बिनोद कुमार शर्मा
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बिनोद कुमार शर्मा
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##😞14 फरवरी ब्लैक डे🖤
#😞14 फरवरी ब्लैक डे🖤 - 14 Oxq তুলনামা शहीद दिवस पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए  मां भारती के वीर जवानों को भावभीनी -श्रद्धांजलि अमर जवान आपके अदम्य साहस, वीरता व शौर्य का राष्ट्र सदैव ऋणी रहेगा| 14 FEBRUARY BLACK DAY Binod kumar Sharma 14 Oxq তুলনামা शहीद दिवस पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए  मां भारती के वीर जवानों को भावभीनी -श्रद्धांजलि अमर जवान आपके अदम्य साहस, वीरता व शौर्य का राष्ट्र सदैव ऋणी रहेगा| 14 FEBRUARY BLACK DAY Binod kumar Sharma - ShareChat
#श्री रामलला दर्शन अयोध्या
श्री रामलला दर्शन अयोध्या - कै दर्शन श्री रामलला , अयोध्या धाम 3{||5{ १४ फरवरी २०२६ Binod kumar Sharma ^ कै दर्शन श्री रामलला , अयोध्या धाम 3{||5{ १४ फरवरी २०२६ Binod kumar Sharma ^ - ShareChat
#जय माँ विंध्यवासिनी🙏🏻🚩
जय माँ  विंध्यवासिनी🙏🏻🚩 - ख फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तिथि - द्वादशी, संवत् २०८२, दिन शनिवार, १४ फरवरी २०२६७ * *जय जय मैय्या विंध्यवासिनी की* ख फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तिथि - द्वादशी, संवत् २०८२, दिन शनिवार, १४ फरवरी २०२६७ * *जय जय मैय्या विंध्यवासिनी की* - ShareChat
#जय महाकाल दर्शन।।
जय महाकाल दर्शन।। - जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन* संवत् फ फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तिथि ২০২, নিন द्वादशी, शनिवार, १४ फरवरी २०२६ 3 ఎా: T9TqT* படபயயI श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  +లాయ ~@9@0 जयणीराम जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन* संवत् फ फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तिथि ২০২, নিন द्वादशी, शनिवार, १४ फरवरी २०२६ 3 ఎా: T9TqT* படபயயI श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  +లాయ ~@9@0 जयणीराम - ShareChat
*हनुमान जी की पांच रोचक कहानी* *वाल्मीकि रामायण के अलावा दुनियाभर की रामायण में हनुमानजी के संबंध में सैंकड़ों कथाओं का वर्णन मिलता है। उनके बचपने से लेकर कलयुग तक तो हजारों कथाएं हमें पढ़ने को मिल जाती हैं। हनुमानजी को कलयुग का संकट मोचन देवता कहा गया है। एकमात्र इन्हीं की भक्ति फलदायी है। आइए जानते हैं कि कौनसी 5 ऐसी पौराणिक कथाएं हैं जो आज भी प्रचलित हैं।* *1. चारों जुग परताप तुम्हारा :-* *लंका विजय कर अयोध्या लौटने पर जब श्रीराम उन्हें युद्घ में सहायता देने वाले विभीषण, सुग्रीव, अंगद आदि को कृतज्ञतास्वरूप उपहार देते हैं तो हनुमानजी श्रीराम से याचना करते हैं- ''यावद् रामकथा वीर चरिष्यति महीतले। तावच्छरीरे वत्स्युन्तु प्राणामम न संशय:।।''* *अर्थात : 'हे वीर श्रीराम! इस पृथ्वी पर जब तक रामकथा प्रचलित रहे, तब तक निस्संदेह मेरे प्राण इस शरीर में बसे रहें।' इस पर श्रीराम उन्हें आशीर्वाद देते हैं- 'एवमेतत् कपिश्रेष्ठ भविता नात्र संशय:। चरिष्यति कथा यावदेषा लोके च मामिका तावत् ते भविता कीर्ति: शरीरे प्यवस्तथा। लोकाहि यावत्स्थास्यन्ति तावत् स्थास्यन्ति में कथा।'