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#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - RraT 2 जो उड्ना f ப = पिता होता है। = থা ब्बाप पेज पुत्तर सृष्टि में परमात्मा को किसी ने देखा नहीं, लेकिन माता पिता के रूप में वह Eek हर घर में मौजूद है। उनके चरणों से बड़ा कोई तीर्थ नहीं है। मंदिर या गुरुद्वारे की यात्रा सफल तब मानी जाती है जब घर के जीवित देवताओं के चेहरे पर मुस्कान Tu प्रकृति का नियम है। जो आज अपने होगी। जैसा बीजोगे , वैसा काटोगे "- 46' माता पिता के प्रति सेवक भाव रखते हैं कल उनके बच्चे उनके लिए वही भाव Hi रखेंगे । माता पिता की सेवा केवल एक कर्तव्य नहीं , बल्कि अपने आने वाले कल Tu के लिए 'सुहाग और सौभाग्य का संचय है। दुनिया की बड़ी से बड़ी दौलत वह सुख नहीं दे सकती जो माता पिता की असीस' ( आशीर्वांद ) से मिलता है। उनकी Guru में रहना ही सबसे बड़ा भाग्य है॰ क्योंकि उनके आशीर्वाद से ही जीवन छत्रछ।या की कठिन राहें सुगम हो जाती हैंl जब सेवा बिना किसी स्वार्थ के की जाती है, तो Ji वह ' इबादत' बन जाती है। माँ बाप की सेवा का फल 'तत्काल' मिलता है, मन की शांति और आत्मिक संतोष के रूप में।माँ बाप के चरणों में ही जन्नत है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाया [ RraT 2 जो उड्ना f ப = पिता होता है। = থা ब्बाप पेज पुत्तर सृष्टि में परमात्मा को किसी ने देखा नहीं, लेकिन माता पिता के रूप में वह Eek हर घर में मौजूद है। उनके चरणों से बड़ा कोई तीर्थ नहीं है। मंदिर या गुरुद्वारे की यात्रा सफल तब मानी जाती है जब घर के जीवित देवताओं के चेहरे पर मुस्कान Tu प्रकृति का नियम है। जो आज अपने होगी। जैसा बीजोगे , वैसा काटोगे "- 46' माता पिता के प्रति सेवक भाव रखते हैं कल उनके बच्चे उनके लिए वही भाव Hi रखेंगे । माता पिता की सेवा केवल एक कर्तव्य नहीं , बल्कि अपने आने वाले कल Tu के लिए 'सुहाग और सौभाग्य का संचय है। दुनिया की बड़ी से बड़ी दौलत वह सुख नहीं दे सकती जो माता पिता की असीस' ( आशीर्वांद ) से मिलता है। उनकी Guru में रहना ही सबसे बड़ा भाग्य है॰ क्योंकि उनके आशीर्वाद से ही जीवन छत्रछ।या की कठिन राहें सुगम हो जाती हैंl जब सेवा बिना किसी स्वार्थ के की जाती है, तो Ji वह ' इबादत' बन जाती है। माँ बाप की सेवा का फल 'तत्काल' मिलता है, मन की शांति और आत्मिक संतोष के रूप में।माँ बाप के चरणों में ही जन्नत है।ऊँ नमः शिवाय शिवा शिव जी सदा सहाया [ - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी 1 खा़मोशी लेगी बदला मेरा तुम जैसी महामूर्ख से बहस करना मेरे fag अपने हाथ में मशाल लेकर अंधेरे में रास्ता में हाथ ' मेरे खुद ढूंढने जैसा है क्योकिं अंत ' का ही जलेगा.. ! ! जहाँ पर मेरे बोले सत्य 9 की कद्र नही , वहाँ मौन ही मेरा सबसे बड़ा तर्क है चीखना आसान है, लेकिन अपमान के बीच शांत रहकर मुस्कुराते हुए आगे बढ लिए  जाना ही मेरे' बहुत बड़े जिगर का काम है..!! मेरी खामोशी ही मेरा सबसे बड़ा चुनाव है, जहाँ शब्दों से ज़्यादा, खुद का लेहजों में जहरीला बचाव है...!! जब तुम्हारे ' पान और नीयत में खोट हो,वहाँ मेरा चुप रह जाना ही मेरा सबसे गहरा घाव है तुम्हारे ೊf..! ! मेरी 1 खा़मोशी लेगी बदला मेरा तुम जैसी महामूर्ख से बहस करना मेरे fag अपने हाथ में मशाल लेकर अंधेरे में रास्ता में हाथ ' मेरे खुद ढूंढने जैसा है क्योकिं अंत ' का ही जलेगा.. ! ! जहाँ पर मेरे बोले सत्य 9 की कद्र नही , वहाँ मौन ही मेरा सबसे बड़ा तर्क है चीखना आसान है, लेकिन अपमान के बीच शांत रहकर मुस्कुराते हुए आगे बढ लिए  जाना ही मेरे' बहुत बड़े जिगर का काम है..!! मेरी खामोशी ही मेरा सबसे बड़ा चुनाव है, जहाँ शब्दों से ज़्यादा, खुद का लेहजों में जहरीला बचाव है...!! जब तुम्हारे ' पान और नीयत में खोट हो,वहाँ मेरा चुप रह जाना ही मेरा सबसे गहरा घाव है तुम्हारे ೊf..! ! - ShareChat
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satnam waheguru ji - 96 सभि सत सभि तप सभि चंगिआईआI। सिधा पुरखा कीआ वडिआईआ II सिधी किनै न पाईआIl fu तुधु करमि मिलै नाही ठाकि रहाईआI। अर्थः सत्य का पालन करना , शरीर और मन मीठा को साधने वाली कठिन तपस्या और नेक कर्म करना , ये तीनों गुण मनुष्य के श्रेष्ठ होने ये मनुष्य  ৯ সসাতা নী ঔ লক্িন को अभिमानी भी बना सकते हैं। इसलिए, इन्हें अपनी उपलब्धि मानने के बजाय उसकी देन मानना ही असली ज्ञान है।जो लोग लगे सिद्धियों के स्वामी बन जाते हैं॰ उनकी महिमा भी उनकी अपनी नहीं है बल्कि उस सिद्ध परमात्मा की इच्छा के बिना कोई भी नहीं हो सकता। परमात्मा की वडिआई तेरा का अंत कोई नहीं पा सका। बड़े बड़े सिद्धों के पास जो सामर्थ्य है, वह तेरी ही दी हुई चमक है। बिना परमात्मा की इच्छा और सहयोग के, कोई भी प्रयास अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकता। हे भाई! जब परमात्मा किसी कार्य को सिद्ध करने की भाणा कृपा करता है॰ तो ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति, चाहे वह कितनी भी प्रबल क्यों न हो, उसमें बाधा नहीं डाल सकती। वह कार्य अखंड और अटल हो जाता है। यह शब्द मनुष्य को अहंकार से मुक्ति और परमात्मा पर पूर्ण समर्पण सिखाता है कि विचारवानों के विचार और सिद्धों की शक्तियाँ सब उसी एक ही समुद्र की बूंदें हैं। जब उसकी कृपा का प्रवाह चलता है, तो सारे मार्ग स्वतः ही खुल जाते हैं। 96 सभि सत सभि तप सभि चंगिआईआI। सिधा पुरखा कीआ वडिआईआ II सिधी किनै न पाईआIl fu तुधु करमि मिलै नाही ठाकि रहाईआI। अर्थः सत्य का पालन करना , शरीर और मन मीठा को साधने वाली कठिन तपस्या और नेक कर्म करना , ये तीनों गुण मनुष्य के श्रेष्ठ होने ये मनुष्य  ৯ সসাতা নী ঔ লক্িন को अभिमानी भी बना सकते हैं। इसलिए, इन्हें अपनी उपलब्धि मानने के बजाय उसकी देन मानना ही असली ज्ञान है।