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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - ತಃr sfr ~rFT ভরতীী]] न्ाो बोज्ज[ अखिज्जे GfauIl समसतं प्रसिज्जे।। यहाँ 'जीव' शबद दर्शाता है प्रथम संसारी जीव (हम और मै तेरा 3/&: ।द्वितीय जीवंः वह शुद्ध चेतना या 'परमात्मा' जो हर जीव आप के भीतर विद्यमान है। हे भाई!उस चैतन्य सत्ता को नमस्कार है भिखारी जो जीवन का भी जीवन है। यह स्वीकारोक्ति है कि शरीर नश्वर है, लेकिन उसके भीतर का जीव रूह शाश्वत है। नमो बीज ব্রীতী; নীত' ক্কা সথ কীনা वह मूल शक्ति जहाँ से सब उत्पन्न जिओ हुआ। जैसे एक छोटे से बीज में विशाल वटवृक्ष छिपा होता है, वैसे ही आत्मा में अनंत ज्ञान और शक्ति छिपी है। बीजेः यानी वह परम तत्व जो सृष्टि और मोक्ष दोनों का आधार है। इसे পঙ্াভা करने का अर्थ है अपनी मूल जड़ से जुड़ना। नमस्कार जिसका कभी क्षय नहीं होताे। समय, बुढ़ापा या मृत्यु अखिज्जे इसे कम नहीं कर सकते। अभिज्जेःजिसे कोई शस्त्र काट नर्ह वाले सकता , अग्नि जला नहीं सकती और शस्त्र भेद नहीं सकते। यह पूर्णतः अखंड है। समसतं प्रसिज्जेः जो समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाला है या जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड की पूर्णता बाबा समाहित है। उस परम तत्व की शरण में जाने या उसे पहचानने से समस्त कार्यों में सिद्धि और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। जा गुरु गोबिंद सिंह जी बाणी मे समझा रहे है, हम केवल मांसन्मज्जा का शरीर नहीं, बल्कि एक अविनाशी जीव हैं। हमारे मौजूद है। हमें संसार की कोई भी भीतर अनंत शक्तियों का बीज शक्ति नष्ट (अखिज्जे) या खंडित ( अभिज्जे) नहीं कर सकती। ತಃr sfr ~rFT ভরতীী]] न्ाो बोज्ज[ अखिज्जे GfauIl समसतं प्रसिज्जे।। यहाँ 'जीव' शबद दर्शाता है प्रथम संसारी जीव (हम और मै तेरा 3/&: ।द्वितीय जीवंः वह शुद्ध चेतना या 'परमात्मा' जो हर जीव आप के भीतर विद्यमान है। हे भाई!उस चैतन्य सत्ता को नमस्कार है भिखारी जो जीवन का भी जीवन है। यह स्वीकारोक्ति है कि शरीर नश्वर है, लेकिन उसके भीतर का जीव रूह शाश्वत है। नमो बीज ব্রীতী; নীত' ক্কা সথ কীনা वह मूल शक्ति जहाँ से सब उत्पन्न जिओ हुआ। जैसे एक छोटे से बीज में विशाल वटवृक्ष छिपा होता है, वैसे ही आत्मा में अनंत ज्ञान और शक्ति छिपी है। बीजेः यानी वह परम तत्व जो सृष्टि और मोक्ष दोनों का आधार है। इसे পঙ্াভা करने का अर्थ है अपनी मूल जड़ से जुड़ना। नमस्कार जिसका कभी क्षय नहीं होताे। समय, बुढ़ापा या मृत्यु अखिज्जे इसे कम नहीं कर सकते। अभिज्जेःजिसे कोई शस्त्र काट नर्ह वाले सकता , अग्नि जला नहीं सकती और शस्त्र भेद नहीं सकते। यह पूर्णतः अखंड है। समसतं प्रसिज्जेः जो समस्त सिद्धियों को प्रदान करने वाला है या जिसमें संपूर्ण ब्रह्मांड की पूर्णता बाबा समाहित है। उस परम तत्व की शरण में जाने या उसे पहचानने से समस्त कार्यों में सिद्धि और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। जा गुरु गोबिंद सिंह जी बाणी मे समझा रहे है, हम केवल मांसन्मज्जा का शरीर नहीं, बल्कि एक अविनाशी जीव हैं। हमारे मौजूद है। हमें संसार की कोई भी भीतर अनंत शक्तियों का बीज शक्ति नष्ट (अखिज्जे) या खंडित ( अभिज्जे) नहीं कर सकती। - ShareChat