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#satnam waheguru ji #satnam shri waheguru ji #Meetha Lage Tera bhana
satnam waheguru ji - ಕಹಣೀ೩ಿತೊರಿuಳೂ अजाप देव पूदना सदीव g೫ತಾ೯ಿ]] 6ி अर्थः यदि ईश्वर को केवल शब्दों को बार ्बार दोहराने से या मंत्र जपने से पाया जा सकता , तो वह बहुत सरल होता। लेकिन परमात्मा 'अजाप है अर्थात् वह किसी भाषा या शब्द की सीमा में नहीं बँधा है। मै तेरा मनुष्य अपनी 'चालाकी' से घंटों माला फेर कर या ऊँचे स्वर में जाप कर के सोचता है उस परम सत्ता को प्रभावित कर लेगा। केवल आवाज भिखारी निकालना ही काफी होता, तो 'पूदना' एक छोटा सा पक्षी तो दिन रात अपनी चहचहाहट में 'तुहीं तुहीं पुकारता रहता है। तो क्या वह पक्षी जिओ सबसे बड़ा ज्ञानी हो गया? [ पक्षी का 'तुहीं तुहीं कहना उसका स्वभाव है। इसी प्रकार, मनुष्य का धर्म भी उसके स्वभाव में होना चाहिए। जब পঙ্াভা उसके भीतर से 'मैं का अहंकार मर जाता है तो उस मालिक की रज़ा वाले को स्वीकार कर लेता है, तब उसके जीवन से भी वही 'तुहीं तुहीं की की छवि बिगाड़ते खुशबू आने लगती है। जब लोग स्वार्थ के लिए दूसरों IqI हैं, वहाँ यह शब्द एक कवच का काम करता है। यह हमें सिखाता है कि दुनिया जो चाहे कहे, यदि आपका मन उस 'अजाप देव' से जुड़ा है, तो U कोई आपका अहित नहीं कर सकता। जिस दिन मनुष्य इस भाव को जी लेता है, उस दिन उसे न किसी शत्रु का भय रहता है और न ही किसी चालाकी की ज़रूरत पड़ती है। वह उस सागर की तरह शांत हो जाता है जिसकी सतह पर लहरें तो होती हैं, पर गहराई अडिग रहती ಕಹಣೀ೩ಿತೊರಿuಳೂ अजाप देव पूदना सदीव g೫ತಾ೯ಿ]] 6ி अर्थः यदि ईश्वर को केवल शब्दों को बार ्बार दोहराने से या मंत्र जपने से पाया जा सकता , तो वह बहुत सरल होता। लेकिन परमात्मा 'अजाप है अर्थात् वह किसी भाषा या शब्द की सीमा में नहीं बँधा है। मै तेरा मनुष्य अपनी 'चालाकी' से घंटों माला फेर कर या ऊँचे स्वर में जाप कर के सोचता है उस परम सत्ता को प्रभावित कर लेगा। केवल आवाज भिखारी निकालना ही काफी होता, तो 'पूदना' एक छोटा सा पक्षी तो दिन रात अपनी चहचहाहट में 'तुहीं तुहीं पुकारता रहता है। तो क्या वह पक्षी जिओ सबसे बड़ा ज्ञानी हो गया? [ पक्षी का 'तुहीं तुहीं कहना उसका स्वभाव है। इसी प्रकार, मनुष्य का धर्म भी उसके स्वभाव में होना चाहिए। जब পঙ্াভা उसके भीतर से 'मैं का अहंकार मर जाता है तो उस मालिक की रज़ा वाले को स्वीकार कर लेता है, तब उसके जीवन से भी वही 'तुहीं तुहीं की की छवि बिगाड़ते खुशबू आने लगती है। जब लोग स्वार्थ के लिए दूसरों IqI हैं, वहाँ यह शब्द एक कवच का काम करता है। यह हमें सिखाता है कि दुनिया जो चाहे कहे, यदि आपका मन उस 'अजाप देव' से जुड़ा है, तो U कोई आपका अहित नहीं कर सकता। जिस दिन मनुष्य इस भाव को जी लेता है, उस दिन उसे न किसी शत्रु का भय रहता है और न ही किसी चालाकी की ज़रूरत पड़ती है। वह उस सागर की तरह शांत हो जाता है जिसकी सतह पर लहरें तो होती हैं, पर गहराई अडिग रहती - ShareChat