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#❤️जीवन की सीख #☝अनमोल ज्ञान "गंदा गंदा दे दो, बढ़िया बढ़िया ले लो। क्या बढ़िया सौदा है।" श्याम सुंदर ने उसी का सब कुछ लुटा है, जिसने उनसे कहा है हमारा सब कुछ लूट लो। अपने घर में बुलाया है बाकायदा आओ लूटो। देखो हम लोगों ने नहीं बुलाया तो उनकी हिम्मत नहीं है कि हमारा कुछ लूट ले। और लूटा भी तो क्या लूटा? ये और आश्चर्य सुनो! जीव के पास क्या है? सब गंदी गंदी चीज चीजें हैं। पंचक्लेश; अविद्या, अस्मिता, राग, द्वेष, अभिनिवेश ये पांच क्लेश होते हैं। इनसे हम दुखी हैं। वो लूट ले जाते हैं। अब तुम्हारे पास यह पांचों नहीं रहेंगे। हम ले जा रहे हैं। अविद्या माने अज्ञान, अस्मिता माने अहंकार, राग संसार से अटैचमेंट, द्वेष संसार में कहीं ना कहीं दुश्मनी, अभिनिवेश माने मृत्यु का डर हम मर ना जाए, हम मर ना जाए। बुखार आया हम मर ना जाए। हर जगह हर समय हम मर ना जाए। देखो बड़े-बड़े आदमियों के पीछे 500 आदमियों की लाइन लगी रहती है पुलिस और मिलिट्री की। कोई मार ना दे, हम मर ना जाए। यह पांच क्लेश हैं। भगवान कहते हैं हम ले जा रहे हैं। अरे ये तो अच्छी बात है। ये कोई बुरी बात थोड़े ही है। पंचकोष इनसे भी हम दुखी हैं। अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष, आनंदमय कोष। भगवान कहते हैं मैं ले जा रहा हूं उसको भी। तीन प्रकार का शरीर। यह पंच महाभूत का शरीर। सूक्ष्म शरीर जो मरने के बाद साथ जाता है। और कारण शरीर जो महाप्रलय में भगवान के महोदर में रहता है। ये तीन शरीरों का बंधन है हमारा। भगवान कहते हैं ले जा रहा हूं लूट के। अब तुमको यह गंदा शरीर नहीं मिलेगा, 84 लाख में घुमाने वाला। रोज बीमार है, रोज डॉक्टरों के शरणागत हो रहा है। और फिर ये स्थूल शरीर को छोड़ दो। यह कम बीमार हो ना हो मान लिया। यह मन की बीमारी। यह सूक्ष्म शरीर का रोग तो बड़ा भयानक है। कामनाएं पैदा होती हैं। नहीं पूरी हुई तो क्रोध आया। पूरी हो गई तो लोभ आया। फिर आगे बढ़ो। फिर अरबपति बनो। फिर और आगे चलो। भगवान कहते हैं मैं ले जा रहा हूं। और सबसे बड़ी बात हमारे अनंत जन्मों के पाप पुण्य वो अनलिमिटेड अनंत हैं। अरे हम एक जन्म में हजारों अच्छे बुरे कर्म करते हैं और जन्म ही अनंत हो चुके, तो फिर कर्म की क्या गिनती है? और हमने दोनों प्रकार के कर्म किए हैं। अच्छे भी किए हैं बुरे भी किए हैं। याद नहीं हैं यह बात अलग है। यह पाप और पुण्य इन्हीं दोनों से प्रारब्ध बन के आता है, संचित कर्म से। जो सबको भोगना पड़ता है। भगवत्प्राप्ति कर लेने वाले महापुरुष को भी भोगना पड़ता है। उसको भी कैंसर होगा। वो भी रोगग्रस्त होगा। वो भी मरेगा। उसको भी बुढ़ापा आएगा। तो भगवान कहते हैं हम ये सब ले जा रहे हैं। माफ कर दिया तुम्हारा सब फाइल जला दी। *अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:।