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#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - पुत्तर परमात्मा देनाम दी कसौटी ते केवल खरा ही मनुष्य Cek टिक सकता है..!! जैसे एक मूर्तिकार पत्थर पर बार बार कैे लिए नहीं, बल्कि उसके चोट करता है॰ उसे नष्ट करने Tu भीतर छिपी मूरत को बाहर लाने के लिए जिसमे परमात्मा की छवी टिका होती है उसी तरह तुम सभी को कभी कभी लिए : चोटें तोड़ने के भीतर की उन परतों नहीं, बल्कि' Hi तुम्हारे लिए होती हैं जो तुमको परमात्मा से दूर रखती को हटाने के' हैं..!! जब भी तुम यह मान लेते हैं कि मैं तो इंसान हूँ॰ मैं Tu कमज़ोर हूँ बस वहीं से अहंकार का अंत होता है और तुम्हारे उस सच्चे परमात्माकी शक्ति का प्रवेश होता है...!!जब भी Guu तुम अपनी ताकत छोड़ देते हैं, तब उसकी ताकत तुमको पुत्तर जब भी कोई पत्थर टूटता है वह संभालती है..!| बिखर जाता है, लेकिन जो ईंसान परमात्मा के चरणों में Ji लिए  टूटता है, वह जुड़ जाता है हमेशा के उस अकाल पुरख के साथ...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा V6TII पुत्तर परमात्मा देनाम दी कसौटी ते केवल खरा ही मनुष्य Cek टिक सकता है..!! जैसे एक मूर्तिकार पत्थर पर बार बार कैे लिए नहीं, बल्कि उसके चोट करता है॰ उसे नष्ट करने Tu भीतर छिपी मूरत को बाहर लाने के लिए जिसमे परमात्मा की छवी टिका होती है उसी तरह तुम सभी को कभी कभी लिए : चोटें तोड़ने के भीतर की उन परतों नहीं, बल्कि' Hi तुम्हारे लिए होती हैं जो तुमको परमात्मा से दूर रखती को हटाने के' हैं..!! जब भी तुम यह मान लेते हैं कि मैं तो इंसान हूँ॰ मैं Tu कमज़ोर हूँ बस वहीं से अहंकार का अंत होता है और तुम्हारे उस सच्चे परमात्माकी शक्ति का प्रवेश होता है...!!जब भी Guu तुम अपनी ताकत छोड़ देते हैं, तब उसकी ताकत तुमको पुत्तर जब भी कोई पत्थर टूटता है वह संभालती है..!| बिखर जाता है, लेकिन जो ईंसान परमात्मा के चरणों में Ji लिए  टूटता है, वह जुड़ जाता है हमेशा के उस अकाल पुरख के साथ...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा V6TII - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। कउन बसत्नु आईहेरैर्संग्ताा लपटि रहिओ रसि लौथी खर्नगता ম নয जब तू इस दुनिया में आया था॰तो तेरे हे भाई! सोच साथ कौन सी वस्तु आई थी? कुछ भी नहीं। फिरतू भिखारी इन सांसारिक चीजों को अपनी जागीर क्यों समझ बैठा है? जैसे एक पतंगा दीयेकी लौके रस यानी 13 चमक के लोभ में उससे लिपटजाता है औरअंत में खुद को जला बैठता है॰ वैसे ही इंसान भी माया के पहाडा इन झूठे रसों और स्वादों में लिपटा हुआ है। यह নাল लोभ उसे आत्मिक रूप से नष्ट कर रहा है। गुरुजी हमें याद दिला रहे हैं किन हम कुछ साथ लाए थे, न बाबा कुछ साथ ले जाएंगे। इसलिएजो आज हमारे पास है ٨ औरजो आज हमारे साथ घट रहा है॰ उसे उसकी दाति को उसकी देन समझकर स्वीकार कखने में ही असली सुख है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - ক্িত্তু] त्रिहु ঘুতন ভরপ্স ফু্ভ্তুমইত্রমইতু होवै [35 भिनगा तिसहि बरुझाए नानका " सुप्रसंनत