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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - नमसर्त नृकरमेण नमसर्त नृभरमेण नमसर्त नृदेसेण नमसर्त नृभेसेग मीठा भावार्थःउस परमात्मा को सदा नमन करना चाहिए ৯ ৪২ ' जो दुनिया ' कार्य को शक्ति प्रदान करता है। इंसान को "मैं कर रहा ' हूँ," लेकिन गुरु साहिब समझाते हैं कि लगता है कि' लगे असली कर्ता वही है। वह हर ' पीछे की शक्ति है और हर 'FTబశ' क्रिया का संचालक है। सृष्टि के असंख्य ; जीवों , मनुष्यों की रक्षा तेरा और पालना करने वाला वही एक है। वह किसी भेदभाव के बिना सबको रिज़क प्रदान करता है। परमात्मा किसी एक खास देश भाणा का नहीं है। वह अदेस है, यानी उसका कोई एक निश्चित पता नहीं है क्योंकि वह हर जगह मौजूद है पूरी पृथ्वी ही उसका घर है। ईश्वर का कोई एक मजहब या स्वरूप नहीं है। वह हर भेष में है और फिर भी किसी एक भेष तक सीमित नहीं है। वह अभेष है। इसका अर्थ यह भी है कि संसार के अनगिनत रूपों और वेशभूषाओं में वही एक नूर चमक रहा है। नमसर्त नृकरमेण नमसर्त नृभरमेण नमसर्त नृदेसेण नमसर्त नृभेसेग मीठा भावार्थःउस परमात्मा को सदा नमन करना चाहिए ৯ ৪২ ' जो दुनिया ' कार्य को शक्ति प्रदान करता है। इंसान को "मैं कर रहा ' हूँ," लेकिन गुरु साहिब समझाते हैं कि लगता है कि' लगे असली कर्ता वही है। वह हर ' पीछे की शक्ति है और हर 'FTబశ' क्रिया का संचालक है। सृष्टि के असंख्य ; जीवों , मनुष्यों की रक्षा तेरा और पालना करने वाला वही एक है। वह किसी भेदभाव के बिना सबको रिज़क प्रदान करता है। परमात्मा किसी एक खास देश भाणा का नहीं है। वह अदेस है, यानी उसका कोई एक निश्चित पता नहीं है क्योंकि वह हर जगह मौजूद है पूरी पृथ्वी ही उसका घर है। ईश्वर का कोई एक मजहब या स्वरूप नहीं है। वह हर भेष में है और फिर भी किसी एक भेष तक सीमित नहीं है। वह अभेष है। इसका अर्थ यह भी है कि संसार के अनगिनत रूपों और वेशभूषाओं में वही एक नूर चमक रहा है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - जिसु सिमरत दूखु सभु जाइा नॉमु खननु वसै मनि आइाा हे भाई! सभी प्रकार के कष्ट उस अकाल पुरख को याद करने ম নযা से विदा हो जाते हैं। परमात्मा की याद में जोड़ने से इंसान सांसारिक परेशानियों से ऊपर उठ जाता है उसके मन के भिखारी भीतर की बेचैनी और चिंता भी शांत होजाती है। जिस तरह एक कीमती हीरा अंधेरे कमरे को रोशन कर देता है, उसी तरह जिओ नाम रत्न अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर देता है। यह कोई साधारण दौलत नहीं, बल्कि वह रूहानी पूँजी है जो कभी खत्म नहीं होती। प्रभु का नाम केवल जीभ से जपने तक पहाडा सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसेमनमें बसाना जरूरी है। जब ईश्वर की याद दिल की गहराइयों में समा जाती है, तो qT मनुष्य का स्वभाव और विचार बदलने लगते हैं। उसके जीवन में ठहराव और संतोष आ जाता है।