* तुमने अपने घर में बुला लिया लूटो बस हम सब ले जा रहे हैं। और आगे भी तुम कोई अच्छा बुरा कर्म ना कर पाओगे, यह भी हम ठेका ले रहे हैं। भूत भूतकाल के तो सब माफ कर दिए और भविष्य में कोई कर्म तुम कर ही नहीं सकते। क्यों? हमारे शरीर, इंद्रिय, मन, बुद्धि नहीं रहेंगे क्या? रहेंगे लेकिन तुम्हारे कर्म का फल नहीं मिलेगा। चाहे जो करो तुम आजाद हो। स्वयं चरती मुनयो करोड़ों मर्डर करो अर्जुन हनुमान जी जला दो लंका। हमारे देखो देश में प्रेसिडेंट की गाड़ी का चालान नहीं होता। कोई मर जाए मर जाओ। तो ऐसे ही भगवत्प्राप्ति के बाद किसी महापुरुष को ना पाप छू सकता है ना पुण्य छू सकता है। वैसे अलग हो गए। तो हम ये सब ले जा रहे हैं। यानी आगे का भी मामला साफ। पिछला भी साफ। और ये हम जबरदस्ती नहीं कर रहे हैं। तुमने बुलाया है कंप्लीट सरेंडर पूर्ण शरणागति वाले का लूटता हूं मैं। जो लुटाने को तैयार हो जाए सेंट परसेंट। आओ लूटो। और अगर कोई कहे मेरे पास जो है मैं नहीं दूंगा। *सूख हाड़ लै भाग सठ स्वान निरखि मृगराज।* एक कुत्ता सूखी हड्डी मुंह में चबा रहा था। चबाते चबाते उसी के गले एक खून निकलने लगा अपने खून लपेट के हड्डा में और चूस रहा है और समझ रहा है कि हड्डी से खून मिल रहा है। और जब शेर को आते देखता है तो अपनी हड्डी ले भागता है ये छीन लेगा इस डर से। अरे भला शेर कुत्ते के मुख की हड्डी क्या करेगा ? वो तो हाथी वगैरह का शिकार करता है। ऐसे ऐसे ही हम लोग हैं भगवान के अवतार मिले अनंत बार संत महात्मा मिल अनत बार लेकिन सब जगह गंदी भावना की। हे ये हमसे कुछ लेने आया है। [हंसी] हमारे पास 4 लाख है ना उसी पे निगाह है इसकी। [हंसी] तो ये हमारी जो शंका इससे भगवान का लाभ आज तक नहीं मिला। भगवान ने हमारा कुछ भी नहीं लूटा हमारे कर्म का फल दे दिया। तुमने जो कमाया है लो। और जिसने ये जान लिया अरे गंदा गंदा दे दो, बढ़िया बढ़िया ले लो। क्या बढ़िया सौदा है। तन गंदा, मन गंदा सब गड़बड़ यही भगवान मांग रहे हैं दे दो और उनके यहां से फिर अनंत आनंद अनंत ज्ञान और उनका लोक और सदा को यानी लुटाने के लिए जिसने प्रार्थना पत्र दिया और सचमुच से थ्योरिटिकल नहीं वो तो हम लोग रोज करते हैं - *त्वमेव माता च पिता त्वमेव, त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव।* मंदिर में बोलते हैं ऐसे यानी तुम ही मेरे सब कुछ हो लेकिन एक हिदायत एक सूचना मकान के पर लगी है। तुम्हारा सब कुछ है लेकिन ले जाने की परमिशन नहीं है, बस देख लो। ये हम लोग करते हैं। तो शरणागत जो हो गया उसी का हृदय शुद्ध होगा। जिसका हृदय शुद्ध होगा उसी के हृदय में भगवान आएंगे। और उसी के लिए ये सब कृपाएं करते हैं। जिसको हम कह रहे हैं लुटेरा। तूने सब कुछ लूट लिया। *- जगद्गुरूत्तम श्री कृपालु जी महाराज*
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