सुशील मेहता
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सुशील मेहता
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मैं अवकाश प्राप्त डाक्टर हूँ
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - 'णल यूँ तेरी रहगुज़र से दीवाना वार  ঘুড়ই काँधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुज़रे बैठे हैं रास्ते में दिल का खंडर सजा कर शायद इसी तरफ़ से इक दिन बहार " गुज़रे दार-ओ रसन से दिल तक सब रास्ते अधूरे 4-R जो एक बार गुज़रे गुज़रे बहती हुई ये नदिया " हुए किनारे घुलते कोई तो पार उतरे कोई तो पार ঘুড়াই क़ुर्बान इस नज़र पे मरियम की सादगी भी साए से जिस नज़र के सौ किर्दगार गुज़रे तूने भी हमको देखा हमने भी तुझ को देखा  ही हार गुज़रा हम जान हार गुज़रे तू दिल Rani मीना कुमारी Motivational Videos Appl Want 'णल यूँ तेरी रहगुज़र से दीवाना वार  ঘুড়ই काँधे पे अपने रख के अपना मज़ार गुज़रे बैठे हैं रास्ते में दिल का खंडर सजा कर शायद इसी तरफ़ से इक दिन बहार " गुज़रे दार-ओ रसन से दिल तक सब रास्ते अधूरे 4-R जो एक बार गुज़रे गुज़रे बहती हुई ये नदिया " हुए किनारे घुलते कोई तो पार उतरे कोई तो पार ঘুড়াই क़ुर्बान इस नज़र पे मरियम की सादगी भी साए से जिस नज़र के सौ किर्दगार गुज़रे तूने भी हमको देखा हमने भी तुझ को देखा  ही हार गुज़रा हम जान हार गुज़रे तू दिल Rani मीना कुमारी Motivational Videos Appl Want - ShareChat
#आज का मंत्र
आज का मंत्र - आज का मंत्र निषेवते प्रशस्तानी निन्दितानी न सेवते। अनास्तिकः श्रद्धान एतत् पण्डितलक्षणम्। | भावार्थः जो अच्छे कर्म करता है और बुरे कर्मों से दूर रहता है, साथ ही जो ईश्वर में भरोसा रखता है और श्रद्धालु है, उसके ये सद्नुण पंडित होने के लक्षण हैं। @myquote आज का मंत्र निषेवते प्रशस्तानी निन्दितानी न सेवते। अनास्तिकः श्रद्धान एतत् पण्डितलक्षणम्। | भावार्थः जो अच्छे कर्म करता है और बुरे कर्मों से दूर रहता है, साथ ही जो ईश्वर में भरोसा रखता है और श्रद्धालु है, उसके ये सद्नुण पंडित होने के लक्षण हैं। @myquote - ShareChat
शेर दीप्ति मिश्रा #✒ शायरी
✒ शायरी - दुखती रग पर उंगली रख कर पूछ रहें हो कैसी हो तुमसे यह उम्मीद नहीं थी चाहे जैसी हो दुनियां ; दीप्ति मिश्रा @myquote दुखती रग पर उंगली रख कर पूछ रहें हो कैसी हो तुमसे यह उम्मीद नहीं थी चाहे जैसी हो दुनियां ; दीप्ति मिश्रा @myquote - ShareChat
हर साल फरवरी के तीसरे गुरुवार को विश्व मानव विज्ञान दिवस( world Anthropology day) मनाया जाता है। यह दिन अप्रयुक्त क्षेत्र का सम्मान करने और आम जनता को मानव विज्ञान के बारे में शिक्षित करने के लिए मनाया जाता है। मानवता के वैज्ञानिक अध्ययन को मानवविज्ञान के रूप में जाना जाता है। यह मानव समाजों और संस्कृतियों की शुरुआत और प्रगति की जांच करता है। ऐतिहासिक और समकालीन समुदायों में लक्षणों की जांच के लिए विभिन्न वैज्ञानिक पद्धतियों का उपयोग किया जाता है। यह अध्ययन हमें यह समझने में भी मदद करता है कि दुनिया कैसे काम करती है, हमारे व्यवहार के पीछे क्या कारण हैं और हमारा वातावरण हमसे कैसे प्रभावित होता है। प्रारंभ में राष्ट्रीय मानवविज्ञान दिवस के रूप में मनाया गया, बाद में 2016 में इस दिन का नाम बदल दिया गया। चूंकि मानवविज्ञान केवल एक देश के लिए नहीं, बल्कि दुनिया में सभी के