* *अर्थात् : 'हे कपिश्रेष्ठ, ऐसा ही होगा, इसमें संदेह नहीं है। संसार में मेरी कथा जब तक प्रचलित रहेगी, तब तक तुम्हारी कीर्ति अमिट रहेगी और तुम्हारे शरीर में प्राण भी रहेंगे ही। जब तक ये लोक बने रहेंगे, तब तक मेरी कथाएं भी स्थिर रहेंगी।' चारों जुग परताप तुम्हारा, है परसिद्ध जगत उजियारा।।* *2. दो बार उठाया था संजीवनी पर्वत : एक बार बचपन में ही हनुमानजी समुद्र में से संजीवनी पर्वत को देवगुरु बृहस्पति के कहने से अपने पिता के लिए उठा लाते हैं। यह देखकर उनकी माता बहुत ही भावुक हो जाती है। इसके बाद राम-रावण युद्ध के दौरान जब रावण के पुत्र मेघनाद ने शक्तिबाण का प्रयोग किया तो लक्ष्मण सहित कई वानर मूर्छित हो गए थे। जामवंत के कहने पर हनुमानजी संजीवनी बूटी लेने द्रोणाचल पर्वत की ओर गए। जब उनको बूटी की पहचान नहीं हुई, तब उन्होंने पर्वत के एक भाग को उठाया और वापस लौटने लगे। रास्ते में उनको कालनेमि राक्षस ने रोक लिया और युद्ध के लिए ललकारने लगा। कालनेमि राक्षस रावण का अनुचर था। रावण के कहने पर ही कालनेमि हनुमानजी का रास्ता रोकने गया था। लेकिन रामभक्त हनुमान उसके छल को जान गए और उन्होंने तत्काल उसका वध कर दिया।* *3. विभीषण और राम को मिलाना : जब हनुमानजी सीता माता को ढूंढते-ढूंढते विभीषण के महल में चले जाते हैं। विभीषण के महल पर वे राम का चिह्न अंकित देखकर प्रसन्न हो जाते हैं। वहां उनकी मुलाकात विभीषण से होती है। विभीषण उनसे उनका परिचय पूछते हैं और वे खुद को रघुनाथ का भक्त बताते हैं। हनुमान और विभीषण का लंबा संवाद होता है और हनुमानजी जान जाते हैं कि यह काम का व्यक्ति है।* *इसके बाद जिस समय श्रीराम लंका पर चढ़ाई करने की तैयारी कर रहे होते हैं उस दौरान विभीषण का रावण से विवाद चल रहा होता है अंत में विभीषण महल को छोड़कर राम से मिलने को आतुर होकर समुद्र के इस पार आ जाते हैं। वानरों ने विभीषण को आते देखा तो उन्होंने जाना कि शत्रु का कोई खास दूत है। कोई भी विभीषण पर विश्वास नहीं करता है।* *सुग्रीव कहते हैं- 'हे रघुनाथजी! सुनिए, रावण का भाई मिलने आया है।' प्रभु कहते हैं- 'हे मित्र! तुम क्या समझते हो?' वानरराज सुग्रीव ने कहा- 'हे नाथ! राक्षसों की माया जानी नहीं जाती। यह इच्छानुसार रूप बदलने वाला न जाने किस कारण आया है।' ऐसे में हनुमानजी सभी को दिलासा देते हैं और राम भी कहते हैं कि मेरा प्रण है कि शरणागत के भय को हर लेना चाहिए। इस तरह हनुमानजी के कारण ही श्रीराम-विभीषण का मिलन सुनिश्चित हो पाया।* *4. सबसे पहले लिखी रामायण : शास्त्रों के अनुसार विद्वान लोग कहते हैं कि सर्वप्रथम रामकथा हनुमानजी ने लिखी थी और वह भी एक शिला (चट्टान) पर अपने नाखूनों से लिखी थी। यह रामकथा वाल्मीकिजी की रामायण से भी पहले लिखी गई थी और यह 'हनुमद रामायण' के नाम से प्रसिद्ध है। यह घटना तब की है जबकि भगवान श्रीराम रावण पर विजय प्राप्त करने के बाद अयोध्या में राज करने लगते हैं और श्री हनुमानजी हिमालय पर चले जाते हैं। वहां वे अपनी शिव तपस्या के दौरान की एक शिला पर प्रतिदिन अपने नाखून से रामायण की कथा लिखते थे। इस तरह उन्होंने प्रभु श्रीराम की महिमा का उल्लेख करते हुए 'हनुमद रामायण' की रचना की।* *कुछ समय बाद महर्षि वाल्मीकि ने भी 'वाल्मीकि रामायण' लिखी और लिखने के बाद उनके मन में इसे भगवान शंकर को दिखाकर उनको समर्पित करने की इच्छा हुई। वे अपनी रामायण लेकर शिव के धाम कैलाश पर्वत पहुंच गए। वहां उन्होंने हनुमानजी को और उनके द्वारा लिखी गई 'हनुमद रामायण' को देखा। हनुमद रामायण के दर्शन कर वाल्मीकिजी निराश हो गए।