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#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - @ पुत्तर जीवन में कभी भी किसी की परीक्षाएं मत लेना और दूसरों की मिल भी जाएगा , वह कभी तुम्हारा नहीं परीक्षाओं से जो कुछ तुम्हें के अनुभव कभी तुम्हारे अनुभव नहीं हो सकते। जीवन होगा। दूसरे Tu की आत्यंतिक रहस्यमयता तो उसी के सामने प्रगट होती है॰ जो अपने अपना परीक्षा स्थल बना लेता, जो अपने को ही अपनी प्रयोग क बना लेता। अगर तुम इसे गहराई से समझें, तो इसमें से बहुत ही ؟ Hi क्रांतिकारी पहलू सामने आते हैं। हम अक्सर की गलतियों या दूसरों ' उनकी सफलताओं को पढ़कर , सुनकर उन्हें अपना ज्ञान मान लेते हैं। लेकिन उधार लिया हुआ सच, सच नहीं होता..!!किसी दूसरे के Tu जीवन की परीक्षा का परिणाम आपके लिए केवल एक 'सूचना' (nformation) है, बोध ( Wisdom) नहीं। जब तक आग आपकी उंगली को न छुए, आपको तपन का असली Guu दूसरों की कमियां निकालना आसान है अनुभव नहीं हा होगा.. लेकिन अपनी ईर्ष्या, अपने क्रोध और अपने अहंकार को प्रयोगशाला में रखकर देखना ही असली 'परीक्षा' है.॰!!जब तुम आप खुद को ही Ji बना लेते हैं, तो तुम अपनी आदतों के गुलाम 'Subject' (f744) नहीं रहते, बल्कि उनके द्रष्टा' (Observer) बन जाते हैं..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।। @ पुत्तर जीवन में कभी भी किसी की परीक्षाएं मत लेना और दूसरों की मिल भी जाएगा , वह कभी तुम्हारा नहीं परीक्षाओं से जो कुछ तुम्हें के अनुभव कभी तुम्हारे अनुभव नहीं हो सकते। जीवन होगा। दूसरे Tu की आत्यंतिक रहस्यमयता तो उसी के सामने प्रगट होती है॰ जो अपने अपना परीक्षा स्थल बना लेता, जो अपने को ही अपनी प्रयोग क बना लेता। अगर तुम इसे गहराई से समझें, तो इसमें से बहुत ही ؟ Hi क्रांतिकारी पहलू सामने आते हैं। हम अक्सर की गलतियों या दूसरों ' उनकी सफलताओं को पढ़कर , सुनकर उन्हें अपना ज्ञान मान लेते हैं। लेकिन उधार लिया हुआ सच, सच नहीं होता..!!किसी दूसरे के Tu जीवन की परीक्षा का परिणाम आपके लिए केवल एक 'सूचना' (nformation) है, बोध ( Wisdom) नहीं। जब तक आग आपकी उंगली को न छुए, आपको तपन का असली Guu दूसरों की कमियां निकालना आसान है अनुभव नहीं हा होगा.. लेकिन अपनी ईर्ष्या, अपने क्रोध और अपने अहंकार को प्रयोगशाला में रखकर देखना ही असली 'परीक्षा' है.॰!!जब तुम आप खुद को ही Ji बना लेते हैं, तो तुम अपनी आदतों के गुलाम 'Subject' (f744) नहीं रहते, बल्कि उनके द्रष्टा' (Observer) बन जाते हैं..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - मति विचि रतन जवाहर माणिक जे इक सिख सुणी।