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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - धरमु दइआ का पूतु।।संतोखु थापि रखिआ जिनि सूतिIl धौलु जे को बुझै होवै सचिआरु।।धवलै उपरि केता भारु।। धरती होरु परै होरु होरु।।तिस ते भारु तलै कवणु जोरु।। अर्थःपुराने समय में यह माना जाता था कि धरती एक बैल (धवल ) के सीँगों पर टिकी है। गुरु नानक देव जी ने इस तर्क को चुनौती दीः HoT वह समझाते हैं कि ब्रह्मॉंड की अनंतता में कोई एक भौतिक सहारा जैसे बैल या खंभा नहीं हो सकता। असल में, यह पूरी कायनात कुदरती नियमों के सहारे टिकी है, जिसे उन्होंने ' धर्म कहा है। यहाँ लगे धर्म' का अर्थ पूजा पाठ नहीं, बल्कि संतुलन है। जैसे एक माँ वैसे ही अपनी दया और प्रेम से परिवार को जोड़कर रखती है, परमात्मा की 'दया' इस पूरी सृष्टि को बिखरने से रोकती है। धरम ने तेरा जब नियमों में अपनी मर्यादा अनुसार संतोष को जन्म दिया है। संतोष और ठहराव होता है, तभी सृष्टि मर्यादा में रहती है। यदि ग्रहों की चाल में संतोष ( अनुशासन) न हो, तो सब आपस में टकराकर भाणा नष्ट हो जाएँगे। सृष्टि का संतुलन तभी बना रहता है जब दया हो और संतोष' (संयम ) हो। बिना नियमों के यह संसार करुणा बिखर जाएगा। धरमु दइआ का पूतु।।संतोखु थापि रखिआ जिनि सूतिIl धौलु जे को बुझै होवै सचिआरु।।धवलै उपरि केता भारु।। धरती होरु परै होरु होरु।।तिस ते भारु तलै कवणु जोरु।। अर्थःपुराने समय में यह माना जाता था कि धरती एक बैल (धवल ) के सीँगों पर टिकी है। गुरु नानक देव जी ने इस तर्क को चुनौती दीः HoT वह समझाते हैं कि ब्रह्मॉंड की अनंतता में कोई एक भौतिक सहारा जैसे बैल या खंभा नहीं हो सकता। असल में, यह पूरी कायनात कुदरती नियमों के सहारे टिकी है, जिसे उन्होंने ' धर्म कहा है। यहाँ लगे धर्म' का अर्थ पूजा पाठ नहीं, बल्कि संतुलन है। जैसे एक माँ वैसे ही अपनी दया और प्रेम से परिवार को जोड़कर रखती है, परमात्मा की 'दया' इस पूरी सृष्टि को बिखरने से रोकती है। धरम ने तेरा जब नियमों में अपनी मर्यादा अनुसार संतोष को जन्म दिया है। संतोष और ठहराव होता है, तभी सृष्टि मर्यादा में रहती है। यदि ग्रहों की चाल में संतोष ( अनुशासन) न हो, तो सब आपस में टकराकर भाणा नष्ट हो जाएँगे। सृष्टि का संतुलन तभी बना रहता है जब दया हो और संतोष' (संयम ) हो। बिना नियमों के यह संसार करुणा बिखर जाएगा। - ShareChat