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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - रंगी रंगी भाती करि करि जिनसी माइआ जिनि उपाई।।करि करि देखै कीता आपणा जिउ तिस दी वडिआई ]l HoT अर्थः परमात्मा ने कई रंगों, कई किस्मों और कई प्रकार की वस्तुओं वाली यह माया पैदा की है। परमात्मा ने जान (f೬) बूझकर इस संसार को तरह-्तरह के रंगों और किस्मों में बनाया है। यह उसकी रचनात्मकता का उत्सव है। ईश्वर केवल इस लगे संसार को बनाने वाला ही नहीं है, बल्कि वह इसका प्रेक्षक भी है। वह अपनी बनाई हुई इस रचना को स्वयं ही पैदा करके देख रहा है उसकी संभाल कर रहा है और यह सब उसकी तेरा अपनी महिमा के अनुसार हो रहा है। वह सृष्टि बनाकर अलग नहीं बैठ गया बल्कि वह अपनी रचना में खुद समाया हुआ है और बड़े चाव से इसे निहार रहा है। जैसे उसकी महानता है, वैसे ही उसके खेल और उसकी रचना का विस्तार है। मनुष्य भाणा को उसकी रज़ा को स्वीकार करना चाहिए , न कि दोष इसमें ढूँढना चाहिए क्योंकि यह सब उसकी महानता का ही विस्तार है।यह पूरी कायनात ईश्वर का एक भव्य खेल है वह अपनी रचना से प्रेम करता है और उसे देखन्देखकर प्रसन्न होता है। रंगी रंगी भाती करि करि जिनसी माइआ जिनि उपाई।।करि करि देखै कीता आपणा जिउ तिस दी वडिआई ]l HoT अर्थः परमात्मा ने कई रंगों, कई किस्मों और कई प्रकार की वस्तुओं वाली यह माया पैदा की है। परमात्मा ने जान (f೬) बूझकर इस संसार को तरह-्तरह के रंगों और किस्मों में बनाया है। यह उसकी रचनात्मकता का उत्सव है। ईश्वर केवल इस लगे संसार को बनाने वाला ही नहीं है, बल्कि वह इसका प्रेक्षक भी है। वह अपनी बनाई हुई इस रचना को स्वयं ही पैदा करके देख रहा है उसकी संभाल कर रहा है और यह सब उसकी तेरा अपनी महिमा के अनुसार हो रहा है। वह सृष्टि बनाकर अलग नहीं बैठ गया बल्कि वह अपनी रचना में खुद समाया हुआ है और बड़े चाव से इसे निहार रहा है। जैसे उसकी महानता है, वैसे ही उसके खेल और उसकी रचना का विस्तार है। मनुष्य भाणा को उसकी रज़ा को स्वीकार करना चाहिए , न कि दोष इसमें ढूँढना चाहिए क्योंकि यह सब उसकी महानता का ही विस्तार है।यह पूरी कायनात ईश्वर का एक भव्य खेल है वह अपनी रचना से प्रेम करता है और उसे देखन्देखकर प्रसन्न होता है। - ShareChat