दुनिया की वस्तुएँ हमें कुछ बाबा सुख दे सकती हैं, लेकिन स्थायी आनंद केवल लिए  समय के नाम के स्मरण से ही संभव है। जब परमात्मा का नाम मन में U होता है॰ तो इंसान प्रतिकूल परिस्थितियों (ठोकरों ) में भी डगमगाता नहीं है, क्योंकि उसे असली कर्ता पर भरोसा होता 8 जिसु सिमरत दूखु सभु जाइा नॉमु खननु वसै मनि आइाा हे भाई! सभी प्रकार के कष्ट उस अकाल पुरख को याद करने ম নযা से विदा हो जाते हैं। परमात्मा की याद में जोड़ने से इंसान सांसारिक परेशानियों से ऊपर उठ जाता है उसके मन के भिखारी भीतर की बेचैनी और चिंता भी शांत होजाती है। जिस तरह एक कीमती हीरा अंधेरे कमरे को रोशन कर देता है, उसी तरह जिओ नाम रत्न अज्ञानता के अंधेरे को दूर कर देता है। यह कोई साधारण दौलत नहीं, बल्कि वह रूहानी पूँजी है जो कभी खत्म नहीं होती। प्रभु का नाम केवल जीभ से जपने तक पहाडा सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसेमनमें बसाना जरूरी है। जब ईश्वर की याद दिल की गहराइयों में समा जाती है, तो qT मनुष्य का स्वभाव और विचार बदलने लगते हैं। उसके जीवन में ठहराव और संतोष आ जाता है।दुनिया की वस्तुएँ हमें कुछ बाबा सुख दे सकती हैं, लेकिन स्थायी आनंद केवल लिए  समय के नाम के स्मरण से ही संभव है। जब परमात्मा का नाम मन में U होता है॰ तो इंसान प्रतिकूल परिस्थितियों (ठोकरों ) में भी डगमगाता नहीं है, क्योंकि उसे असली कर्ता पर भरोसा होता 8 - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा भीड़ तुम जैसी चालाक में शोर मॅचाकर अपनी जगह बनाने की कोशिश जरूर कर सकती हो, लेकिन तुम्हारा आधार खोखला है ಞ तुम के कंधों का इस्तेमाल तो कर सकती हो पर कभी सच्चा सम्मान कभी भी नहीं पाऊँगी..!! एकसाफ दिल इंसान लिए के उसकी सबसे बड़ी दौलत उसका सुकून है, उसको अपनी काबिलियत किसी को साबित करने की जिरूरत नहीं पड़ती तुम क्या जनों समय और   तुम्हारी बुरी नीयत खुद तुम्हारा सब कुछ सा़फ कर देगी...!! बुरी नियत' तुम्हारी বৃব্ধ মীসব্ধ বী নফ্ক ৯ তী ওঁজ ही अंदर इंसान को खोखला कर देती है॰ याद रखना मेरी बात अंत में सिर्फ वही बचता हैजो सच्चा और ईमानदार होता है...!! मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा भीड़ तुम जैसी चालाक में शोर मॅचाकर अपनी जगह बनाने की कोशिश जरूर कर सकती हो, लेकिन तुम्हारा आधार खोखला है ಞ तुम के कंधों का इस्तेमाल तो कर सकती हो पर कभी सच्चा सम्मान कभी भी नहीं पाऊँगी..!! एकसाफ दिल इंसान लिए के उसकी सबसे बड़ी दौलत उसका सुकून है, उसको अपनी काबिलियत किसी को साबित करने की जिरूरत नहीं पड़ती तुम क्या जनों समय और   तुम्हारी बुरी नीयत खुद तुम्हारा सब कुछ सा़फ कर देगी...!! बुरी नियत' तुम्हारी বৃব্ধ মীসব্ধ বী নফ্ক ৯ তী ওঁজ ही अंदर इंसान को खोखला कर देती है॰ याद रखना मेरी बात अंत में सिर्फ वही बचता हैजो सच्चा और ईमानदार होता है...!! - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - पुत्तर अपने हृदय के अंदर मोह सिर्फ उस परमात्मा @ೂ दे प्रति ही रख जो एथे और ओथे दोनों जहन विच तेरी बहा नू पकड़ेगा. . !!याद रखी परिस्थितियां बदलते ही अपने पराए हो जाते हैं॰..