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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - मति विचि रतन जवाहर माणिक जे इक गुर की सिख सुणी।।गुरा इक देहि बुझाई।I सभना जीआ का इकु दाता सो मै विसरि न UIకేII अर्थः यदि कोई मनुष्य गुरु की केवल एक॰ शिक्षाको भी ध्यान मैतेरा से सुन ले और उसे जीवन में उतार ले, तो उसकी बुद्धि के भीतर ऊँचे और सुच्चे विचार रूपी रत्न, जवाहर और माणिक प्रकट हो भिखारी जाते हैं। गुरु की शिक्षा वह चाबी है जो हमारे भीतर छिपे 137 के खजाने को खोल देती है। फिर मनुष्य आत्मिक गुणों ' तकलीफ देने वालों से विचलित नहीं होता। हे गुरु! मुझे बस यह एक समझ सूझ बूझ दे दो, जो परमात्मा संसार के सभी जीवों 46TST को दातें देने वाला है, वह मुझे कभी भी॰ भूले नहीं। जब इंसान বাল को यह याद रहता है कि देने वाला केवल वह' एक है, तो वह इंसानों वे अपने हों या पराये से उम्मीदें रखना छोड़ देता है बाबा फिर मनुष्य को दुःख भी सुख जैसा लगने लगता है क्योंकि उसको पता होता है कि उसका रक्षक सतिगुरु सजणु सदा साथ 7 है।मनुष्य को यह समझ आ जाती हैं कि ये सब उस 'दाते' का ही खेल है उसके मन में ' निर्वैर बिना किसी से दुश्मनी के रहने की शक्ति आती है। मति विचि रतन जवाहर माणिक जे इक गुर की सिख सुणी।।गुरा इक देहि बुझाई।I सभना जीआ का इकु दाता सो मै विसरि न UIకేII अर्थः यदि कोई मनुष्य गुरु की केवल एक॰ शिक्षाको भी ध्यान मैतेरा से सुन ले और उसे जीवन में उतार ले, तो उसकी बुद्धि के भीतर ऊँचे और सुच्चे विचार रूपी रत्न, जवाहर और माणिक प्रकट हो भिखारी जाते हैं। गुरु की शिक्षा वह चाबी है जो हमारे भीतर छिपे 137 के खजाने को खोल देती है। फिर मनुष्य आत्मिक गुणों ' तकलीफ देने वालों से विचलित नहीं होता। हे गुरु! मुझे बस यह एक समझ सूझ बूझ दे दो, जो परमात्मा संसार के सभी जीवों 46TST को दातें देने वाला है, वह मुझे कभी भी॰ भूले नहीं। जब इंसान को यह याद रहता है कि देने वाला केवल वह' एक है, तो वह इंसानों वे अपने हों या पराये से उम्मीदें रखना छोड़ देता है बाबा फिर मनुष्य को दुःख भी सुख जैसा लगने लगता है क्योंकि उसको पता होता है कि उसका रक्षक सतिगुरु सजणु सदा साथ 7 है।मनुष्य को यह समझ आ जाती हैं कि ये सब उस 'दाते' का ही खेल है उसके मन में ' निर्वैर बिना किसी से दुश्मनी के रहने की शक्ति आती है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - मंनै सुरति होवै मनि बुधि।।मंनै सगल भवण की सुधि।।मनै मुहि चोटा ना खाइ।।मनै जम कै साथि न जाइ।। মীঠা अर्थः हे भाई! परमात्मा के नाम पर अटूट निश्चय करने से मनुष्य की जागृत हो जाती है और मन में श्रेष्ठ बुद्धि का प्रकाश होता है। सुरति ऐसी अवस्था में व्यक्ति को समस्त ब्रह्मांड और सृष्टि के रहस्यों का 77 और सूझ-बूझ प्राप्त हो जाती है। उसे कही बाहर भटकने की ज्ञान ज़रूरत नहीं रहती। नाम को मानने वाला व्यक्ति जीवन के संघर्षों में मुंह पर चोट नहीं खाता, यानी वह अपमान और विकारों की मार से तेरा है, उसे मृत्यु का बच जाता है। जिसने सत्य को स्वीकार कर लिया भय जम का साथ नहीं सताता , क्योंकि वह जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर आत्मिक शांति पा लेता है। यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि भाणा असली ताकत किसी बाहरी समर्थन में नहीं, बल्कि मन के भीतर उस सत्य को स्वीकार करने में है। जब विश्वास गहरा होता है, तो न दुनिया का डर रहता है और न ही मौत का। मंनै सुरति होवै मनि बुधि।।मंनै सगल भवण की सुधि।।मनै मुहि चोटा ना खाइ।।