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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - सारेही देस को देखि रहिओ मत कोऊ न देखीअत प्रानपती பனfssசி के।।स्री भगवान की भाइकृषा ೯೩ ಖ[ हे भाई! मैने दुनिया के हर कोने , हर विचारधारा , हर तरह के वैभव और मीठा शक्ति का गहराई से अवलोकन कर लिया है लेकिन उस 'प्राणपति अकाल पुरख के सच्चे प्रेमियों और उसके मार्ग पर चलने वालों के बिना बाकी सब खाली दिखाई देता है। बिना उस अकाल पुरख की कृपा के, इंसान चाहे लगे कितना भी शक्तिशाली , धनवान या बड़ा क्यों न हो, वह एक कौड़ी या के बिना मनुष्य का और कृपा ` तिनके के समान भी नहीं है। परमात्मा के प्रेम  अस्तित्व और उसकी सारी उपलब्धियाँ शून्य हैं।जीवन में परमात्मा का प्रेम तेरा और उसकी कृपा नहीं है, तो उसकी सारी हस्ती, सारा अहंकार मिट्टी के है। गुरु साहिब यहाँ कर्मकांड, अहंकार और बाहरी दिखावे पर चोट समान करते हुए समझाते हैं किप्रेम ही सर्वोपरि है। अगर हृदय में प्रभु के लिए प्रेम WIUIT और सच्ची नीयत नहीं है, तो सब व्यर्थ है। परमात्मा पर रत्ती' भर कृपा ही इंसान को निहाल कर देती है। इंसान चाहे पूरी दुनिया का भ्रमण कर ले, पर शांति और मुक्ति ईश्वर की रज़ा और उसकी दया से ही मिलती है। मनुष्य दुनिया की दौड़ में खुद को कितना भी व्यस्त कर लें, लेकिन उसकी   अपनी आत्मा के मूल ( प्राणपति ) से जुड़ना ही जीवन का असली लक्ष्य होना चाहिए। सारेही देस को देखि रहिओ मत कोऊ न देखीअत प्रानपती பனfssசி के।।स्री भगवान की भाइकृषा ೯೩ ಖ[ हे भाई! मैने दुनिया के हर कोने , हर विचारधारा , हर तरह के वैभव और मीठा शक्ति का गहराई से अवलोकन कर लिया है लेकिन उस 'प्राणपति अकाल पुरख के सच्चे प्रेमियों और उसके मार्ग पर चलने वालों के बिना बाकी सब खाली दिखाई देता है। बिना उस अकाल पुरख की कृपा के, इंसान चाहे लगे कितना भी शक्तिशाली , धनवान या बड़ा क्यों न हो, वह एक कौड़ी या के बिना मनुष्य का और कृपा ` तिनके के समान भी नहीं है। परमात्मा के प्रेम  अस्तित्व और उसकी सारी उपलब्धियाँ शून्य हैं।जीवन में परमात्मा का प्रेम तेरा और उसकी कृपा नहीं है, तो उसकी सारी हस्ती, सारा अहंकार मिट्टी के है। गुरु साहिब यहाँ कर्मकांड, अहंकार और बाहरी दिखावे पर चोट समान करते हुए समझाते हैं किप्रेम ही सर्वोपरि है। अगर हृदय में प्रभु के लिए प्रेम WIUIT और सच्ची नीयत नहीं है, तो सब व्यर्थ है। परमात्मा पर रत्ती' भर कृपा ही इंसान को निहाल कर देती है। इंसान चाहे पूरी दुनिया का भ्रमण कर ले, पर शांति और मुक्ति ईश्वर की रज़ा और उसकी दया से ही मिलती है। मनुष्य दुनिया की दौड़ में खुद को कितना भी व्यस्त कर लें, लेकिन उसकी   अपनी आत्मा के मूल ( प्राणपति ) से जुड़ना ही जीवन का असली लक्ष्य होना चाहिए। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - हरि प्रेम बाणी मनु मारिआ अणीआले {g लागी पीर पिरम अणीआ राम राजे $l की सो जाणै जरीआ $l परमात्मा की प्रेम वाणी "शब्द" ने मेरे मन को इस तरह बेध दिया है जैसे # dT नोकदार तीरों ने शरीर को पार कर लिया हो। यहाँ  मन मारने का अर्थ अहंकार को खत्म करना है। जैसे तीर शरीर के भीतर गहरे उतर जाता भिखारी वैसे ही प्रभु का प्रेम मेरे मन के भीतर तक समा गया है। जिसके 8, जिओ हृदय में इस ईश्वरीय प्रेम की पीडा की तड़प लगी हो, वही जानता है कि इसे सहना कैसे किया जाता है। यह दर्द दुनियावी चोट जैसा नहीं है পঙ্কাভা बल्कि यह वह दर्द है जो आत्मा को परमात्मा से मिलने के लिए बेचैन कर देता है। जिसे यह चोट नहीं लगी, वह इस अवस्था को समझ ही वाले नहीं सकता। प्रेम का तीर चुभता भी है और आनंद भी देता है। यह वह @IqT से मुक्त ' पीडा है जो इंसान को दुनिया के झूठे बंधनों ' करके ' प्राणपति से जोड़ देती है। जब मन हरिप्रेम के तीरों से बिंध जाता है, परात्मा 7 तो वह दुनिया की फ़िज़ूल की चिंताओं और नियंत्रण से आज़ाद हो जाता है। फिर केवल एक ही धुन रह जाती है, उस प्रभु के प्रेम में मगन हन हरि प्रेम बाणी मनु मारिआ अणीआले {g लागी पीर पिरम अणीआ राम राजे $l की सो जाणै जरीआ $l परमात्मा की प्रेम वाणी "शब्द" ने मेरे मन को इस तरह बेध दिया है जैसे # dT नोकदार तीरों ने शरीर को पार कर लिया हो। यहाँ  मन मारने का अर्थ अहंकार को खत्म करना है। जैसे तीर शरीर के भीतर गहरे उतर जाता भिखारी वैसे ही प्रभु का प्रेम मेरे मन के भीतर तक समा गया है। जिसके 8, जिओ हृदय में इस ईश्वरीय प्रेम की पीडा की तड़प लगी हो, वही जानता है कि इसे सहना कैसे किया जाता है। यह दर्द दुनियावी चोट जैसा नहीं है পঙ্কাভা बल्कि यह वह दर्द है जो आत्मा को परमात्मा से मिलने के लिए बेचैन कर देता है। जिसे यह चोट नहीं लगी, वह इस अवस्था को समझ ही वाले नहीं सकता। प्रेम का तीर चुभता भी है और आनंद भी देता है। यह वह @IqT से मुक्त ' पीडा है जो इंसान को दुनिया के झूठे बंधनों ' करके ' प्राणपति से जोड़ देती है। जब मन हरिप्रेम के तीरों से बिंध जाता है, परात्मा 7 तो वह दुनिया की फ़िज़ूल की चिंताओं और नियंत्रण से आज़ाद हो जाता है। फिर केवल एक ही धुन रह जाती है, उस प्रभु के प्रेम में मगन हन - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा तब तक नहीं समझते कि चुभन तुम जैसे होती है, जब तक काँटा तुम्हारे खुद क्या के पैर में न चुभे.. !! 8 तुमको ' নদ্কাঠী ' Tಖ ' पर दूंगा उतना जो भाषा में जवाब औकात और सीमा याद নদ্কাঠী  तुमको ' 1 दिला सके..!! तुम जैसे लोग अक्सर दूसरों आंसुओं को पानी समझते हैं, जब तक के तुम्हारी अपनी आँखों में नमक न पडे़े के दर्द की कीमत का पता दूसरे तुमको चलेगा.. !! मेरा सबसे बाद दर्द यही है कि मैने सबको समझा , सबकी गलतियों को माफ किया, और अंत में मुझको क्या मिला? सिर्फ अकेलापन और यह इल्जाम कि "तुम बदल गए हो..पर किसी ने आज तक यह नहीं पूछा कि "मुझे खुद को बदलने पर मजबूर किसने किया?. !! मेरे अंदर समंदर जितनी हलचल थी और चेहरे पर सदा मुस्कान थी पर दर्द अपना कभी किसी को नही कहा...जनता था कि यहाँ मरहम लगाने वाले कम और जख्म कुरेदने वाले ज्यादा हैं..!! मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा तब तक नहीं समझते कि चुभन तुम जैसे होती है, जब तक काँटा तुम्हारे खुद क्या के पैर में न चुभे.. !! 