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#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - Cek पुत्तर कर्म और समर्पण का सबसे सुंदर और सटीक संतुलन तभी है जब तुम्हारी सोच परमात्मा के उदम (प्रयास और हुकम (परमात्मा की रज़ा को सही तरह से समझ सको..!! उद्यम (कोशिश ) Tu करते हुए ही जीवन जियो, नाम की कमाई करते हुए आत्मिक सुख को भोगो.४ू! !इसी तरह से Hi परमात्मा का ध्यान करते हुए उससे मिल जाओ फिर तुम्हारे जीवन की तुम्हारी सारी चिंताएं मिट Tu इसलिए, अब अपने मन का बोझ और আফ্ী न्याय की उम्मीद को उसी सच्चे पातशाह पर छोड़ Gu दो जो तुम नहीं देख पाए उसको परमात्मा देख विश्वास  अब तुम्हारी उसके प्रति सच्ची रहा है, यही Ji ताकत है। ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय! ! Cek पुत्तर कर्म और समर्पण का सबसे सुंदर और सटीक संतुलन तभी है जब तुम्हारी सोच परमात्मा के उदम (प्रयास और हुकम (परमात्मा की रज़ा को सही तरह से समझ सको..!! उद्यम (कोशिश ) Tu करते हुए ही जीवन जियो, नाम की कमाई करते हुए आत्मिक सुख को भोगो.४ू! !इसी तरह से Hi परमात्मा का ध्यान करते हुए उससे मिल जाओ फिर तुम्हारे जीवन की तुम्हारी सारी चिंताएं मिट Tu इसलिए, अब अपने मन का बोझ और আফ্ী न्याय की उम्मीद को उसी सच्चे पातशाह पर छोड़ Gu दो जो तुम नहीं देख पाए उसको परमात्मा देख विश्वास  अब तुम्हारी उसके प्रति सच्ची रहा है, यही Ji ताकत है। ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय! ! - ShareChat
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satnam waheguru ji - 6R रसु नामु नपाइआ ते भागहीण जम हरि हरि पासिपाजो सतिगुर सरणि संगति नही आए। ध्रिगु जीवे fergr ٤٨٩٨٥ मै तेरा अर्थः जिन्होंने परमात्मा के नाम का आनंद या रस प्राप्त नहीं किया, वे बड़े दुर्भाग्यशाली हैं। वे अंततः यम मृत्यु के दूत के वश में जाते हैं यानी भिखारी वे जन्म मरण के चक्र में फंसे रहते हैंl जो मनुष्य सच्चे गुरु की शरण और साधु संगत में नहीं आए॰उनका जीना धिक्कार है और उनके जिओ जीवन जीने के ढंग को भी धिक्कार है क्योंकि उन्होंने अपना अनमोल पहाडा मनुष्य जीवन व्यर्थ गँवा दिया। हे भाई।मृनुष्य जीवन का मुख्य उद्देश्य परमात्मा से जुड़ना और सत्संग करना है। संगत वह स्थान है जहाँ मन वाले का मैल धुलता है और हरि रस की प्राप्ति होती है।जिन पर परमात्मा की कृपा  होती है, केवल वही सत्संग में आते हैंl जो व्यक्ति इस दुनिया बाबा के मोह माया में फंसकर नाम सिमरन और गुरु की शरण से दूर रहता তী उसका जीवन व्यर्थ है। यह वाणी हमें चेतावनी देती है कि हम समय रहते सही मार्ग अर्थात सच्चे मार्ग पर चलें। 6R रसु नामु नपाइआ ते भागहीण जम हरि हरि पासिपाजो सतिगुर सरणि संगति नही आए। ध्रिगु जीवे fergr ٤٨٩٨٥ मै तेरा अर्थः जिन्होंने परमात्मा के नाम का आनंद या रस प्राप्त नहीं किया, वे बड़े दुर्भाग्यशाली हैं। वे अंततः यम मृत्यु के दूत के वश में जाते हैं यानी भिखारी वे जन्म मरण के चक्र में फंसे रहते हैंl जो मनुष्य सच्चे गुरु की शरण और साधु संगत में नहीं आए॰उनका जीना धिक्कार है और उनके जिओ जीवन जीने के ढंग को भी धिक्कार है क्योंकि उन्होंने अपना अनमोल पहाडा मनुष्य जीवन व्यर्थ गँवा दिया। हे भाई।