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।। ॐ ।। प्रयत्नाद्यतमानस्तु योगी संशुद्धकिल्बिषः। अनेकजन्मसंसिद्धस्ततो याति परां गतिम् ।। अनेक जन्मों से प्रयत्न करनेवाला योगी परमसिद्धि को प्राप्त हो जाता है। प्रयत्नपूर्वक अभ्यास करनेवाला योगी सभी पापों से अच्छी प्रकार शुद्ध होकर परमगति को प्राप्त हो जाता है। प्राप्ति का यही क्रम है। पहले शिथिल प्रयत्न से वह योग आरम्भ करता है, मन चलायमान होने पर जन्म लेता है, सद्गुरु के कुल में प्रवेश पाता है और प्रत्येक जन्म में अभ्यास करते हुए वहीं पहुँच जाता है, जिसका नाम परमगति परमधाम है। श्रीकृष्ण ने कहा कि 'स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य' (२/४०) इस धर्म का स्वल्प अभ्यास भी महान जन्म-मृत्यु के भय से उद्धार करनेवाला होता है। धर्म बदलता नहीं है। इस योग में बीज का नाश नहीं होता। आप दो कदम चल भर दें, उस साधन का कभी नाश नहीं होता। हर परिस्थिति में रहते हुए पुरुष ऐसा कर सकता है। कारण कि थोड़ा साधन तो परिस्थितियों से घिरनेवाला व्यक्ति ही कर पाता है; क्योंकि उसके पास समय नहीं है। आप काले हों, गोरे हों अथवा कहीं के हों, गीता सबके लिये है। आपके लिये भी है, बशर्ते आप मनुष्य हों। #यथार्थ गीता #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏गीता ज्ञान🛕
यथार्थ गीता - श्रकृष्णने कहाकि स्वल्पमायस्य थमक्य झस थन ar3aHM ನr जन्म मृत्यु केभयसी उब्धार  करलेवाला होता है। धर्न बनलता नहीं है। इस योग्सें बीजाक Viar-ನನn ~  ~  க1 ப U٧U UUI B  பாகாI #பu ` ஈாராரசn சப்ப்சa1 ஈஈ-ப711a ப1 /7/{6]47957ா I T` 077Iப - মাদদমানবানাযমম় হাঁব মাপবী বমেন H7 ர8P71 पचमठतिपेगा  iulaa T மh Iau a THaIHTHI~I7 r71 ச7 TIAIசIப !பu  Trlo =ரII =7 1 Dப nuauaumras ஈm ஈn ஈரர farI ப  ரசபfmIam Lamaln ದ 1 श्रकृष्णने कहाकि स्वल्पमायस्य थमक्य झस थन ar3aHM ನr जन्म मृत्यु केभयसी उब्धार  करलेवाला होता है। धर्न बनलता नहीं है। इस योग्सें बीजाक Viar-ನನn ~  ~  க1 ப U٧U UUI B  பாகாI #பu ` ஈாராரசn சப்ப்சa1 ஈஈ-ப711a ப1 /7/{6]47957ா I T` 077Iப - মাদদমানবানাযমম় হাঁব মাপবী বমেন H7 ர8P71 पचमठतिपेगा  iulaa T மh Iau a THaIHTHI~I7 r71 ச7 TIAIசIப !பu  Trlo =ரII =7 1 Dப nuauaumras ஈm ஈn ஈரர farI ப  ரசபfmIam Lamaln ದ 1 - ShareChat