श्री हरि

sn vyas
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7 days ago
#श्री हरि विष्णु ⚜️ शास्त्रों में आता है कि जिनका मिलना प्रारब्ध के अधीन है, उन स्त्री, पुत्र, परिवार, धन, भोजन आदि के मिलने में तो सन्तोष करना चाहिए; और जिनका मिलना नये पुरुषार्थ के अधीन हो, जैसे जप-तप, ध्यान, स्वाध्याय आदि में तथा परमात्म- तत्त्व को जानने के विषय में सन्तोष करना ही नहीं चाहिए। पारमार्थिक उन्नति की कोई सीमा नहीं है, अपनी स्थिति में सन्तोष करने से फिर आगे उन्नति रुक जाती है। जब तक अपने अलग अस्तित्व (व्यक्तित्व)-का भान होता है, तब तक तो सन्तोष करना ही नहीं चाहिए।* *⚜️ कृतकृत्य (करना), ज्ञात- ज्ञातव्य, (जानना) और प्राप्त-प्राप्तव्य (पाना)— तीन बातें है; जब तक कुछ भी करना, जानना और पाना बाकी रहता है, तब तक पूर्णता नहीं है। 'यं लब्ध्वा चापरं लाभं मन्यते नाधिकं ततः। यस्मिन्स्थितो न दुःखेन गुरुणापि विचाल्यते॥' (गीता-6/22)। जिस लाभ की प्राप्ति के बाद उससे बढ़कर भी कोई लाभ हो सकता है, यह बात स्वप्न में भी मानने में नहीं आती है। जिस सुख से वह बड़े भारी दुःख से भी विचलित नहीं किया जा सके, जहाँ दुःख का स्पर्श ही नहीं हो, ऐसे अनिर्वचनीय सुख की प्राप्ति का मौका इस मनुष्य शरीर में मिला हुआ है।* *⚜️ पारमार्थिक उन्नति में सन्तोष करने से धोखा हो जाता है, फिर उसकी आगे उन्नति रुक जाती है; और सांसारिक चीजों में सन्तोष नहीं करने से धोखा हो जाता है, उसकी कामनाएँ पूरी नहीं होने से वह दुःख पाता रहता है। यह मानव शरीर पारमार्थिक उन्नति के लिए ही मिला है, सुख-भोग, आराम, मान-बड़ाई के लिए नहीं है, इसलिए सांसारिक वस्तुओं आदि का मिलना अथवा नहीं मिलना इतने महत्त्व का नहीं है।* *⚜️ एक मार्मिक बात है कि वर्तमान में मिलने वाला फल वर्तमान कर्मों का फल नहीं है। पिछले जन्मों में किये गये कर्मों के आधार पर, प्रारब्धानुसार वर्तमान में फल की प्राप्ति होती है, अभी वर्तमान में किये जाने वाले कर्मों का (क्रियमाण कर्म) फल आगे कभी मिलेगा; इसलिए फल की प्राप्ति में सन्तोष ही करना चाहिए। 'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।'* *⚜️ मनुष्य शरीर में हमें ऐसे सुख के लिए प्रयत्न करना चाहिए, जिसमें दुःख का लेश भी न हो; मामूली सुख हमें नहीं लेना है। दुःख की अपेक्षा वाले साधारण सुख तो मनुष्येतर सभी योनियों में मिल जायेंगे, लेकिन ऐसा दुःख- रहित महान् आनन्द प्राप्त करने का मौका तो इस मनुष्य शरीर में ही है। 'दिन नहीं भूख रैन नहीं निद्रा, छिन-छिन व्याकुल होत हिया। चितवन मोरि तुमसे लागी पिया।' भोजन-पानी छोड़ने से भगवान् नहीं मिलते हैं; भगवत् प्राप्ति की लगन ऐसी लग जाय कि भूख-प्यास का भान ही न हो, तो भगवान् मिल जाते हैं।* 🌷🌷🌷🌷🌷
sn vyas
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7 days ago