गुरा इक देहि बुझाई $ घुरकी सभना जीआ का इकु दाता सो मै विसरि ম তার্হী] अर्थः यदि कोई मनुष्य गुरुकी केवल एक' शिक्षा को भी ध्यानसे मै तेरा सुन ले और उसे जीवन में उतार ले, तो उसकी बुद्धि के भीतर ऊँचे विचार रूपी रत्न जवाहर और माणिक प्रकट हो जाते और ' भिखारी सुच्चे हैं। गुरु की शिक्षा वह चाबी है जो ' भीतर छिपे आत्मिक गुणों FHR के खजाने को खोल देती है। फिर मनुष्य तकलीफ देने वालों ' जिओ विचलित नहीं होता। हे गुरु! मुझे बस यह एक समझ सूझ बूझ दे दो, जो परमात्मा संसार के सभी जीवों को दातें देने वाला है, वह पहाडा मुझे कभी भी भूले नहीं। जब इंसान को यह याद रहता है कि देने वाला केवल 'वह एक है, तो वह इंसानों में भले अपने हों या पराये वाले से उम्मीदें रखना छोड़ देता फिर मनुष्य को दुःख भी सुख जैसा लगने लगता है क्योंकि उसको पता होता है कि उसका रक्षक बाबा सतिगुरु सजणु सदा साथ है। मनुष्य को यह समझ आ जाती हैं खेल है उसके मन में निर्वैर बिना किये सब उस 'दाते का के रहने की शक्ति आती है। किसी से दुश्मनी ' मति विचि रतन जवाहर माणिक जे इक सिख सुणी।गुरा इक देहि बुझाई $ घुरकी सभना जीआ का इकु दाता सो मै विसरि ম তার্হী] अर्थः यदि कोई मनुष्य गुरुकी केवल एक' शिक्षा को भी ध्यानसे मै तेरा सुन ले और उसे जीवन में उतार ले, तो उसकी बुद्धि के भीतर ऊँचे विचार रूपी रत्न जवाहर और माणिक प्रकट हो जाते और ' भिखारी सुच्चे हैं। गुरु की शिक्षा वह चाबी है जो ' भीतर छिपे आत्मिक गुणों FHR के खजाने को खोल देती है। फिर मनुष्य तकलीफ देने वालों ' जिओ विचलित नहीं होता। हे गुरु! मुझे बस यह एक समझ सूझ बूझ दे दो, जो परमात्मा संसार के सभी जीवों को दातें देने वाला है, वह पहाडा मुझे कभी भी भूले नहीं। जब इंसान को यह याद रहता है कि देने वाला केवल 'वह एक है, तो वह इंसानों में भले अपने हों या पराये वाले से उम्मीदें रखना छोड़ देता फिर मनुष्य को दुःख भी सुख जैसा लगने लगता है क्योंकि उसको पता होता है कि उसका रक्षक बाबा सतिगुरु सजणु सदा साथ है। मनुष्य को यह समझ आ जाती हैं खेल है उसके मन में निर्वैर बिना किये सब उस 'दाते का के रहने की शक्ति आती है। किसी से दुश्मनी ' - ShareChat
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satnam waheguru ji - तरसु पइआ मिहरामति होई सतिगुरु सजणु मिलिआ।।नानक नामु मिलै तां जीवां तनु मनु थीवै हरिआIl HIoT अर्थः बाबा नानक जी कह! जब उस अकाल पुरख परमात्मा को मुझ पर तरस आया और उसकी कृपा हुई, तब मुझे ' सतिगुरु' रूपी सच्चा मित्र मिला।  गुरु का मिलना लगे कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह परमात्मा की विशेष कृपा का प्रभु की दया नहीं होती, इंसान भटकता फल है। जब तक रहता है। सच्चा मित्र ( सजणु ) वही है जो आत्मा को परमात्मा dr से जोड़ दे। हे प्रभू! तेरे मन में मेरे लिए दया पैदा हुई, मेरे पर तेरी मेहर हुई, तब मुझे मित्र गुरू मिला तेरा यह उपकार भुलाया नहीं जा सकता। उस परमात्मा के नाम की बरकत से भाणा मेरा तन और मन दोनों हरे-भरे हो जाते हैं। जैसे पानी के बिना पौधा सूख जाता है, वैसे ही 'नाम के बिना आत्मा मुरझा जाती है। नाम की प्राप्ति से मानसिक क्लेश मिट जाते हैं और जीवन में एक नई ताजगी और खुशी आ जाती है और मेरा मन उस आत्मिक जीवन की बरकति से खिल उठता है। तरसु पइआ मिहरामति होई सतिगुरु सजणु मिलिआ।।