मृनुष्य जीवन का मुख्य उद्देश्य परमात्मा से जुड़ना और सत्संग करना है। संगत वह स्थान है जहाँ मन वाले का मैल धुलता है और हरि रस की प्राप्ति होती है।जिन पर परमात्मा की कृपा  होती है, केवल वही सत्संग में आते हैंl जो व्यक्ति इस दुनिया बाबा के मोह माया में फंसकर नाम सिमरन और गुरु की शरण से दूर रहता তী उसका जीवन व्यर्थ है। यह वाणी हमें चेतावनी देती है कि हम समय रहते सही मार्ग अर्थात सच्चे मार्ग पर चलें। - ShareChat
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satnam waheguru ji - देदै्भगहि सहसा छूणा सोभ करे र्ससासु[ा खाराबा वेकाराा चोरा जारातै कूड़िआरा  इकिहौदा खाइ चलहि ऐथाऊ तिना भि काई कासा अर्थः जीव परमात्मा से उसकी दी हुई बख्शिशों को' fawa Hat करते हैं लेकिन वह और ज्यादा माँगते रहते है। ' तृष्णा कभी खत्म नहीं होती। परमात्मा दे रहा है, पर 7 मनुष्य की माँग बढ़ती ही जा रही है। संसार में हर तरह के लोग हैं चोर झूठ बोलने वाले। इस सृष्टि में सज्जन ही नहीं, बल्कि दुर्जन और अपराधी भी पल रहे हैं और గా परमात्मा सबको रिज़क दे रहा है। कई लोग ऐसे हैं संसार में जो कुछ उनके पास है उसे खा-पीकर और भोगकर चले जाते हैं।जो केवल खाने पीने और भोगने में ही UII जीवन व्यतीत कर देते हैं, वेजीवन के असली मकसद नाम सिमरन और सेवा को भूल जाते हैं। परमात्मा की रचना असीमित है। हर जगह, हर रूप में उसी की सत्ता काम कर रही है। भाई!परमात्मा सबको दे रहा है, चाहे वह चोर हो या साधु। लेकिन इंसान केवल माँगने में लगा लेकिन मनुष्य का असली कार कार्य तो उस परमात्मा के हुक्म को पहचानना है। देदै्भगहि सहसा छूणा सोभ करे र्ससासु[ा खाराबा वेकाराा चोरा जारातै कूड़िआरा  इकिहौदा खाइ चलहि ऐथाऊ तिना भि काई कासा अर्थः जीव परमात्मा से उसकी दी हुई बख्शिशों को' fawa Hat करते हैं लेकिन वह और ज्यादा माँगते रहते है। ' तृष्णा कभी खत्म नहीं होती। परमात्मा दे रहा है, पर 7 मनुष्य की माँग बढ़ती ही जा रही है। संसार में हर तरह के लोग हैं चोर झूठ बोलने वाले। इस सृष्टि में सज्जन ही नहीं, बल्कि दुर्जन और अपराधी भी पल रहे हैं और గా परमात्मा सबको रिज़क दे रहा है। कई लोग ऐसे हैं संसार में जो कुछ उनके पास है उसे खा-पीकर और भोगकर चले जाते हैं।जो केवल खाने पीने और भोगने में ही UII जीवन व्यतीत कर देते हैं, वेजीवन के असली मकसद नाम सिमरन और सेवा को भूल जाते हैं। परमात्मा की रचना असीमित है। हर जगह, हर रूप में उसी की सत्ता काम कर रही है। भाई!