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जीवन के हर पोर-पोर पर #जीवन के हर पोर-पोर पर
जीवन के हर पोर-पोर पर - जीवन के हर पोर-पोर पर नाच रहा जुगनू-सा पानी | निकले संकल्पों के अंकुर तोड़ वर्जना की दीवारें &<24-44236<6 नभ के वायस पंख पसारे ] भींँगे तप्त प्राण वर्षों के महके स्वप्न विजन मरुथल में ये अमोल मोतियाँ समेटूँ मैं अपने रीते आँचल में 1 स्वप्निल इन्द्रधनुष पर झूलेगी मेरी साधना सयानी | लोकगीत की बिरहिन बाँधे पंखों में संदेश पवन के पैरों में बिजलियाँ बाँध कर नाचे परियाँ द्वार गगन के । रोम रोम व्याकुल होता तन जब समीर के झोंके परसे जैसे किसी सुनहरी ग्रीवा पर उछ्वास पिया के बरसे | झूम रही तापसी अपर्णा पढ्ने आज चनरिया धानी जीवन के हर पोर-पोर पर नाच रहा जुगनू-सा पानी | निकले संकल्पों के अंकुर तोड़ वर्जना की दीवारें &<24-44236<6 नभ के वायस पंख पसारे ] भींँगे तप्त प्राण वर्षों के महके स्वप्न विजन मरुथल में ये अमोल मोतियाँ समेटूँ मैं अपने रीते आँचल में 1 स्वप्निल इन्द्रधनुष पर झूलेगी मेरी साधना सयानी | लोकगीत की बिरहिन बाँधे पंखों में संदेश पवन के पैरों में बिजलियाँ बाँध कर नाचे परियाँ द्वार गगन के । रोम रोम व्याकुल होता तन जब समीर के झोंके परसे जैसे किसी सुनहरी ग्रीवा पर उछ्वास पिया के बरसे | झूम रही तापसी अपर्णा पढ्ने आज चनरिया धानी - ShareChat