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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - मंनै सुरति होवै मनि बुधि।।मंनै सगल भवण की सुधि।।मनै मुहि चोटा ना खाइ।।मनै जम कै साथि न जाइ।। মীঠা अर्थः हे भाई! परमात्मा के नाम पर अटूट निश्चय करने से मनुष्य की जागृत हो जाती है और मन में श्रेष्ठ बुद्धि का प्रकाश होता है। सुरति ऐसी अवस्था में व्यक्ति को समस्त ब्रह्मांड और सृष्टि के रहस्यों का 77 और सूझ-बूझ प्राप्त हो जाती है। उसे कही बाहर भटकने की ज्ञान ज़रूरत नहीं रहती। नाम को मानने वाला व्यक्ति जीवन के संघर्षों में मुंह पर चोट नहीं खाता, यानी वह अपमान और विकारों की मार से तेरा है, उसे मृत्यु का बच जाता है। जिसने सत्य को स्वीकार कर लिया भय जम का साथ नहीं सताता , क्योंकि वह जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर आत्मिक शांति पा लेता है। यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि भाणा असली ताकत किसी बाहरी समर्थन में नहीं, बल्कि मन के भीतर उस सत्य को स्वीकार करने में है। जब विश्वास गहरा होता है, तो न दुनिया का डर रहता है और न ही मौत का। मंनै सुरति होवै मनि बुधि।।मंनै सगल भवण की सुधि।।मनै मुहि चोटा ना खाइ।।मनै जम कै साथि न जाइ।। মীঠা अर्थः हे भाई! परमात्मा के नाम पर अटूट निश्चय करने से मनुष्य की जागृत हो जाती है और मन में श्रेष्ठ बुद्धि का प्रकाश होता है। सुरति ऐसी अवस्था में व्यक्ति को समस्त ब्रह्मांड और सृष्टि के रहस्यों का 77 और सूझ-बूझ प्राप्त हो जाती है। उसे कही बाहर भटकने की ज्ञान ज़रूरत नहीं रहती। नाम को मानने वाला व्यक्ति जीवन के संघर्षों में मुंह पर चोट नहीं खाता, यानी वह अपमान और विकारों की मार से तेरा है, उसे मृत्यु का बच जाता है। जिसने सत्य को स्वीकार कर लिया भय जम का साथ नहीं सताता , क्योंकि वह जन्म मरण के चक्र से मुक्त होकर आत्मिक शांति पा लेता है। यह पंक्तियाँ स्पष्ट करती हैं कि भाणा असली ताकत किसी बाहरी समर्थन में नहीं, बल्कि मन के भीतर उस सत्य को स्वीकार करने में है। जब विश्वास गहरा होता है, तो न दुनिया का डर रहता है और न ही मौत का। - ShareChat