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#✍🏽 माझ्या लेखणीतून
✍🏽 माझ्या लेखणीतून - एक विवाहित बेटी ने अपनी माँ के नाम एक पत्र लिखी माँ तुम बहुत याद आती हो अब मेरी सुबह 5 बजे ही हो जाती है और रात १२ बज जाती है तब माँ तुम बहुत याद आती हो, सबको गरम गरम खाना परोसती हूँ॰ और खुद ठंढा ही खा लेती हूँ॰ तब माँ तुम बहुत याद आती हो कोई बीमार पडता है तो एक पैर पर ড उसकी सेवा में लग जाती हूँ॰ और जब मैं बीमार पड़ती हूँ तो खुद ही अपनी सेवा कर लेती हूँ, तब माँ तुम बहुत याद आती हो जब रात में सब सोते हैं॰ बच्चों और पति को चादर ओढ़ाना नहीं और खुद को कोई चादर ओढाने वाला भूलती नहीं, तब माँ तुम बहुत याद आती हो सबकी जरुरत पूरी करते करते खुद को भूल जाती हूँ॰ खुद से मिलने वाला कोई नहीं, तब मा तुम बहुत याद आती हो यही कहानी हर लड़की की शायद शादी के बाद हो जाती होगी , कहने को तो हर आदमी शादी से पहले कहता है माँ की याद तुम्हें आने न दूँगा फिर भी क्यों? माँ तुम बहुत याद आती हो UR एक विवाहित बेटी ने अपनी माँ के नाम एक पत्र लिखी माँ तुम बहुत याद आती हो अब मेरी सुबह 5 बजे ही हो जाती है और रात १२ बज जाती है तब माँ तुम बहुत याद आती हो, सबको गरम गरम खाना परोसती हूँ॰ और खुद ठंढा ही खा लेती हूँ॰ तब माँ तुम बहुत याद आती हो कोई बीमार पडता है तो एक पैर पर ড उसकी सेवा में लग जाती हूँ॰ और जब मैं बीमार पड़ती हूँ तो खुद ही अपनी सेवा कर लेती हूँ, तब माँ तुम बहुत याद आती हो जब रात में सब सोते हैं॰ बच्चों और पति को चादर ओढ़ाना नहीं और खुद को कोई चादर ओढाने वाला भूलती नहीं, तब माँ तुम बहुत याद आती हो सबकी जरुरत पूरी करते करते खुद को भूल जाती हूँ॰ खुद से मिलने वाला कोई नहीं, तब मा तुम बहुत याद आती हो यही कहानी हर लड़की की शायद शादी के बाद हो जाती होगी , कहने को तो हर आदमी शादी से पहले कहता है माँ की याद तुम्हें आने न दूँगा फिर भी क्यों? माँ तुम बहुत याद आती हो UR - ShareChat