8 तुमको ' নদ্কাঠী ' Tಖ ' पर दूंगा उतना जो भाषा में जवाब औकात और सीमा याद নদ্কাঠী  तुमको ' 1 दिला सके..!! तुम जैसे लोग अक्सर दूसरों आंसुओं को पानी समझते हैं, जब तक के तुम्हारी अपनी आँखों में नमक न पडे़े के दर्द की कीमत का पता दूसरे तुमको चलेगा.. !! मेरा सबसे बाद दर्द यही है कि मैने सबको समझा , सबकी गलतियों को माफ किया, और अंत में मुझको क्या मिला? सिर्फ अकेलापन और यह इल्जाम कि "तुम बदल गए हो..पर किसी ने आज तक यह नहीं पूछा कि "मुझे खुद को बदलने पर मजबूर किसने किया?. !! मेरे अंदर समंदर जितनी हलचल थी और चेहरे पर सदा मुस्कान थी पर दर्द अपना कभी किसी को नही कहा...जनता था कि यहाँ मरहम लगाने वाले कम और जख्म कुरेदने वाले ज्यादा हैं..!! - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - ಯ लिए Cek पुत्तर अक्सर लोग तात्कालिक लाभ के बुराई का रास्ता चुन लेते हैं॰ लेकिन अंततः जीत उसी की होती है जो सत्य के मार्ग पर अडिग रहता है..!! Tu लिए बुराई अस्थायी होती है॰ इसे टिके रहने के Hi लगातार नए झूठ और छल का सहारा लेना पड़ता है। इसके विपरीत, सत्य को किसी सहारे की जरूरत नहीं होती; वह स्वयं में पूर्ण है.॰!! जैसे सूरज के निकलते Tu ही घना अंधेरा बिना किसी युद्ध के स्वतः समाप्त हो जाता है॰ वैसे ही ज्ञान और सत्य के सामने आते ही Gu का भ्रम टूट जाता है..!! झूठ या ತR15 बुराई का गुब्बारा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए॰ उसे Ji fag सत्य की एक छोटी सी सुई ही काफी फोड़ने के होती है..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा H6III ಯ लिए Cek पुत्तर अक्सर लोग तात्कालिक लाभ के बुराई का रास्ता चुन लेते हैं॰ लेकिन अंततः जीत उसी की होती है जो सत्य के मार्ग पर अडिग रहता है..!! Tu लिए बुराई अस्थायी होती है॰ इसे टिके रहने के Hi लगातार नए झूठ और छल का सहारा लेना पड़ता है। इसके विपरीत, सत्य को किसी सहारे की जरूरत नहीं होती; वह स्वयं में पूर्ण है.॰!! जैसे सूरज के निकलते Tu ही घना अंधेरा बिना किसी युद्ध के स्वतः समाप्त हो जाता है॰ वैसे ही ज्ञान और सत्य के सामने आते ही Gu का भ्रम टूट जाता है..!! झूठ या ತR15 बुराई का गुब्बारा चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो जाए॰ उसे Ji fag सत्य की एक छोटी सी सुई ही काफी फोड़ने के होती है..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा H6III - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा जिंदगी ने एक ही॰सबक सिखाया है कि भरोसा सिर्फ खुंद पर रखना ही सबसे बेहतर है। परख़ने वालों ने मुझे अपनी नज़र से परखा , मगर मेरा सच सिर्फ मेरा खुदा जोनता है...!!मैंने सदा धोखा खाया है॰ पर कभी किसी को धोखा दिया नहीं..!! मेरे किरदार में लाखों कमियाँ होंगी , मगर किसी की भावनाओं से खेलना मुझे कभी आया ही नहीं.. !! बनावटीपन और झूठे दिखावे वाले लोग ' दूर ही मुझसे ' रहेंतो अच्छा है..!!