बिनोद कुमार शर्मा
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#डां सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के पुण्य तिथि ,,🌺🌺
डां सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी के पुण्य तिथि - 1 APRIL अप्रैल एशिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण होना चाहिए" पूर्व राष्ट्रपति शिक्षणविद्, भारतरत्न प्रख्यात डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन V ii;i x Rinodkumar Sharma N^ 1 APRIL अप्रैल एशिक्षा का उद्देश्य चरित्र निर्माण होना चाहिए" पूर्व राष्ट्रपति शिक्षणविद्, भारतरत्न प्रख्यात डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जी को उनकी पुण्यतिथि पर कोटि-कोटि नमन V ii;i x Rinodkumar Sharma N^ - ShareChat
#🌷वैशाख अमावस्या 🙏🌺
🌷वैशाख अमावस्या - १७ अप्रैल সা9 মঞ্সী ঐথানামিতী কী भक्ति ओर आस्था के पर्व  वैशाख अमावस्या की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ४९ - fau] आपकी सभी भगवान मनोकामनाएं पूर्ण करें BF Binod kumar Sharma १७ अप्रैल সা9 মঞ্সী ঐথানামিতী কী भक्ति ओर आस्था के पर्व  वैशाख अमावस्या की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ४९ - fau] आपकी सभी भगवान मनोकामनाएं पूर्ण करें BF Binod kumar Sharma - ShareChat
*आज दिनांक 17/04/26* #श्री रामलला दर्शन अयोध्या
श्री रामलला दर्शन अयोध्या - गए हैं तो आज की जग স্ুতক্ুন ম সম্ম पहली हाजिरी   प्रभु श्री राम जी के चरणों में जय श्री राम प्रभु বি गए हैं तो आज की जग স্ুতক্ুন ম সম্ম पहली हाजिरी   प्रभु श्री राम जी के चरणों में जय श्री राम प्रभु বি - ShareChat
#जय माँ विंध्यवासिनी🙏🏻🚩
जय माँ  विंध्यवासिनी🙏🏻🚩 - वैशाख, कृष्ण पक्ष, तिथि अमावस्या, संवत् २०८३, दिन शुक्रवार, १७ अप्रैल २०२६७ * *जय जय मैय्या विंध्यवासिनी की* वैशाख, कृष्ण पक्ष, तिथि अमावस्या, संवत् २०८३, दिन शुक्रवार, १७ अप्रैल २०२६७ * *जय जय मैय्या विंध्यवासिनी की* - ShareChat
*स्वामी विवेकानंद की सीख:-* *स्वामी विवेकानंद के पास एक दिन एक युवक पहुंचा। उसके चेहरे पर बेचैनी साफ दिख रही थी। उसने कहा, “मैं कई साधु-संतों से मिला, मंदिरों में गया, आश्रमों में रहा, लेकिन मुझे वह नहीं मिला, जिसकी मुझे तलाश है।”* *स्वामी जी ने शांत स्वर में पूछा, “तुम आखिर चाहते क्या हो?”* *युवक बोला, “मैं शांति चाहता हूं। मैंने हनुमान जी की साधना की, ध्यान-योग किया, बड़े-बड़े शास्त्र पढ़े, खुद को एकांत में रखा, लेकिन मन की अशांति दूर नहीं हुई।”* *स्वामी जी ने ध्यान से उसकी बात सुनी और मुस्कुराकर बोले, “तुम्हारा रास्ता गलत नहीं है, लेकिन अधूरा है। सबसे पहले अपने उस एकांत कमरे के दरवाजे खोल दो, जिसमें तुम खुद को बंद करके साधना करते हो। फिर अपने घर के दरवाजे भी खोलो और बाहर निकलो।”