jasbir
ShareChat
click to see wallet page
@tuhit
tuhit
jasbir
@tuhit
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा याद रखना तू मेरी बात को तेरे भीतर का घमंड एक सोने के बर्तन जैसा है जो बाहर से्तो बहुत कीमती और सुंदर दिखाई देता है, लेकिन वह किसी की प्यास नहीं बुझा की शीतलता सकता.. !! प्यास बुझाने ' केवल मिट्टी के घड़े में ही होती है...!!ठीक इसी तरह तेरा अहंकार समाज में दिखावा तो कर सकता है, पर असली सुकून और रिश्तों मे अपनापन एक विनम्र और जमीन से जुड़े इंसान से ही मिल सकती है..!! तेरा अहंकार ने तेरे अंदर एक ऐसी दीवार खडी कर रख़ी है जिसने ' अपनों से तुझको  दूर कर दिया है..l! अगर तेरे   स्वभाव में थोड़ी सी भी विनम्रता और सादगी होती, आज तू अपनों के बीच खडी होती, न कि सबसे अलगन्थलग और अकेली...!! मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा याद रखना तू मेरी बात को तेरे भीतर का घमंड एक सोने के बर्तन जैसा है जो बाहर से्तो बहुत कीमती और सुंदर दिखाई देता है, लेकिन वह किसी की प्यास नहीं बुझा की शीतलता सकता.. !! प्यास बुझाने ' केवल मिट्टी के घड़े में ही होती है...!!ठीक इसी तरह तेरा अहंकार समाज में दिखावा तो कर सकता है, पर असली सुकून और रिश्तों मे अपनापन एक विनम्र और जमीन से जुड़े इंसान से ही मिल सकती है..!! तेरा अहंकार ने तेरे अंदर एक ऐसी दीवार खडी कर रख़ी है जिसने ' अपनों से तुझको  दूर कर दिया है..l! अगर तेरे   स्वभाव में थोड़ी सी भी विनम्रता और सादगी होती, आज तू अपनों के बीच खडी होती, न कि सबसे अलगन्थलग और अकेली...!! - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - नानाबिधि करि बनत बनाई $l अपनी कीमति ऑपे पाईा पुरखने यह संसार कोई एक तरह उस अकाल से नहीं, बल्कि 'नाना बिधि' अनेकों प्रकार और विधियों से बनाया है। उसने तरहन्तरह के जीव रंग, रूप मै तेरा पहाड़, समंदर, और इंसान रचे हैंl हर इंसान का स्वभाव अलग है, हरएक की किस्मत अलग है। यह भिखारी जिओ उसकी कलाकारी है कि कोई भी दो चीजें एक जैसी खेल  नहीं हैंl उसने यह खेल तो रच दिया, लेकिन इस পঙ্াভা केवल की गहराई और इसकी कीमत महत्व या मूल्य qId वही जानता है। हम इंसान अपनी छोटी सी बुद्धि से बाबा अंदाज़ा नहीं लगा सकते। वह खुद उस परमात्मा का ही अपनी रचना का मूल्य जानता है और खुद ही ச इसका आर्नंद लेता है। नानाबिधि करि बनत बनाई $l अपनी कीमति ऑपे पाईा पुरखने यह संसार कोई एक तरह उस अकाल से नहीं, बल्कि 'नाना बिधि' अनेकों प्रकार और विधियों से बनाया है। उसने तरहन्तरह के जीव रंग, रूप मै तेरा पहाड़, समंदर, और इंसान रचे हैंl हर इंसान का स्वभाव अलग है, हरएक की किस्मत अलग है। यह भिखारी जिओ उसकी कलाकारी है कि कोई भी दो चीजें एक जैसी खेल  नहीं हैंl उसने यह खेल तो रच दिया, लेकिन इस পঙ্াভা केवल की गहराई और इसकी कीमत महत्व या मूल्य qId वही जानता है। हम इंसान अपनी छोटी सी बुद्धि से बाबा अंदाज़ा नहीं लगा सकते। वह खुद उस परमात्मा का ही अपनी रचना का मूल्य जानता है और खुद ही ச इसका आर्नंद लेता है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - लादिःखेपर्संतहर्संगि चालु Il अवरतिआगि बिखिआर्जंजाल।। अगर तुझे इस जीवन ्यात्रा से कुछ साथ ले जाना है, तो ೯ 915 HloT नाम' और शुभ गुणों की खेप लाद  कर ले केजा सकता है और यह सौदा तुझे कहाँ मिलेगा? यानी गुरु की संगत में , साध संगत में। जो पूँजी तूने दुनिया के रिश्तों और सामान में जमा की है, वह यहीं रह जाएगी, लेकिन जो नाम की पूँजी तू संतों की संगति में कमाएगा , वही लगे परलोक में