लिए महत्वपूर्ण है, इसलिए विश्व मानवविज्ञान दिवस मनाना अधिक उपयुक्त लगा। फिर, मानवविज्ञानी क्षेत्रीय प्रथाओं और सामाजिक संबंधों को समझाने के लिए नृवंशविज्ञान पद्धति का उपयोग करते हैं। मानवविज्ञानी अपने विषयों के दैनिक जीवन में संलग्न होकर लोगों की संस्कृतियों, संस्थानों और प्रथाओं के वास्तविक महत्व को देख और उजागर कर सकते हैं। और मानवविज्ञानियों द्वारा किए गए योगदान को स्वीकार करने और उन्हें महत्व देने के लिए, विश्व मानवविज्ञान दिवस की स्थापना 2015 में अमेरिकन एंथ्रोपोलॉजिकल एसोसिएशन (एएए) द्वारा की गई थी। #जागरूकता दिवस
जागरूकता दिवस - 10 60 19 February 2026 (orld dnthropologg cDqy Lorem ipSUm dolor sit amet; consectetuer| adipiscing elit,sed diam nonummy nibh. cuismod tincidunt Ut laoreet dolore] magna aliquam erat volutpal 10 60 19 February 2026 (orld dnthropologg cDqy Lorem ipSUm dolor sit amet; consectetuer| adipiscing elit,sed diam nonummy nibh. cuismod tincidunt Ut laoreet dolore] magna aliquam erat volutpal - ShareChat
छत्रपति शिवाजी जयंती छत्रपति शिवाजी भोसले (1630-1680 ई.) छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को मराठा परिवार में हुआ था। उनके जन्मदिवस के अवसर पर ही हर साल 19 फरवरी को भारत में छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती मनाई जाती है। महाराष्ट सरकार ने तो इस दिन को राज्य में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया है। भारत के एक महान राजा एवं रणनीतिकार थे जिन्होंने 1674 ई. में पश्चिम भारत में मराठा साम्राज्य की नींव रखी। इसके लिए उन्होंने मुगल साम्राज्य के शासक औरंगज़ेब से संघर्ष किया। सन् 1674 में रायगढ़ में उनका राज्याभिषेक हुआ और वह "छत्रपति" बने। छत्रपती शिवाजी महाराज ने अपनी अनुशासित सेना एवं सुसंगठित प्रशासनिक इकाइयों कि सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया। उन्होंने समर-विद्या में अनेक नवाचार किए तथा छापामार युद्ध (guerilla warfare) की नयी शैली (शिवसूत्र) विकसित की। उन्होंने प्राचीन हिन्दू राजनीतिक प्रथाओं तथा दरबारी शिष्टाचारों को पुनर्जीवित किया। गुरिल्ला युद्ध के अविष्कारक : कहते हैं कि छत्रपति शिवाजी ने ही भारत में पहली बार गुरिल्ला युद्ध का आरम्भ किया था। उनकी इस युद्ध नीती से प्रेरित होकर ही वियतनामियों ने अमेरिका से जंगल जीत ली थी। इस युद्ध का उल्लेख उस काल में रचित 'शिव सूत्र' में मिलता है। गोरिल्ला युद्ध एक प्रकार का छापामार युद्ध। मोटे तौर पर छापामार युद्ध अर्धसैनिकों की टुकड़ियों अथवा अनियमित सैनिकों द्वारा शत्रुसेना के पीछे या पार्श्व में आक्रमण करके लड़े जाते हैं। #शत शत नमन
शत शत नमन - १९ फरवरी हिन्द स्वराज के संस्थापक  प्रतापी योद्धा एवं परम श्रेष्ठ रणनीतिकार छत्रपति शिवाजी महाशज की जयंती पर कोटि कोटि नमन Motivational VdeoseA oo Want AM lil IIE ' १९ फरवरी हिन्द स्वराज के संस्थापक  प्रतापी योद्धा एवं परम श्रेष्ठ रणनीतिकार छत्रपति शिवाजी महाशज की जयंती पर कोटि कोटि नमन Motivational VdeoseA oo Want AM lil IIE ' - ShareChat