नानक नामु मिलै तां जीवां तनु मनु थीवै हरिआIl HIoT अर्थः बाबा नानक जी कह! जब उस अकाल पुरख परमात्मा को मुझ पर तरस आया और उसकी कृपा हुई, तब मुझे ' सतिगुरु' रूपी सच्चा मित्र मिला।  गुरु का मिलना लगे कोई संयोग नहीं है, बल्कि यह परमात्मा की विशेष कृपा का प्रभु की दया नहीं होती, इंसान भटकता फल है। जब तक रहता है। सच्चा मित्र ( सजणु ) वही है जो आत्मा को परमात्मा dr से जोड़ दे। हे प्रभू! तेरे मन में मेरे लिए दया पैदा हुई, मेरे पर तेरी मेहर हुई, तब मुझे मित्र गुरू मिला तेरा यह उपकार भुलाया नहीं जा सकता। उस परमात्मा के नाम की बरकत से भाणा मेरा तन और मन दोनों हरे-भरे हो जाते हैं। जैसे पानी के बिना पौधा सूख जाता है, वैसे ही 'नाम के बिना आत्मा मुरझा जाती है। नाम की प्राप्ति से मानसिक क्लेश मिट जाते हैं और जीवन में एक नई ताजगी और खुशी आ जाती है और मेरा मन उस आत्मिक जीवन की बरकति से खिल उठता है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा मैने खुद को उन जंजीरों से आज़ाद कर लिया है जिसके करके मैने दुनिया की फिक्र करनी छोड़ दी है क्योंकि भीड़़ में खो जाने से बेहतर है अकेले अपनी राह पर मज़बूती से खड़े रहना..! ! आज के चालन मे सबसे सुरक्षित निवेश खुद पर यकीन है यह जिन्दगी का वह एसेट है जो कभी डूबता नहीं जबकि मैने सबसे सुरक्षित निवेश गोल्ड को भीः हुए डूबते देखा.. !! तकलीफ देने वाले भले ही पराये हों, लेकिन मज़ा लेने वाले अपने ही होते हैं क्योकिं जब हम तकलीफ में होते हैं तो अक्सर हमारे अपने ही लोग हमें समझने के बजाय हमारी तकलीफ का मज़ा लेते हैं यही बात जीवन की सचाई है जो बहुत दुखद और निराशाजनक है. लिए ' बाहरी दुश्मन से लड़़ना मेरे आसान था क्योंकि मुझको पता है कि वह प्रहार जरूर करेगा लेकिन जब अपने जिन्हें में अपनी ढाल समझता था वह मेरी तकलीफों को देख कर मजे लेने लगें या दर्शक बन जाएं तो वह घाव बहुत गहरा था मेरे लिए..!! मेरी खामोशी लेगी बदला मेरा मैने खुद को उन जंजीरों से आज़ाद कर लिया है जिसके करके मैने दुनिया की फिक्र करनी छोड़ दी है क्योंकि भीड़़ में खो जाने से बेहतर है अकेले अपनी राह पर मज़बूती से खड़े रहना..! ! आज के चालन मे सबसे सुरक्षित निवेश खुद पर यकीन है यह जिन्दगी का वह एसेट है जो कभी डूबता नहीं जबकि मैने सबसे सुरक्षित निवेश गोल्ड को भीः हुए डूबते देखा.. !! तकलीफ देने वाले भले ही पराये हों, लेकिन