तेरे साथ चलेगी| बाकी सब अवर त्याग और जंजाल यही छुट जाने   है। यहाँ त्यागने का अर्थ घर ्बार छोड़ना नहीं, बल्कि मन से उस 'मोह' को त्यागना है जो तुझे परमात्मा से दूर करता है। दुनिया के तेरा पीछे भागना एक ऐसा जाल है जिसमें इंसान जितना फँसता ढतना ही दुखी होता है। दुनिया के रिश्ते 'बिखिआ जंजाल' साबित हो सकते हैं, लेकिन गुरु का नाम और संतों की शिक्षा कभी साथ नहीं छोड़तीl जब इंसान यह समझ जाता है किउसे ' अकेले' जाना है, तब वह व्यर्थ भाणा के झगड़ों और शिकायतों को छोड़कर अपनी ' आध्यात्मिक खेप' नाम की कमाई तैयार करने में लग जाता है। फिर मनुष्य दूसरे फालतू कामों को त्याग कर गुरु के मार्ग पर चलते हैं, तब वह बोझ जो आप महसूस कर रहे थे, वह पूरी तरह खत्म हो जाता है। लादिःखेपर्संतहर्संगि चालु Il अवरतिआगि बिखिआर्जंजाल।। अगर तुझे इस जीवन ्यात्रा से कुछ साथ ले जाना है, तो ೯ 915 HloT नाम' और शुभ गुणों की खेप लाद  कर ले केजा सकता है और यह सौदा तुझे कहाँ मिलेगा? यानी गुरु की संगत में , साध संगत में। जो पूँजी तूने दुनिया के रिश्तों और सामान में जमा की है, वह यहीं रह जाएगी, लेकिन जो नाम की पूँजी तू संतों की संगति में कमाएगा , वही लगे परलोक में तेरे साथ चलेगी| बाकी सब अवर त्याग और जंजाल यही छुट जाने   है। यहाँ त्यागने का अर्थ घर ्बार छोड़ना नहीं, बल्कि मन से उस 'मोह' को त्यागना है जो तुझे परमात्मा से दूर करता है। दुनिया के तेरा पीछे भागना एक ऐसा जाल है जिसमें इंसान जितना फँसता ढतना ही दुखी होता है। दुनिया के रिश्ते 'बिखिआ जंजाल' साबित हो सकते हैं, लेकिन गुरु का नाम और संतों की शिक्षा कभी साथ नहीं छोड़तीl जब इंसान यह समझ जाता है किउसे ' अकेले' जाना है, तब वह व्यर्थ भाणा के झगड़ों और शिकायतों को छोड़कर अपनी ' आध्यात्मिक खेप' नाम की कमाई तैयार करने में लग जाता है। फिर मनुष्य दूसरे फालतू कामों को त्याग कर गुरु के मार्ग पर चलते हैं, तब वह बोझ जो आप महसूस कर रहे थे, वह पूरी तरह खत्म हो जाता है। - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - पुत्तर परमात्मा देनाम दी कसौटी ते केवल खरा ही मनुष्य Cek टिक सकता है..!! जैसे एक मूर्तिकार पत्थर पर बार बार कैे लिए नहीं, बल्कि उसके चोट करता है॰ उसे नष्ट करने Tu भीतर छिपी मूरत को बाहर लाने के लिए जिसमे परमात्मा की छवी टिका होती है उसी तरह तुम सभी को कभी कभी लिए : चोटें तोड़ने के भीतर की उन परतों नहीं, बल्कि' Hi तुम्हारे लिए होती हैं जो तुमको परमात्मा से दूर रखती को हटाने के' हैं..!! जब भी तुम यह मान लेते हैं कि मैं तो इंसान हूँ॰ मैं Tu कमज़ोर हूँ बस वहीं से अहंकार का अंत होता है और तुम्हारे उस सच्चे परमात्माकी शक्ति का प्रवेश होता है...!!जब भी Guu तुम अपनी ताकत छोड़ देते हैं, तब उसकी ताकत तुमको पुत्तर जब भी कोई पत्थर टूटता है वह संभालती है..!| बिखर जाता है, लेकिन जो ईंसान परमात्मा के चरणों में Ji लिए  टूटता है, वह जुड़ जाता है हमेशा के उस अकाल पुरख के साथ...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा V6TII पुत्तर परमात्मा देनाम दी कसौटी ते केवल खरा ही मनुष्य Cek टिक सकता है..!! जैसे एक मूर्तिकार पत्थर पर बार बार कैे लिए नहीं, बल्कि उसके चोट करता है॰ उसे नष्ट करने Tu भीतर छिपी मूरत को बाहर लाने के लिए जिसमे परमात्मा की छवी टिका होती है उसी तरह तुम सभी को कभी कभी लिए : चोटें तोड़ने के भीतर की उन परतों नहीं, बल्कि' Hi तुम्हारे लिए होती हैं जो तुमको परमात्मा से दूर रखती को हटाने के' हैं..!! जब भी तुम यह मान लेते हैं कि मैं तो इंसान हूँ॰ मैं Tu कमज़ोर हूँ बस वहीं से अहंकार का अंत होता है और तुम्हारे उस सच्चे परमात्माकी शक्ति का प्रवेश होता है...!!