याद रखना , तूफ़ान में अक्सर कश्तियाँ और घमंड में हस्तियाँ डूब ही जाती हैं, मगर जो अपनी सादगी और सच पर कायम रहते हैं, दरिया भी उन्हें रास्ता दे देता मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा जिंदगी ने एक ही॰सबक सिखाया है कि भरोसा सिर्फ खुंद पर रखना ही सबसे बेहतर है। परख़ने वालों ने मुझे अपनी नज़र से परखा , मगर मेरा सच सिर्फ मेरा खुदा जोनता है...!!मैंने सदा धोखा खाया है॰ पर कभी किसी को धोखा दिया नहीं..!! मेरे किरदार में लाखों कमियाँ होंगी , मगर किसी की भावनाओं से खेलना मुझे कभी आया ही नहीं.. !! बनावटीपन और झूठे दिखावे वाले लोग ' दूर ही मुझसे ' रहेंतो अच्छा है..!!याद रखना , तूफ़ान में अक्सर कश्तियाँ और घमंड में हस्तियाँ डूब ही जाती हैं, मगर जो अपनी सादगी और सच पर कायम रहते हैं, दरिया भी उन्हें रास्ता दे देता - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - मुदा रसंतोखु सरमु पतु झौली धिआन की करहि बिभूतिाखिंथा कालु कुआरी काइओ जुगति ्डंडा़ परतीतिा गुरु साहिब ने योगियों को बाहरी प्रतीकों के बजाय आंतरिक गुणों HoT में मिट्टी या कांच की मुँद्रा को अपनाने की सलाह दी। योगी कानों ' कुंडल ) पहनते थे। गुरु जी कहते हैं संतोष को अपने कानों की ೯ಷ बनाओ। यानी जो परमात्मा दे उसमें खुश रहना ही असली योग और पात्र रखते थे। गुरु जी कहते हैं शर्म योगी भिक्षा के लिए' झोली लगे (मेहनत और विनम्रता ) को अपना पात्र और झोली बनाओ। योगी विभूति) मलते थे। गुरु जी कहते हैं, प्रभु के ध्यान को शरीर पर राख फटे हुए ' ही अपने शरीर की भस्म बना लो। योगी कपड़ों की पुराने जी कहते हैं काल (मृत्यु) की याद को थे। गुरु  गोदड़ी (खिंथा ) पहनते तेरा अपनी गोदड़ी बनाओ। यानी हमेशा याद रखो कि जीवन नश्वर है, यही सबसे बड़ा त्याग है। अपनी काया (शरीर) को विकारों से बचाकर कुंवारा (निर्मल/ पवित्र) रखना ही योग की सच्ची जुगति (विधि) है। योगी हाथ में एक डंडा रखते थे। गुरु जी कहते हैंः प्रभु पर भाणा परतीति (अखंड विश्वास / श्रद्धा) को अपना डंडा बनाओ। उस समय आई पंथ योगियों का सबसे ऊँचा संप्रदाय माना जाता था। गुरु जी कहते हैं कि जो मनुष्य सगल जमाती पूरी मानवता को अपना साथी समझता है, वही वास्तव में सबसे ऊँचे आई पंथ का है। गुरु ' नानक देव जी स्पष्ट कर रहे हैं कि परमात्मा को पाने के' लिए जंगल जाने या शरीर पर राख मलने की आवश्यकता नहीं है। यदि आपके भीतर संतोष , विनम्रता , प्रभु स्मरण और सबको एक समान में रहकर भी  बड़े योगी देखने की दृष्टि है, तो आप घर गृहस्थी Hq4 81 मुदा रसंतोखु सरमु पतु झौली धिआन की करहि बिभूतिाखिंथा कालु कुआरी काइओ जुगति ्डंडा़ परतीतिा गुरु साहिब ने योगियों को बाहरी प्रतीकों के बजाय आंतरिक गुणों HoT में मिट्टी या कांच की मुँद्रा को अपनाने की सलाह दी। योगी कानों ' कुंडल ) पहनते थे। गुरु जी कहते हैं संतोष को अपने कानों की ೯ಷ बनाओ। यानी जो परमात्मा दे उसमें खुश रहना ही असली योग और पात्र रखते थे। गुरु जी कहते हैं शर्म योगी भिक्षा के लिए' झोली लगे (मेहनत