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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - नमो नित्त नाराइणे क्रूर करमे।। नमो प्रेत अप्रेत देवे सुधरमे ।। मै तेरा हे भाई! उस सदा रहने वाले (नित्त) नारायण को नमस्कार है।जो क्रूर कर्म' (कठोर दंड देने वाले या विनाशकारी रूप का भी कर्ता है। यहाँ गुरु भिखारी साहिब समझाते हैं कि परमात्मा केवल कोमल ही नहीं है, बल्कि जब अधर्म जिओ बढ़ता है, तब वह काल या विनाशक का रूप धरकर दुष्टों का संहार भी करता है। वह सृजनकर्ता भी है और संहारकर्ता भी। जो प्रेत; अंधकारमयी योनियों और अप्रेत; जो प्रेत नहीं हैं, यानी पवित्र आत्माएं दोनों में मौजूद है। जो स्वयं 46TST प्रकाशमान (देव) है और श्रेष्ठ धर्म का स्वरूप है। ईश्वर की व्यापकता इतनी है वाले किवह केवल ' अच्छाई' तक सीमित नहीं हैः वह प्रकाश और अंधकार , सुंदर और डरावने , दोनों ही रूपों का आधार है। वह हर योनि और हर जीव में व्याप्त Iq है। गुरु साहिब कह रहे हैं कि जिसे दुनिया 'बुरा' या ' अपवित्र (प्रेत) कहकर त्याग देती है, परमात्मा वहाँ भी मौजूद है। ईश्वर केवल स्वर्ग में या सुंदर जगहों Gt पर नहीं बैठा। वह सृष्टि के हर कण में है  चाहे वह उजाला हो या गहरा ajekTI नमो नित्त नाराइणे क्रूर करमे।। नमो प्रेत अप्रेत देवे सुधरमे ।। मै तेरा हे भाई! उस सदा रहने वाले (नित्त) नारायण को नमस्कार है।जो क्रूर कर्म' (कठोर दंड देने वाले या विनाशकारी रूप का भी कर्ता है। यहाँ गुरु भिखारी साहिब समझाते हैं कि परमात्मा केवल कोमल ही नहीं है, बल्कि जब अधर्म जिओ बढ़ता है, तब वह काल या विनाशक का रूप धरकर दुष्टों का संहार भी करता है। वह सृजनकर्ता भी है और संहारकर्ता भी। जो प्रेत; अंधकारमयी योनियों और अप्रेत; जो प्रेत नहीं हैं, यानी पवित्र आत्माएं दोनों में मौजूद है। जो स्वयं 46TST प्रकाशमान (देव) है और श्रेष्ठ धर्म का स्वरूप है। ईश्वर की व्यापकता इतनी है वाले किवह केवल ' अच्छाई' तक सीमित नहीं हैः वह प्रकाश और अंधकार , सुंदर और डरावने , दोनों ही रूपों का आधार है। वह हर योनि और हर जीव में व्याप्त Iq है। गुरु साहिब कह रहे हैं कि जिसे दुनिया 'बुरा' या ' अपवित्र (प्रेत) कहकर त्याग देती है, परमात्मा वहाँ भी मौजूद है। ईश्वर केवल स्वर्ग में या सुंदर जगहों Gt पर नहीं बैठा। वह सृष्टि के हर कण में है  चाहे वह उजाला हो या गहरा ajekTI - ShareChat