मज़ा लेने वाले अपने ही होते हैं क्योकिं जब हम तकलीफ में होते हैं तो अक्सर हमारे अपने ही लोग हमें समझने के बजाय हमारी तकलीफ का मज़ा लेते हैं यही बात जीवन की सचाई है जो बहुत दुखद और निराशाजनक है. लिए ' बाहरी दुश्मन से लड़़ना मेरे आसान था क्योंकि मुझको पता है कि वह प्रहार जरूर करेगा लेकिन जब अपने जिन्हें में अपनी ढाल समझता था वह मेरी तकलीफों को देख कर मजे लेने लगें या दर्शक बन जाएं तो वह घाव बहुत गहरा था मेरे लिए..!! - ShareChat
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satnam waheguru ji - जाकीलीलाकी मिति नाहि। सगल देव ह्ारे अवगाहिय mder Bhulana_Edts अर्थः उस परमात्मा की सीमा , मर्यादा के खेल या उसकी ম নয रचना का कोई अंत नहीं है। वह कितना बड़ा है और उसकी शक्तियाँ कितनी विस्तार वाली हैं॰ इसे मापा नहीं जा भिखारी নিম্লান, सकता। सभी देवता बड़ेन्बड़े दिव्य शक्तियाँ हार गई, में उतरते हुए या विचार करते थक गईखोजते हुए, गहराई ' जिओ हुए पर उस परमात्मा की महिमा का अंत नहीं पा सके। जब बड़े बड़े देवता जिन्हें हम ज्ञान का ःप्रतीक मानते हैं उस 461ST परमात्मा को पूरी तरह नहीं समझ पाए, तो मनुष्य को अपने ज्ञान पर अहंकार नहीं करना चाहिए। जैसे समुद्र में বাল है, वैसे ही ऋषि मुनि और गोताखोर गहराई ढूँढने Ga विद्वान ' परमात्मा के गुणों में उतरे, पर वह इतना बेअंत है बाबा कि सब थक कर यही बोले नेति नेति परमात्मा ऐसा भी नहीं, अंत ऐसा भी नहीं है। जब मनुष्य को यह समझ आ 5ಗ जाती है किमैं सब कुछ नहीं जानता," तब उसके अंदर होंमें "विस्माद " खत्म हो जाती है फिर वह तर्क करना छोड़ कर कुदरत का आनंद लेना शुरू कर देता है। जाकीलीलाकी मिति नाहि। सगल देव ह्ारे अवगाहिय mder Bhulana_Edts अर्थः उस परमात्मा की सीमा , मर्यादा के खेल या उसकी ম নয रचना का कोई अंत नहीं है। वह कितना बड़ा है और उसकी शक्तियाँ कितनी विस्तार वाली हैं॰ इसे मापा नहीं जा भिखारी নিম্লান, सकता। सभी देवता बड़ेन्बड़े दिव्य शक्तियाँ हार गई, में उतरते हुए या विचार करते थक गईखोजते हुए, गहराई ' जिओ हुए पर उस परमात्मा की महिमा का अंत नहीं पा सके। जब बड़े बड़े देवता जिन्हें हम ज्ञान का ःप्रतीक मानते हैं उस 461ST परमात्मा को पूरी तरह नहीं समझ पाए, तो मनुष्य को अपने ज्ञान पर अहंकार नहीं करना चाहिए। जैसे समुद्र में है, वैसे ही ऋषि मुनि और गोताखोर गहराई ढूँढने Ga विद्वान ' परमात्मा के गुणों में उतरे, पर वह इतना बेअंत है बाबा कि सब थक कर यही बोले नेति नेति परमात्मा ऐसा भी नहीं, अंत ऐसा भी नहीं है। जब मनुष्य को यह समझ आ 5ಗ जाती है किमैं सब कुछ नहीं जानता," तब उसके अंदर होंमें "विस्माद " खत्म हो जाती है फिर वह तर्क करना छोड़ कर कुदरत का आनंद लेना शुरू कर देता है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - नाना