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गजल #✒ शायरी
✒ शायरी - मुनव्वर राना  কী  স্ত্রংবু   মুলী   ম 311 & जिस्म तुम्हारे आती   है भी 4 दूसरों तुम्हारी अब खबर हमीं हैं 4 अकेले नहीं जागते रातों ওম   নী   নীব बड़ी   मुश्किलों   से 8 आती हमारी आँखों को मैला तो कर दिया है मगर चमक   आँसुओं मोहब्बतों आती 8 7 से लिए   तो   अँधेरे   हसीन ೩ लगते इसी कि रात मिल के तिरे गेसुओं से आती है पे पहुँचा दिया मोहब्बत ने किस मक़ाम कि तेरी याद भी अब कोशिशों से आती है मुनव्वर राना  কী  স্ত্রংবু   মুলী   ম 311 & जिस्म तुम्हारे आती   है भी 4 दूसरों तुम्हारी अब खबर हमीं हैं 4 अकेले नहीं जागते रातों ওম   নী   নীব बड़ी   मुश्किलों   से 8 आती हमारी आँखों को मैला तो कर दिया है मगर चमक   आँसुओं मोहब्बतों आती 8 7 से लिए   तो   अँधेरे   हसीन ೩ लगते इसी कि रात मिल के तिरे गेसुओं से आती है पे पहुँचा दिया मोहब्बत ने किस मक़ाम कि तेरी याद भी अब कोशिशों से आती है - ShareChat

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