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कुण्डली आत्माराम #संतो की रचनायें
संतो की रचनायें - 'कुण्डली" संतन डाकी क्यूं कहौ, डाकणि तोहि।| खाया घर बाहर सबको दल्या , रह्या न वाकी कोहि। | रह्या न बाकी कोहि, हाथ सूं करी खवारी।| राम राय का कौल, गई चूक्या बहु aIII आत्म संत जन मोर रहे, राम आसरै होइ। | संतन डाकी क्यूं कहो, डाकणि खाया तोहि।| आत्माराम (೧ Motivational Videos App Want . 'कुण्डली" संतन डाकी क्यूं कहौ, डाकणि तोहि।| खाया घर बाहर सबको दल्या , रह्या न वाकी कोहि। | रह्या न बाकी कोहि, हाथ सूं करी खवारी।| राम राय का कौल, गई चूक्या बहु aIII आत्म संत जन मोर रहे, राम आसरै होइ। | संतन डाकी क्यूं कहो, डाकणि खाया तोहि।| आत्माराम (೧ Motivational Videos App Want . - ShareChat