jasbir
ShareChat
click to see wallet page
@tuhit
tuhit
jasbir
@tuhit
मुझे ShareChat पर फॉलो करें!
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा जब भी बातों का सिलसिला तेरे विरुद्ध हो तू अपने स्वार्थ के पीछे गलत को भी सही ठहराने के लिए शब्दों के अर्थ' को ही बदल देती है यानी तेरे लिए नियम अलग और मेरे लिए अलग..!! जितना भी मे तेरे लिए अच्छा कर लू तू हर हाल में कमियाँ मेरी ढूंढ ही लेती है जब की मेरी चुप्पी को ব্ূী ব্রুয়া गलत' समझा जाती है और बोलने मान लेती है..!! खंजर से मिली मुझको चोट से ज्यादा दर्द अपनी टूटी हुई उम्मीद का है जिसको तूने तोड़ दिया.. ! !दर्द इस बात का नहीं है कि वार मुझ पर हुआ, का है कि तुमसे यह उम्मीद बल्कि इस बात नहीं थी मुझको.. ! ! खंजर का घाव शरीर पर दिखता है लेकिन टूटे हुए विश्वास का रूह पर होता है...यह दिखाई नहीं घाव देता, इसलिए इसका दर्द भी अकेले ही सहना पड़ता है..!! मेरी खामोशी लेेगी बदला मेरा जब भी बातों का सिलसिला तेरे विरुद्ध हो तू अपने स्वार्थ के पीछे गलत को भी सही ठहराने के लिए शब्दों के अर्थ' को ही बदल देती है यानी तेरे लिए नियम अलग और मेरे लिए अलग..!! जितना भी मे तेरे लिए अच्छा कर लू तू हर हाल में कमियाँ मेरी ढूंढ ही लेती है जब की मेरी चुप्पी को ব্ূী ব্রুয়া गलत' समझा जाती है और बोलने मान लेती है..!! खंजर से मिली मुझको चोट से ज्यादा दर्द अपनी टूटी हुई उम्मीद का है जिसको तूने तोड़ दिया.. ! !दर्द इस बात का नहीं है कि वार मुझ पर हुआ, का है कि तुमसे यह उम्मीद बल्कि इस बात नहीं थी मुझको.. ! ! खंजर का घाव शरीर पर दिखता है लेकिन टूटे हुए विश्वास का रूह पर होता है...यह दिखाई नहीं घाव देता, इसलिए इसका दर्द भी अकेले ही सहना पड़ता है..!! - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - नमो काल काले।I नमसतसतु दिआलेIl नमसर्त अबरने ।। <2@$> नमसतं अमरने।। RI गुरु गोविंद सिंह जी ने ईश्वर को केवल एक शांत सत्ता के रूप में नहीं , बल्कि एक गतिशील और सामर्थ्यवान शक्ति के भिखारी लिए ' रूप में परिभाषित किया है जो अन्याय के काल' है g और शरणागत के दयालु' है उनकी कोमलता को जिओ दर्शाया है। ईश्वर केवल दंड देने वाला या संहारक नहीं है,बल्कि वह अत्यंत कृपालु और क्षमाशील है।वह जितना 46TST शक्तिशाली है, उतना ही दया का सागर भी है। मनुष्य अक्सर ईश्वर को किसी विशेष रंग,या जातिगत पहचान में वाले बांधने की कोशिश करता है। जब की ईश्वर का कोई भौतिक शरीर या सामाजिक वर्ग नहीं है। जब ईश्वर का कोई @IqT वर्ण नहीं है, तो उसके बनाए इंसानों में श्रेष्ठता या नीचता का भेद व्यर्थ है। परमात्मा जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त है। परमात्मा एक ऐसी सत्ता है जो अत्यंत शक्तिशाली काल का काल होने के बावजूद परम दयालु है, और वह किसी मृत्यु में नहीं बंधा है। भी मानवीय सीमा रंग, जाति, नमो काल काले।