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#एक रचना रोज़✍ #📚कविता-कहानी संग्रह #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य #🌙रात की शायरी✍
एक रचना रोज़✍ - हरकिसी को मैं खुश रख सकूं वो सलीका मुझे नहोीं आता_ जो मैं नहों हूँ॰ वो दिखने का तरीका मुझे नहीं आता ~ हरकिसी को मैं खुश रख सकूं वो सलीका मुझे नहोीं आता_ जो मैं नहों हूँ॰ वो दिखने का तरीका मुझे नहीं आता ~ - ShareChat