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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - देदै्भगहि सहसा छूणा सोभ करे र्ससासु[ा खाराबा वेकाराा चोरा जारातै कूड़िआरा  इकिहौदा खाइ चलहि ऐथाऊ तिना भि काई कासा अर्थः जीव परमात्मा से उसकी दी हुई बख्शिशों को' fawa Hat करते हैं लेकिन वह और ज्यादा माँगते रहते है। ' तृष्णा कभी खत्म नहीं होती। परमात्मा दे रहा है, पर 7 मनुष्य की माँग बढ़ती ही जा रही है। संसार में हर तरह के लोग हैं चोर झूठ बोलने वाले। इस सृष्टि में सज्जन ही नहीं, बल्कि दुर्जन और अपराधी भी पल रहे हैं और గా परमात्मा सबको रिज़क दे रहा है। कई लोग ऐसे हैं संसार में जो कुछ उनके पास है उसे खा-पीकर और भोगकर चले जाते हैं।जो केवल खाने पीने और भोगने में ही UII जीवन व्यतीत कर देते हैं, वेजीवन के असली मकसद नाम सिमरन और सेवा को भूल जाते हैं। परमात्मा की रचना असीमित है। हर जगह, हर रूप में उसी की सत्ता काम कर रही है। भाई!परमात्मा सबको दे रहा है, चाहे वह चोर हो या साधु। लेकिन इंसान केवल माँगने में लगा लेकिन मनुष्य का असली कार कार्य तो उस परमात्मा के हुक्म को पहचानना है। देदै्भगहि सहसा छूणा सोभ करे र्ससासु[ा खाराबा वेकाराा चोरा जारातै कूड़िआरा  इकिहौदा खाइ चलहि ऐथाऊ तिना भि काई कासा अर्थः जीव परमात्मा से उसकी दी हुई बख्शिशों को' fawa Hat करते हैं लेकिन वह और ज्यादा माँगते रहते है। ' तृष्णा कभी खत्म नहीं होती। परमात्मा दे रहा है, पर 7 मनुष्य की माँग बढ़ती ही जा रही है। संसार में हर तरह के लोग हैं चोर झूठ बोलने वाले। इस सृष्टि में सज्जन ही नहीं, बल्कि दुर्जन और अपराधी भी पल रहे हैं और గా परमात्मा सबको रिज़क दे रहा है। कई लोग ऐसे हैं संसार में जो कुछ उनके पास है उसे खा-पीकर और भोगकर चले जाते हैं।जो केवल खाने पीने और भोगने में ही UII जीवन व्यतीत कर देते हैं, वेजीवन के असली मकसद नाम सिमरन और सेवा को भूल जाते हैं। परमात्मा की रचना असीमित है। हर जगह, हर रूप में उसी की सत्ता काम कर रही है। भाई!परमात्मा सबको दे रहा है, चाहे वह चोर हो या साधु। लेकिन इंसान केवल माँगने में लगा लेकिन मनुष्य का असली कार कार्य तो उस परमात्मा के हुक्म को पहचानना है। - ShareChat