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पद दयाबाई #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - "पद" 'दयादासि' हरि नाम लै, या जग में यह सार। हरि भजते हरि ही भये, पायो भेद अपारII सोवत जागत हरि भजो , हरि हिरदै न बिसार। डोरा गहि हरि नाम की॰ 'दया' न टूटै तार। नारायन नर देह में॰ पैयत हैं ततकाल। सतसंगति हरि भजन सूँ , काढ़ो तृस्ना व्यालII दया नाव हरि नाम को, सतगुरु खेवन हार। साधू जन के संग मिलि, तिरत न लागै वार।। ee (दयाबाई) meepik< Motivatonat Videos App Want' "पद" 'दयादासि' हरि नाम लै, या जग में यह सार। हरि भजते हरि ही भये, पायो भेद अपारII सोवत जागत हरि भजो , हरि हिरदै न बिसार। डोरा गहि हरि नाम की॰ 'दया' न टूटै तार। नारायन नर देह में॰ पैयत हैं ततकाल। सतसंगति हरि भजन सूँ , काढ़ो तृस्ना व्यालII दया नाव हरि नाम को, सतगुरु खेवन हार। साधू जन के संग मिलि, तिरत न लागै वार।। ee (दयाबाई) meepik< Motivatonat Videos App Want' - ShareChat