रामकृष्ण परमहंस जयंती फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भारत के महान संत एवं विचारक रामकृष्ण परमहंस का जन्म हुआ था। इस वर्ष यह तिथि 15 मार्च को है। आज रामकृष्ण परमहंस की जयंती है। उनका बचपन का नाम गदाधर चट्टोपाध्याय था। तारीख के अनुसार उनका जन्म 18 फरवरी 1836 को बंगाल के एक प्रांत कामारपुकुर गांव में हुआ था। पिता का नाम खुदीराम तथा माता का नाम चंद्रमणि देवी था। वे भारत के एक महान संत और विचारक थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में सभी धर्मों की एकता पर जोर दिया। वे मानवता के पुजारी थे। हिन्दू, इस्लाम और ईसाई आदि सभी धर्मों पर उसकी श्रद्धा एक समान थी, ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने बारी-बारी सबकी साधना करके एक ही परम-सत्य का साक्षात्कार किया था। अपने बचपन से ही उन्हें विश्वास था कि भगवान के दर्शन हो सकते हैं, अतः भगवान प्राप्ति के लिए उन्होंने कठोर साधना और भक्ति की तथा सादगीपूर्ण जीवन बिताया। अपने जीवन में उन्होंने स्कूल के कभी दर्शन नहीं किए थे। उन्हें न तो अंग्रेजी आती थी, न वे संस्कृत के जानकार थे। वे तो सिर्फ मां काली के भक्त थे। उनकी सारी पूंजी महाकाली का नाम-स्मरण मात्र था। माना जाता है कि उनके माता-पिता को उनके जन्म से पहले ही अलौकिक घटनाओं का अनुभव हुआ था। उनके पिता को एक रात दृष्टांत हुआ, जिसमें उन्होंने देखा कि भगवान गदाधर ने स्वप्न में उनसे कहा था कि वे विष्णु अवतार के रूप में उनके पुत्र के रूप में जन्म लेंगे तथा माता चंद्रमणि को भी ऐसे ही एक दृष्टांत का अनुभव हुआ था, जिसमें उन्होंने शिव मंदिर में अपने गर्भ में एक रोशनी को प्रवेश करते हुए देखा था। #शत शत नमन
शत शत नमन - एक साधक के रूप में मानवता की सेवा करने चाले महान चिचारक आध्यात्मिक गुरू स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती पर उन्हें शत् शत्त नमन १९ फरवरी २०२६ गुरुवार Motivational Videos App Want एक साधक के रूप में मानवता की सेवा करने चाले महान चिचारक आध्यात्मिक गुरू स्वामी रामकृष्ण परमहंस जी की जयंती पर उन्हें शत् शत्त नमन १९ फरवरी २०२६ गुरुवार Motivational Videos App Want - ShareChat
फूलेरा दूज हिंदू पंचांग के अनुसार, फाल्गुन माह में शुक्ल पक्ष के दौरान दूसरे दिन (द्वितीया तिथि) पर फुलेरा दूज पर मनाई जाती है । ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह दिन मार्च या फरवरी के महीने में मनाया जाता है। हर साल फुलेरा दूज का त्यौहार दो प्रमुख त्योहारों के बीच आता है, यानी वसंत पंचमी और होली। फुलेरा दूज को एक शुभ और सर्वोच्च त्यौहार माना जाता है, जिसे उत्तर भारत के लगभग सभी क्षेत्रों में बड़े उत्साह और जोश के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान कृष्ण को समर्पित है। शाब्दिक अर्थ में फुलेरा का अर्थ है 'फूल' जो फूलों को दर्शाता है। यह माना जाता है कि भगवान कृष्ण फूलों के साथ खेलते हैं और फुलेरा दूज की शुभ पूर्व संध्या पर होली के त्योहार में भाग लेते हैं। यह त्योहार लोगों के जीवन में खुशियां और उल्लास लाता है। वृंदावन और मथुरा के कुछ मंदिरों में, भक्तों को भगवान कृष्ण के विशेष दर्शन का भी मौका मिल सकता है, जहां वह हर साल फुलेरा दूज के उचित समय पर होली उत्सव में भाग लेने वाले होते हैं। इस दिन विभिन्न अनुष्ठानों और समारोहों का आयोजन किया जाता है और साथ ही देवता भगवान कृष्ण की मूर्तियों को होली के आगामी उत्सव पर दर्शाने के लिए रंगों से सराबोर किया जाता है। #शुभ कामनाएँ 🙏
