पंचतंत्र दुष्टांत

Nikhil Raja Official
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24 days ago
आज उसकी बारी है, कल तुम्हारी भी हो सकती है! 💯 . . . #hindimotivatinal #viral #trending #☝ मेरे विचार #👍 डर के आगे जीत👌 #☝अनमोल ज्ञान #🙌 Never Give Up
sn vyas
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1 months ago
#पंचतंत्र की कहानियाँ🙈🙉🙊 #पंचतंत्र #पंचतंत्र दुष्टांत घर का भेदी (पंचतंत्र की कहानी) 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️ प्राचीन काल की बात है, एक राजा का इकलौता पुत्र था। एक बार किसी तरह राजकुमार के पेट में एक सांप चला गया। सांप ने राजकुमार के पेट को ही अपना बिल बना लिया और वहीं रहने लगा। पेट में सांप होने के कारण राजकुमार दिन-प्रतिदिन कमजोर होता गया। राजा ने दुनिया भर के वैद्यों से उसका बहुत उपचार कराया, परंतु कोई फायदा नहीं हुआ। अपने माता-पिता और परिवार को अपनी वजह से दुखी देखकर, राजकुमार ने राजभवन छोड़ दिया और दूसरे राज्य में जाकर एक मंदिर के बाहर सामान्य भिखारी की तरह रहने लगा। उसी राज्य के राजा की दो पुत्रियां थीं। बड़ी पुत्री हमेशा मीठा बोलती थी, चाहे वह झूठ ही क्यों न हो, लेकिन छोटी पुत्री हमेशा कड़वा मगर सच बोलती थी। एक दिन राजा अपनी छोटी पुत्री की सच्ची बातों से इतना क्रोधित हो गया कि उसने मंत्रियों को आदेश दिया कि इसका विवाह किसी निर्धन भिखारी से कर दिया जाए। मंत्रियों ने आज्ञा का पालन किया और मंदिर के बाहर ठहरे हुए उसी राजकुमार (जिसे वे भिखारी समझ रहे थे) से राजकुमारी का विवाह करा दिया। विवाह के बाद दोनों वह राज्य छोड़कर एक तालाब के किनारे रहने लगे। एक दिन राजकुमारी कुछ सामान लेने बाजार गई थी। जब वह लौट कर आई, तो उसने एक हैरान कर देने वाला दृश्य देखा। राजकुमार तालाब के किनारे सो रहा था और उसके मुंह से वह सांप बाहर निकला हुआ था, जो पास के ही बिल में रहने वाले एक दूसरे सांप से बात कर रहा था। बिल वाला सांप, पेट वाले सांप को खरी-खोटी सुनाते हुए कह रहा था कि तूने इस बेचारे राजकुमार का जीवन बर्बाद कर दिया है। यह सुनकर पेट वाला सांप क्रोधित होकर बोला कि तू भी तो जिस स्थान पर रह रहा है, उसके नीचे स्वर्ण कलश (सोने का घड़ा) गड़ा है और तू उस कलश को दूषित कर रहा है। तभी बिल वाला सांप अपना भेद खोलते हुए कहता है, अगर कोई भी इस राजकुमार को उबली हुई राई की कांजी पिला दे, तो तेरी मौत निश्चित है। जवाब में पेट वाला सांप कहता है और अगर कोई तेरे इस बिल में उबला हुआ गर्म तेल डाल दे, तो तू भी नहीं बचेगा। पेड़ के पीछे छिपी राजकुमारी ने दोनों सांपों की ये सारी बातें सुन लीं। उसने तुरंत वही उपाय किए जो सांपों ने एक-दूसरे को मारने के लिए बताए थे। राजकुमारी ने राई की कांजी पिलाकर राजकुमार के पेट वाले सांप को मार दिया, जिससे राजकुमार पूरी तरह स्वस्थ हो गया। फिर उसने बिल में खौलता हुआ तेल डालकर दूसरे सांप को भी मार गिराया और वहां गड़े हुए स्वर्ण कलश को निकाल लिया। इस प्रकार दोनों की निर्धनता दूर हो गई। राजकुमार के स्वस्थ होने पर वे दोनों अपने राज्य वापस लौट आए। घर लौटने पर राजा-रानी ने अपने पुत्र और पुत्रवधू का बड़ी धूमधाम से स्वागत किया और वे सुखपूर्वक जीवन बिताने लगे। इस कहानी से यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी अपने रहस्य (भेद) दूसरों के सामने उजागर नहीं करने चाहिए। आपस की फूट और अपना भेद खोलना हमेशा विनाश का कारण बनता है। साभार~ पं देव शर्मा🔥 〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️🌼〰️〰️