सद्गुरु जग्गी वासुदेव

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3 months ago
आदियोगी शिव की प्रतिमा कहाँ स्थित है? तमिलनाडु के कोयंबटूर में स्थित आदियोगी शिव की प्रतिमा 34 मीटर (112 फीट) ऊंची, 45 मीटर (147 फीट) लंबी और 25 मीटर (82 फीट) चौड़ी इस्पात की बनी है, जिसमें शिव को तिरुनामम के साथ दर्शाया गया है। इसे गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स द्वारा विश्व की "सबसे बड़ी प्रतिमा " के रूप में मान्यता प्राप्त है। #सद्गुरु जग्गी वासुदेव #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #महाशिवरात्रि #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱
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3 months ago
🔱महाशिवरात्रि का महत्व🔱 महाशिवरात्रि आध्यात्मिक पथ पर चलने वाले साधकों के लिए बहुत महत्व रखती है। यह उनके लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है जो पारिवारिक परिस्थितियों में हैं और संसार की महत्वाकांक्षाओं में मग्न हैं। पारिवारिक परिस्थितियों में मग्न लोग महाशिवरात्रि को शिव के विवाह के उत्सव की तरह मनाते हैं। सांसारिक महत्वाकांक्षाओं में मग्न लोग महाशिवरात्रि को, शिव के द्वारा अपने शत्रुओं पर विजय पाने के दिवस के रूप में मनाते हैं। परंतु, साधकों के लिए, यह वह दिन है, जिस दिन वे कैलाश पर्वत के साथ एकात्म हो गए थे। वे एक पर्वत की भाँति स्थिर व निश्चल हो गए थे। यौगिक परंपरा में, शिव को किसी देवता की तरह नहीं पूजा जाता। उन्हें आदि गुरु माना जाता है, पहले गुरु, जिनसे ज्ञान उपजा। ध्यान की अनेक सहस्राब्दियों के पश्चात्, एक दिन वे पूर्ण रूप से स्थिर हो गए। वही दिन महाशिवरात्रि का था। उनके भीतर की सारी गतिविधियाँ शांत हुईं और वे पूरी तरह से स्थिर हुए, इसलिए साधक महाशिवरात्रि को स्थिरता की रात्रि के रूप में मनाते हैं।🔱 #सद्गुरु जग्गी वासुदेव #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #महाशिवरात्रि #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱
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3 months ago
सद्गुरु जग्गी वासुदेव द्वारा कोयंबटूर के ईशा योग सेंटर में आयोजित महाशिवरात्रि उत्सव दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक समारोहों में से एक है। 112-फुट की आदियोगी प्रतिमा के सामने, यह रात भर चलने वाला उत्सव संगीत, नृत्य, ध्यान (ध्यानलिंग) और महायोग के माध्यम से आत्म-जागरण का अनुभव कराता है। इसमें मशहूर हस्तियां, गायक और लाखों लोग शामिल होते हैं।🔱🔱 #महाशिवरात्रि #सद्गुरु जग्गी वासुदेव #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