और विनम्रता ) को अपना पात्र और झोली बनाओ। योगी विभूति) मलते थे। गुरु जी कहते हैं, प्रभु के ध्यान को शरीर पर राख फटे हुए ' ही अपने शरीर की भस्म बना लो। योगी कपड़ों की पुराने जी कहते हैं काल (मृत्यु) की याद को थे। गुरु  गोदड़ी (खिंथा ) पहनते तेरा अपनी गोदड़ी बनाओ। यानी हमेशा याद रखो कि जीवन नश्वर है, यही सबसे बड़ा त्याग है। अपनी काया (शरीर) को विकारों से बचाकर कुंवारा (निर्मल/ पवित्र) रखना ही योग की सच्ची जुगति (विधि) है। योगी हाथ में एक डंडा रखते थे। गुरु जी कहते हैंः प्रभु पर भाणा परतीति (अखंड विश्वास / श्रद्धा) को अपना डंडा बनाओ। उस समय आई पंथ योगियों का सबसे ऊँचा संप्रदाय माना जाता था। गुरु जी कहते हैं कि जो मनुष्य सगल जमाती पूरी मानवता को अपना साथी समझता है, वही वास्तव में सबसे ऊँचे आई पंथ का है। गुरु ' नानक देव जी स्पष्ट कर रहे हैं कि परमात्मा को पाने के' लिए जंगल जाने या शरीर पर राख मलने की आवश्यकता नहीं है। यदि आपके भीतर संतोष , विनम्रता , प्रभु स्मरण और सबको एक समान में रहकर भी  बड़े योगी देखने की दृष्टि है, तो आप घर गृहस्थी Hq4 81 - ShareChat
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satnam waheguru ji - कर्लक बिना नेकर्लकी सरूपे ।। नमो राज राजेस्वरपरम रूपे ।l ANprಯpri मैतेरा हे भाई!दुनिया में हर चीज़, व्यक्ति या विचार में कोई न कोई कमी या कलंक हो सकता है। समय के साथ हर चीज़ धुंधली भिखारी पड़ सकती है, लेकिन परमात्मा समय से परे है। उस पर माया, लोभ, मोह या क्रोध का कोई दाग नहीं लग सकता। परमात्मा जिओ से कभी प्रभावित नहीं का स्वरूप ही ऐसा है कि वह 'gIకే' होता। वह प्रकाश की उस किरण की तरह है जो गंदगी पर पड़ने के बावजूद खुद मैली नहीं होती। सांसारिक राजाओं का পঙ্াভা निश्चित समय और सीमा तक होता है। उनके ऊपर राज एक নাল भी कोई न कोई शक्ति होती है। लेकिन अकाल पुरख राजाओं का राजा   है। परमात्मा वह शक्ति है जो पूरे ब्रह्मांड का संचालन कर रही है वह सबसे बड़ा शासक है, जिसका हुक्म अटल है। बाबा लिए  संघर्ष करते संसार के राजा अपनी सत्ता बनाए रखने के जी हैं, लेकिन राज राजेस्वरं का शासन सहज है। पूरा ब्रह्मांड, तारों की गति से लेकर एक पत्ते के गिरने तक, उसी के अटूट नियमों हुकम में बंधा हुआ है। कर्लक बिना नेकर्लकी सरूपे ।। नमो राज राजेस्वरपरम रूपे ।l ANprಯpri मैतेरा हे भाई!दुनिया में हर चीज़, व्यक्ति या विचार में कोई न कोई कमी या कलंक हो सकता है। समय के साथ हर चीज़ धुंधली भिखारी पड़ सकती है, लेकिन परमात्मा समय से परे है। उस पर माया, लोभ, मोह या क्रोध का कोई दाग नहीं लग सकता। परमात्मा जिओ से कभी प्रभावित नहीं का स्वरूप ही ऐसा है कि वह 'gIకే' होता। वह प्रकाश की उस किरण की तरह है जो गंदगी पर पड़ने के बावजूद खुद मैली नहीं होती। सांसारिक राजाओं का পঙ্াভা निश्चित समय और सीमा तक होता है। उनके ऊपर राज एक নাল भी कोई न कोई शक्ति होती है। लेकिन अकाल पुरख राजाओं का राजा   है। परमात्मा वह शक्ति है जो पूरे ब्रह्मांड का संचालन कर रही