* *वाल्मीकिजी को निराश देखकर हनुमानजी ने उनसे उनकी निराशा का कारण पूछा तो महर्षि बोले कि उन्होंने बड़े ही कठिन परिश्रम के बाद रामायण लिखी थी लेकिन आपकी रामायण देखकर लगता है कि अब मेरी रामायण उपेक्षित हो जाएगी, क्योंकि आपने जो लिखा है उसके समक्ष मेरी रामायण तो कुछ भी नहीं है। तब वाल्मीकिजी की चिंता का शमन करते हुए श्री हनुमानजी ने हनुमद रामायण पर्वत शिला को एक कंधे पर उठाया और दूसरे कंधे पर महर्षि वाल्मीकि को बिठाकर समुद्र के पास गए और स्वयं द्वारा की गई रचना को श्रीराम को समर्पित करते हुए समुद्र में समा दिया। तभी से हनुमान द्वारा रची गई हनुमद रामायण उपलब्ध नहीं है। वह आज भी समुद्र में पड़ी है।* *5. हनुमान और अर्जुन : आनंद रामायण में वर्णन है कि अर्जुन के रथ पर हनुमान के विराजित होने के पीछे भी निम्नलिखित कारण हैं:-* *त्रेतायुग से ही रामजी का नाम लेकर हनुमान चिरंजीवी रहे और ऐसे में एक दिन रामेश्वरम के पास उनकी भेंट अर्जुन से हो गयी. अर्जुन को अपने धनुर्धारी होने पर बड़ा घमंड था. हनुमान से मिलने के बाद उन्होंने कहा कि प्रभु आपने त्रेतायुग में अपनी सेना के साथ मिलकर ये पत्थर का जो सेतु बनाया, अगर मैं होता तो अकेले ही अपने बाणों से ही ऐसा सेतु बनाता कि बिना टूटे उस सेतु से सभी बहुत आराम से उसे पार कर लेते. ऐसे में श्रीराम ने क्यों नहीं ऐसा सेतु स्वयं बना लिए।* *जब अर्जुन में झलका अहंकार* *हनुमान जी ने अर्जुन की पूरी बात सुनी और विनम्रतापूर्वक कहा कि, जिस स्थान आप अभी खड़े हैं, यहां बाणों से सेतु बनाना असंभव है. ऐसा सेतु मेरी सेना का वजन क्या, मेरा ही वजन नहीं संभाल पाती. इस पर अर्जुन ने हनुमान जी को चुनौती दी कि अगर उन्होंने बाणों से ऐसा सेतु बना दिया, जिसमें हनुमान जी तीन कदम चल पाए तो फिर हनुमान जी को अग्नि में प्रवेश करना होगा और अगर हनुमान जी के चलने से पुल टूट गया तो फिर अर्जुन अग्नि में प्रवेश कर जाएंगे. हनुमान जी ने अर्जुन की चुनौती स्वीकार कर ली. इसके बाद अर्जुन ने उनके सामने ही एक सरोवर में बाणों का सेतु बनाकर तैयार कर दिया।* *हनुमान जी के वजन से हिला सेतु* *हनुमान जी प्रभु राम का नाम लेकर उस सेतु पर चल पड़े. लेकिन हनुमना जी का पहला कदम पड़ते ही वो सेतु डगमगाने लगा, दूसरे कदम में उस सेतु के टूटने की आवाजें आने लगी और तीसरे कदम पर तो उस सरोवर का पानी रक्त जैसा लाल हो गया. लेकिन अर्जुन के कहेनुसार हनुमान जी सेतु पर तीन कदम चल चुके थे और अब उनके अग्नि में प्रवेश करने का समय आ गया था. जैसे ही वो अग्नि में प्रवेश करने वाले थे वैसे ही वहां पर श्रीकृष्ण अवतरित हुए।* *उन्होंने हनुमान जी को रोका और उन्हें समझाया कि दरअसल ये सेतु तो पहले कदम में ही टूट जाता. लेकिन मैं कछुए का रूप लेकर इस सेतु के नीचे लेटा हुआ था. दो कदमों के बाद तो ये सेतु टूट गया था और हनुमान जी का तीसरा कदम असल में श्री कृष्ण के ऊपर पड़ा था. इसलिए सरोवर का पानी उनके रक्त से लाल हो गया. यह जानकर हनुमान जी को बहुत ही ग्लानि महसूस हुई और उन्होंने क्षमा मांगते हुए उनसे अपने पाप का प्रायश्चित करने का उपाय मांगा. अर्जुन भी ये सब जानकर निराश हो गए और दोनों ने भगवान से क्षमा मांगी।