I नमसतसतु दिआलेIl नमसर्त अबरने ।। <2@$> नमसतं अमरने।। RI गुरु गोविंद सिंह जी ने ईश्वर को केवल एक शांत सत्ता के रूप में नहीं , बल्कि एक गतिशील और सामर्थ्यवान शक्ति के भिखारी लिए ' रूप में परिभाषित किया है जो अन्याय के काल' है g और शरणागत के दयालु' है उनकी कोमलता को जिओ दर्शाया है। ईश्वर केवल दंड देने वाला या संहारक नहीं है,बल्कि वह अत्यंत कृपालु और क्षमाशील है।वह जितना 46TST शक्तिशाली है, उतना ही दया का सागर भी है। मनुष्य अक्सर ईश्वर को किसी विशेष रंग,या जातिगत पहचान में वाले बांधने की कोशिश करता है। जब की ईश्वर का कोई भौतिक शरीर या सामाजिक वर्ग नहीं है। जब ईश्वर का कोई @IqT वर्ण नहीं है, तो उसके बनाए इंसानों में श्रेष्ठता या नीचता का भेद व्यर्थ है। परमात्मा जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त है। परमात्मा एक ऐसी सत्ता है जो अत्यंत शक्तिशाली काल का काल होने के बावजूद परम दयालु है, और वह किसी मृत्यु में नहीं बंधा है। भी मानवीय सीमा रंग, जाति, - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - सुणिऐ ईंसरु बरमा ईंदुमा सुणिऐ मुखि सालाहण र्मदुमा तनि भेदाा सुणिऐ जोगा gரி सुणिऐ सासत सिम्रिति वेदाा विगासु।। नानकभगता सदा सुणिऐ दूख पाप का नासु।। मीठा अर्थः प्रभु के नाम को सुनने से एक साधारण मनुष्य की अवस्था ऐसी हो जाती है कि वह शिव , ब्रह्मा और इंद्र के समान आध्यात्मिक ऊँचाइयों को प्राप्त कर लेता है।ईश्वर का ध्यान सुनने मात्र से मनुष्य के भीतर दिव्य गुणों ~ का संचार होता है।प्रभु का नाम सुनने से मंद बुरा या नीच विचार वाला व्यक्ति भी अपने मुख से परमात्मा की महिमा का गुणगान करने लगता है। नाम सुनने से योग की युक्तियाँ तरीके और शरीर के रहस्यों आत्मिक भेद तेरा है।मनुष्य को बाहरी आडंबरों की ज़रूरत नहीं ব্ধা সান সাদ ৪ী আনা ' पड़ती , उसे भीतर के सत्य की समझ आ जाती है।समस्त धार्मिक ग्रंथों का के नाम को गहराई से सुनने में समाया हुआ है। ज्ञान उस एक परमात्मा देव जी कहते हैं! कि भक्त हमेशा आनंद में रहते हैं क्योंकि भाणा बाबा नानक नाम सुनने से उनके सभी दुखों और पापों का नाश हो जाता है। इन पंक्तियों का सार यह है कि जब कोई व्यक्ति पूरी एकाग्रता और श्रद्धा के साथ परमात्मा के नाम को अपने भीतर उतारता है॰ तो उसे संसार का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान और पद स्वतः ही प्राप्त हो जाता है। उसे सत्य की समझ के लिए कहीं बाहर भटकने की आवश्यकता नहीं रहती। सुणिऐ ईंसरु बरमा ईंदुमा सुणिऐ मुखि सालाहण र्मदुमा तनि भेदाा सुणिऐ जोगा gரி सुणिऐ सासत सिम्रिति वेदाा विगासु।। नानकभगता सदा सुणिऐ दूख पाप का नासु।। मीठा अर्थः प्रभु के नाम को सुनने से एक साधारण मनुष्य की अवस्था ऐसी हो जाती है कि वह शिव , ब्रह्मा और इंद्र के समान आध्यात्मिक ऊँचाइयों को प्राप्त कर लेता है।ईश्वर का ध्यान सुनने मात्र से मनुष्य के भीतर दिव्य गुणों ~ का संचार होता है।