यह वाक्य उन Tu लिए ' लोगों के' के भरोसे एक आईना है जो दूसरों ' अपनी खुशियाँ ढूंढते हैं। दिल इंसान दा तभी टूटता Hi है जब   कोई बहुत प्यारा चोट पहुँचाता है, तो तब उसका सिर्फ़ दिल ही नहीं टूटता , बल्कि उसके Tu 'भ्रम को भी तोड़ देता है जिसमें वो जी रहे होते हैं...!!  इंसान का अपनी जिन्दगी में गिरना कोई बुरी बात नहीं . लेकिन गिरकर यह समझ लेना कि Guu अब उसको किस पर भरोसा करना है और किस पर नहीं , यही असली जीत है। अब उसके पास वह परख है जिसे दुनिया की कोई भी दौलत नहीं Ji खरीद सकती...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। | पुत्तर अपने हृदय के अंदर मोह सिर्फ उस परमात्मा @ೂ दे प्रति ही रख जो एथे और ओथे दोनों जहन विच तेरी बहा नू पकड़ेगा. . !!याद रखी परिस्थितियां बदलते ही अपने पराए हो जाते हैं॰..यह वाक्य उन Tu लिए ' लोगों के' के भरोसे एक आईना है जो दूसरों ' अपनी खुशियाँ ढूंढते हैं। दिल इंसान दा तभी टूटता Hi है जब   कोई बहुत प्यारा चोट पहुँचाता है, तो तब उसका सिर्फ़ दिल ही नहीं टूटता , बल्कि उसके Tu 'भ्रम को भी तोड़ देता है जिसमें वो जी रहे होते हैं...!!  इंसान का अपनी जिन्दगी में गिरना कोई बुरी बात नहीं . लेकिन गिरकर यह समझ लेना कि Guu अब उसको किस पर भरोसा करना है और किस पर नहीं , यही असली जीत है। अब उसके पास वह परख है जिसे दुनिया की कोई भी दौलत नहीं Ji खरीद सकती...!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय। | - ShareChat
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satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा लिए ' स्कूल हमें अंक' के' तैयार करते हैं, लेकिन जिंदगी हमें लिए ' तैयार करती अस्तित्व' के है। स्कूल में पहले सबक मिलता है और फिर इम्तिहान , लेकिन ज़िंदगी पहले इम्तिहान लेती है और फिर सबक सिखाती है। 'धोखा' खाना दुनिया की सबसे बड़ी डिग्री है, क्योंकि इसके बाद इंसान की आँखें हमेशा के' fag खुल जाती हैं..!! जब तक मौसम सुहाना होता है, हर कोई साथ चलने का वादा करता है। लेकिन जैसे ही आपकी ज़़िंदगी में तूफ़ान आता है, वैसे ही रिश्तों की एक्सपायरी डेट दिखने लगती है। यह सच बहुत तकलीफ देता है कि जिन लोगों के लिए हम दुनिया से लड़ जाते हैं, वही लोग वक्त आने पर सबसे पहले किनारे हो जाते हैं..!! मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा लिए ' स्कूल हमें अंक' के' तैयार करते हैं, लेकिन जिंदगी हमें लिए ' तैयार करती अस्तित्व' के है। स्कूल में पहले सबक मिलता है और फिर इम्तिहान , लेकिन ज़िंदगी पहले इम्तिहान लेती है और फिर सबक सिखाती है। 'धोखा' खाना दुनिया की सबसे बड़ी डिग्री है, क्योंकि इसके बाद इंसान की आँखें हमेशा के' fag खुल जाती हैं..!! जब तक मौसम सुहाना होता है, हर कोई साथ चलने का वादा करता है। लेकिन जैसे ही आपकी ज़़िंदगी में तूफ़ान आता है, वैसे ही रिश्तों की एक्सपायरी डेट दिखने लगती है। यह सच बहुत तकलीफ देता है कि जिन लोगों के लिए हम दुनिया से लड़ जाते हैं, वही लोग वक्त आने पर सबसे पहले किनारे हो जाते हैं..!! - ShareChat
