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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - 6R रसु नामु नपाइआ ते भागहीण जम हरि हरि पासिपाजो सतिगुर सरणि संगति नही आए। ध्रिगु जीवे fergr ٤٨٩٨٥ मै तेरा अर्थः जिन्होंने परमात्मा के नाम का आनंद या रस प्राप्त नहीं किया, वे बड़े दुर्भाग्यशाली हैं। वे अंततः यम मृत्यु के दूत के वश में जाते हैं यानी भिखारी वे जन्म मरण के चक्र में फंसे रहते हैंl जो मनुष्य सच्चे गुरु की शरण और साधु संगत में नहीं आए॰उनका जीना धिक्कार है और उनके जिओ जीवन जीने के ढंग को भी धिक्कार है क्योंकि उन्होंने अपना अनमोल पहाडा मनुष्य जीवन व्यर्थ गँवा दिया। हे भाई।मृनुष्य जीवन का मुख्य उद्देश्य परमात्मा से जुड़ना और सत्संग करना है। संगत वह स्थान है जहाँ मन वाले का मैल धुलता है और हरि रस की प्राप्ति होती है।जिन पर परमात्मा की कृपा  होती है, केवल वही सत्संग में आते हैंl जो व्यक्ति इस दुनिया बाबा के मोह माया में फंसकर नाम सिमरन और गुरु की शरण से दूर रहता তী उसका जीवन व्यर्थ है। यह वाणी हमें चेतावनी देती है कि हम समय रहते सही मार्ग अर्थात सच्चे मार्ग पर चलें। 6R रसु नामु नपाइआ ते भागहीण जम हरि हरि पासिपाजो सतिगुर सरणि संगति नही आए। ध्रिगु जीवे fergr ٤٨٩٨٥ मै तेरा अर्थः जिन्होंने परमात्मा के नाम का आनंद या रस प्राप्त नहीं किया, वे बड़े दुर्भाग्यशाली हैं। वे अंततः यम मृत्यु के दूत के वश में जाते हैं यानी भिखारी वे जन्म मरण के चक्र में फंसे रहते हैंl जो मनुष्य सच्चे गुरु की शरण और साधु संगत में नहीं आए॰उनका जीना धिक्कार है और उनके जिओ जीवन जीने के ढंग को भी धिक्कार है क्योंकि उन्होंने अपना अनमोल पहाडा मनुष्य जीवन व्यर्थ गँवा दिया। हे भाई।मृनुष्य जीवन का मुख्य उद्देश्य परमात्मा से जुड़ना और सत्संग करना है। संगत वह स्थान है जहाँ मन वाले का मैल धुलता है और हरि रस की प्राप्ति होती है।जिन पर परमात्मा की कृपा  होती है, केवल वही सत्संग में आते हैंl जो व्यक्ति इस दुनिया बाबा के मोह माया में फंसकर नाम सिमरन और गुरु की शरण से दूर रहता তী उसका जीवन व्यर्थ है। यह वाणी हमें चेतावनी देती है कि हम समय रहते सही मार्ग अर्थात सच्चे मार्ग पर चलें। - ShareChat