है वह सबसे बड़ा शासक है, जिसका हुक्म अटल है। बाबा लिए  संघर्ष करते संसार के राजा अपनी सत्ता बनाए रखने के जी हैं, लेकिन राज राजेस्वरं का शासन सहज है। पूरा ब्रह्मांड, तारों की गति से लेकर एक पत्ते के गिरने तक, उसी के अटूट नियमों हुकम में बंधा हुआ है। - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - @ पुत्तर छल करने वाला व्यक्ति दुनिया की नज़रों में जीत भले ही जाए॰ पर वह खुद की में हार जाता है.. वक्त का नज़रों Tu पहिया जब घूमता है॰ तो हिसाब सबका बराबर होता है, F Hi হঁসানী বী ওণালন ম তীন ৯ गवाह चाहिए होते है, पर खुदा की अदालत में सिर्फ नीयत देखी जाती है..!! छल Tu की जीत उधार ली गई रोशनी की तरह है॰ जो रात ढलते ही खत्म हो जाएगी॰. परंतु सत्य की जीत सूरज की तरह है॰ जो Guu के पीछे छुप तो सकती है॰ लेकिन बुझ नहीं बादलों सकता...!! पुत्तर जिसकी नीयत सा़फ और स्वभाव सरल है, Ji उनको किसी मंदिर या मस्जिद में दुआ माँगने की ज़रूरत नहीं उसका जीवन ही सबसे बड़ी इबादत है।ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।। @ पुत्तर छल करने वाला व्यक्ति दुनिया की नज़रों में जीत भले ही जाए॰ पर वह खुद की में हार जाता है.. वक्त का नज़रों Tu पहिया जब घूमता है॰ तो हिसाब सबका बराबर होता है, F Hi হঁসানী বী ওণালন ম তীন ৯ गवाह चाहिए होते है, पर खुदा की अदालत में सिर्फ नीयत देखी जाती है..!! छल Tu की जीत उधार ली गई रोशनी की तरह है॰ जो रात ढलते ही खत्म हो जाएगी॰. परंतु सत्य की जीत सूरज की तरह है॰ जो Guu के पीछे छुप तो सकती है॰ लेकिन बुझ नहीं बादलों सकता...!! पुत्तर जिसकी नीयत सा़फ और स्वभाव सरल है, Ji उनको किसी मंदिर या मस्जिद में दुआ माँगने की ज़रूरत नहीं उसका जीवन ही सबसे बड़ी इबादत है।ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - नमसर्त नृकरमेण नमसर्त नृभरमेण नमसर्त नृदेसेण नमसर्त नृभेसेग मीठा भावार्थःउस परमात्मा को सदा नमन करना चाहिए ৯ ৪২ ' जो दुनिया ' कार्य को शक्ति प्रदान करता है। इंसान को "मैं कर रहा ' हूँ," लेकिन गुरु साहिब समझाते हैं कि लगता है कि' लगे असली कर्ता वही है। वह हर ' पीछे की शक्ति है और हर 'FTబశ' क्रिया का संचालक है। सृष्टि के असंख्य ; जीवों , मनुष्यों की रक्षा तेरा और पालना करने वाला वही एक है। वह किसी भेदभाव के बिना सबको रिज़क प्रदान करता है। परमात्मा किसी एक खास देश भाणा का नहीं है। वह अदेस है, यानी उसका कोई एक निश्चित पता नहीं है क्योंकि वह हर जगह मौजूद है पूरी पृथ्वी ही उसका घर है। ईश्वर का कोई एक मजहब या स्वरूप नहीं है। वह हर भेष में है और फिर भी किसी एक भेष तक सीमित नहीं है। वह अभेष है। इसका अर्थ यह भी है कि संसार के अनगिनत रूपों और वेशभूषाओं में वही एक नूर चमक रहा है। नमसर्त नृकरमेण नमसर्त नृभरमेण नमसर्त नृदेसेण नमसर्त नृभेसेग मीठा भावार्थःउस परमात्मा को सदा नमन करना चाहिए ৯ ৪২ ' जो दुनिया ' कार्य को शक्ति प्रदान करता है। इंसान को "मैं कर रहा ' हूँ," लेकिन गुरु साहिब समझाते हैं कि लगता है कि' लगे असली कर्ता