Tor हे भाई! ईश्वरकिसी मूर्ति यातस्वीर्तकसीमित  नहीं है। वह हर जगह हैे क्योंकि उसका कोई एक लगे रंग यारूप नहीं है। वह पूरी सृष्टि में समाया हुआ है। संसार में जो कुछ भी हम देखते हैं वह तीन गुणों लालच क्रोध औरशांति के अधीन है, तेरा सब बंधनों से मुक्त है। लेकिन परमात्मा इन बाबा नानक जी कहते हे! ईश्वर के इस निराकार भाणा स्वरूप को वही समझ पाता है, जिस पर वह स्वयं प्रसन्न (कृपालु होता है। परमात्मा को मनुष्य अपनी चतुराई से नहीं पा सकता। उसे समझने के Sle या 31R' ಞ' কী থিমা কী उसकी नदर@कृपा) आवश्यकता होती है। ক্িত্তু] त्रिहु ঘুতন ভরপ্স ফু্ভ্তুমইত্রমইতু होवै [35 भिनगा तिसहि बरुझाए नानका " सुप्रसंनत Tor हे भाई! ईश्वरकिसी मूर्ति यातस्वीर्तकसीमित  नहीं है। वह हर जगह हैे क्योंकि उसका कोई एक लगे रंग यारूप नहीं है। वह पूरी सृष्टि में समाया हुआ है। संसार में जो कुछ भी हम देखते हैं वह तीन गुणों लालच क्रोध औरशांति के अधीन है, तेरा सब बंधनों से मुक्त है। लेकिन परमात्मा इन बाबा नानक जी कहते हे! ईश्वर के इस निराकार भाणा स्वरूप को वही समझ पाता है, जिस पर वह स्वयं प्रसन्न (कृपालु होता है। परमात्मा को मनुष्य अपनी चतुराई से नहीं पा सकता। उसे समझने के Sle या 31R' ಞ' কী থিমা কী उसकी नदर@कृपा) आवश्यकता होती है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा अपनों से मिली ठोकरों को जब से जीवन जीने की एक प्रेरणा माना ही तब से जिन्दगी जीने एक संघर्ष और सुखद यात्रा बनती जा रही है ना की एक बोझ..!! किताबें से भले ही बहुत ज्ञान की जानकारी हासिल की हो लेकिन जिंदगी की ठोकरो से जीने का संस्कार और समझ पाई है..!! जो इंसान अपनी गलतियों और समय की मार से सीख लेता है फिर उसे दुनिया की कोई ताकत सफल होने से नहीं रोक सकती..!! जिसे में बुरा समय कहते हैं असल में वही बुरा समय मेरे चरित्र को गढ़ने का एक नया दौर देखने के था...!! सारी उम्र अपनों को ' सुखी लिए मोह के कच्चे धागों से बंधा रहा परंतु आखिर यही बात समंझ आई जिनके पीछे सभी कुछ छोड़ा अंत वही हाथ अपना छोड़़ा कर अलग खड़े हा गए मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा अपनों से मिली ठोकरों को जब से जीवन जीने की एक प्रेरणा माना ही तब से जिन्दगी जीने एक संघर्ष और सुखद यात्रा बनती जा रही है ना की एक बोझ..!! किताबें से भले ही बहुत ज्ञान की जानकारी हासिल की हो लेकिन जिंदगी की ठोकरो से जीने का संस्कार और समझ पाई है..!! जो इंसान अपनी गलतियों और समय की मार से सीख लेता है फिर उसे दुनिया की कोई ताकत सफल होने से नहीं रोक सकती..!! जिसे में बुरा समय कहते हैं असल में वही बुरा समय मेरे चरित्र को गढ़ने का एक नया दौर देखने के था...!! सारी उम्र अपनों को ' सुखी लिए मोह के कच्चे धागों से बंधा रहा परंतु आखिर यही बात समंझ आई जिनके पीछे सभी कुछ छोड़ा अंत वही हाथ अपना छोड़़ा कर अलग खड़े हा गए - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - & पुत्तर जीवन की असली शांति और सुंदरता ताम ्झाम में नहीं , Tu बल्कि उन छोटे और सादे पलों में है जो हमें सुकून देते हैं .!! मनुष्य दे मन दी सादगी वह दिव्य रहस्य है जिसे समझने के बाद इंसान दुनिया की भागदौड़़ से मुक्त हो जाता है..!! 