जो लोग लगे सिद्धियों के स्वामी बन जाते हैं॰ उनकी महिमा भी उनकी अपनी नहीं है बल्कि उस सिद्ध परमात्मा की इच्छा के बिना कोई भी नहीं हो सकता। परमात्मा की वडिआई तेरा का अंत कोई नहीं पा सका। बड़े बड़े सिद्धों के पास जो सामर्थ्य है, वह तेरी ही दी हुई चमक है। बिना परमात्मा की इच्छा और सहयोग के, कोई भी प्रयास अपने अंतिम लक्ष्य तक नहीं पहुँच सकता। हे भाई! जब परमात्मा किसी कार्य को सिद्ध करने की भाणा कृपा करता है॰ तो ब्रह्मांड की कोई भी शक्ति, चाहे वह कितनी भी प्रबल क्यों न हो, उसमें बाधा नहीं डाल सकती। वह कार्य अखंड और अटल हो जाता है। यह शब्द मनुष्य को अहंकार से मुक्ति और परमात्मा पर पूर्ण समर्पण सिखाता है कि विचारवानों के विचार और सिद्धों की शक्तियाँ सब उसी एक ही समुद्र की बूंदें हैं। जब उसकी कृपा का प्रवाह चलता है, तो सारे मार्ग स्वतः ही खुल जाते हैं। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - भएक्रिपाल गुसाईआनठे सोगर्सतापा तती चाउन लगई सतिगुरिखे आपिण गुरु साहिब बताते हैं कि सोग दुख और संताप पीड़ा़ तभी तक ম নয हम उस मालिक से टूटे हुए हैं। जैसे ही वह कृपालु हैं जब तक भिखारी होता है, मन का भय और हृदय की पीडा़ समाप्त हो जाती है। संसार की कोई भी नकारात्मकता, कोई भी कड़वाहट या कोई जिओ भी विपत्ति उस मनुष्य का मानसिक संतुलन नहीं बिगाड़ सकती जिस पर गुरु ने मेहर भर हाथ रख लिया है। उसके भीतर एक 46TST ऐसी शीतलता आ जाती है कि बाहरकी तपिश उसे स्पर्श नहीं বাল लिए से जुड़  कर पाती। जो मनुष्य भी गुरु के चरणों ' गया, उसके दुनिया की बाधाएं और संताप बेअसर हो जाते हैं क्योंकि' गुरु ने बाबा स्वयं उसे अपनी ओट शरण में लेकर उसकी रक्षा की है। भावः U जैसे एक पिता अपने बच्चे को आंच से बचाने के लिए अपनी गोद में समेट लेता है, वैसे ही गुरु अपने भक्त के इर्द गिर्द एक अभेद्य सुरक्षा कवच बना देता हैl भएक्रिपाल गुसाईआनठे सोगर्सतापा तती चाउन लगई सतिगुरिखे आपिण गुरु साहिब बताते हैं कि सोग दुख और संताप पीड़ा़ तभी तक ম নয हम उस मालिक से टूटे हुए हैं। जैसे ही वह कृपालु हैं जब तक भिखारी होता है, मन का भय और हृदय की पीडा़ समाप्त हो जाती है। संसार की कोई भी नकारात्मकता, कोई भी कड़वाहट या कोई जिओ भी विपत्ति उस मनुष्य का मानसिक संतुलन नहीं बिगाड़ सकती जिस पर गुरु ने मेहर भर हाथ रख लिया है। उसके भीतर एक 46TST ऐसी शीतलता आ जाती है कि बाहरकी तपिश उसे स्पर्श नहीं लिए से जुड़  कर पाती। जो मनुष्य भी गुरु के चरणों ' गया, उसके दुनिया की बाधाएं और संताप बेअसर हो जाते हैं क्योंकि' गुरु ने बाबा स्वयं उसे अपनी ओट शरण में लेकर उसकी रक्षा की है। भावः U जैसे एक पिता अपने बच्चे को आंच से बचाने के लिए अपनी गोद में समेट लेता है, वैसे ही गुरु अपने भक्त के इर्द गिर्द एक अभेद्य सुरक्षा कवच बना देता हैl - ShareChat