प्रभु का नाम सुनने से मंद बुरा या नीच विचार वाला व्यक्ति भी अपने मुख से परमात्मा की महिमा का गुणगान करने लगता है। नाम सुनने से योग की युक्तियाँ तरीके और शरीर के रहस्यों आत्मिक भेद तेरा है।मनुष्य को बाहरी आडंबरों की ज़रूरत नहीं ব্ধা সান সাদ ৪ী আনা ' पड़ती , उसे भीतर के सत्य की समझ आ जाती है।समस्त धार्मिक ग्रंथों का के नाम को गहराई से सुनने में समाया हुआ है। ज्ञान उस एक परमात्मा देव जी कहते हैं! कि भक्त हमेशा आनंद में रहते हैं क्योंकि भाणा बाबा नानक नाम सुनने से उनके सभी दुखों और पापों का नाश हो जाता है। इन पंक्तियों का सार यह है कि जब कोई व्यक्ति पूरी एकाग्रता और श्रद्धा के साथ परमात्मा के नाम को अपने भीतर उतारता है॰ तो उसे संसार का सर्वश्रेष्ठ ज्ञान और पद स्वतः ही प्राप्त हो जाता है। उसे सत्य की समझ के लिए कहीं बाहर भटकने की आवश्यकता नहीं रहती। - ShareChat
#Eek Tu Hi Guru Ji
Eek Tu Hi Guru Ji - EEK पुत्तर ध्यान में जीने वाला मनुष्य गलती नहीं कर सकता वह जो भी करता है, पूरी तरह करता है; और अगले ही क्षण Tu उससे आगे बढ़ जाता है। वह पीछे मुड़कर नहीं देखता, वह हैनहीं हूनयहव पश्चाताप नहीं करता। जो हुआ, वह हुआ; जो 46 HI नहीं हुआ। न तो वह अपने को शाबाशी देता किया" न ही वह कभी अपराधबोध से भरता है मैं यह क्यों नहीं कर पाया?" उसके भीतर कोई बोझ नहीं होता; वह Tu अतीत से पूरी तरह कट चुका होता है। हर क्षण वह भविष्य में TGURU प्रवेश करता है; हर क्षण उसका अतीत विलीन हो जाता वह प्रातःकाल की ओस की बूँदों की तरह ताज़ा होता है। जिस व्यक्ति का मन दर्पण की तरह साफ होता है, उस पर अतीत की धूल नहीं जमती।यही सूत्र एक 'मुक्त पुरुष' के V लक्षण हैं.. !! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय! ! EEK पुत्तर ध्यान में जीने वाला मनुष्य गलती नहीं कर सकता वह जो भी करता है, पूरी तरह करता है; और अगले ही क्षण Tu उससे आगे बढ़ जाता है। वह पीछे मुड़कर नहीं देखता, वह हैनहीं हूनयहव पश्चाताप नहीं करता। जो हुआ, वह हुआ; जो 46 HI नहीं हुआ। न तो वह अपने को शाबाशी देता किया" न ही वह कभी अपराधबोध से भरता है मैं यह क्यों नहीं कर पाया?" उसके भीतर कोई बोझ नहीं होता; वह Tu अतीत से पूरी तरह कट चुका होता है। हर क्षण वह भविष्य में TGURU प्रवेश करता है; हर क्षण उसका अतीत विलीन हो जाता वह प्रातःकाल की ओस की बूँदों की तरह ताज़ा होता है। जिस व्यक्ति का मन दर्पण की तरह साफ होता है, उस पर अतीत की धूल नहीं जमती।यही सूत्र एक 'मुक्त पुरुष' के V लक्षण हैं.. !! ऊँ नमःशिवाय शिवा शिव जी सदा सहाय! ! - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - { गइआ प्रभि आपि गवाइआ[| नीद पई सुख सहज घरु आइआ[ মী নহা अध्यात्म में सबसे बड़ा रोग हउमै अहंकार, चिंताऔर हे भाई। मानसिक अशांति को माना गया है। जब इंसान अपनी चतुराई भिखारी में खुद ' को समर्पित कर देता छोड़कर परमात्मा के चरणों है, तो परमात्मा उसके मानसिक बोझ और विकारों को जड़ से 3 मिटा देता है। जब मनुष्य के मन से दुविधा और डर निकल जाता है, तो उसकी आत्मा एक ऐसे विश्राम में चली जाती है जहाँ कोई हलचल नहीं होती। जैसे एक बच्चा माँ की गोद में पूरी तरह अपने পঙ্াভা आप को सुरक्षित महसूस कर सो जाता है, वैसे ही भक्त प्रभु की शरण में निश्चिंत हो जाता है।