1 के दौर में लोग दिखावे की होड़ में अपना असली वजूद आज खो देते हैं। लेकिन असली आकर्षण सादगी और सच्चाई में Tu होता है..!!जो इंसान जैसा है, वैसा ही खुद को पेश करता है तो उसे किसी का डर नहीं रहता और उसका व्यक्तित्व " सच्चा " और Guu गरिमापूर्ण दिखता है..!! मौन के दो रूप होते हैं एक जो आपको सभ्य बनाता है, और दूसरा जो आपको दोषी बना देता Ji है,आज अगर किसी और का घर जल रहा है और तुम चुप हो रुख तुम्हारे घर की तरफ भी होगा इसी लिए तो कल हवा का जो गलत है उसका साथ छोड़ों और जो ठीक है उसकी बाहों को पकड़ो...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।l & पुत्तर जीवन की असली शांति और सुंदरता ताम ्झाम में नहीं , Tu बल्कि उन छोटे और सादे पलों में है जो हमें सुकून देते हैं .!! मनुष्य दे मन दी सादगी वह दिव्य रहस्य है जिसे समझने के बाद इंसान दुनिया की भागदौड़़ से मुक्त हो जाता है..!! 1 के दौर में लोग दिखावे की होड़ में अपना असली वजूद आज खो देते हैं। लेकिन असली आकर्षण सादगी और सच्चाई में Tu होता है..!!जो इंसान जैसा है, वैसा ही खुद को पेश करता है तो उसे किसी का डर नहीं रहता और उसका व्यक्तित्व " सच्चा " और Guu गरिमापूर्ण दिखता है..!! मौन के दो रूप होते हैं एक जो आपको सभ्य बनाता है, और दूसरा जो आपको दोषी बना देता Ji है,आज अगर किसी और का घर जल रहा है और तुम चुप हो रुख तुम्हारे घर की तरफ भी होगा इसी लिए तो कल हवा का जो गलत है उसका साथ छोड़ों और जो ठीक है उसकी बाहों को पकड़ो...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।l - ShareChat
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satnam waheguru ji - करि किरपा संत मिले मोहि पाइआ।।संती धीरजु  নিন ৯ मंतु दीओ मोहि निरभउ गुर का सबदु कमाइआ[ H గ अर्थःहे भाई! परमात्मा की अपारकृपा हुई कि मुझे संर्तों का मिलाप प्राप्त हुआ। उन संतों की शरण में आकर ही मेरे भट्कते ह्ुएत मह्न॰को शाति और धर्य प्राप्त हुआक हैह सं्तों ने  भिखारी मुझे वह मंत्र दिया है जिससे मैं निरभउ  हो गया हूँ। अब मैं जिओ गुरु के 'शब्द' को अपने जीवन में कमा रहा हूँ यानी उस पर हूँ। जब से गुरु के उपदेश पर चलना शुरू পঙ্াভা अमल कर रहा किया है॰तो मौत और संसार का सारा डर खत्म हो गया है, वाले क्योंकि उस अकाल पुरख की मौजूदगी हर जगह महसूस होने लगी है। आध्यात्मिक मार्ग में धैर्य बहुत बड़ी उपलब्धि IqI है क्योकिं इस मार्ग पर परमात्मा को 'निरभउ' कहा गया है। Gtt भक्त गुरु के शब्द के जरिए उस निरभउ से जुड़ता है, G तो वह खुद भी निडर हो जाता है। करि किरपा संत मिले मोहि पाइआ।।