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sn vyas
698 views • 1 months ago
महर्षि भृगु द्वारा अग्निदेव को शाप 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ पूरी कहानी #प #पौराणिक कथा महर्षि भृगु की पत्नी का नाम पुलोमा था। वह बहुत सुंदर थी और गर्भवती थी। बात बहुत पुरानी है। पुलोमा के पिता ने बचपन में ही उसका विवाह राक्षस पुलोमन से तय कर दिया था, पर बाद में उनका विवाह ऋषि भृगु से हो गया। इस विवाह के साक्षी स्वयं अग्निदेव थे। एक दिन ऋषि भृगु स्नान के लिए आश्रम से बाहर गए। तभी वह राक्षस पुलोमन आश्रम में आया। उसने पुलोमा को देखा और मोहित हो गया। उसे ले जाने से पहले उसने अग्निदेव से पूछा - "हे अग्नि! क्या यह वही पुलोमा है जिसका पहले मुझसे विवाह तय हुआ था? सत्य बताना, क्योंकि तुम हर यज्ञ में साक्षी रहते हो।" अग्निदेव धर्म संकट में पड़ गए। एक तरफ सत्य बोलना था, दूसरी तरफ एक स्त्री की रक्षा का प्रश्न। अंत में उन्होंने सत्य ही बोला - "हाँ, यह वही पुलोमा है।" इतना सुनते ही राक्षस ने वराह रूप धारण किया और पुलोमा को उठाकर भागने लगा। भय और पीड़ा से पुलोमा के गर्भ से एक तेजस्वी बालक नीचे गिरा। वह बालक इतना तेजस्वी था कि उसकी चमक से राक्षस वहीं भस्म हो गया। उसी बालक का नाम पड़ा च्यवन - क्योंकि वह गर्भ से च्युत हुआ था। यही आगे चलकर महर्षि च्यवन बने। जब भृगु ऋषि लौटे और सारी बात सुनी, तो उन्हें अग्निदेव पर बहुत क्रोध आया। उन्होंने कहा - "तुमने मेरे होते हुए मेरी पत्नी के बारे में राक्षस को बता दिया। तुम सर्वज्ञ होकर भी एक राक्षस की सहायता कर गए। इसलिए मैं तुम्हें शाप देता हूँ - आज से तुम सर्वभक्षी हो जाओगे, तुम पवित्र-अपवित्र सब कुछ खाओगे।" अग्निदेव इस शाप से बहुत दुखी हुए और सृष्टि से अंतर्धान हो गए। अग्नि के बिना यज्ञ, हवन, सब बंद हो गया। देवता घबरा गए। तब सृष्टिकर्ता ब्रह्मा जी ने अग्निदेव को समझाया और वरदान दिया - "भृगु का शाप लोकहित के लिए ही होगा। हे अग्नि! तुम जो कुछ भी भक्षण करोगे, तुम्हारे स्पर्श मात्र से वह वस्तु फिर से पवित्र हो जाएगी। तुम अपवित्र को भी पवित्र करने वाले बनोगे।" इसी वरदान के कारण आज भी अग्नि में जो कुछ डाला जाता है, वह शुद्ध माना जाता है। अग्नि कभी अशुद्ध नहीं होती, बल्कि वह सबको शुद्ध करती है। अतः सत्य बोलना धर्म है, पर सत्य को कैसे, कहाँ बोलना है, इसका विवेक भी जरूरी है। और ऋषियों का क्रोध भी अंत में लोक-कल्याण का कारण बन जाता है। श्रोत 👉🏻 महाभारत आदि पर्व 💐 साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️
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