परमात्मा सबको दे रहा है, चाहे वह चोर हो या साधु। लेकिन इंसान केवल माँगने में लगा लेकिन मनुष्य का असली कार कार्य तो उस परमात्मा के हुक्म को पहचानना है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - # खामोशी लेेगी बदला मेरा सांप तो केवल छेड़ने पर ही डसता है, लेकिन तुम जैसी दुष्ट स्वभाव वाली कदम ्कदम पर हमको डसती हो और दुख देती रही हो..!! जैसे बादलों से अमृत बरसने पर भी बेंत में फल-फूल fag ' नहीं आते, वैसे ही में तेरे कितना भी कर लु पर तेरी गंदी सोच को कभी अच्छा !? इसलिए सयाने बदल नहीं सकता. कहते हैं कि दुष्ट और दिल से कपटी तुम जैसे लोगो से तर्क करने से बेहतर है मौन रहना और दूरी बना कर रहना ही बेहतर है..!! छोड़ इन बातों को कि ज़ख्म कहाँ ्कहाँ से मिले हैं मुझको तू तो ये बता सफर कितना बाकी है क्योकिं तुम जैसों लिए के प्रति दयालु होना सिर्फ নুদ্কাই जब की खुद की मन की शांति अच्छा है और सुकून को खोना है..!! जैसे उल्लू को सूर्य का प्रकाश पसंद नहीं आता, वैसे ही तेरी जैसी दुष्ट और गन्दी सोच वालों कर दू तुम कभी भी की कितनी भी मदद मेरा भला नही सोचोगी..!! # खामोशी लेेगी बदला मेरा सांप तो केवल छेड़ने पर ही डसता है, लेकिन तुम जैसी दुष्ट स्वभाव वाली कदम ्कदम पर हमको डसती हो और दुख देती रही हो..!! जैसे बादलों से अमृत बरसने पर भी बेंत में फल-फूल fag ' नहीं आते, वैसे ही में तेरे कितना भी कर लु पर तेरी गंदी सोच को कभी अच्छा !? इसलिए सयाने बदल नहीं सकता. कहते हैं कि दुष्ट और दिल से कपटी तुम जैसे लोगो से तर्क करने से बेहतर है मौन रहना और दूरी बना कर रहना ही बेहतर है..!! छोड़ इन बातों को कि ज़ख्म कहाँ ्कहाँ से मिले हैं मुझको तू तो ये बता सफर कितना बाकी है क्योकिं तुम जैसों लिए के प्रति दयालु होना सिर्फ নুদ্কাই जब की खुद की मन की शांति अच्छा है और सुकून को खोना है..!! जैसे उल्लू को सूर्य का प्रकाश पसंद नहीं आता, वैसे ही तेरी जैसी दुष्ट और गन्दी सोच वालों कर दू तुम कभी भी की कितनी भी मदद मेरा भला नही सोचोगी..!! - ShareChat
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satnam waheguru ji - मति विचि रतन जवाहर माणिक जे इक गुर की सिख सुणी।।गुरा इक देहि बुझाई।I सभना जीआ का इकु दाता सो मै विसरि न UIకేII अर्थः यदि कोई मनुष्य गुरु की केवल एक॰ शिक्षाको भी ध्यान मैतेरा से सुन ले और उसे जीवन में उतार ले, तो उसकी बुद्धि के भीतर ऊँचे और सुच्चे विचार रूपी रत्न, जवाहर और माणिक प्रकट हो भिखारी जाते हैं। गुरु की शिक्षा वह चाबी है जो हमारे भीतर छिपे 137 के खजाने को खोल देती है। फिर मनुष्य आत्मिक गुणों ' तकलीफ देने वालों से विचलित नहीं होता। हे गुरु! मुझे बस यह एक समझ सूझ बूझ दे दो, जो परमात्मा संसार के सभी जीवों 46TST को दातें देने वाला है, वह मुझे कभी भी॰ भूले नहीं। जब इंसान বাল को यह याद रहता है कि देने वाला केवल वह' एक है, तो वह इंसानों वे अपने हों या पराये से उम्मीदें रखना छोड़ देता है बाबा फिर मनुष्य को दुःख भी सुख जैसा लगने लगता है क्योंकि उसको पता होता है कि उसका रक्षक सतिगुरु सजणु सदा साथ 7 है।मनुष्य को यह समझ आ जाती हैं कि ये सब उस 'दाते' का ही खेल है उसके मन में ' निर्वैर बिना किसी से दुश्मनी के रहने की शक्ति आती है। मति विचि रतन जवाहर माणिक जे इक गुर की सिख सुणी।।गुरा इक देहि बुझाई।