संती धीरजु  নিন ৯ मंतु दीओ मोहि निरभउ गुर का सबदु कमाइआ[ H గ अर्थःहे भाई! परमात्मा की अपारकृपा हुई कि मुझे संर्तों का मिलाप प्राप्त हुआ। उन संतों की शरण में आकर ही मेरे भट्कते ह्ुएत मह्न॰को शाति और धर्य प्राप्त हुआक हैह सं्तों ने  भिखारी मुझे वह मंत्र दिया है जिससे मैं निरभउ  हो गया हूँ। अब मैं जिओ गुरु के 'शब्द' को अपने जीवन में कमा रहा हूँ यानी उस पर हूँ। जब से गुरु के उपदेश पर चलना शुरू পঙ্াভা अमल कर रहा किया है॰तो मौत और संसार का सारा डर खत्म हो गया है, वाले क्योंकि उस अकाल पुरख की मौजूदगी हर जगह महसूस होने लगी है। आध्यात्मिक मार्ग में धैर्य बहुत बड़ी उपलब्धि IqI है क्योकिं इस मार्ग पर परमात्मा को 'निरभउ' कहा गया है। Gtt भक्त गुरु के शब्द के जरिए उस निरभउ से जुड़ता है, G तो वह खुद भी निडर हो जाता है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - कई बैकुंठ नाही लवै लागे।I बपुड़ी भी गिआनी तिआगे।।  मुंकति सतिगुर ते पाईऐ हउ बलि एकंकारु बलि गुर दरसाइणा।l लिए मीठा हे भाई!़ भक्त के ईश्वर का प्रेम ही उसके लिए सबसे बड़ा सुख है।अनेकों बैकुंठ भी गुरू के दर्शनों की बराबरी नहीं कर सकते। जो ब्रह्म ज्ञानी हैं वे mT मुक्ति जैसी तुच्छ इच्छा को भी त्याग देते हैं। एक सच्चा ज्ञानी मोक्ष की भी परवाह नहीं करता; वह तेरा केवल परमात्मा की रजा और उनकी भक्ति में लीन रहना चाहता है। भक्त के लिए परमात्मा का भाणा नाम सिमरन और गुरु की कृपा ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। जब भक्त को गुरु के माध्यम से परमात्मा का अनुभव हो जाता है॰ तो उसे न तो स्वर्ग और न ही मुक्ति की चिंता। का लालच रहता है कई बैकुंठ नाही लवै लागे।I बपुड़ी भी गिआनी तिआगे।।  मुंकति सतिगुर ते पाईऐ हउ बलि एकंकारु बलि गुर दरसाइणा।l लिए मीठा हे भाई!़ भक्त के ईश्वर का प्रेम ही उसके लिए सबसे बड़ा सुख है।अनेकों बैकुंठ भी गुरू के दर्शनों की बराबरी नहीं कर सकते। जो ब्रह्म ज्ञानी हैं वे mT मुक्ति जैसी तुच्छ इच्छा को भी त्याग देते हैं। एक सच्चा ज्ञानी मोक्ष की भी परवाह नहीं करता; वह तेरा केवल परमात्मा की रजा और उनकी भक्ति में लीन रहना चाहता है। भक्त के लिए परमात्मा का भाणा नाम सिमरन और गुरु की कृपा ही जीवन का सर्वोच्च लक्ष्य है। जब भक्त को गुरु के माध्यम से परमात्मा का अनुभव हो जाता है॰ तो उसे न तो स्वर्ग और न ही मुक्ति की चिंता। का लालच रहता है - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा तुम जैसों से बहस मैं अब मैने अपनी अपनी ऊर्जा बर्बांद करंना छोड़ दी हूँ क्योकिं जब से मैने जवाब देना बंद किया है तो तेरे मन का अहंकार और तेरे सभी झूठ की सच्चाई अपने आप बाहरआने लगी है॰॰!! मेरी खामोशी मेरा वह् आइना है जिसमें तेरे दोगलेपन और मक्कारी की असलियत साफ नजर आने लग पड़ी है४! जहां मेरे बोले शब्द काम नहीं आते, वहां मेरी खामोशी सच बोलती है तुम जैसे लोग मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी समझ।लेते हो लेकिन असल मैं यह ' fg' मेरा ' एक बहुत बड़ा मानसिक बल है॰॰!! मेरी खामोशी ने एक " ब्रेक" का काम करना शुरू कर दिया है नही तो अक्सर झगड़ों में मैने वह भी बोल दिया जिसका बहुत देर तक रहता था॰॰!! पछतावा मुझको ' मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा तुम जैसों से बहस मैं अब मैने अपनी अपनी ऊर्जा बर्बांद करंना छोड़ दी हूँ क्योकिं जब से मैने जवाब देना बंद किया है तो तेरे मन का अहंकार और तेरे सभी झूठ की सच्चाई अपने आप बाहरआने लगी है॰॰!! मेरी खामोशी मेरा वह् आइना है जिसमें तेरे दोगलेपन और मक्कारी की असलियत साफ नजर आने लग पड़ी है४! जहां मेरे बोले शब्द काम नहीं आते, वहां मेरी खामोशी सच बोलती है तुम जैसे लोग मेरी खामोशी को मेरी कमजोरी समझ।