बिनोद कुमार शर्मा
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बिनोद कुमार शर्मा
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-------------------------------------------- *पिता जी के हाथ के निशान* पिता जी बूढ़े हो गए थे और चलते समय दीवार का सहारा लेते थे। नतीजतन, दीवारें जहाँ भी छूती थीं, वहाँ रंग उड़ जाता था और दीवारों पर उनके उंगलियों के निशान पड़ जाते थे। मेरी पत्नी यह देखती और अक्सर गंदी दिखने वाली दीवारों के बारे में शिकायत करती। एक दिन, उन्हें सिरदर्द हो रहा था, इसलिए उन्होंने अपने सिर पर थोड़ा तेल मालिश किया। इसलिए चलते समय दीवारों पर तेल के दाग बन गए। मेरी पत्नी यह देखकर मुझ पर चिल्लाई और मैं भी अपने पिता पर चिल्लाया और उनसे बदतमीजी से बात की, उन्हें सलाह दी कि वे चलते समय दीवारों को न छुएँ। वे दुखी लग रहे थे। मुझे भी अपने व्यवहार पर शर्म आ रही थी, लेकिन मैंने उनसे कुछ नहीं कहा। पिता जी ने चलते समय दीवार को पकड़ना बंद कर दिया और एक दिन गिर पड़े। वे बिस्तर पर पड़ गए और कुछ ही समय में हमें छोड़कर चले गए। मुझे अपने दिल में अपराधबोध महसूस हुआ और मैं उनके भावों को कभी नहीं भूल पाया और कुछ ही समय बाद उनके निधन के लिए खुद को माफ़ नहीं कर पाया। कुछ समय बाद, हम अपने घर की पेंटिंग करवाना चाहते थे।  जब पेंटर आए तो मेरे बेटे ने, जो अपने दादा को बहुत प्यार करता था, पेंटर को पिता के फिंगरप्रिंट साफ करने और उन जगहों पर पेंट करने की अनुमति नहीं दी। पेंटर बहुत अच्छे थे, उन्होंने उसे भरोसा दिलाया कि वे मेरे पिता के फिंगरप्रिंट/हाथ के निशान नहीं मिटाएंगे बल्कि इन निशानों के चारों ओर एक सुंदर घेरा बनाकर एक अनूठी डिजाइन बनाएंगे। इसके बाद यह सिलसिला चलता रहा और वे निशान हमारे घर का हिस्सा बन गए। हमारे घर आने वाला हर व्यक्ति हमारे अनोखे डिजाइन की प्रशंसा करता था। समय के साथ, मैं भी बूढ़ा हो गया। अब मुझे चलने के लिए दीवार के सहारे की जरूरत थी। एक दिन चलते समय, मुझे अपने पिता से कहे गए शब्द याद आ गए और मैंने बिना सहारे के चलने की कोशिश की। मेरे बेटे ने यह देखा और तुरंत मेरे पास आया और मुझे दीवार का सहारा लेने के लिए कहा, चिंता व्यक्त करते हुए कि मैं बिना सहारे के गिर जाऊंगा, मैंने महसूस किया कि मेरा बेटा मुझे पकड़ रहा था। मेरी पोती तुरंत आगे आई और प्यार से, मुझे सहारा देने के लिए अपना हाथ उसके कंधे पर रखने के लिए कहा। मैं लगभग चुपचाप रोने लगा। अगर मैंने अपने पिता के लिए भी ऐसा ही किया होता, तो वे लंबे समय तक जीवित रहते। मेरी पोती मुझे साथ ले गई और सोफे पर बैठा दिया। फिर उसने मुझे दिखाने के लिए अपनी ड्राइंग बुक निकाली। उसकी शिक्षिका ने उसकी ड्राइंग की प्रशंसा की और उसे बेहतरीन टिप्पणियाँ दीं! स्केच दीवारों पर मेरे पिता के हाथ के निशान का था। स्केच के नीचे शीर्षक लिखा था.. “काश हर बच्चा बड़ों से इसी तरह प्यार करता”। मैं अपने कमरे में वापस आ गया और अपने पिता से माफ़ी मांगते हुए फूट-फूट कर रोने लगा, जो अब इस दुनिया में नहीं थे। हम भी समय के साथ बूढ़े हो जाते हैं /हो जाएंगे। आइए अपने बड़ों का ख्याल रखें और अपने बच्चों को भी यही सिखाएँ। ●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆● Post अगर आप को अच्छी लगी हो तो इसे आगे जरूर शेयर करें । #किस्से-कहानी ●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●◆●
#👌 अच्छी सोच👍
