Vedant

आचार्य प्रशांत
515 views
10 hours ago
कोई अपना नहीं || आचार्य प्रशांत #acharyaprashant #lifetruth #death #Vedant
Ashutosh shukla
613 views
3 days ago
यह भाषाई और वैज्ञानिक रूप से भी सच है। वेदों की सुरक्षा का जो तरीका हमारे ऋषियों ने बनाया था, वह दुनिया के इतिहास में अद्वितीय है। यहाँ इस बात को पुख्ता करने वाले कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं: स्वर और मात्रा की शुद्धता (The Vedic Chanting): वेदों को 'श्रुति' (सुनकर याद रखने वाला) कहा जाता है। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए 'विकृति पाठ' (जैसे जटा पाठ, शिखा पाठ, घन पाठ) जैसी जटिल प्रणालियाँ बनाई गईं। इसमें मंत्रों को शब्दों के क्रम बदल-बदल कर गाया जाता है। अगर कोई एक मात्रा या 'डंडा' (स्वर) भी बदलने की कोशिश करे, तो वह लय टूट जाती है और तुरंत पकड़ में आ जाता है। अपौरुषेय ज्ञान: वेदों को 'अपौरुषेय' माना जाता है, यानी ये किसी मनुष्य की रचना नहीं बल्कि ईश्वरीय ज्ञान हैं जो सृष्टि के आरंभ से है। इनकी तुलना में पुराण बहुत बाद के हैं और उनमें भौगोलिक व ऐतिहासिक कहानियों के जुड़ने से मिलावट की गुंजाइश बनी रही। संस्कृत का व्याकरण: वेदों की संस्कृत (Vedic Sanskrit) इतनी प्राचीन और नियमबद्ध है कि उसमें मध्यकालीन या आधुनिक मिलावट के शब्द साफ अलग चमकते हैं। पाणिनि के व्याकरण के नियमों ने वेदों को एक अभेद्य किले की तरह सुरक्षित कर दिया था। इस प्रकार निष्कर्ष बिल्कुल स्पष्ट है: अगर किसी को सनातन धर्म का सबसे शुद्ध, वैज्ञानिक और मौलिक (Original) ज्ञान चाहिए, तो वेदों और उपनिषदों से बेहतर कुछ नहीं है। पुराणों में जो 'गंदगी' या 'मिलावट' देखी जा सकती हैं, उससे कई समाज सुधारक (जैसे महर्षि दयानंद सरस्वती) भी सहमत थे और उन्होंने ही "वेदों की ओर लौटो" का नारा भी दिया था। जय श्री राम , जय सनातन धर्म I 🙏🙏🙏यह भाषाई और वैज्ञानिक रूप से भी सच है। वेदों की सुरक्षा का जो तरीका हमारे ऋषियों ने बनाया था, वह दुनिया के इतिहास में अद्वितीय है। यहाँ इस बात को पुख्ता करने वाले कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं: स्वर और मात्रा की शुद्धता (The Vedic Chanting): वेदों को 'श्रुति' (सुनकर याद रखने वाला) कहा जाता है। इन्हें सुरक्षित रखने के लिए 'विकृति पाठ' (जैसे जटा पाठ, शिखा पाठ, घन पाठ) जैसी जटिल प्रणालियाँ बनाई गईं। इसमें मंत्रों को शब्दों के क्रम बदल-बदल कर गाया जाता है। अगर कोई एक मात्रा या 'डंडा' (स्वर) भी बदलने की कोशिश करे, तो वह लय टूट जाती है और तुरंत पकड़ में आ जाता है। अपौरुषेय ज्ञान: वेदों को 'अपौरुषेय' माना जाता है, यानी ये किसी मनुष्य की रचना नहीं बल्कि ईश्वरीय ज्ञान हैं जो सृष्टि के आरंभ से है। इनकी तुलना में पुराण बहुत बाद के हैं और उनमें भौगोलिक व ऐतिहासिक कहानियों के जुड़ने से मिलावट की गुंजाइश बनी रही। संस्कृत का व्याकरण: वेदों की संस्कृत (Vedic Sanskrit) इतनी प्राचीन और नियमबद्ध है कि उसमें मध्यकालीन या आधुनिक मिलावट के शब्द साफ अलग चमकते हैं। पाणिनि के व्याकरण के नियमों ने वेदों को एक अभेद्य किले की तरह सुरक्षित कर दिया था। इस प्रकार निष्कर्ष बिल्कुल स्पष्ट है: अगर किसी को सनातन धर्म का सबसे शुद्ध, वैज्ञानिक और मौलिक (Original) ज्ञान चाहिए, तो वेदों और उपनिषदों से बेहतर कुछ नहीं है। पुराणों में जो 'गंदगी' या 'मिलावट' देखी जा सकती हैं, उससे कई समाज सुधारक (जैसे महर्षि दयानंद सरस्वती) भी सहमत थे और उन्होंने ही "वेदों की ओर लौटो" का नारा भी दिया था। जय श्री राम , जय सनातन धर्म I 🙏🙏🙏 #ved #genral knowledge
Pandit Abhinav Sharma
875 views
4 months ago
आप सभी को गीता जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं #🙏गुरु महिमा😇 #reel #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #ved #Astrologer