ी हरिद्वार 🙏गंगा नदी 🙏👌हर हर गंगे🙏 #जय माँ गंगे हर हर गंगे प्राचीन काल में राजा सगर के साठ हजार पुत्र कपिल मुनि के श्राप से भस्म हो गए थे। उनके उद्धार का एकमात्र उपाय था कि स्वर्गलोक से माँ गंगा पृथ्वी पर आएँ और उनके पवित्र जल का स्पर्श उन तक पहुँचे। कई पीढ़ियाँ बीत गईं, लेकिन यह कार्य कोई पूरा न कर सका। अंततः राजा भगीरथ ने वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी ने गंगा को पृथ्वी पर भेजने की अनुमति दी। किंतु उन्होंने चेतावनी दी कि गंगा का वेग इतना प्रचंड है कि पृथ्वी उसका भार सहन नहीं कर पाएगी। तब भगवान शिव ने करुणावश गंगा को अपनी विशाल जटाओं में धारण किया और धीरे-धीरे पृथ्वी पर प्रवाहित किया। जब माँ गंगा भगीरथ के पीछे-पीछे चल रही थीं, तो उनका तीव्र प्रवाह पर्वतों, वनों और आश्रमों को पार करता हुआ आगे बढ़ने लगा। इसी मार्ग में महान तपस्वी महर्षि जह्नु का आश्रम था, जहाँ वे गहन तप और यज्ञ में लीन थे। गंगा की तेज धारा ने देखते ही देखते उनके आश्रम और यज्ञशाला को जलमग्न कर दिया। अपनी तपस्या में विघ्न देखकर महर्षि जह्नु अत्यंत क्रोधित हो उठे। अपने अद्भुत तपोबल से उन्होंने पूरी गंगा को अपनी अंजलि में समेट लिया और एक ही घूँट में पी गए। क्षणभर में गंगा का प्रवाह रुक गया और चारों ओर आश्चर्य छा गया। गंगा के लुप्त होते ही राजा भगीरथ का महान संकल्प अधूरा रह गया। वे अत्यंत व्याकुल हो गए। तब भगीरथ, देवताओं और अनेक ऋषि-मुनियों ने महर्षि जह्नु के समक्ष विनम्र होकर प्रार्थना की कि वे माँ गंगा को पुनः मुक्त करें, ताकि समस्त लोकों का कल्याण हो सके। भगीरथ की विनम्रता और देवताओं की प्रार्थना से महर्षि जह्नु का क्रोध शांत हो गया। उन्होंने अपनी योगशक्ति से अपने दाहिने कान से गंगा को पुनः प्रकट किया। इस प्रकार गंगा का मानो पुनर्जन्म हुआ और तभी से उन्हें "जाह्नवी" कहा जाने लगा, अर्थात महर्षि जह्नु की पुत्री। इसके बाद माँ गंगा पुनः भगीरथ के साथ आगे बढ़ीं और उस स्थान तक पहुँचीं जहाँ राजा सगर के पुत्रों की अस्थियाँ थीं। गंगा के पवित्र जल के स्पर्श से सभी को मोक्ष प्राप्त हुआ और राजा भगीरथ की वर्षों की तपस्या सफल हुई। तभी से किसी असंभव कार्य को अथक प्रयास से पूरा करने को "भगीरथ प्रयत्न" कहा जाता है। स्रोत: यह प्रसंग मुख्य रूप से वाल्मीकि रामायण (बालकाण्ड), महाभारत, ब्रह्म पुराण, भागवत पुराण तथा अन्य पुराणों में वर्णित गंगा अवतरण की कथाओं में मिलता है।