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Eek Tu Hi Guru Ji - @ೂ पुत्तर परमात्मा कण ्कण में व्याप्त है। परमात्मा को Tu লিত' कहीं बाहर जाने की आवश्यकता खोजने के' नहीं है, बल्कि अपनी दृष्टि को बदलने की आवश्यकता है। परमात्मा का निवास निर्मल मन में Hi होता है। जब तक हृदय काम , क्रोध , लोभ और अहंकार जैसे विकारों से मुक्त नहीं होता, तब तक Tu उस अनंत की अनुभूति संभव नहीं है। जब परमात्मा निराकार है, तो केवल वस्त्र बदलने , तिलक लगाने Guu या शारीरिक प्रदर्शन करने से उसकी प्राप्ति नहीं हो सकती| परमात्मा तक पहुँचने का सबसे सुगम मार्ग Ji माना गया है "जिन प्रेम किओ तिन ही प्रभ पायो।" ] नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। ] @ೂ पुत्तर परमात्मा कण ्कण में व्याप्त है। परमात्मा को Tu লিত' कहीं बाहर जाने की आवश्यकता खोजने के' नहीं है, बल्कि अपनी दृष्टि को बदलने की आवश्यकता है। परमात्मा का निवास निर्मल मन में Hi होता है। जब तक हृदय काम , क्रोध , लोभ और अहंकार जैसे विकारों से मुक्त नहीं होता, तब तक Tu उस अनंत की अनुभूति संभव नहीं है। जब परमात्मा निराकार है, तो केवल वस्त्र बदलने , तिलक लगाने Guu या शारीरिक प्रदर्शन करने से उसकी प्राप्ति नहीं हो सकती| परमात्मा तक पहुँचने का सबसे सुगम मार्ग Ji माना गया है "जिन प्रेम किओ तिन ही प्रभ पायो।" ] नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। ] - ShareChat
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satnam waheguru ji - अउखध मंत्र तंत सभि छारु Il करणैहारु रिदे महि धारु Il हे भाई! दुनिया भरकी दवाइयाँ  अिउखध) मंत्र जप मै तेरा और तंत्र टोने (तंत) उस परम शक्ति के सामने छार राख या व्यर्थ है। यानी, जब तक ईश्वर की कृपा न भिखारी उपाय पूरी तरह सफल नहीं होते। ೯, बाहरी ' जिओ इसलिए, उस करणैहारु सब कुछ करने वाले परमात्मा को अपने हृदय में बसाओ| वही असली पहाडा रक्षक और दुख काटने वाला है।बाहरी कर्मकांडों या के्वल भौतिकु उफायों परननिर्शर रहने केबजाय, हमें वाले उस परम शक्ति अकाल पुरख पर भरोसा रखना @IqT चाहिए जो ब्रह्मांड का रचयिता है। जब हम 7 परमात्मा को मन में बसा लेते हैं॰ तो मानसिक और আংস্াসিন্ধ থাঁনি ২েনঃ ৪ী সাদ ৪ী আনী ৯1 अउखध मंत्र तंत सभि छारु Il करणैहारु रिदे महि धारु Il हे भाई! दुनिया भरकी दवाइयाँ  अिउखध) मंत्र जप मै तेरा और तंत्र टोने (तंत) उस परम शक्ति के सामने छार राख या व्यर्थ है। यानी, जब तक ईश्वर की कृपा न भिखारी उपाय पूरी तरह सफल नहीं होते। ೯, बाहरी ' जिओ इसलिए, उस करणैहारु सब कुछ करने वाले परमात्मा को अपने हृदय में बसाओ| वही असली पहाडा रक्षक और दुख काटने वाला है।बाहरी कर्मकांडों या के्वल भौतिकु उफायों परननिर्शर रहने केबजाय, हमें वाले उस परम शक्ति अकाल पुरख पर भरोसा रखना @IqT चाहिए जो ब्रह्मांड का रचयिता है। जब हम 7 परमात्मा को मन में बसा लेते हैं॰ तो मानसिक और আংস্াসিন্ধ থাঁনি ২েনঃ ৪ী সাদ ৪ী আনী ৯1 - ShareChat