वही है। वह हर ' पीछे की शक्ति है और हर 'FTబశ' क्रिया का संचालक है। सृष्टि के असंख्य ; जीवों , मनुष्यों की रक्षा तेरा और पालना करने वाला वही एक है। वह किसी भेदभाव के बिना सबको रिज़क प्रदान करता है। परमात्मा किसी एक खास देश भाणा का नहीं है। वह अदेस है, यानी उसका कोई एक निश्चित पता नहीं है क्योंकि वह हर जगह मौजूद है पूरी पृथ्वी ही उसका घर है। ईश्वर का कोई एक मजहब या स्वरूप नहीं है। वह हर भेष में है और फिर भी किसी एक भेष तक सीमित नहीं है। वह अभेष है। इसका अर्थ यह भी है कि संसार के अनगिनत रूपों और वेशभूषाओं में वही एक नूर चमक रहा है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - जिसु सिमरत दूखु सभु जाइा नॉमु खननु वसै मनि आइाा हे भाई! सभी प्रकार के कष्ट उस अकाल पुरख को याद करने ম নযা से विदा हो जाते हैं। परमात्मा की याद में जोड़ने से इंसान सांसारिक परेशानियों से ऊपर उठ जाता है उसके मन के भिखारी भीतर की बेचैनी और चिंता भी शांत होजाती है। जिस तरह एक कीमती हीरा अंधेरे कमरे को रोशन कर देता है, उसी तरह जिओ नाम रत्न अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर देता है। यह कोई साधारण दौलत नहीं, बल्कि वह रूहानी पूँजी है जो कभी खत्म नहीं होती। प्रभु का नाम केवल जीभ से जपने तक पहाडा सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसेमनमें बसाना जरूरी है। जब ईश्वर की याद दिल की गहराइयों में समा जाती है, तो qT मनुष्य का स्वभाव और विचार बदलने लगते हैं। उसके जीवन में ठहराव और संतोष आ जाता है।दुनिया की वस्तुएँ हमें कुछ बाबा सुख दे सकती हैं, लेकिन स्थायी आनंद केवल लिए  समय के नाम के स्मरण से ही संभव है। जब परमात्मा का नाम मन में U होता है॰ तो इंसान प्रतिकूल परिस्थितियों (ठोकरों ) में भी डगमगाता नहीं है, क्योंकि उसे असली कर्ता पर भरोसा होता 8 जिसु सिमरत दूखु सभु जाइा नॉमु खननु वसै मनि आइाा हे भाई! सभी प्रकार के कष्ट उस अकाल पुरख को याद करने ম নযা से विदा हो जाते हैं। परमात्मा की याद में जोड़ने से इंसान सांसारिक परेशानियों से ऊपर उठ जाता है उसके मन के भिखारी भीतर की बेचैनी और चिंता भी शांत होजाती है। जिस तरह एक कीमती हीरा अंधेरे कमरे को रोशन कर देता है, उसी तरह जिओ नाम रत्न अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर देता है। यह कोई साधारण दौलत नहीं, बल्कि वह रूहानी पूँजी है जो कभी खत्म नहीं होती। प्रभु का नाम केवल जीभ से जपने तक पहाडा सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसेमनमें बसाना जरूरी है। जब ईश्वर की याद दिल की गहराइयों में समा जाती है, तो qT मनुष्य का स्वभाव और विचार बदलने लगते हैं। उसके जीवन में ठहराव और संतोष आ जाता है।दुनिया की वस्तुएँ हमें कुछ बाबा सुख दे सकती हैं, लेकिन स्थायी आनंद केवल लिए  समय के नाम के स्मरण से ही संभव है। जब परमात्मा का नाम मन में U होता है॰ तो इंसान प्रतिकूल परिस्थितियों (ठोकरों ) में भी डगमगाता नहीं है, क्योंकि उसे असली कर्ता पर भरोसा होता 8 - ShareChat