I सभना जीआ का इकु दाता सो मै विसरि न UIకేII अर्थः यदि कोई मनुष्य गुरु की केवल एक॰ शिक्षाको भी ध्यान मैतेरा से सुन ले और उसे जीवन में उतार ले, तो उसकी बुद्धि के भीतर ऊँचे और सुच्चे विचार रूपी रत्न, जवाहर और माणिक प्रकट हो भिखारी जाते हैं। गुरु की शिक्षा वह चाबी है जो हमारे भीतर छिपे 137 के खजाने को खोल देती है। फिर मनुष्य आत्मिक गुणों ' तकलीफ देने वालों से विचलित नहीं होता। हे गुरु! मुझे बस यह एक समझ सूझ बूझ दे दो, जो परमात्मा संसार के सभी जीवों 46TST को दातें देने वाला है, वह मुझे कभी भी॰ भूले नहीं। जब इंसान को यह याद रहता है कि देने वाला केवल वह' एक है, तो वह इंसानों वे अपने हों या पराये से उम्मीदें रखना छोड़ देता है बाबा फिर मनुष्य को दुःख भी सुख जैसा लगने लगता है क्योंकि उसको पता होता है कि उसका रक्षक सतिगुरु सजणु सदा साथ 7 है।मनुष्य को यह समझ आ जाती हैं कि ये सब उस 'दाते' का ही खेल है उसके मन में ' निर्वैर बिना किसी से दुश्मनी के रहने की शक्ति आती है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - मंनै सुरति होवै मनि बुधि।।मंनै सगल भवण की सुधि।।मनै मुहि चोटा ना खाइ।।मनै जम कै साथि न जाइ।। মীঠা अर्थः हे भाई! परमात्मा के नाम पर अटूट निश्चय करने से मनुष्य की जागृत हो जाती है और मन में श्रेष्ठ बुद्धि का प्रकाश होता है। सुरति ऐसी अवस्था में व्यक्ति को समस्त ब्रह्मांड और सृष्टि के रहस्यों का 77 और सूझ-बूझ प्राप्त हो जाती है। उसे कही बाहर भटकने की ज्ञान ज़रूरत नहीं रहती। नाम को मानने वाला व्यक्ति जीवन के संघर्षों में मुंह पर चोट नहीं खाता, यानी वह अपमान और विकारों की मार से तेरा है, उसे मृत्यु का बच जाता है। जिसने सत्य को स्वीकार कर लिया भय जम का साथ नहीं सताता , क्योंकि वह जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर आत्मिक शांति पा लेता है। यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि भाणा असली ताकत किसी बाहरी समर्थन में नहीं, बल्कि मन के भीतर उस सत्य को स्वीकार करने में है। जब विश्वास गहरा होता है, तो न दुनिया का डर रहता है और न ही मौत का। मंनै सुरति होवै मनि बुधि।।मंनै सगल भवण की सुधि।।मनै मुहि चोटा ना खाइ।।मनै जम कै साथि न जाइ।। মীঠা अर्थः हे भाई! परमात्मा के नाम पर अटूट निश्चय करने से मनुष्य की जागृत हो जाती है और मन में श्रेष्ठ बुद्धि का प्रकाश होता है। सुरति ऐसी अवस्था में व्यक्ति को समस्त ब्रह्मांड और सृष्टि के रहस्यों का 77 और सूझ-बूझ प्राप्त हो जाती है। उसे कही बाहर भटकने की ज्ञान ज़रूरत नहीं रहती। नाम को मानने वाला व्यक्ति जीवन के संघर्षों में मुंह पर चोट नहीं खाता, यानी वह अपमान और विकारों की मार से तेरा है, उसे मृत्यु का बच जाता है। जिसने सत्य को स्वीकार कर लिया भय जम का साथ नहीं सताता , क्योंकि वह जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर आत्मिक शांति पा लेता है। यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि भाणा असली ताकत किसी बाहरी समर्थन में नहीं, बल्कि मन के भीतर उस सत्य को स्वीकार करने में है। जब विश्वास गहरा होता है, तो न दुनिया का डर रहता है और न ही मौत का। - ShareChat