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satnam waheguru ji - वडा साहिबु वडी नाई कीता जाका होवै ` नानकजे को आपौ जाणै अगै गइआनसोहै $ मीठा अर्थःवडा साहिबु वडी नाई यहाँ नाई का अर्थ केवल नाम नहीं, बल्कि उसकी महिमा , शक्ति और न्याय से है। वह साहिब इतना बड़ा है कि उसकी बड़ाई का अंत कोई नहीं पा @ా सकता। उसकी महानता का प्रमाण यह है कि इस पूरी सृष्टि में जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह उसी के हुकम में है। होता वही है जो वह अकाल पुरख करता है। हॅम केवल గా निमित्त मात्र हैं, असली कर्ता वह स्वयं है। जब मनुष्य अपनी उपलब्धियों का श्रेय खुद लेने लगता है॰ तो वह मैं के जाल में फँस जाता है। गुरु नानक देव जी चेतावनी देते हैं कि यदि भाणा कोई मनुष्य इस भ्रम में रहता है किसब कुछ मैं कर रहा हूँ॰ बड़ा हूँ (अहंकार तो वह व्यक्ति परलोक में "मैं बहुत ' :T परमात्मा की दरगाह में सम्मान नहीं पाता। अहंकार करने वाला व्यक्ति उस महान शक्ति के सामने छोटा ही रहता है। वडा साहिबु वडी नाई कीता जाका होवै ` नानकजे को आपौ जाणै अगै गइआनसोहै $ मीठा अर्थःवडा साहिबु वडी नाई यहाँ नाई का अर्थ केवल नाम नहीं, बल्कि उसकी महिमा , शक्ति और न्याय से है। वह साहिब इतना बड़ा है कि उसकी बड़ाई का अंत कोई नहीं पा @ా सकता। उसकी महानता का प्रमाण यह है कि इस पूरी सृष्टि में जो कुछ भी घटित हो रहा है, वह उसी के हुकम में है। होता वही है जो वह अकाल पुरख करता है। हॅम केवल గా निमित्त मात्र हैं, असली कर्ता वह स्वयं है। जब मनुष्य अपनी उपलब्धियों का श्रेय खुद लेने लगता है॰ तो वह मैं के जाल में फँस जाता है। गुरु नानक देव जी चेतावनी देते हैं कि यदि भाणा कोई मनुष्य इस भ्रम में रहता है किसब कुछ मैं कर रहा हूँ॰ बड़ा हूँ (अहंकार तो वह व्यक्ति परलोक में "मैं बहुत ' :T परमात्मा की दरगाह में सम्मान नहीं पाता। अहंकार करने वाला व्यक्ति उस महान शक्ति के सामने छोटा ही रहता है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा सदा अपने स्वार्थ को समझंदारी ही समझी   पर सच तो यह है कि तुम्हारे जो टिके हुए ' रिश्ता स्वार्थ पर थे वह तेरी रिश्तेदारी नहीं बल्कि एक सौदा था रिश्तों को निभाने का. !! तेरी मासूमियत और चालाकी तुझको दुनिया की दौड़ में कुछ लिए समय के' आगे तो रख सकती है, लेकिन तेरा दोगलापन कभी तुझको मन की शांति नहीं दे सकता  !! सीधे पेड़ भले ही पहले काटे जाते है लेकिन वे दुनिया वाले 9|8 यह भूल जाते हैं कि तूफान में भी अक्सर वही पेड़ बचते हैं जिनमें झुकने की लचीलापन और सादगी होती है...!! अपनी चालक भरी बातों से सभी के दिलों को जीत तो तू लेगी परन्तु याद रखना मेरी बात दुनिया वाले सम्मान हमेशा उसी का करते है जो अपनी सादगी और उसूलों पर अटल रहता है..!! मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा सदा अपने स्वार्थ को समझंदारी ही समझी   पर सच तो