शुभ कामनाएँ 🙏 - १९ फरवरी २०२६ गुरुवार Scer दूज की हार्दिक शुभकामनाएं ICOMNENTS App Want Motivational Videos १९ फरवरी २०२६ गुरुवार Scer दूज की हार्दिक शुभकामनाएं ICOMNENTS App Want Motivational Videos - ShareChat
गज़ल #✒ शायरी
✒ शायरी - TTUTన रहेन घर के हुए ख़्वार ये तो  होना था यार  ये तो   होना तिरी #  तलाश থা बर - सर - ए -दीवार जलते चराग़ों की কনায सियाहियाँ पस -ए-्दीवार ये॰  तो   होना থা मुख़ालिफ़ बाँटने   वालों ক  4 ज़मीन గT हमीं   पे आ   गिरी तलवार  ये নী   কীনা থা गुज़र के इक रह-ए-पुर-ख़ार से यहाँ पहुँचे यहाँ से फिर रह-ए-पुर-ख़ार ये तो होना था ওক্তুক   ম   বুচ   ফ্   ;   কমাঁ  गया सूरज हुए   थे देर  से  बेदार ये तो   होना था हमीं   ने उस   के   लिए 2 যমী बनाए किघर तक आ गया बाज़ार ये तो होना था কী নামীয ম স্তুলুম 73 ాTగ था कम ব্রুলব-নয  38 दीवार 77 4 होना था Motivational Vicleos /oo Want TTUTన रहेन घर के हुए ख़्वार ये तो  होना था यार  ये तो   होना तिरी #  तलाश থা बर - सर - ए -दीवार जलते चराग़ों की কনায सियाहियाँ पस -ए-्दीवार ये॰  तो   होना থা मुख़ालिफ़ बाँटने   वालों ক  4 ज़मीन గT हमीं   पे आ   गिरी तलवार  ये নী   কীনা থা गुज़र के इक रह-ए-पुर-ख़ार से यहाँ पहुँचे यहाँ से फिर रह-ए-पुर-ख़ार ये तो होना था ওক্তুক   ম   বুচ   ফ্   ;   কমাঁ  गया सूरज हुए   थे देर  से  बेदार ये तो   होना था हमीं   ने उस   के   लिए 2 যমী बनाए किघर तक आ गया बाज़ार ये तो होना था কী নামীয ম স্তুলুম 73 ాTగ था कम ব্রুলব-নয  38 दीवार 77 4 होना था Motivational Vicleos /oo Want - ShareChat
चौपाई चरणदास #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - चौपाई ' 0 रिध्दि सिध्दि फल कछू न चाहूँ जगत कामना को नहिं लाऊँ और कामना मैं नहिं राखूँ रसना भाखूँ तुम्हारे নাম में बहु ' चौरासी दुख पायो ता ते सरन तिहारी आयो सुक्ति होन की मन में आवै आवागवन सूँ जीव डरावै प्रेम प्रीति में हिरदा भीजै यही दान पाता मोहिं दीजै अपना कीजै गहिये बाहीं धरिये सिर पर हाथ गुसाई चरनदास' को लेहु उबारे मैं अण्डा तुम सेवनहारे (चरनदास) Motivational Videos App Want . चौपाई ' 0 रिध्दि सिध्दि फल कछू न चाहूँ जगत कामना को नहिं लाऊँ और कामना मैं नहिं राखूँ रसना भाखूँ तुम्हारे নাম में बहु ' चौरासी दुख पायो ता ते सरन तिहारी आयो सुक्ति होन की मन में आवै आवागवन सूँ जीव डरावै प्रेम प्रीति में हिरदा भीजै यही दान पाता मोहिं दीजै अपना कीजै गहिये बाहीं धरिये सिर पर हाथ गुसाई चरनदास' को लेहु उबारे मैं अण्डा तुम सेवनहारे (चरनदास) Motivational Videos App Want . - ShareChat
रामकृष्ण परमहंस का वचन #संतो के ज्ञान वर्धक वचन
संतो के ज्ञान वर्धक वचन - स्वामी रामकृष्ण परमहंस के अनुसार हर व्यक्ति दिखने में अलग और स्वाभाव से भी अलग होता है। कोई दिखने में गोरा है, कोई काला है, कोई सीधा है, तो कोई क्रूर है परंतु सभी में इश्वर तत्व विद्यमान है। अतः सभी में ईश्वर की छवि देखना चाहिए। परमहंस Motivational-Videos App Want स्वामी रामकृष्ण परमहंस के अनुसार हर व्यक्ति दिखने में अलग और स्वाभाव से भी अलग होता है। कोई दिखने में गोरा है, कोई काला है, कोई सीधा है, तो कोई क्रूर है परंतु सभी में इश्वर तत्व विद्यमान है। अतः सभी में ईश्वर की छवि देखना चाहिए। परमहंस Motivational-Videos App Want - ShareChat