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Irfan shaikh
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3 महीने पहले
शरत चंद्र चट्टोपाध्याय (1876–1938) बांग्ला साहित्य के सबसे लोकप्रिय और कालजयी उपन्यासकारों में से एक हैं। उन्हें 'अपराजेय कथाशिल्पी' के नाम से भी जाना जाता है। उनके साहित्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उन्होंने समाज के उन वर्गों (विशेषकर महिलाओं और वंचितों) को अपनी रचनाओं का केंद्र बनाया, जिन्हें अक्सर अनदेखा किया जाता था। यहाँ उनके जीवन और साहित्य से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें दी गई हैं: 1. प्रमुख रचनाएँ (Major Works) उनकी कहानियाँ और उपन्यास आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने दशकों पहले थे। उनकी कई रचनाओं पर सफल फिल्में भी बनी हैं: देवदास: उनकी सबसे प्रसिद्ध कृति, जिस पर कई भाषाओं में फिल्में बनीं। श्रीकांत: इसे उनकी सर्वश्रेष्ठ रचनाओं में से एक माना जाता है (चार भागों में)। चरित्रहीन: समाज की रूढ़ियों पर प्रहार करने वाला उपन्यास। परिणीता: एक सुंदर प्रेम कहानी। पाथेर दाबी: क्रांतिकारी विचारों से ओत-प्रोत होने के कारण ब्रिटिश सरकार ने इस पर प्रतिबंध लगा दिया था। बड़ी दीदी: उनकी पहली प्रकाशित रचना। 2. लेखन की विशेषताएँ नारी चित्रण: शरत बाबू ने महिलाओं के अंतर्मन की पीड़ा, उनके त्याग और उनके विद्रोह को बहुत गहराई से चित्रित किया। यथार्थवाद: उनके उपन्यासों में कल्पना से ज्यादा यथार्थ (Reality) झलकता है। उन्होंने समाज की कुरीतियों और जातिवाद पर तीखे प्रहार किए। सरल भाषा: उनकी भाषा इतनी सरल और हृदयस्पर्शी थी कि पाठक खुद को कहानी का हिस्सा महसूस करने लगता था। 3. जीवन दर्शन शरत चंद्र का अपना जीवन काफी संघर्षपूर्ण रहा। उन्होंने काफी समय म्यांमार (बर्मा) में बिताया, जहाँ के अनुभवों ने उनके लेखन को एक नई दृष्टि दी। वे मानव स्वभाव के पारखी थे और उन्होंने हमेशा यह माना कि "पाप से घृणा करो, पापी से नहीं।" रोचक तथ्य वे केवल एक लेखक ही नहीं, बल्कि एक कुशल संगीतज्ञ (गायक और बांसुरी वादक) भी थे। रवींद्रनाथ टैगोर के बाद वे दूसरे ऐसे बांग्ला लेखक थे, जिनकी लोकप्रियता पूरे भारत में फैली। उनकी जीवनी प्रसिद्ध लेखक विष्णु प्रभाकर ने 'आवारा मसीहा' नाम से लिखी है, जो साहित्य की एक अनमोल धरोहर मानी जाती है। #hindi khabar #🆕 ताजा अपडेट #🗞breaking news🗞 #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #aaj ki taaja khabar
Irfan shaikh
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4 महीने पहले
बाबा गुरबख्श सिंह जी बाबा गुरबख्श सिंह जी (Baba Gurbaksh Singh Ji) सिख इतिहास के एक महान योद्धा और शहीद (Great Warrior and Martyr) थे। उनकी मुख्य बातें इस प्रकार हैं: जन्म और प्रारंभिक जीवन: उनका जन्म 10 अप्रैल 1688 को अमृतसर के पास गाँव लील में हुआ था। वह गुरु गोबिंद सिंह जी के समकालीन थे और 11 वर्ष की आयु में भाई मणी सिंह जी की प्रेरणा से उन्होंने अमृतपान किया था। शिक्षा और सैन्य सेवा: उन्होंने बाबा दीप सिंह जी और भाई मणी सिंह जी के साथ समय बिताया, और वह एक कुशल विद्वान और योद्धा बने। शहादत: वह मुख्य रूप से दिसंबर 1764 में श्री हरमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर), अमृतसर की रक्षा के लिए अपनी शहादत के लिए जाने जाते हैं। अहमद शाह अब्दाली ने जब हिंदुस्तान पर सातवाँ आक्रमण किया और अमृतसर पर हमला किया, तो बाबा गुरबख्श सिंह जी ने लगभग 30 सिखों के एक जत्थे का नेतृत्व किया। उन्होंने अब्दाली की विशाल सेना (लगभग 30,000) के खिलाफ़ बहादुरी से लोहा लिया और श्री हरमंदिर साहिब की रक्षा करते हुए अंतिम सांस तक लड़ते रहे, जहाँ उन्होंने शहीदी प्राप्त की। यादगार: उनकी शहादत की याद में गुरुद्वारा श्री शहीद गंज बाबा गुरबख्श सिंह श्री हरमंदिर साहिब परिसर में, श्री अकाल तख्त के पीछे स्थित है। चरित्र: वह नीले बाणे (पारंपरिक सिख पोशाक) में रहते थे, अमृतवेले जागते थे, और अपने शरीर और दस्तार (पगड़ी) को सरबलोह (शुद्ध लोहा) के शस्त्रों और कवच से सजाते थे। वह अत्यंत निडर, धार्मिक और सम्माननीय संत-सिपाही के रूप में जाने जाते हैं। वह सिखों के इतिहास में एक महान शहीद और संत-सिपाही (Saint-Soldier) के रूप में पूजे जाते हैं, जिन्होंने धर्म और पवित्र स्थल की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। क्या आप उनके जीवन के किसी खास पहलू या उनकी शहादत के बारे में और जानना चाहेंगे? #aaj ki taaja khabar #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #🆕 ताजा अपडेट #hindi khabar #🗞breaking news🗞