यह है कि तुम्हारे जो टिके हुए ' रिश्ता स्वार्थ पर थे वह तेरी रिश्तेदारी नहीं बल्कि एक सौदा था रिश्तों को निभाने का. !! तेरी मासूमियत और चालाकी तुझको दुनिया की दौड़ में कुछ लिए समय के' आगे तो रख सकती है, लेकिन तेरा दोगलापन कभी तुझको मन की शांति नहीं दे सकता  !! सीधे पेड़ भले ही पहले काटे जाते है लेकिन वे दुनिया वाले 9|8 यह भूल जाते हैं कि तूफान में भी अक्सर वही पेड़ बचते हैं जिनमें झुकने की लचीलापन और सादगी होती है...!! अपनी चालक भरी बातों से सभी के दिलों को जीत तो तू लेगी परन्तु याद रखना मेरी बात दुनिया वाले सम्मान हमेशा उसी का करते है जो अपनी सादगी और उसूलों पर अटल रहता है..!! - ShareChat
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satnam waheguru ji - सारेही देस को देखि रहिओ मत कोऊ न देखीअत प्रानपती பனfssசி के।।स्री भगवान की भाइकृषा ೯೩ ಖ[ हे भाई! मैने दुनिया के हर कोने , हर विचारधारा , हर तरह के वैभव और मीठा शक्ति का गहराई से अवलोकन कर लिया है लेकिन उस 'प्राणपति अकाल पुरख के सच्चे प्रेमियों और उसके मार्ग पर चलने वालों के बिना बाकी सब खाली दिखाई देता है। बिना उस अकाल पुरख की कृपा के, इंसान चाहे लगे कितना भी शक्तिशाली , धनवान या बड़ा क्यों न हो, वह एक कौड़ी या के बिना मनुष्य का और कृपा ` तिनके के समान भी नहीं है। परमात्मा के प्रेम  अस्तित्व और उसकी सारी उपलब्धियाँ शून्य हैं।जीवन में परमात्मा का प्रेम तेरा और उसकी कृपा नहीं है, तो उसकी सारी हस्ती, सारा अहंकार मिट्टी के है। गुरु साहिब यहाँ कर्मकांड, अहंकार और बाहरी दिखावे पर चोट समान करते हुए समझाते हैं किप्रेम ही सर्वोपरि है। अगर हृदय में प्रभु के लिए प्रेम WIUIT और सच्ची नीयत नहीं है, तो सब व्यर्थ है। परमात्मा पर रत्ती' भर कृपा ही इंसान को निहाल कर देती है। इंसान चाहे पूरी दुनिया का भ्रमण कर ले, पर शांति और मुक्ति ईश्वर की रज़ा और उसकी दया से ही मिलती है। मनुष्य दुनिया की दौड़ में खुद को कितना भी व्यस्त कर लें, लेकिन उसकी   अपनी आत्मा के मूल ( प्राणपति ) से जुड़ना ही जीवन का असली लक्ष्य होना चाहिए। सारेही देस को देखि रहिओ मत कोऊ न देखीअत प्रानपती பனfssசி के।।स्री भगवान की भाइकृषा ೯೩ ಖ[ हे भाई! मैने दुनिया के हर कोने , हर विचारधारा , हर तरह के वैभव और मीठा शक्ति का गहराई से अवलोकन कर लिया है लेकिन उस 'प्राणपति अकाल पुरख के सच्चे प्रेमियों और उसके मार्ग पर चलने वालों के बिना बाकी सब खाली दिखाई देता है। बिना उस अकाल पुरख की कृपा के, इंसान चाहे लगे कितना भी शक्तिशाली , धनवान या बड़ा क्यों न हो, वह एक कौड़ी या के बिना मनुष्य का और कृपा ` तिनके के समान भी नहीं है। परमात्मा के प्रेम  अस्तित्व और उसकी सारी उपलब्धियाँ शून्य हैं।