मनै जम कै साथि न जाइ।। মীঠা अर्थः हे भाई! परमात्मा के नाम पर अटूट निश्चय करने से मनुष्य की जागृत हो जाती है और मन में श्रेष्ठ बुद्धि का प्रकाश होता है। सुरति ऐसी अवस्था में व्यक्ति को समस्त ब्रह्मांड और सृष्टि के रहस्यों का 77 और सूझ-बूझ प्राप्त हो जाती है। उसे कही बाहर भटकने की ज्ञान ज़रूरत नहीं रहती। नाम को मानने वाला व्यक्ति जीवन के संघर्षों में मुंह पर चोट नहीं खाता, यानी वह अपमान और विकारों की मार से तेरा है, उसे मृत्यु का बच जाता है। जिसने सत्य को स्वीकार कर लिया भय जम का साथ नहीं सताता , क्योंकि वह जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर आत्मिक शांति पा लेता है। यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि भाणा असली ताकत किसी बाहरी समर्थन में नहीं, बल्कि मन के भीतर उस सत्य को स्वीकार करने में है। जब विश्वास गहरा होता है, तो न दुनिया का डर रहता है और न ही मौत का। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - खामोशी लेगी बदला मेरा ताक झांक करने में लगी हो में तुम ' मेरी जिन्दगी ' पहले अपने घंर की लंका दहन पर ध्यान दो..!! उम्र भर डरता रहा कि किसी भी मोड पर मेरा तुम संग साथ ना छूटे लेकिन जब में खुद ही अपने आप को खो बैठा तो किसी ने भी मेरी तरफ ध्यान तक नही दिया कभी..! ! शतरंज़ हमें सिखाता है कि कभी कभी जीतने के लिए एक कदम पीछे हटना  तरह जीवन में भी शतरंज की तरह এভনা ঔ ' इसी ' हर चाल चलने का एक समय होता है..!! मेरा शांत मन ही बेहतर रणनीति बना सकता था रिश्तों को निभाने की क्योकिं में जनता था धैर्य रखने वाला व्यक्ति केवल अगली चाल नहीं, बल्कि आने वाले कई पड़ावों के बारे में सोच पाता है..!! अपनी रिश्तों की इस उलझी हुई बिसात पर ' मुझको  जिन्दगी की अगली चाल खुद की शांति और स्वाभिमान के लिए ही चलनी चाहिए, शायद यह मेरी जिन्दगी का वही ' मोड़ है जहाँ दूसरों मुझको ' के बजाय खुद के जीवन की 'रणनीति पर ध्यान देने की जरूरत है..!! खामोशी लेगी बदला मेरा ताक झांक करने में लगी हो में तुम ' मेरी जिन्दगी ' पहले अपने घंर की लंका दहन पर ध्यान दो..!! उम्र भर डरता रहा कि किसी भी मोड पर मेरा तुम संग साथ ना छूटे लेकिन जब में खुद ही अपने आप को खो बैठा तो किसी ने भी मेरी तरफ ध्यान तक नही दिया कभी..! ! शतरंज़ हमें सिखाता है कि कभी कभी जीतने के लिए एक कदम पीछे हटना  तरह जीवन में भी शतरंज की तरह এভনা ঔ ' इसी ' हर चाल चलने का एक समय होता है..!! मेरा शांत मन ही बेहतर रणनीति बना सकता था रिश्तों को निभाने की क्योकिं में जनता था धैर्य रखने वाला व्यक्ति केवल अगली चाल नहीं, बल्कि आने वाले कई पड़ावों के बारे में सोच पाता है..!! अपनी रिश्तों की इस उलझी हुई बिसात पर ' मुझको  जिन्दगी की अगली चाल खुद की शांति और स्वाभिमान के लिए ही चलनी चाहिए, शायद यह मेरी जिन्दगी का वही ' मोड़ है जहाँ दूसरों मुझको ' के बजाय खुद के जीवन की 'रणनीति पर ध्यान देने की जरूरत है..!! - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - & "g7' ಪತತ' पहुँचाने का भाव रखते हैं, तो सबसे जब हम किसी पहले हमारी अपनी मानसिक शांति भंग होती है। यानी पाप का दंड Tw उसी क्षण मिलना शुरू हो जाता है जब विचार मन में आता है..!! भी हम किसी को दुख पहुंचाना चाहते हैं है पाप? दूसरे | ٩ जब विचार में या कृत्य में, तभी पाप घटित हो जाता है।जो व्यक्ति दूसरे Hi को दुख पहुंचाना चाहता है, कृत्य में या भाव में, वह पाप में ग्रसित हो जाता है। जो व्यक्ति इस पृथ्वी पर किसी को भी दुख नहीं Tu पहुंचाना चाहता , कृत्य में या विचार में, वह पाप के बाहर हो जाता है। अगर मन में किसी का बुरा करने की इच्छा आ गई, तो भले ही कृत्य न आध्यात्मिक स्तर पर वह ऊर्जा नकारात्मक हो गई। Gu हुआ हो, लेकिन विचार ने अपना प्रभाव तुम पर छोड़ दिया। पुत्तर मेरी बातों का मूल मंत्र यही है कि अहिंसा और किसी का 0 आत्म सम्मान " ही जीवन का सही मार्ग है। जब आप किसी का बुरा नहीं चाहते , तो आप पाप से मुक्त हैं और तुमको उसी धैर्य का उपयोग खुद को फिर से पाने के लिए करना चाहिए..! !अँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय! ! & "g7' ಪತತ' पहुँचाने का भाव रखते हैं, तो सबसे जब हम किसी पहले हमारी अपनी मानसिक शांति भंग होती है। यानी पाप का दंड Tw उसी क्षण मिलना शुरू हो जाता है जब विचार मन में आता है..!! भी हम किसी को दुख पहुंचाना चाहते हैं है पाप? दूसरे | ٩ जब विचार में या कृत्य में, तभी पाप घटित हो जाता है।जो व्यक्ति दूसरे Hi को दुख पहुंचाना चाहता है, कृत्य में या भाव में, वह पाप में ग्रसित हो जाता है। जो व्यक्ति इस पृथ्वी पर किसी को भी दुख नहीं Tu पहुंचाना चाहता , कृत्य में या विचार में, वह पाप के बाहर हो जाता है। अगर मन में किसी का बुरा करने की इच्छा आ गई, तो भले ही कृत्य न आध्यात्मिक स्तर पर वह ऊर्जा नकारात्मक हो गई। Gu हुआ हो, लेकिन विचार ने अपना प्रभाव तुम पर छोड़ दिया। पुत्तर मेरी बातों का मूल मंत्र यही है कि अहिंसा और किसी का 0 आत्म सम्मान " ही जीवन का सही मार्ग है। जब आप किसी का बुरा नहीं चाहते , तो आप पाप से मुक्त हैं और तुमको उसी धैर्य का उपयोग खुद को फिर से पाने के लिए करना चाहिए..! !अँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय! ! - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - @ पुत्तर जीवन में कभी भी किसी की परीक्षाएं मत लेना और दूसरों की मिल भी जाएगा , वह कभी तुम्हारा नहीं परीक्षाओं से जो कुछ तुम्हें के अनुभव कभी तुम्हारे अनुभव नहीं हो सकते। जीवन होगा। दूसरे Tu की आत्यंतिक रहस्यमयता तो उसी के सामने प्रगट होती है॰ जो अपने अपना परीक्षा स्थल बना लेता, जो अपने को ही अपनी प्रयोग क बना लेता। अगर तुम इसे गहराई से समझें, तो इसमें से बहुत ही ؟ Hi क्रांतिकारी पहलू सामने आते हैं। हम अक्सर की गलतियों या दूसरों ' उनकी सफलताओं को पढ़कर , सुनकर उन्हें अपना ज्ञान मान लेते हैं। लेकिन उधार लिया हुआ सच, सच नहीं होता..!!किसी दूसरे के Tu जीवन की परीक्षा का परिणाम आपके लिए केवल एक 'सूचना' (nformation) है, बोध ( Wisdom) नहीं। जब तक आग आपकी उंगली को न छुए, आपको तपन का असली Guu दूसरों की कमियां निकालना आसान है अनुभव नहीं हा होगा.. लेकिन अपनी ईर्ष्या, अपने क्रोध और अपने अहंकार को प्रयोगशाला में रखकर देखना ही असली 'परीक्षा' है.॰!!जब तुम आप खुद को ही Ji बना लेते हैं, तो तुम अपनी आदतों के गुलाम 'Subject' (f744) नहीं रहते, बल्कि उनके द्रष्टा' (Observer) बन जाते हैं..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।। @ पुत्तर जीवन में कभी भी किसी की परीक्षाएं मत लेना और दूसरों की मिल भी जाएगा , वह कभी तुम्हारा नहीं परीक्षाओं से जो कुछ तुम्हें के अनुभव कभी तुम्हारे अनुभव नहीं हो सकते। जीवन होगा। दूसरे Tu की आत्यंतिक रहस्यमयता तो उसी के सामने प्रगट होती है॰ जो अपने अपना परीक्षा स्थल बना लेता, जो अपने को ही अपनी प्रयोग क बना लेता। अगर तुम इसे गहराई से समझें, तो इसमें से बहुत ही ؟ Hi क्रांतिकारी पहलू सामने आते हैं। हम अक्सर की गलतियों या दूसरों ' उनकी सफलताओं को पढ़कर , सुनकर उन्हें अपना ज्ञान मान लेते हैं। लेकिन उधार लिया हुआ सच, सच नहीं होता..!!किसी दूसरे के Tu जीवन की परीक्षा का परिणाम आपके लिए केवल एक 'सूचना' (nformation) है, बोध ( Wisdom) नहीं। जब तक आग आपकी उंगली को न छुए, आपको तपन का असली Guu दूसरों की कमियां निकालना आसान है अनुभव नहीं हा होगा.. लेकिन अपनी ईर्ष्या, अपने क्रोध और अपने अहंकार को प्रयोगशाला में रखकर देखना ही असली 'परीक्षा' है.॰!!जब तुम आप खुद को ही Ji बना लेते हैं, तो तुम अपनी आदतों के गुलाम 'Subject' (f744) नहीं रहते, बल्कि उनके द्रष्टा' (Observer) बन जाते हैं..!! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय।। - ShareChat