सहज' वह अवस्था है, जहाँ मनुष्य वाले में टूटता ' में बहुत ' ज्यादा उछलता है और न दुख है।जब Sq परमात्मा की कृपा होती है, तो मनुष्य के भीतर शांति का संतुलन बाबा आ जाता है, जिसे सहज घर' गुरबाणी मे कहा गया है। अगर हम अपनी समस्याओं को उस मालिक के चरणों में अर्पण कर दें, तो वह न केवल हमारे कष्टों को हर लेता है, बल्कि हमारे भीतर एक स्थायी शांति और आनंद भर देता है। { गइआ प्रभि आपि गवाइआ[| नीद पई सुख सहज घरु आइआ[ মী নহা अध्यात्म में सबसे बड़ा रोग हउमै अहंकार, चिंताऔर हे भाई। मानसिक अशांति को माना गया है। जब इंसान अपनी चतुराई भिखारी में खुद ' को समर्पित कर देता छोड़कर परमात्मा के चरणों है, तो परमात्मा उसके मानसिक बोझ और विकारों को जड़ से 3 मिटा देता है। जब मनुष्य के मन से दुविधा और डर निकल जाता है, तो उसकी आत्मा एक ऐसे विश्राम में चली जाती है जहाँ कोई हलचल नहीं होती। जैसे एक बच्चा माँ की गोद में पूरी तरह अपने পঙ্াভা आप को सुरक्षित महसूस कर सो जाता है, वैसे ही भक्त प्रभु की शरण में निश्चिंत हो जाता है।सहज' वह अवस्था है, जहाँ मनुष्य वाले में टूटता ' में बहुत ' ज्यादा उछलता है और न दुख है।जब Sq परमात्मा की कृपा होती है, तो मनुष्य के भीतर शांति का संतुलन बाबा आ जाता है, जिसे सहज घर' गुरबाणी मे कहा गया है। अगर हम अपनी समस्याओं को उस मालिक के चरणों में अर्पण कर दें, तो वह न केवल हमारे कष्टों को हर लेता है, बल्कि हमारे भीतर एक स्थायी शांति और आनंद भर देता है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - नमो नरक नासे।।सदैवं प्रकासे।l अनंग सरूपे।।अर्भं्ग बिभूते ।l नमो नरक नासे अर्थः ईश्वर को सदा नमस्कार है जो नरक का মীঠা नाश करने वाले हैं, अर्थात जो और बंधनों से मुक्ति ব্রুত্রী दिलाते हैं। जब हम उस परम शक्ति से जुड़ते हैं, तो हमारे जीवन के तमाम मानसिक और आत्मिक क्लेश नरक' 9H ( हो जाते हैं। सदैवं प्रकासेः जो सदैव प्रकाशमान हैं, जिनका ज्ञान और ज्योति कभी फीकी नहीं पडती| में हर दुनिया तेरा रोशनी सूरज, चाँद, दीपक कभी न कभी है या ढलती Ssள है। लेकिन ईश्वर का प्रकाश सदैव जागृत रहती है। अनंगं सरूपेः जिनका स्वरूप बिना किसी अंग के है, यानी वे निराकार और दिव्य हैं। वह किसी एक धर्म, देश या जाति के भाणा लिबास तक सीमित नहीं है। वह अदृश्य ऊर्जा' की तरह हर मौजूद है।अभंगं बिभूतेः जिनकी महिमा, शक्ति और जगह वैभव कभी खंडित नहीं होता अविनाशी है।उसे कोई मिटा नहीं सकता। वह कल भी थी, आज भी है और हमेशा रहेगी। वह निराकार होकर भी सर्वव्यापी है और उसकी शक्ति का स्रोत अक्षय है। नमो नरक नासे।।