#श्री हरि विष्णु #श्री हरि 🕉️🙏 जब श्रीहरि ने अपनी हथेली पर पृथ्वी को धारण किया — भगवान विष्णु की दिव्य कथा🕉🚩 🌍 एक बार पृथ्वी ने श्रीहरि को पुकारा... बहुत प्राचीन समय की बात है। पृथ्वी पर अधर्म बढ़ने लगा था। मनुष्य अपने स्वार्थ में प्रकृति को भूलने लगे और धर्म का संतुलन डगमगाने लगा। पृथ्वी ने करुण स्वर में भगवान विष्णु से प्रार्थना की— “हे नारायण! मैं आपके समस्त जीवों का भार अपने ऊपर धारण करती हूँ, लेकिन आज मेरा संतुलन बिगड़ रहा है। मेरी रक्षा कौन करेगा?” श्रीहरि ने अपनी दिव्य दृष्टि से पृथ्वी की ओर देखा। उन्होंने कहा— “हे धरती माता, जब तक इस सृष्टि में धर्म का एक भी दीप जल रहा है, तब तक तुम्हें अकेला नहीं समझना।” 🪷 श्रीहरि ने पृथ्वी को अपनी हथेली पर उठाया भगवान विष्णु ने अपनी हथेली आगे बढ़ाई और पृथ्वी को अपने दिव्य संरक्षण में ले लिया। उस क्षण देवताओं ने देखा कि असंख्य ग्रह, नक्षत्र और आकाशगंगाएँ भी उसी विराट व्यवस्था का हिस्सा हैं। श्रीहरि बोले— “मैं इस पृथ्वी का स्वामी बनकर नहीं, उसका रक्षक बनकर इसे धारण करता हूँ।” और फिर उन्होंने एक गहरा संदेश दिया— “पृथ्वी तुम्हारी संपत्ति नहीं है। तुम उसके केवल संरक्षक हो।” 🌀 सुदर्शन चक्र का रहस्य उनकी उँगली पर घूमता सुदर्शन चक्र केवल युद्ध का अस्त्र नहीं माना जाता, बल्कि धर्म और cosmic order के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। जब-जब अधर्म बढ़ता है, तब-तब श्रीहरि धर्म की रक्षा के लिए अवतार लेते हैं। “परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।” अर्थात धर्म की रक्षा और अधर्म के नाश के लिए भगवान अवतार लेते हैं। 🌺 हाथ में कमल क्यों? श्रीहरि के दूसरे हाथ में कमल है। कमल कीचड़ में खिलकर भी निर्मल रहता है। इसलिए यह हमें सिखाता है— “परिस्थितियाँ चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, अपने भीतर की पवित्रता को मत खोना।” 🐚 शंख की आवाज़ भगवान के हाथ में शंख धर्म और शुभता की घोषणा करता है। मानो वह पूरी सृष्टि से कह रहा हो— “डरो मत… धर्म का प्रकाश कभी समाप्त नहीं होता।” 🌌संदेश:- हम जिस पृथ्वी पर रहते हैं, वह ब्रह्मांड में बहुत छोटी दिखाई देती है। लेकिन भगवान विष्णु की दृष्टि में हर जीव, हर ग्रह और हर कण महत्वपूर्ण है। इसलिए कथा हमें याद दिलाती है— 🌍 धरती की रक्षा करो। 🌿 प्रकृति का सम्मान करो। 🙏 अहंकार छोड़ो। ⚖️ धर्म और सत्य का साथ दो। 🕉️ ईश्वर को केवल मंदिर में नहीं, पूरी सृष्टि में अनुभव करो। और अंत में श्रीहरि मुस्कुराकर कहते हैं— “जब तुम पृथ्वी की रक्षा करते हो, तब वास्तव में तुम मेरी ही सृष्टि की सेवा करते हो।” 🙏 🌺 ॐ नमो भगवते वासुदेवाय 🕉️ जय श्री हरि विष्णु 🙏 नारायण नारायण 🌍 धरती माता की जय
Bhakti Sansar Sagar (Mr Swami)
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22 days ago