👌 अच्छी सोच👍 - सच्चे रिश्ते में देना और लेना दोनों तरफ से होता है। सिर्फ दुख देता है इसलिए ऐसे रिश्ते एकतरफा प्यार को छोड़ देना ही समझदारी है। रामकृपा * *अगर आप सकारात्मक सोचेँगे कि मैं कर सकता हूँ॰ मुझे सफलता मिलेगी , सब ठीक हो जाएगा तो आपके अंदर एक नई ऊर्जा आती है और काम करने तरीका बदल जाता है।-रामकृपा * का सच्चे रिश्ते में देना और लेना दोनों तरफ से होता है। सिर्फ दुख देता है इसलिए ऐसे रिश्ते एकतरफा प्यार को छोड़ देना ही समझदारी है। रामकृपा * *अगर आप सकारात्मक सोचेँगे कि मैं कर सकता हूँ॰ मुझे सफलता मिलेगी , सब ठीक हो जाएगा तो आपके अंदर एक नई ऊर्जा आती है और काम करने तरीका बदल जाता है।-रामकृपा * का - ShareChat
🌹🌷🙏 #शुभ सोमवार 🙏🌷🌹
शुभ सोमवार - शुभू सोमवार 23/02/26 र्प्रातः नमन~ ध्यानमग्न रहते महेश्वराय सदा पर्वत पर है 74: वास सबकी भोलेनाथ जी॰ करते पूरी GIr Il शंभुः मंगलं वृषभध्वजः| मंगलं भगवान् मंगलं पार्वतीनाथो मंगलायतनो हरः।| रामकृपा शिव परिवारकी असीम कृपा से आप सदैव आनंदित रहें। शुभू सोमवार 23/02/26 र्प्रातः नमन~ ध्यानमग्न रहते महेश्वराय सदा पर्वत पर है 74: वास सबकी भोलेनाथ जी॰ करते पूरी GIr Il शंभुः मंगलं वृषभध्वजः| मंगलं भगवान् मंगलं पार्वतीनाथो मंगलायतनो हरः।| रामकृपा शिव परिवारकी असीम कृपा से आप सदैव आनंदित रहें। - ShareChat
#जय महाकाल दर्शन।।
जय महाकाल दर्शन।। - जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का सायंकालीन आरती श्रृंगार दर्शन* ७ फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तिथि - पंचमी, संवत् २०८२, दिन * रविवार, २२ फरवरी २०२६७ * ऊँ नमः शिवाय* श्री महाकालेश्वर संध्या आरती दर्शन  जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का सायंकालीन आरती श्रृंगार दर्शन* ७ फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तिथि - पंचमी, संवत् २०८२, दिन * रविवार, २२ फरवरी २०२६७ * ऊँ नमः शिवाय* श्री महाकालेश्वर संध्या आरती दर्शन - ShareChat
#श्री रामलला दर्शन अयोध्या
श्री रामलला दर्शन अयोध्या - आज कै दर्शन श्री रामलला , अयोध्या धाम २२ फरवरी २०२६ Binod kumar Sharma आज कै दर्शन श्री रामलला , अयोध्या धाम २२ फरवरी २०२६ Binod kumar Sharma - ShareChat
#जय माँ विंध्यवासिनी🙏🏻🚩
जय माँ  विंध्यवासिनी🙏🏻🚩 - फ फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तिथि - पंचमी, संवत् २०८२, दिन * रविवार, २२ फरवरी २०२६७ * *जय जय मैय्या विंध्यवासिनी की* फ फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तिथि - पंचमी, संवत् २०८२, दिन * रविवार, २२ फरवरी २०२६७ * *जय जय मैय्या विंध्यवासिनी की* - ShareChat
#जय महाकाल दर्शन।।
जय महाकाल दर्शन।। - जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन* फ फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तिथि - पंचमी, संवत् २०८२, दिन * रविवार, २२ फरवरी २०२६७ * ऊँ नमः शिवाय* श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  శ్ जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज का भस्म आरती श्रृंगार दर्शन* फ फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तिथि - पंचमी, संवत् २०८२, दिन * रविवार, २२ फरवरी २०२६७ * ऊँ नमः शिवाय* श्री महाकालेश्वर भस्म आरती दर्शन  శ్ - ShareChat
