चन्द्रशेखर आजाद पुंय तिथि
आज भारतीय क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद (Chandra Shekhar Azad) की पुण्यतिथि है.27 फरवरी साल 1931 में आज ही के दिन मुठभेड़ के दौरान आजाद ने अंग्रेजों के हाथों मरने की बजाय खुद को गोली मारने का विकल्प चुना. जिस जगह पर उन्होंने देश के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी वो जगह यानी इलाहबाद (Allahabad) का अल्फ्रेड पार्क ऐतिहासिक स्मारक बन गया. अब इस पार्क को चंद्रशेखर आजाद पार्क के नाम से जाना जाता है।
चंद्रशेखर आजाद की पुण्यतिथि पर लोग उनकी शहादत को याद करते हुए कई ट्वीट कर रहे हैं. यही वजह है कि ट्विटर पर भी #ChandrashekharAzad ट्वीट कर रहा है. एक यूजर ने चंद्रशेखर को याद करते हुए लिखा भारत माता के लाल, अमर बलिदानी आज़ाद जी की पुण्यतिथि पर शत्-शत् नमन. वहीं दूसरे यूजर ने लिखा कि अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि।
आजाद जिंदगीभर अपने नाम के मुताबिक आजाद जिंदगी जीत रहे. उन्होंने संकल्प लिया था कि वे कभी भी जालिम अंग्रेजों के हाथ नहीं आएंगे और उन्हें फांसी लगाने का मौका अंग्रेजों को कभी नहीं मिल सकेगा और अपने इसी वचन को आजाद ने पूरी तरह निभाया।
#शत शत नमन
आमलकी एकादशी।
फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहते हैं। आमलकी यानी आंवला को शास्त्रों में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त है। विष्णु जी ने जब सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा को जन्म दिया उसी समय उन्होंने आंवले के वृक्ष को जन्म दिया। आंवले को भगवान विष्णु ने आदि वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित किया है। इसके हर अंग में ईश्वर का स्थान माना गया है।
माना जाता है कि आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास होने की वजह से उसी के नीचे भगवान का पूजन किया जाता है, यही आमलकी एकादशी ( Amalaki Ekadashi ) कहलाती है। इस दिन आंवले का उबटन, आंवले के जल से स्नान, आंवला पूजन, आंवले का भोजन और आंवले का दान करना चाहिए।
जिस कारण इस दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। पीपल और आंवले के वृक्ष को हिंदू धर्म में देवता के समान माना गया है।माना जाता है कि जब भगवान श्री हरि विष्णु ने सृष्टि की रचना के लिए ब्रह्मा जी को जन्म दिया, उसी समय भगवान विष्णु ने आंवले के वृक्ष को भी जन्म दिया। इसी कारण आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है। आंवले वृक्ष के हर अंग में ईश्वर का निवास माना गया है। #शुभ कामनाएँ 🙏













