#राधे-राधे #श्री गणेश
`श्रीराधाकृतं श्रीगणेशस्तोत्रम्🪶`
*( अथ ध्यानं )*
*खर्वं लम्बोदरं स्थूलं ज्वलन्तं ब्रह्मतेजसा ।*
*गजवक्त्रं वह्निवर्णमेकदन्तमनन्तकम् ॥१॥*
*सिद्धानां योगिनामेव ज्ञानिनां च गुरोर्गुरुम् ।*
*ध्यानं मुनीन्द्रैर्दैवेन्द्रैर्ब्रह्मेशशेषसंज्ञकैः ॥२॥*
*सिद्धेन्द्रैर्मुनिभिः सद्धिर्भगवन्तं सनातनम् ।*
*ब्रह्मस्वरूपं परमं मङ्गलं मङ्गलालयम् ॥३॥*
*सर्वविघ्नहरं शान्तं दातारं सर्वसम्पदाम् ।*
*भवाब्धिमायापोतेन कर्णधारं च कर्मिणाम् ॥४॥*
*शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणम् ।*
*ध्यायेद्ध्यानात्मकं साध्वं भक्तेशं भक्तवत्सलम् ॥५॥*
*( इति ध्यानम् )*
*राधिकोवाच–*
*'परं धाम परं ब्रह्म परेशं परमेश्वरम् ।*
*विघ्ननिघ्नकरं शान्तं पुष्टं कान्तमनन्तकम् ॥१॥*
*सुरासुरेन्द्रैः सिद्धेन्द्रैः स्तुतं स्तौमि परात्परम् ।*
*सुरपद्मदिनेशं च गणेशं मङ्गलायनम् ॥२॥*
*इदं स्तोत्रं महापुण्यं विघ्नशोकहरं परम् ।*
*यः पठेत् प्रातरुत्थाय सर्वविघ्नात् प्रमुच्यते ॥३॥*
*॥ इति श्रीराधाकृतम् श्रीगणेशस्तोत्रम् सम्पूर्णम् ॥*
`अर्थात 👉🏻 जो खर्व ( छोटे कदवाले ) , लम्बोदर ( तोंदवाले ) , स्थूलकाय , ब्रह्मतेजसे उद्भासित , हाथीके से मुखवाले , अग्निसरीखे कान्तिमान् , एकदन्त एवं असीम हैं ; जो सिद्धों , योगियों तथा ज्ञानियोंके गुरु-के-गुरु हैं ; ब्रह्मा , शिव औऱ शेष आदि देवेन्द्र , मुनीन्द्र , सिद्धेन्द्र , मुनिगण एवं संतलोग जिनका ध्यान करते हैं ; जो ऐश्वर्यशाली , सनातन , ब्रह्मस्वरूप , परम् मङ्गल , मङ्गलके स्थान , सम्पूर्ण विघ्नोंको हरनेवाले , शान्त , सम्पूर्ण सम्पत्तियोंके दाता , कर्मयोगियोंके लिये भवसागरमें मायारूपी जहाजके कर्णधारस्वरूप शरणागत दीन-दुःखीकी रक्षामें तत्पर , ध्यानरूप साधना करनेयोग्य , भक्तोंके स्वामी तथा भक्तवत्सल हैं ; उन गणेशका ध्यान करना चाहिये ।`
`– जो परम् धाम , परब्रह्म , परेश , परम् ईश्वर , विघ्नोंके विनाशक , शान्त , पुष्ट , मनोहर औऱ अनन्त हैं ; प्रधान-प्रधान सुर , असुर एवं सिद्ध जिनका स्तवन करते हैं ; जो देवरूपी कमलके लिये सूर्य तथा मङ्गलोंके आश्रय-स्थान हैं , उन परात्पर गणेशकी मैं स्तुति करती हूँ । यह उत्तम स्तोत्र महान् पुण्यमय व विघ्न औऱ शोकको हरनेवाला है । जो प्रातः काल उठकर इसका पाठ करता है , वह सम्पूर्ण विघ्नोंसे विमुक्त हो जाता है ।`
[ `ब्रह्मवैवर्तमहापुराण , कृष्णजन्मखण्ड , अध्याय १२३` ]
`☝🏻 यह राधारानी के मुख से निकला अतिसुन्दर गणेश स्तोत्र – इसमें भक्ति एवं फल दोनों एक साथ हैं ।`
`🎯 स्तोत्र का सार –`
`१. ध्यान - ५ श्लोक मेँ गणेश जी का स्वरूप बताया गया –`
*खर्वं लम्बोदरं स्थूलं. एकदन्तमनन्तकम्*
`👉🏻 ☆छोटे कद , ☆बड़ी तोंद , ☆हाथी मुख , ☆एक दांत , ☆ब्रह्मतेज से ज्वलन्त । वो ही ☆सिद्ध-योगी-ज्ञानी के गुरु के गुरु हैं । वही ☆भवसागर के कर्णधार हैं ।`
`२. स्तुति मेँ राधा जी के वचन के २ श्लोक –`
*परं धाम परं ब्रह्म परेशं परमेश्वरम्*
`👉🏻 वो ☆परब्रह्म , ☆परमेश्वर , ☆विघ्ननाशक , ☆शान्त , एवं ☆अनन्त हैं । ☆देव-असुर-सिद्ध समस्त जिनकी स्तुति करते हैं ।`
`३. फलश्रुति के १ श्लोक में –`
*यः पठेत् प्रातरुत्थाय सर्वविघ्नात् प्रमुच्यते*
`👉🏻 जो प्रातः उठकर पाठ करे , वह समस्त विघ्नों से मुक्त हो जाता है ।`
*😊🪷 एक पंक्ति में निचोड़ –* `राधा जी कहती हैं – गणेश जी ही "मंगलायतन" हैं । उन्हें याद कर लो तो विघ्न औऱ शोक दोनों कट जाते हैं ।`
*विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय🙏🏻*
*बोलो विघ्नविनाशक श्री गणेश भगवान की जय🚩*
*हर हर महादेव🚩*
*जय जय श्री सीताराम🚩*
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`🌄🌄 प्रभात वंदन 🌄🌄`