सदैवं प्रकासे।l अनंग सरूपे।।अर्भं्ग बिभूते ।l नमो नरक नासे अर्थः ईश्वर को सदा नमस्कार है जो नरक का মীঠা नाश करने वाले हैं, अर्थात जो और बंधनों से मुक्ति ব্রুত্রী दिलाते हैं। जब हम उस परम शक्ति से जुड़ते हैं, तो हमारे जीवन के तमाम मानसिक और आत्मिक क्लेश नरक' 9H ( हो जाते हैं। सदैवं प्रकासेः जो सदैव प्रकाशमान हैं, जिनका ज्ञान और ज्योति कभी फीकी नहीं पडती| में हर दुनिया तेरा रोशनी सूरज, चाँद, दीपक कभी न कभी है या ढलती Ssள है। लेकिन ईश्वर का प्रकाश सदैव जागृत रहती है। अनंगं सरूपेः जिनका स्वरूप बिना किसी अंग के है, यानी वे निराकार और दिव्य हैं। वह किसी एक धर्म, देश या जाति के भाणा लिबास तक सीमित नहीं है। वह अदृश्य ऊर्जा' की तरह हर मौजूद है।अभंगं बिभूतेः जिनकी महिमा, शक्ति और जगह वैभव कभी खंडित नहीं होता अविनाशी है।उसे कोई मिटा नहीं सकता। वह कल भी थी, आज भी है और हमेशा रहेगी। वह निराकार होकर भी सर्वव्यापी है और उसकी शक्ति का स्रोत अक्षय है। - ShareChat
#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana #Eek Tu Hi Guru Ji
satnam waheguru ji - खामोशी लेगी बदला मेरा मेरे को नीचा दिखाने की कोशिश में तूने अपना ही व्यक्तित्व और शांति को ही खो दिया है..!! मेरे अहित को नष्ट करने के प्रेयास में अंततः तूने अपने खुद के विनाश का मार्ग चुन लिया है तेरी की हुई नफरत और ईर्ष्या ही तुझको जला कर राख कर देगी  !!   याद राखियों मेरी बातों को अंत में सबको राख ही हो जाना है मेरे को मिटाने का तेरा अहंकार पालना व्यर्थ ही जायेगा.. ! ! मिट जाते हैं औरों को मिटाने वाले लाश कहाँ रोती है रोते हैं उसको जलाने वाले..!! मुझको को मिटाने की चाहत रख़ने से बेहतर है कि तू खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दें खुद भी चैन से जी और मुझको भी चैन से जीने दे  !! मेरे जीवन मे नफरत के जो गड्ढे तुमने खोदे है याद राखियो एक दिन उसी गड्डों मे तू gச&ர!! खामोशी लेगी बदला मेरा मेरे को नीचा दिखाने की कोशिश में तूने अपना ही व्यक्तित्व और शांति को ही खो दिया है..!! मेरे अहित को नष्ट करने के प्रेयास में अंततः तूने अपने खुद के विनाश का मार्ग चुन लिया है तेरी की हुई नफरत और ईर्ष्या ही तुझको जला कर राख कर देगी  !!   याद राखियों मेरी बातों को अंत में सबको राख ही हो जाना है मेरे को मिटाने का तेरा अहंकार पालना व्यर्थ ही जायेगा.. ! ! मिट जाते हैं औरों को मिटाने वाले लाश कहाँ रोती है रोते हैं उसको जलाने वाले..!! मुझको को मिटाने की चाहत रख़ने से बेहतर है कि तू खुद को बेहतर बनाने पर ध्यान दें खुद भी चैन से जी और मुझको भी चैन से जीने दे  !! मेरे जीवन मे नफरत के जो गड्ढे तुमने खोदे है याद राखियो एक दिन उसी गड्डों मे तू gச&ர!! - ShareChat
https://www.facebook.com/share/p/1amHEh1Xxf/ #satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - ShareChat
Facebook