* *हनुमान जी ने यूं पकड़ी अर्जुन के रथ की ध्वजा* *तब श्री कृष्ण ने दोनों को समझाया कि जो भी हुआ उनकी इच्छा से हुआ. ऐसे में मेरी यही इच्छा है कि आप कुरुक्षेत्र के युद्ध में हमारी सहायता करें. हनुमान जी ने उनसे पूछा कि वो कैसे अर्जुन की सहायता कर सकते हैं. तब उन्होंने हनुमान जी को अर्जुन के रथ के ऊपर ध्वजा में विराजमान होने को कहा. ऐसा करने से विरोधियों के बाण रथ पर लगे भी तो वो हनुमान के वजन के कारण पीछे नहीं जाएगा और अर्जुन को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक पाएगा. हनुमान जी ने श्री कृष्ण की बात मान ली और इस तरह से महाभारत युद्ध के दौरान अर्जुन के रथ पर हनुमान जी ध्वज के साथ विराजमान हुए।* *-रामकृपा-* #किस्से-कहानी
#👌 अच्छी सोच👍
👌 अच्छी सोच👍 - *नियत साफ साफ हो और मकसद नेक हो तो परमात्मा किसी ना किसो रूप में आपकी मदद जरूर है।-रामकृपा ' करता' है कुछ ' *जीवन में कई परिस्थितिया बनतो आपके लिएअच्छी कुछ ख़राब हो सकती है पर सीखा कर दोनों जाती है।-रामकृपा *नियत साफ साफ हो और मकसद नेक हो तो परमात्मा किसी ना किसो रूप में आपकी मदद जरूर है।-रामकृपा ' करता' है कुछ ' *जीवन में कई परिस्थितिया बनतो आपके लिएअच्छी कुछ ख़राब हो सकती है पर सीखा कर दोनों जाती है।-रामकृपा - ShareChat
🌹🌷🙏 #शुभ शनिवार 🙏🌷🌹
शुभ शनिवार - शुभ शनिवार 35 14/02/26 ~प्रातः नमन~ बीर हंहनुमते हनुमान नम नम8् शनैश्वराय ; #7` कपीन्द्र सचिवोत्तम अंजनीगर्भ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् . रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमन् रक्ष सर्वदा छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामी शनैश्चरम्। रामकृपा शनिदेव व पंचमुखी हनुमान जी के कृपा से श्री आप सपरिवार सदा ' सुखी, स्वस्थ एवं आनंदित रहे ! शुभ शनिवार 35 14/02/26 ~प्रातः नमन~ बीर हंहनुमते हनुमान नम नम8् शनैश्वराय ; #7` कपीन्द्र सचिवोत्तम अंजनीगर्भ नीलांजनसमाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम् . रामप्रिय नमस्तुभ्यं हनुमन् रक्ष सर्वदा छायामार्तण्डसम्भूतं तं नमामी शनैश्चरम्। रामकृपा शनिदेव व पंचमुखी हनुमान जी के कृपा से श्री आप सपरिवार सदा ' सुखी, स्वस्थ एवं आनंदित रहे ! - ShareChat
#जय महाकाल दर्शन।।
जय महाकाल दर्शन।। - जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का सायंकालीन आरती श्रृंगार दर्शन* *दिव्य श्री उमामहेश श्रृंगार दर्शन* मुखौटा *फ फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तिथि - विजया एकादशी, संवत् २०८२, दिन - शुक्रवार, १३ फरवरी २०२६७ * ऊँ नमः शिवाय* श्री महाकालेश्वर संध्या आरती दर्शन जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का सायंकालीन आरती श्रृंगार दर्शन* *दिव्य श्री उमामहेश श्रृंगार दर्शन* मुखौटा *फ फाल्गुन, कृष्ण पक्ष, तिथि - विजया एकादशी, संवत् २०८२, दिन - शुक्रवार, १३ फरवरी २०२६७ * ऊँ नमः शिवाय* श्री महाकालेश्वर संध्या आरती दर्शन - ShareChat
##🌺 विजया एकादशी🙏
#🌺 विजया एकादशी🙏 - १३ फरवरी ऊँ नमो नारायणाय शष्कीऔरशष्कैप्वरीपरिवारकी fser एकादशी कीह्ार्निकशुमकामदा&ु Binod kumar Sharma १३ फरवरी ऊँ नमो नारायणाय शष्कीऔरशष्कैप्वरीपरिवारकी fser एकादशी कीह्ार्निकशुमकामदा&ु Binod kumar Sharma - ShareChat
#श्री रामलला दर्शन अयोध्या
श्री रामलला दर्शन अयोध्या - आज कैे दर्शन श्री रामलला , अयोध्या धाम १३ फरवरी २०२६ Binod kumar Sharma {| आज कैे दर्शन श्री रामलला , अयोध्या धाम १३ फरवरी २०२६ Binod kumar Sharma {| - ShareChat