लेते हो लेकिन असल मैं यह ' fg' मेरा ' एक बहुत बड़ा मानसिक बल है॰॰!! मेरी खामोशी ने एक " ब्रेक" का काम करना शुरू कर दिया है नही तो अक्सर झगड़ों में मैने वह भी बोल दिया जिसका बहुत देर तक रहता था॰॰!! पछतावा मुझको ' - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - RraT 2 जो उड्ना f ப = पिता होता है। = থা ब्बाप पेज पुत्तर सृष्टि में परमात्मा को किसी ने देखा नहीं, लेकिन माता पिता के रूप में वह Eek हर घर में मौजूद है। उनके चरणों से बड़ा कोई तीर्थ नहीं है। मंदिर या गुरुद्वारे की यात्रा सफल तब मानी जाती है जब घर के जीवित देवताओं के चेहरे पर मुस्कान Tu प्रकृति का नियम है। जो आज अपने होगी। जैसा बीजोगे , वैसा काटोगे "- 46' माता पिता के प्रति सेवक भाव रखते हैं कल उनके बच्चे उनके लिए वही भाव Hi रखेंगे । माता पिता की सेवा केवल एक कर्तव्य नहीं , बल्कि अपने आने वाले कल Tu के लिए 'सुहाग और सौभाग्य का संचय है। दुनिया की बड़ी से बड़ी दौलत वह सुख नहीं दे सकती जो माता पिता की असीस' ( आशीर्वांद ) से मिलता है। उनकी Guru में रहना ही सबसे बड़ा भाग्य है॰ क्योंकि उनके आशीर्वाद से ही जीवन छत्रछ।या की कठिन राहें सुगम हो जाती हैंl जब सेवा बिना किसी स्वार्थ के की जाती है, तो Ji वह ' इबादत' बन जाती है। माँ बाप की सेवा का फल 'तत्काल' मिलता है, मन की शांति और आत्मिक संतोष के रूप में।माँ बाप के चरणों में ही जन्नत है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाया [ RraT 2 जो उड्ना f ப = पिता होता है। = থা ब्बाप पेज पुत्तर सृष्टि में परमात्मा को किसी ने देखा नहीं, लेकिन माता पिता के रूप में वह Eek हर घर में मौजूद है। उनके चरणों से बड़ा कोई तीर्थ नहीं है। मंदिर या गुरुद्वारे की यात्रा सफल तब मानी जाती है जब घर के जीवित देवताओं के चेहरे पर मुस्कान Tu प्रकृति का नियम है। जो आज अपने होगी। जैसा बीजोगे , वैसा काटोगे "- 46' माता पिता के प्रति सेवक भाव रखते हैं कल उनके बच्चे उनके लिए वही भाव Hi रखेंगे । माता पिता की सेवा केवल एक कर्तव्य नहीं , बल्कि अपने आने वाले कल Tu के लिए 'सुहाग और सौभाग्य का संचय है। दुनिया की बड़ी से बड़ी दौलत वह सुख नहीं दे सकती जो माता पिता की असीस' ( आशीर्वांद ) से मिलता है। उनकी Guru में रहना ही सबसे बड़ा भाग्य है॰ क्योंकि उनके आशीर्वाद से ही जीवन छत्रछ।या की कठिन राहें सुगम हो जाती हैंl जब सेवा बिना किसी स्वार्थ के की जाती है, तो Ji वह ' इबादत' बन जाती है। माँ बाप की सेवा का फल 'तत्काल' मिलता है, मन की शांति और आत्मिक संतोष के रूप में।माँ बाप के चरणों में ही जन्नत है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाया [ - ShareChat