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#✍️ साहित्य एवं शायरी #दिल कि बातें ... दिल कि कलम से #🌟🌟दिल के अल्फाज ❤️💫📝 #💓 दिल के अल्फ़ाज़ #📖 कविता और कोट्स✒️
✍️ साहित्य एवं शायरी - शौक हर रंग रकीबे सरोनसामाँ निकला , कैस तस्वीर के परदे में भी उरियाँ निकला। । जख्म ने दाद न दी तंगी-एनदिल की यारब, तीर भी सीना ए॰बिस्मिल से पर अफशाँ निकला। | बू॰ए॰गुल नाला-ए- दिल दूदे चिरागे - महफिल , जो तेरी बज्म से निकला, सो परिशाँ निकला। । मुहब्बत थी,चमन से लेकिन,अब ये बे -दिमागी है, की सुगंध की लहर से नाक में आता है,दम मेरा।। फूलों दिल में फिर गिराया ने इक शोर उठाया ग़ालिब' , आह ! जो कतरा न निकला था ,तो तूफ़ाँ निकला ।। शौक हर रंग रकीबे सरोनसामाँ निकला , कैस तस्वीर के परदे में भी उरियाँ निकला। । जख्म ने दाद न दी तंगी-एनदिल की यारब, तीर भी सीना ए॰बिस्मिल से पर अफशाँ निकला। | बू॰ए॰गुल नाला-ए- दिल दूदे चिरागे - महफिल , जो तेरी बज्म से निकला, सो परिशाँ निकला। । मुहब्बत थी,चमन से लेकिन,अब ये बे -दिमागी है, की सुगंध की लहर से नाक में आता है,दम मेरा।। फूलों दिल में फिर गिराया ने इक शोर उठाया ग़ालिब' , आह ! जो कतरा न निकला था ,तो तूफ़ाँ निकला ।। - ShareChat

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