बिधि करि बनत बनाईगा अपनी कीमति आपे पाई$ ने इस ' संसार की रचना अनगिनत अर्थः परमात्मा HoT रूपों , रंगों और प्रकारों में की है। यह सृष्टि उसकी कला का एक विशाल और विविध प्रदर्शन है। यह గా संसार परमात्मा का ही प्रसार है, जिसमें उसने जीव जंतु, मनुष्य और प्रकृति को अलग ्अलग तेरा रूपों में गढ़ा है। इसका भाव यह है कि इस दुनिया 43 ' भी अचानक या बिना कारण नहीं हुआ| ೩೯' जीव और वस्तु को एक विशेष पसात्मा भाणा उद्देश्य और विधि के साथ गढ़ा है।परमात्मा की रचना को मनुष्य  देख तो सकते हैं लेकिन उसकी कीमति उसकी गहराई या सामर्थ्य का अंदाज़ा नहीं लगा सकते। परमात्मा की महिमा और उसके की सीमा का अंदाजा कोई इंसान नहीं लगा गुणों ' सकता। वह बेअंत (अनंत ) है। नाना बिधि करि बनत बनाईगा अपनी कीमति आपे पाई$ ने इस ' संसार की रचना अनगिनत अर्थः परमात्मा HoT रूपों , रंगों और प्रकारों में की है। यह सृष्टि उसकी कला का एक विशाल और विविध प्रदर्शन है। यह గా संसार परमात्मा का ही प्रसार है, जिसमें उसने जीव जंतु, मनुष्य और प्रकृति को अलग ्अलग तेरा रूपों में गढ़ा है। इसका भाव यह है कि इस दुनिया 43 ' भी अचानक या बिना कारण नहीं हुआ| ೩೯' जीव और वस्तु को एक विशेष पसात्मा भाणा उद्देश्य और विधि के साथ गढ़ा है।परमात्मा की रचना को मनुष्य  देख तो सकते हैं लेकिन उसकी कीमति उसकी गहराई या सामर्थ्य का अंदाज़ा नहीं लगा सकते। परमात्मा की महिमा और उसके की सीमा का अंदाजा कोई इंसान नहीं लगा गुणों ' सकता। वह बेअंत (अनंत ) है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - # खामोशी लेेगी बदला मेरा मैंने सभी के झूठे भ्रम को सदा तोडा है पर कभी भी किसी का भरोसा नहीं तोडा. .!! तुम जैसों की हुई एक्सपेक्टेशन्स को तोड़ना कभी कभी ज़रूरी होता है क्योकिं सभी मुस्कुराते हुए चेहरा ट्रस्ट के लायक नहीं होता और सबसे सेफ इन्वेस्टमेंट है खुद पर भरोसा ना की तुम जैसी दोहरे किरदार वाली पर..!! आँखें बंद करके एक्सीडेंट को दावत चलना देना है, चाहे वो सड़क हो या रिश्ते इसी लिए. सदा ही रियल बनो, अंधा ट्रस्ट परमत दुसरों 1 करो, और जो खुद पर टिक गया, उसे दुनिया हिला नहीं सकती..!! # खामोशी लेेगी बदला मेरा मैंने सभी के झूठे भ्रम को सदा तोडा है पर कभी भी किसी का भरोसा नहीं तोडा. .!! तुम जैसों की हुई एक्सपेक्टेशन्स को तोड़ना कभी कभी ज़रूरी होता है क्योकिं सभी मुस्कुराते हुए चेहरा ट्रस्ट के लायक नहीं होता और सबसे सेफ इन्वेस्टमेंट है खुद पर भरोसा ना की तुम जैसी दोहरे किरदार वाली पर..!! आँखें बंद करके एक्सीडेंट को दावत चलना देना है, चाहे वो सड़क हो या रिश्ते इसी लिए. सदा ही रियल बनो, अंधा ट्रस्ट परमत दुसरों 1 करो, और जो खुद पर टिक गया, उसे दुनिया हिला नहीं सकती..!! - ShareChat