*!! लोहे का तराजू !!* ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ *एक बार एक व्यापारी को व्यापार के सिलसिले में परदेस जाना था और उसके लिए पैसों की जरूरत थी। वह एक साहूकार के पास गया और उससे पैसे उधार लिए। व्यापारी ने अपनी लोहे की तराजू साहूकार के पास गिरवी रखवा दी।* *अपनी यात्रा से वापस आने के बाद, व्यापारी साहूकार के घर गया। उसने उसके पैसे वापस किए और उससे अपनी तराजू मांगा। लालची साहूकार बोला, “मेरी दुकान में बहुत सारे चूहे हैं। चूहों ने तुम्हारी तराजू कुतर दिया।”* *व्यापारी को पता था कि साहूकार झूठ बोल रहा है पर उसने साहूकार से कोई बहस नहीं किया। उसने कहा, “कोई बात नहीं। मैं तुम्हारे लिए रेशम के कुछ कपड़े की थान लाया हूं। क्या तुम अपने बेटे को मेरे साथ भेज दोगे? वह कपड़ों के थान को लेकर वापस आ जाएगा।” सौदागर की आंखें चमक उठी और उसने अपने बेटे को व्यापारी के साथ भेज दिया।* *व्यापारी साहूकार के बेटे को एक गुफा में ले गया और बोला, “मैंने अपना सामान इस गुफा में रखा हुआ है। अंदर जाकर दो थान निकाल लो।” जैसे ही लड़का अंदर गया, व्यापारी ने गुफा का दरवाजा बंद कर दिया। व्यापारी अकेला साहूकार के पास गया। परेशान साहूकार ने पूछा, “मेरा बेटा कहां है?”* *व्यापारी ने कहा, “मुझे माफ करना। एक चील तुम्हारे बेटे को अपने पंजे में दबाकर उड़ गया।”* *साहूकार गुस्से में बोला, “ऐसा कैसे हो सकता है? मैं तुम्हारी शिकायत गांव के बड़े बुजुर्ग से करूंगा।”* *जब बुजुर्गों ने व्यापारी से लड़के को वापस करने को कहा तो व्यापारी बोला, “जब लोहे के तराजू को चूहा खा सकता है, तो लड़के को चील कैसे नहीं उठा सकता?”* *उन लोगों ने व्यापारी से पूरा मामला बताने को कहा। व्यापारी की बात सुनकर बुजुर्गों ने साहूकार को तराजू वापस देने को कहा।* *शिक्षा:-* *मित्रों, जैसा बीज बोओगे, वैसी फसल काटोगे।* *-रामकृपा-* #किस्से-कहानी
#👌 अच्छी सोच👍
👌 अच्छी सोच👍 - ्हमेशा सच्चे और ईमानदार लोगों की सँंगति में रहो क्योंकि संगति का असर बहुत गहरा होता है। बुरे लोगों के साथ रहने से आपका भी चरित्र खराब हो है।-रामकृपा* মকনা *जहाँ आपकी कद्र नहीं वहाँ रुको मत। जो लोग  आपकी अहमियत नहीं समझते , आपके प्यार की कीमत नहों जानते और आपके साथ सम्मान से नहों रहते, उनके पीछे अपना समय और जीवन बर्बाद मत  करो। आप किसी को इतना भी महत्व मत दो कि वो  लगे।-रामकृपा " आपको हल्का समझने ्हमेशा सच्चे और ईमानदार लोगों की सँंगति में रहो क्योंकि संगति का असर बहुत गहरा होता है। बुरे लोगों के साथ रहने से आपका भी चरित्र खराब हो है।-रामकृपा* মকনা *जहाँ आपकी कद्र नहीं वहाँ रुको मत। जो लोग  आपकी अहमियत नहीं समझते , आपके प्यार की कीमत नहों जानते और आपके साथ सम्मान से नहों रहते, उनके पीछे अपना समय और जीवन बर्बाद मत  करो। आप किसी को इतना भी महत्व मत दो कि वो  लगे।-रामकृपा " आपको हल्का समझने - ShareChat
🌹🌷🙏 #शुभ रविवार 🙏🌷🌹
शुभ रविवार - शुभ रविवार 22/02/26 ~्प्रातः बंदन~ 0 ऊ मित्राय भानवे FUN नम४ आदिदेव नमस्तृुर्भ्य प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुर्भ्य प्रभाकर नमोडस्तु ते।। | रमकृपा- सूर्यनारायण की कृपा से आप श्र सपरिवार सुखी, स्वस्थ एवं आनंदित रहें। शुभ रविवार 22/02/26 ~्प्रातः बंदन~ 0 ऊ मित्राय भानवे FUN नम४ आदिदेव नमस्तृुर्भ्य प्रसीदमम् भास्कर। दिवाकर नमस्तुर्भ्य प्रभाकर नमोडस्तु ते।। | रमकृपा- सूर्यनारायण की कृपा से आप श्र सपरिवार सुखी, स्वस्थ एवं आनंदित रहें। - ShareChat