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satnam waheguru ji - जेते बदन सृसटि सभा धरैए आप्रु आपनी बूझ उचारैएा तुम सभही ते रहत निरालख्चा] भैद जानत बेद BR 81741 HoT हे भाई! सृष्टि में जितने भी जीव जंतु या मनुष्य शरीर धारण किए गए हैं, वे सब अपनी अपनी बुद्धि और समझ के अनुसार परमात्मा के स्वरूप का वर्णन करते हैं। यानी हर कोई अपनी क्षमता और लगे ज्ञान के दायरे में रहकर परमात्मा को समझने और पुकारने की कोशिश करता है। जैसे हर कोई अपनी बूझ समझ के अनुसार ईश्वर को पुकारता है, तो इसका मतलब है कि किसी का भी पूर्ण dా ज्ञान नहीं है। परमात्मा सबकी परिभाषाओं से बहुत बड़ा है। लेकिन वास्तविकता यह है कि परमात्मा  इन सबसे निरालम अलग हैंl वह किसी बंधन में नहीं हैं। वेदों के रहस्य को जानने वाले विद्वान और दुनिया के बड़़े ्बड़े ज्ञानी भी यही मानते हैं कि परमात्मा का भाणा कोई अंत पाना असंभव है, परमात्मा सबके भीतर होकर भी सबसे न्यारे हैं। वह हम सबके बहुत करीब है, हमारे हर कर्म को जानता है, विकारों या माया के बंधनों से अछूता है। जैसे सूर्य लेकिन वह ' हमारे  की रोशनी कीचड़ पर भी पड़ती है, पर कीचड़ सूर्य को गंदा नहीं कर सकता | जेते बदन सृसटि सभा धरैए आप्रु आपनी बूझ उचारैएा तुम सभही ते रहत निरालख्चा] भैद जानत बेद BR 81741 HoT हे भाई! सृष्टि में जितने भी जीव जंतु या मनुष्य शरीर धारण किए गए हैं, वे सब अपनी अपनी बुद्धि और समझ के अनुसार परमात्मा के स्वरूप का वर्णन करते हैं। यानी हर कोई अपनी क्षमता और लगे ज्ञान के दायरे में रहकर परमात्मा को समझने और पुकारने की कोशिश करता है। जैसे हर कोई अपनी बूझ समझ के अनुसार ईश्वर को पुकारता है, तो इसका मतलब है कि किसी का भी पूर्ण dా ज्ञान नहीं है। परमात्मा सबकी परिभाषाओं से बहुत बड़ा है। लेकिन वास्तविकता यह है कि परमात्मा  इन सबसे निरालम अलग हैंl वह किसी बंधन में नहीं हैं। वेदों के रहस्य को जानने वाले विद्वान और दुनिया के बड़़े ्बड़े ज्ञानी भी यही मानते हैं कि परमात्मा का भाणा कोई अंत पाना असंभव है, परमात्मा सबके भीतर होकर भी सबसे न्यारे हैं। वह हम सबके बहुत करीब है, हमारे हर कर्म को जानता है, विकारों या माया के बंधनों से अछूता है। जैसे सूर्य लेकिन वह ' हमारे  की रोशनी कीचड़ पर भी पड़ती है, पर कीचड़ सूर्य को गंदा नहीं कर सकता | - ShareChat
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satnam waheguru ji - इहु जगु सचै की है कोठड़ी सचे का विचि वासु।Iइकन्हा समाइ लए इकन्हा हुकमि करे विणासुI। हुकमे अर्थः हम जिस दुनिया में रह रहे हैं, उसे तुच्छ न समझें। यदि यह मै तेरा ईश्वर की कोठड़ी है। यह संसार उस सच्चे परमात्मा की रहने जग वाली एक कोठरी या कक्ष है और वह सच्चा परमात्मा स्वयं इस qR संसार के भीतर निवास करता है, तो हमारा हर कर्म उस मालिक की 3 उपस्थिति में हो रहा है। संसार केवल माया या झूठा है। यदि परमात्मा स्वयं इसमें बसता है, तो यह संसार पवित्र है। यह परमात्मा পঙ্াভা #Huఢ का ' प्रकट रूप है। जैसे कलाकार अपनी कला होता है, वैसे ही अकाल पुरख अपनी सृष्टि के कण ्कण में मौजूद है। वह वाले अपनी मर्जी (हुकम ) से वह कुछ जीवों को अपने आप में लीन कर लेता है यानी उन्हें मुक्ति या नाम की प्राप्ति करा देता है और अपने ही IqI हुकम से वह कुछ को माया के विकारों में नष्ट होने देता है।