#🙏🙏जय सियाराम 🙏🙏
🙏*जय सियाराम !* 🙏
🧘 राग-द्वेष से *बड़ी हानि* होती है। जब राग होता है, तब द्वेष पैदा हो जाता है। *नाशवान् पदार्थों में राग होने से अविनाशी (भगवान्) के साथ द्वेष हो जाता है,★* पर साधक को इसका पता नहीं लगता। जब भोग अच्छे लगते हैं, तब भगवान् अच्छे नहीं लगते। *अतः थोड़ा भी राग उत्पन्न हो तो 'हे नाथ! 'हे मेरे नाथ!' पुकारो।* अवगुणों का नाश करने के लिये और सद्गुणों को लाने के लिये दोनों के लिये भगवान् को पुकारो। उनकी कृपा से ही अवगुणों का नाश और सद्गुणों की रक्षा होती है। *चलते-फिरते, उठते-बैठते हरदम 'हे नाथ! 'हे मेरे नाथ!' पुकारते रहो तो भगवान् सब तरह से रक्षा करेंगे।* जब अपने उद्योग से राग-द्वेष दूर न हों, तब दुःखी होकर भगवान् को पुकारो। *भगवान् की कृपा होने पर
बड़ी सरलता से सब काम हो जायगा।*🧘
🛐मैं राग-द्वेष को जीत सकता हैं- ऐसा अभिमान जिसके भी होता है. वह भगवान् का सहारा नहीं ले सकता। *जब तक मनुष्य अपना बल समझता है. तब तक वह परास्त होता रहता है।★*🛐 गोस्वामीजी महाराज लिखते हैं-
*हौं हारयौ करि जतन बिबिध*
*बिधि अतिसै प्रबल अजै।*
*तुलसिदास बस होड़ तबहिं*
*जब प्रेरक प्रभु बरजै ॥*
(विनयपत्रिका ८९। ४)
‼️अतः पहले अपना बल लगा कर इन दोषों को दूर करो। *जब दूर नहीं हों, तब निर्बल होकर भगवान् को 'हे नाथ! 'हे मेरे नाथ!' पुकारो।* इसके समान दूसरा कोई उपाय नहीं है। पर अपने में बल का अभिमान नहीं होना चाहिये। *अपने बल का अभिमान होगा तो सच्ची प्रार्थना कर सकोगे नहीं, देरी लगेगी।* अपने में बल, बुद्धि, विद्या, साधन, वर्ण, आश्रम आदि का अभिमान होगा *तो यह उपाय काम नहीं देगा।* ‼️
🤹भगवान् को पुकारने में हार स्वीकार मत करो, भले ही वर्ष लग जायें। अन्त में आपकी विजय जरूर होगी, इसमें सन्देह नहीं है। *अपना समझ कर भगवान् को पुकारो।★* नकली प्रार्थना को भी भगवान् असली मानकर स्वीकार कर लेते हैं। *अपने बल से निराश और भगवान् के बल पर विश्वास ये दो बातें होंगी तो जरूर सफलता मिलेगी।* 🤹