जीवन में परमात्मा का प्रेम तेरा और उसकी कृपा नहीं है, तो उसकी सारी हस्ती, सारा अहंकार मिट्टी के है। गुरु साहिब यहाँ कर्मकांड, अहंकार और बाहरी दिखावे पर चोट समान करते हुए समझाते हैं किप्रेम ही सर्वोपरि है। अगर हृदय में प्रभु के लिए प्रेम WIUIT और सच्ची नीयत नहीं है, तो सब व्यर्थ है। परमात्मा पर रत्ती' भर कृपा ही इंसान को निहाल कर देती है। इंसान चाहे पूरी दुनिया का भ्रमण कर ले, पर शांति और मुक्ति ईश्वर की रज़ा और उसकी दया से ही मिलती है। मनुष्य दुनिया की दौड़ में खुद को कितना भी व्यस्त कर लें, लेकिन उसकी   अपनी आत्मा के मूल ( प्राणपति ) से जुड़ना ही जीवन का असली लक्ष्य होना चाहिए। - ShareChat
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satnam waheguru ji - हरि प्रेम बाणी मनु मारिआ अणीआले {g लागी पीर पिरम अणीआ राम राजे $l की सो जाणै जरीआ $l परमात्मा की प्रेम वाणी "शब्द" ने मेरे मन को इस तरह बेध दिया है जैसे # dT नोकदार तीरों ने शरीर को पार कर लिया हो। यहाँ  मन मारने का अर्थ अहंकार को खत्म करना है। जैसे तीर शरीर के भीतर गहरे उतर जाता भिखारी वैसे ही प्रभु का प्रेम मेरे मन के भीतर तक समा गया है। जिसके 8, जिओ हृदय में इस ईश्वरीय प्रेम की पीडा की तड़प लगी हो, वही जानता है कि इसे सहना कैसे किया जाता है। यह दर्द दुनियावी चोट जैसा नहीं है পঙ্কাভা बल्कि यह वह दर्द है जो आत्मा को परमात्मा से मिलने के लिए बेचैन कर देता है। जिसे यह चोट नहीं लगी, वह इस अवस्था को समझ ही वाले नहीं सकता। प्रेम का तीर चुभता भी है और आनंद भी देता है। यह वह @IqT से मुक्त ' पीडा है जो इंसान को दुनिया के झूठे बंधनों ' करके ' प्राणपति से जोड़ देती है। जब मन हरिप्रेम के तीरों से बिंध जाता है, परात्मा 7 तो वह दुनिया की फ़िज़ूल की चिंताओं और नियंत्रण से आज़ाद हो जाता है। फिर केवल एक ही धुन रह जाती है, उस प्रभु के प्रेम में मगन हन हरि प्रेम बाणी मनु मारिआ अणीआले {g लागी पीर पिरम अणीआ राम राजे $l की सो जाणै जरीआ $l परमात्मा की प्रेम वाणी "शब्द" ने मेरे मन को इस तरह बेध दिया है जैसे # dT नोकदार तीरों ने शरीर को पार कर लिया हो। यहाँ  मन मारने का अर्थ अहंकार को खत्म करना है। जैसे तीर शरीर के भीतर गहरे उतर जाता भिखारी वैसे ही प्रभु का प्रेम मेरे मन के भीतर तक समा गया है। जिसके 8, जिओ हृदय में इस ईश्वरीय प्रेम की पीडा की तड़प लगी हो, वही जानता है कि इसे सहना कैसे किया जाता है। यह दर्द दुनियावी चोट जैसा नहीं है পঙ্কাভা बल्कि यह वह दर्द है जो आत्मा को परमात्मा से मिलने के लिए बेचैन कर देता है। जिसे यह चोट नहीं लगी, वह इस अवस्था को समझ ही वाले नहीं सकता। प्रेम का तीर चुभता भी है और आनंद भी देता है। यह वह @IqT से मुक्त ' पीडा है जो इंसान को दुनिया के झूठे बंधनों ' करके ' प्राणपति से जोड़ देती है। जब मन हरिप्रेम के तीरों से बिंध जाता है, परात्मा 7 तो वह दुनिया की फ़िज़ूल की चिंताओं और नियंत्रण से आज़ाद हो जाता है। फिर केवल एक ही धुन रह जाती है, उस प्रभु के प्रेम में मगन हन - ShareChat