*वराह अवतार कथा*
*हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार, जब-जब धरती पर अधर्म बढ़ा, तब-तब भगवान विष्णु ने दुष्टों का नाश करके पुन: धर्म की स्थापना के लिए अलग-अलग अवतार धारण किए. वैसे तो भगवान विष्णु के 24 अवतार माने जाते हैं, लेकिन इनमें 10 अवतारों को सबसे प्रमुख माना गया है. इन्हीं 10 अवतारों में से एक है विष्णु जी का वराह अवतार. यह अवतार भगवान विष्णु का तीसरा अवतार है. इस अवतार में भगवान विष्णु ने वराह यानी जंगली सूअर का रूप धारण किया था. हर साल भादो माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को वराह जयंती मनाई जाती है, चलिए आपको इस अवतार से जुड़ी अन्य बातें जानते हैं।*
*भगवान विष्णु ने वराह अवतार क्यों लिया?*
*भगवान विष्णु ने वराह अवतार पृथ्वी को हिरण्याक्ष नाम के राक्षस से बचाने के लिए लिया था. राक्षस हिरण्याक्ष ने पृथ्वी को समुद्र में डुबो दिया था और भगवान विष्णु ने वराह रूप में अवतार लेकर पृथ्वी को बचाया और हिरण्याक्ष का वध किया था।*
*वराह अवतार कहां हुआ था?*
*धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान विष्णु का तीसरा अवतार यानी वराह अवतार उत्तर प्रदेश के सोरों में हुआ था. इसे शूकर क्षेत्र भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि वराह अवतार ने हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध कर पृथ्वी को रसातल से निकालकर पुनः स्थापित किया था।*
*वराह अवतार कब हुआ था?*
*हिंदू पंचांग के मुताबिक, वराह अवतार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हुआ था. इस दिन को वराह जयंती के रूप में मनाया जाता है. इस दिन भगवान विष्णु की पूजा वराह के अवतार में की जाती है।*
*हिरण्याक्ष का आतंक:- हिरण्याक्ष एक शक्तिशाली राक्षस था जिसने पृथ्वी को रसातल यानी समुद्र के नीचे में छिपा दिया था।*
*वराह अवतार:- भगवान विष्णु ने वराह का रूप धारण किया और पृथ्वी को बचाने के लिए समुद्र में प्रवेश किया।*
*युद्ध:- भगवान वराह और हिरण्याक्ष के बीच भयंकर युद्ध हुआ, जो कई वर्षों तक चला।*
*पृथ्वी का उद्धार:- भगवान वराह ने अपने मजबूत दांतों से पृथ्वी को समुद्र से बाहर निकाला और उसे अपने स्थान पर स्थापित किया।*
*हिरण्याक्ष का वध:– अंत में भगवान वराह ने हिरण्याक्ष का वध किया और पृथ्वी को उसके अत्याचारों से मुक्त कराया।*
*-जय श्री हरि विष्णु -* #किस्से-कहानी