सब कुछ Gt उसकी रज़ा में हो रहा है। इंसान के हाथ में केवल प्रयास और अरदास है, लेकिन अंतिम कृपा और निर्णय उस सच्चे का ही है। इहु जगु सचै की है कोठड़ी सचे का विचि वासु।Iइकन्हा समाइ लए इकन्हा हुकमि करे विणासुI। हुकमे अर्थः हम जिस दुनिया में रह रहे हैं, उसे तुच्छ न समझें। यदि यह मै तेरा ईश्वर की कोठड़ी है। यह संसार उस सच्चे परमात्मा की रहने जग वाली एक कोठरी या कक्ष है और वह सच्चा परमात्मा स्वयं इस qR संसार के भीतर निवास करता है, तो हमारा हर कर्म उस मालिक की 3 उपस्थिति में हो रहा है। संसार केवल माया या झूठा है। यदि परमात्मा स्वयं इसमें बसता है, तो यह संसार पवित्र है। यह परमात्मा পঙ্াভা #Huఢ का ' प्रकट रूप है। जैसे कलाकार अपनी कला होता है, वैसे ही अकाल पुरख अपनी सृष्टि के कण ्कण में मौजूद है। वह वाले अपनी मर्जी (हुकम ) से वह कुछ जीवों को अपने आप में लीन कर लेता है यानी उन्हें मुक्ति या नाम की प्राप्ति करा देता है और अपने ही IqI हुकम से वह कुछ को माया के विकारों में नष्ट होने देता है।सब कुछ Gt उसकी रज़ा में हो रहा है। इंसान के हाथ में केवल प्रयास और अरदास है, लेकिन अंतिम कृपा और निर्णय उस सच्चे का ही है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - कहूँ फूल राजा ह्वै बैठा कहूँ सिमटि भिूियो संकर इकैठाा दिखाइ अर्चभवा सगरी सृसटि आदि जुगादि संरूप सुर्यभवा #గా हे भाई! परमात्मा एक खिले हुए फूल की तरह सुंदर और राजा के समान वैभव के साथ रैीन किहासन वही बहै अर पर बैठा हुआ भिखारी प्रतीत होता है। दुनिया की श्मशान में बैठे वैँरागी के सन्नाटे में भी वही है।जो संसार fsrat को त्याग कर अपनी आत्मा में सिमट कर ध्यानमग्न हो जाते हैं।भोग भी वही है और योग भी वही है। जैसे कोई পঙ্াভা जादूगर एक ही धागे से कई तरह के खेल दिखाता है॰ वैसे ही एक ही नूर (ईश्वर ने हज़ारों रूप धारण कर रखे हैं। वाले शुरू नहीं हुआ था और वह परमात्मा तब भी था जब समय अब भी है जब से युगों की गणना शुरू हुई है। वहू राजा के बाबा रूप में शासन भी कॅर रहा है और योगी के रूप में समाधि में भी है। पूरी सृष्टि उसी का एक चमत्कारिक विस्तार है। তীী वह ईश्वर आदि (शुरुआत से है॰ जुगादि (युगों की शुरुआत से है औरँ  स्वयंभू अपने आप से उत्पन्न है। उँसका कोई जन्मदाता नही है, वह सदैव से अस्तित्व में है और स्वयं ही प्रकाशमान है। कहूँ फूल राजा ह्वै बैठा कहूँ सिमटि भिूियो संकर इकैठाा दिखाइ अर्चभवा सगरी सृसटि आदि जुगादि संरूप सुर्यभवा #గా हे भाई! परमात्मा एक खिले हुए फूल की तरह सुंदर और राजा के समान वैभव के साथ रैीन किहासन वही बहै अर पर बैठा हुआ भिखारी प्रतीत होता है। दुनिया की श्मशान में बैठे वैँरागी के सन्नाटे में भी वही है।जो संसार fsrat को त्याग कर अपनी आत्मा में सिमट कर ध्यानमग्न हो जाते हैं।