नंदी

लक्ष्मीनारायण नागला
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7 days ago
भृंगी ऋषि की कथा (लिङ्गपुराण के आधार पर) :: भृंगी ऋषि भगवान शिव के परम अनन्य भक्तों में गिने जाते हैं। उनकी कथा मुख्यतः शैव पुराणों—विशेषकर लिङ्गपुराण, शिवपुराण तथा अन्य शैव आगमों—में वर्णित मिलती है। यह कथा केवल एक भक्त की नहीं, बल्कि शिव और शक्ति की अभिन्नता तथा भक्ति के संतुलन का गहन आध्यात्मिक संदेश देती है। भृंगी ऋषि का परिचय: भृंगी ऋषि महान तपस्वी, योगी तथा भगवान शिव के अनन्य उपासक थे। उनका जीवन पूर्णतः शिव-आराधना में समर्पित था। वे केवल शिव को ही परब्रह्म मानते थे और किसी अन्य देवता की उपासना नहीं करते थे। लिङ्गपुराण में शिवभक्तों की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है कि जो साधक एकाग्र भाव से शिव का ध्यान करता है, वह महान सिद्धियों का अधिकारी बनता है। केवल शिव की पूजा: जब भी भगवान शिव और माता पार्वती एक साथ विराजमान होते, सभी देवता दोनों को प्रणाम करते थे। किन्तु भृंगी ऋषि केवल भगवान शिव की परिक्रमा और वंदना करते थे। वे माता पार्वती को प्रणाम नहीं करते थे। माता पार्वती ने यह देखा और मुस्कराकर पूछा— हे मुनिवर! क्या मैं शिव से भिन्न हूँ कि आप मुझे प्रणाम नहीं करते? भृंगी ऋषि ने उत्तर दिया— माता! मेरा व्रत केवल शिव-भक्ति का है। मैं केवल भगवान शंकर की ही आराधना करता हूँ। अर्धनारीश्वर स्वरूप की लीला: माता पार्वती ने भगवान शिव से कहा— यदि मैं आपसे अभिन्न हूँ, तो ऐसा स्वरूप धारण कीजिए जिसमें कोई हमें अलग न कर सके। तब भगवान शिव ने अपने आधे शरीर में पार्वती को समाहित कर अर्धनारीश्वर स्वरूप धारण किया। अर्धनारीश्वर इस स्वरूप में दाहिना भाग शिव और बायाँ भाग पार्वती का था। भृंगी ऋषि का अद्भुत संकल्प भृंगी ऋषि ने निश्चय किया कि वे केवल शिव की ही परिक्रमा करेंगे। उन्होंने योगबल से स्वयं को एक भृंग (भौंरे) का रूप दे दिया और शिव तथा पार्वती के संयुक्त शरीर के मध्य से निकलकर केवल शिव-भाग की परिक्रमा कर ली। इसी कारण उनका नाम भृंगी प्रसिद्ध हुआ। पार्वती का शाप माता पार्वती ने कहा— जिसे शक्ति का सम्मान नहीं, वह शक्ति से प्राप्त शरीर और रक्त का अधिकारी भी नहीं। उन्होंने भृंगी ऋषि को शाप दिया कि उनके शरीर से रक्त, मांस और स्नायु समाप्त हो जाएँ। क्षणभर में उनका शरीर केवल हड्डियों का ढाँचा रह गया। खड़े रहने में असमर्थ: शरीर से मांस और रक्त चले जाने के कारण भृंगी ऋषि खड़े भी नहीं रह सके। वे गिरने लगे, क्योंकि शरीर में संतुलन बनाए रखने की शक्ति नहीं बची। यह प्रतीक था कि शक्ति के बिना जीवन स्थिर नहीं रह सकता। शिव की करुणा भगवान शिव अपने भक्त की ऐसी दशा देखकर अत्यन्त करुणामय हुए। उन्होंने भृंगी ऋषि को एक तीसरा पैर प्रदान किया, जिससे वे पुनः स्थिर होकर खड़े हो सके। इस प्रकार भृंगी ऋषि तीन पैरों वाले दिव्य ऋषि के रूप में प्रसिद्ध हुए। भृंगी ऋषि का आत्मबोध: इस घटना के बाद भृंगी ऋषि को अनुभव हुआ कि— शिव बिना शक्ति के केवल चेतना हैं। शक्ति बिना शिव के केवल शक्ति-तत्त्व हैं। दोनों मिलकर ही सम्पूर्ण परम तत्त्व हैं। यद्यपि उनकी शिव-भक्ति अटल रही, पर उन्होंने शिव और शक्ति की अभिन्नता का भी सम्मान किया। लिङ्गपुराण में शिव को परम ब्रह्म कहा गया है, किन्तु उनकी शक्ति के बिना सृष्टि, पालन और संहार की लीला संभव नहीं मानी गई। शिव और शक्ति का संबंध अग्नि और उसकी दाहक शक्ति के समान बताया गया है—दोनों अलग नहीं किए जा सकते। शिवः शक्त्या युक्तो यदि भवति शक्तः प्रभवितुं। न चेदेवं देवो न खलु कुशलः स्पन्दितुमपि॥ शक्ति के साथ संयुक्त होकर ही शिव सृष्टि आदि कार्यों में समर्थ होते हैं; शक्ति के बिना वे स्पंदन भी नहीं करते। ~जय शिव शक्ति~ #lingpuran #sanatandharma #hinduism #nonfollowersviewers #babitasrivastava #shivbhakt #ancientindia #vedikindia #bhakti #जय हो नंदी महाराज 🙏 #नंदी जी कैसे बने शिव के वाहन #शिवभक्त नंदी #जय नंदी महाराज #नंदी
NANDKUMAR WAMAN PATIL
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18 days ago
शंकर भगवानचे वाहन असलेले नंदी बैलाचा आज सण महाराष्ट्र बेंदूर स्टेटस #love #jay bhole ## नंदी बैलगाड़ी #🙏भक्ती स्पेशल 😇🌺🌹 (TechZor) 🇮🇳 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
Aayush Gupta
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1 months ago
AI indicator
|| महादेव • नंदी || 🔱🐄 महादेव की कृपा सभी पर बनी रहे। 🕉️✨ Save this for later… Crafted with love by @ • Shiv Premi ❣️ This content is AI generated : for Devotion & Spirituality 🕉️ #mahadev #harharmahadev #Shivshakti #SanatanDharma #Nandi