#श्री राधे#श्री राधा#राधे-राधे
"श्रीराधां जगतारिकां विमलिते
जीवस्य चोद्धारिकां
गोपालस्य सुमालिकां कर-धृतां
श्रेयार्थिनां पालिकां।
दृष्ट्या गोकुलनायिकां यवनिकां
संपाद्य संवारितां
सद्मन्येव विराजितां नवलिकां
वन्दे सदा राधिकाम्।।"
-(तृ.गृ.गो.श्रीव्रजेशकुमारजी कृत
'श्रीस्वामिन्याः स्तुति:' -श्लोक: १)
सकल विश्व की तारक-शक्तिरूपा..
निज कृपा से जीवों के अंतःकरण को विमल बना कर उनका उद्धार करनेवालीं..
निज प्राणप्रेष्ठ श्रीगोपालचूडामणि
द्वारा श्रीकण्ठ में धारण की गई प्रसादी माला को निज हस्त में धारण कर संयोग की आंतर अनुभूति में रममाण..
आत्यंतिक कल्याण के इच्छुक दैवी जीवों का पालन करनेवालीं..
अनधिकारियों के दृष्टिपथ से निज स्वरूप को आच्छादित करने हेतु अवगुण्ठन में निज स्वरूप का गोपन कर सुंदर सुशोभित सदन में प्रिय संग विराजमान...
नवतरुणीरूपा श्रीराधिकाजी को मैं सदैव प्रणाम करता हूँ ..!!
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