Irfan shaikh
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5 महीने पहले
गुरु तेग बहादुर जी 🙏 श्री गुरु तेग बहादुर जी 🙏 श्री गुरु तेग बहादुर जी सिखों के नौवें गुरु थे। जन्म: 1 अप्रैल, 1621 ईस्वी को अमृतसर, पंजाब में हुआ था। पिता: सिखों के छठे गुरु, गुरु हरगोबिंद साहिब। बचपन का नाम: त्यागमल। कार्यकाल: 20 मार्च, 1664 से 24 नवंबर, 1675 तक। उपाधि: उन्हें 'हिंद की चादर' के नाम से जाना जाता है क्योंकि उन्होंने धर्म, इंसानियत और सिद्धांतों की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया था। बलिदान: मुगल शासक औरंगजेब के अत्याचारों और जबरन धर्म परिवर्तन के खिलाफ आवाज़ उठाने के कारण, उन्होंने 24 नवंबर, 1675 को दिल्ली में शहादत दी। उनका बलिदान धार्मिक स्वतंत्रता और मानव कल्याण के लिए विश्व इतिहास में अद्वितीय स्थान रखता है। योगदान: उनके 115 स्तोत्र (शबद) सिख धर्म के मुख्य ग्रंथ श्री गुरु ग्रंथ साहिब में शामिल हैं। गुरु तेग बहादुर जी का जीवन साहस, त्याग और नैतिकता का प्रतीक है। क्या आप उनके जीवन या उनसे जुड़े किसी विशिष्ट पहलू के बारे में और जानना चाहेंगे? #aaj ki taaja khabar #🆕 ताजा अपडेट #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #🗞breaking news🗞 #hindi khabar
Irfan shaikh
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5 महीने पहले
डॉ. सीवी रमन जी डॉ. सीवी रमन, जिनका पूरा नाम चंद्रशेखर वेंकटरामन था, भारत के एक महान भौतिक-शास्त्री थे। जन्म: 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में। सबसे महत्वपूर्ण खोज: रमन प्रभाव (Raman Effect)। यह प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of Light) से संबंधित है। नोबेल पुरस्कार: उन्हें वर्ष 1930 में भौतिकी का प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार दिया गया। वह भौतिक विज्ञान में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले एशिया के पहले व्यक्ति थे। राष्ट्रीय विज्ञान दिवस: उनकी इस महान खोज की याद में, जो 28 फरवरी 1928 को हुई थी, भारत में प्रतिवर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाया जाता है। अन्य सम्मान: उन्हें 1954 में भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था। संस्थान: उन्होंने रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट की स्थापना की, जहाँ उन्होंने अपने अंतिम दिनों तक काम किया। क्या आप डॉ. सीवी रमन या रमन प्रभाव के बारे में और जानकारी जानना चाहेंगे? #aaj ki taaja khabar #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #🗞breaking news🗞 #hindi khabar #🆕 ताजा अपडेट
Irfan shaikh
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5 महीने पहले
विश्व नमस्ते दिवस नमस्ते! "विश्व नमस्ते दिवस" के बारे में स्पष्ट रूप से कोई एक आधिकारिक वैश्विक दिन निर्धारित नहीं है। हालांकि, कुछ संदर्भों में यह उल्लेख मिला है: जुलाई 5: एक स्रोत के अनुसार, 5 जुलाई को पहली बार "इंटरनेशनल नमस्ते डे" (International Namaste Day) मनाया गया था (2016 के आस-पास का संदर्भ)। जुलाई 16: भारत सरकार द्वारा सफाई कर्मचारियों के कल्याण के लिए शुरू की गई 'NAMASTE' (नेशनल एक्शन फॉर मेकनाइज़्ड सैनीटेशन इकोसिस्टम) योजना के संदर्भ में 16 जुलाई को एक 'नमस्ते दिवस' का आयोजन किया गया है। वैश्विक प्रचलन: COVID-19 महामारी के दौरान, हाथ मिलाने से बचने के लिए 'नमस्ते' अभिवादन का प्रचलन वैश्विक स्तर पर बढ़ गया था, जिसके बाद कुछ लोगों ने 'विश्व नमस्ते दिवस' आयोजित करने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया। संक्षेप में, यह एक ऐसा विचार है जिसे बढ़ावा दिया जा रहा है, लेकिन 'योग दिवस' की तरह अभी इसे संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त कोई आधिकारिक विश्व दिवस घोषित नहीं किया गया है। क्या आप 'नमस्ते' के अर्थ या इसके सांस्कृतिक महत्व के बारे में और जानना चाहेंगे? #aaj ki taaja khabar #🗞️🗞️Latest Hindi News🗞️🗞️ #🗞breaking news🗞 #🆕 ताजा अपडेट #hindi khabar