🌼🙏🏻 जय श्री हरि 🙏🏻🌼 कल गुरुवार है। आज की इस शांत संध्या में श्रीहरि विष्णु के श्रीचरणों का स्मरण करते हुए आने वाले गुरुवार का स्वागत श्रद्धा और सकारात्मक भाव से करें। 🙏🏻💛 श्री नारायण की कृपा से जीवन में सत्य, धैर्य, शांति और सद्बुद्धि बनी रहे। भगवान विष्णु हमारे परिवार को सुख-समृद्धि, सद्भाव और मंगलमय जीवन का आशीर्वाद दें। 🌼🪷 हे श्रीहरि, हमारे मन को निर्मल रखें, विचारों को सात्त्विक बनाएं और हमें अच्छे कर्मों के मार्ग पर चलने की शक्ति प्रदान करें। 🙏🏻 कल के पावन गुरुवार की तैयारी आज ही श्रीहरि के नाम से करें। प्रेम से बोलिए — जय श्री हरि! 💛🙏🏻 #जयश्रीहरि #श्रीविष्णु #विष्णुजी #नारायण #श्रीहरि #विष्णुभक्ति #गुरुवार #गुरुवारभक्ति #गुरुवारस्पेशल #लक्ष्मीनारायण #ॐनमोनारायणाय #सनातनधर्म #भक्ति #BhaktiSansarSagar #श्री हरि विष्णु #BhaktiSansarSagar #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏राम राम जी #शुभ गुरुवार
Bhakti Sansar Sagar (Mr Swami)
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26 days ago
🙏🌸 जय श्री हरि नारायण 🌸🙏 कामिका एकादशी की पावन तिथि पर अपने मन को श्रीहरि की भक्ति में समर्पित करें। 🪷 नारायण का स्मरण हृदय में श्रद्धा जगाए, प्रभु का नाम मन में शांति का भाव जगाए, और भक्ति हमें सत्य, संयम और सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ाए। 🙏 तुलसी और प्रभु के चरणों का स्मरण करते हुए अपने भीतर भक्ति का दीप प्रज्वलित करें। 🌿 हे भगवान विष्णु, सभी भक्तों के जीवन में शांति, सद्बुद्धि, संतोष और धर्ममय जीवन की प्रेरणा बनाए रखें। 🌺 🙏 प्रेम से बोलिए — 🌸 जय श्री हरि नारायण 🌸 #BhaktiSansarSagar #कामिकाएकादशी #एकादशी #श्रीहरि #नारायण #विष्णुभगवान #KamikaEkadashi #Ekadashi #LordVishnu #Narayan #VishnuBhakti #HariBhakti #SanatanDharma #Bhakti #Devotional #श्री हरि विष्णु #BhaktiSansarSagar #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🕉️सनातन धर्म🚩 #सुप्रभात
sn vyas
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29 days ago
#श्री हरि विष्णु 🕉️भगवान् श्रीविष्णु के विना दूसरे कोई भी देव मुक्ति नहीं दे सकते हैं। जब-जब वर देने का प्रसंग आता है तब-तब देवता यह कह देते हैं कि मुक्ति को छोड़ कर और वर माँगो । श्रीमद्भागवत में मुचकुन्द राजा के प्रसंग में भी यही बात आई है कि मुचकुन्द पर प्रसन्न होकर देवता लोग बोले कि —🕉️ वरं वृणीष्व भद्रं ते ऋते कैवल्यमद्य नः । एक एवेश्वरस्तस्य भगवान् विष्णुरव्ययः ।। —श्रीमद्भागवत, 10/51/20 📕राजन् ! मोक्ष को छोड़कर जो तुम्हारी इच्छा हो वह माँगो ! इसी तरह शिव जी ने भी घण्टाकर्ण के प्रसंग में मुक्ति के लिये भगवान् विष्णु के पास उनको भेजा। अतः भगवान् श्रीमन्नारायण के विना मुक्ति देना किसी के हाथ में नहीं है। जहाँ तक जिसका अधिकार है वहाँ तक ही वह दे सकता है। परम् पद से बढ़कर और कोई चीज नहीं है। उसका अधिपति सर्वेश्वर भगवान् श्रीमन्नारायण के विना और दूसरा नहीं हो सकता । श्रुतियों में भी यह स्पष्ट ही लिखा है कि जो मुक्ति स्थान है। यानी परमपद है, वह भगवान् श्रीहरि का ही है। उस दिव्य धाम को उनके शरणागत् ही पाते हैं।📕 तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः । 🌸सुप्रभात 🌸 🌷जय श्रीहरि 🌷🙏 🙏जय श्रीराम 🙏