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#प्रसंग ग़लत है ।
प्रसंग ग़लत है । - दिया गया संदर्भ सही पर अवसर और प्रसंग ग़लत है | भाव, अमूर्त और अशरीरी अनुभव की वस्तु रहा है वह चित्र न कर पाया रूपायित शब्दों ने ही उसे कहा है उसका कल्पित रूप सही पर दृश्यमान हर रंग ग़लत है | विश्वास सघन होता तब जब संबंधो का मन बनता है गगन तभी भूतल बनता है भूतल तभी गगन बनता है सही, प्रेम में प्रण करना पर करके प्रण , प्रण-भंग ग़लत है / संस्तुति , अर्थ, कपट से पायी जो भी हो उपलब्धि हीन है ऐसा , तन से उजला हो पर मन से वह बिलकुल मलीन है शिखर लक्ष्य हो, सही बात पर दिया गया संदर्भ सही पर अवसर और प्रसंग ग़लत है | भाव, अमूर्त और अशरीरी अनुभव की वस्तु रहा है वह चित्र न कर पाया रूपायित शब्दों ने ही उसे कहा है उसका कल्पित रूप सही पर दृश्यमान हर रंग ग़लत है | विश्वास सघन होता तब जब संबंधो का मन बनता है गगन तभी भूतल बनता है भूतल तभी गगन बनता है सही, प्रेम में प्रण करना पर करके प्रण , प्रण-भंग ग़लत है / संस्तुति , अर्थ, कपट से पायी जो भी हो उपलब्धि हीन है ऐसा , तन से उजला हो पर मन से वह बिलकुल मलीन है शिखर लक्ष्य हो, सही बात पर - ShareChat