एक नहीं अनेकों मनुष्य काम से, द्वेष से, भय से और स्नेह से अपने मन को भगवान् में लगाकर एवं अपने सारे पाप धोकर उसी प्रकार भगवान् को प्राप्त हुए हैं, जैसे भक्त भक्ति से। गोपियों ने भगवान् से मिलन के तीव्र काम अर्थात प्रेम से, कंस ने भय से, शिशुपाल-दन्तवक्त्र आदि राजाओं ने द्वेष से, यदुवंशियों ने परिवार के सम्बन्ध से, पाण्डवों ने स्नेह से और नारदजी ने भक्ति से अपने मन को भगवान् में लगाया है।
श्रीमद्भागवत-महापुराण/७/१/२९-३०
श्रीमद्भागवत-महापुराण/7/1/29-30
#bhavishypuran #vedpuran #puranam #puranikyatra #mbapanditji #upanishads
#shrimadbhagwat #shrimadbhagwatkatha #bhagwatkatha #bhagwat #bhagwatkathalive #भागवत #भागवतकथा #श्रीमद्भगवद्गीता #MBAPanditJi #PuranikYatra
00:09