* *युवक थोड़ा चौंका। स्वामी जी आगे बोले, “बाहर ऐसे बहुत लोग हैं जो दुखी हैं, बीमार हैं, गरीब हैं और असहाय हैं। उन्हें खोजो, उनकी मदद करो। यदि धन से मदद नहीं कर सकते, तो तन और मन से सेवा करो। किसी को ज्ञान दो, किसी को सहारा दो। एक महीने तक ऐसा करो और फिर मेरे पास आना।”* *युवक ने स्वामी जी की बात मानी। वह रोज बाहर निकलने लगा। उसने गरीब बच्चों को पढ़ाना शुरू किया, बीमारों की मदद की, बुजुर्गों का सहारा बना। धीरे-धीरे उसका मन बदलने लगा। जहां पहले उसे खालीपन महसूस होता था, अब वहां संतोष और सुकून भरने लगा।* *एक महीने बाद वह फिर स्वामी जी के पास पहुंचा। इस बार उसके चेहरे पर एक अलग ही चमक थी। उसने कहा, “स्वामी जी, मुझे शांति मिल गई। दूसरों की सेवा करते हुए जो संतोष मिला, वह किसी साधना में नहीं मिला था।”* *स्वामी जी बोले, “अब तुम साधना भी करो, ध्यान भी करो और शास्त्र भी पढ़ो, लेकिन सेवा को कभी मत छोड़ो। मानव सेवा ही सच्ची साधना है।”* *इस तरह युवक ने समझ लिया कि असली शांति बाहर की दुनिया से भागने में नहीं, बल्कि उसमें योगदान देने में है।* *प्रसंग की सीख-* *सिर्फ खुद पर नहीं, दूसरों के दुख पर भी ध्यान दें* *हम अक्सर अपनी समस्याओं में इतने उलझ जाते हैं कि दूसरों के दुख-दर्द को भूल जाते हैं। जब आप दूसरों की मदद करते हैं, तो आपका दृष्टिकोण बदलता है और मन हल्का होता है।* *सेवा को जीवन का हिस्सा बनाएं* *सेवा का मतलब केवल पैसे देना नहीं है। आप समय देकर, ज्ञान देकर या भावनात्मक सहारा देकर भी जरूरतमंद लोगों की सेवा कर सकते हैं। यह शुभ काम हमें संतुष्टि देता है।* *संतुलन बनाए रखें* *ध्यान, योग, पढ़ाई और सेवा- इन सबका संतुलन जरूरी है। केवल एक ही चीज पर ध्यान देने से जीवन अधूरा रह जाता है।* *एकांत से बाहर निकलें* *अकेले रहकर आत्म-चिंतन जरूरी है, लेकिन हमेशा खुद में बंद रहना मानसिक तनाव बढ़ा सकता है। समाज से जुड़ना भी उतना ही जरूरी है।* *छोटी-छोटी मदद का महत्व समझें* *जरूरी नहीं है कि किसी की बड़ी मदद की जाए। किसी को मुस्कान देना, रास्ता दिखाना या एक अच्छा शब्द कहना भी किसी के लिए बहुत मायने रखता है। छोटी-छोटी मदद करते रहना चाहिए।* *कृतज्ञता का भाव विकसित करें* *जब आप दूसरों की स्थिति देखते हैं, तो आपको एहसास होता है कि आपके पास कितना कुछ है। यह भावना आपको संतोष देती है।* *उद्देश्यपूर्ण जीवन जिएं* *जीवन का असली अर्थ केवल अपने लिए जीना नहीं है, बल्कि दूसरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। सच्ची शांति बाहर कहीं नहीं मिलती, बल्कि हमारे कर्मों में छिपी होती है। जब हम दूसरों के जीवन में खुशी लाते हैं, तो वही खुशी कई गुना होकर हमारे पास लौटती है।* *-रामकृपा-* #किस्से-कहानी
#श्री रामलला दर्शन अयोध्या
श्री रामलला दर्शन अयोध्या - आज के दर्शन श्री रामलला, अयोध्या धाम 163162026 Binod kumar Sharma A  आज के दर्शन श्री रामलला, अयोध्या धाम 163162026 Binod kumar Sharma A - ShareChat