जब भी Guu तुम अपनी ताकत छोड़ देते हैं, तब उसकी ताकत तुमको पुत्तर जब भी कोई पत्थर टूटता है वह संभालती है..!| बिखर जाता है, लेकिन जो ईंसान परमात्मा के चरणों में Ji लिए  टूटता है, वह जुड़ जाता है हमेशा के उस अकाल पुरख के साथ...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा V6TII - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - ক্িত্তু] त्रिहु ঘুতন ভরপ্স ফু্ভ্তুমইত্রমইতু होवै [35 भिनगा तिसहि बरुझाए नानका " सुप्रसंनत Tor हे भाई! ईश्वरकिसी मूर्ति यातस्वीर्तकसीमित  नहीं है। वह हर जगह हैे क्योंकि उसका कोई एक लगे रंग यारूप नहीं है। वह पूरी सृष्टि में समाया हुआ है। संसार में जो कुछ भी हम देखते हैं वह तीन गुणों लालच क्रोध औरशांति के अधीन है, तेरा सब बंधनों से मुक्त है। लेकिन परमात्मा इन बाबा नानक जी कहते हे! ईश्वर के इस निराकार भाणा स्वरूप को वही समझ पाता है, जिस पर वह स्वयं प्रसन्न (कृपालु होता है। परमात्मा को मनुष्य अपनी चतुराई से नहीं पा सकता। उसे समझने के Sle या 31R' ಞ' কী থিমা কী उसकी नदर@कृपा) आवश्यकता होती है। ক্িত্তু] त्रिहु ঘুতন ভরপ্স ফু্ভ্তুমইত্রমইতু होवै [35 भिनगा तिसहि बरुझाए नानका " सुप्रसंनत Tor हे भाई! ईश्वरकिसी मूर्ति यातस्वीर्तकसीमित  नहीं है। वह हर जगह हैे क्योंकि उसका कोई एक लगे रंग यारूप नहीं है। वह पूरी सृष्टि में समाया हुआ है। संसार में जो कुछ भी हम देखते हैं वह तीन गुणों लालच क्रोध औरशांति के अधीन है, तेरा सब बंधनों से मुक्त है। लेकिन परमात्मा इन बाबा नानक जी कहते हे! ईश्वर के इस निराकार भाणा स्वरूप को वही समझ पाता है, जिस पर वह स्वयं प्रसन्न (कृपालु होता है। परमात्मा को मनुष्य अपनी चतुराई से नहीं पा सकता। उसे समझने के Sle या 31R' ಞ' কী থিমা কী उसकी नदर@कृपा) आवश्यकता होती है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा अपनों से मिली ठोकरों को जब से जीवन जीने की एक प्रेरणा माना ही तब से जिन्दगी जीने एक संघर्ष और सुखद यात्रा बनती जा रही है ना की एक बोझ..!! किताबें से भले ही बहुत ज्ञान की जानकारी हासिल की हो लेकिन जिंदगी की ठोकरो से जीने का संस्कार और समझ पाई है..!! जो इंसान अपनी गलतियों और समय की मार से सीख लेता है फिर उसे दुनिया की कोई ताकत सफल होने से नहीं रोक सकती..!! जिसे में बुरा समय कहते हैं असल में वही बुरा समय मेरे चरित्र को गढ़ने का एक नया दौर देखने के था...!! सारी उम्र अपनों को ' सुखी लिए मोह के कच्चे धागों से बंधा रहा परंतु आखिर यही बात समंझ आई जिनके पीछे सभी कुछ छोड़ा अंत वही हाथ अपना छोड़़ा कर अलग खड़े हा गए मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा अपनों से मिली ठोकरों को जब से जीवन जीने की एक प्रेरणा माना ही तब से जिन्दगी जीने एक संघर्ष और सुखद यात्रा बनती जा रही है ना की एक बोझ..!! किताबें से भले ही बहुत ज्ञान की जानकारी हासिल की हो लेकिन जिंदगी की ठोकरो से जीने का संस्कार और समझ पाई है..!! जो इंसान अपनी गलतियों और समय की मार से सीख लेता है फिर उसे दुनिया की कोई ताकत सफल होने से नहीं रोक सकती..!! जिसे में बुरा समय कहते हैं असल में वही बुरा समय मेरे चरित्र को गढ़ने का एक नया दौर देखने के था...!! सारी उम्र अपनों को ' सुखी लिए मोह के कच्चे धागों से बंधा रहा परंतु आखिर यही बात समंझ आई जिनके पीछे सभी कुछ छोड़ा अंत वही हाथ अपना छोड़़ा कर अलग खड़े हा गए - ShareChat