भोग भी वही है और योग भी वही है। जैसे कोई পঙ্াভা जादूगर एक ही धागे से कई तरह के खेल दिखाता है॰ वैसे ही एक ही नूर (ईश्वर ने हज़ारों रूप धारण कर रखे हैं। वाले शुरू नहीं हुआ था और वह परमात्मा तब भी था जब समय अब भी है जब से युगों की गणना शुरू हुई है। वहू राजा के बाबा रूप में शासन भी कॅर रहा है और योगी के रूप में समाधि में भी है। पूरी सृष्टि उसी का एक चमत्कारिक विस्तार है। তীী वह ईश्वर आदि (शुरुआत से है॰ जुगादि (युगों की शुरुआत से है औरँ  स्वयंभू अपने आप से उत्पन्न है। उँसका कोई जन्मदाता नही है, वह सदैव से अस्तित्व में है और स्वयं ही प्रकाशमान है। - ShareChat
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satnam waheguru ji - राम नाम सारु रसु पीवैIl उसु पंडित कै उपदेसि जगु जीवै$l 96 कीकथा हिरदै बसावैग हरि सी पंडितु फिरि जोनि न आवै$ हे भाई! सच्चा पंडित वह है जो केवल नाम का जाप ही नहीं करता , HT बल्कि राम ना्म के तत्व (सारको पहचान कर उसके रस को वैसे ही वह नाम रस पीता है। जैसे प्यासा पानी पीकर तृप्त होता में डूबा रहता है। ऐसे पंडित केउपदेश में इतनी शक्ति और पवित्रता గౌ होती है कि उसे सुनकर सारा जिगत जी उठता है। यहाँ जीने का अर्थ शारीरिक जीवन नहीं, बल्कि आत्मिक रूप से जाग जाना और 437' विकारों ' होना है।वह ईश्वरकी महिमा और कथा को केवल मुख से नहीं कहता , बल्कि उसे अपने हृदय में बसा लेता है। उसके शब्दों और उसके चरित्र में कोई अंतर नहीं होता। वह जन्म ्मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। वह फिरि जोनि न आवै यानी वह दोबारा योनियों के चक्कर में नहीं पड़ता और परमात्मा में लीन हयो जाता हे। भाणा है कि गुरु सहिब जी ने कर्मकांड और खाली शब्द का सारयह किताबी ज्ञान का खंडन किया है वे समझाते हैं कि सच्चे ज्ञानी का के लिए प्रकाश स्तंभ होता है ज्ञान उसके दिमाग में जीवन दूसरों ; नहीं, उसके हृदय में बसना चाहिए। राम नाम सारु रसु पीवैIl उसु पंडित कै उपदेसि जगु जीवै$l 96 कीकथा हिरदै बसावैग हरि सी पंडितु फिरि जोनि न आवै$ हे भाई! सच्चा पंडित वह है जो केवल नाम का जाप ही नहीं करता , HT बल्कि राम ना्म के तत्व (सारको पहचान कर उसके रस को वैसे ही वह नाम रस पीता है। जैसे प्यासा पानी पीकर तृप्त होता में डूबा रहता है। ऐसे पंडित केउपदेश में इतनी शक्ति और पवित्रता గౌ होती है कि उसे सुनकर सारा जिगत जी उठता है। यहाँ जीने का अर्थ शारीरिक जीवन नहीं, बल्कि आत्मिक रूप से जाग जाना और 437' विकारों ' होना है।वह ईश्वरकी महिमा और कथा को केवल मुख से नहीं कहता , बल्कि उसे अपने हृदय में बसा लेता है। उसके शब्दों और उसके चरित्र में कोई अंतर नहीं होता। वह जन्म ्मरण के चक्र से मुक्त हो जाता है। वह फिरि जोनि न आवै यानी वह दोबारा योनियों के चक्कर में नहीं पड़ता और परमात्मा में लीन हयो जाता हे। भाणा है कि गुरु सहिब जी ने कर्मकांड और खाली शब्द का सारयह किताबी ज्ञान का खंडन किया है वे समझाते हैं कि सच्चे ज्ञानी का के लिए प्रकाश स्तंभ होता है ज्ञान उसके दिमाग में जीवन दूसरों ; नहीं, उसके हृदय में बसना चाहिए। - ShareChat