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बिनोद कुमार शर्मा
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बिनोद कुमार शर्मा
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#श्री रामलला दर्शन अयोध्या
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बिनोद कुमार शर्मा
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#जय माँ विंध्यवासिनी🙏🏻🚩
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बिनोद कुमार शर्मा
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#जय महाकाल दर्शन।।
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बिनोद कुमार शर्मा
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*!! प्रथम अवसर !!* *एक किसान की बहुत ही सुन्दर बेटी थी। एक नौजवान लड़का उस किसान की बेटी से शादी की इच्छा लेकर किसान के पास आया।* *उसने किसान की बेटी से शादी करने की इच्छा जताई। किसान ने उसकी ओर देखा और कहा- युवक तुम खेत में जाओ, मैं एक-एक करके तीन बैल छोड़ने वाला हूँ। यदि तुम तीनों बैलों में से किसी एक की भी पूँछ पकड़ लो तो मैं अपनी बेटी की शादी तुमसे कर दूंगा।* *नौजवान इस आसान शर्त को सुनकर खुश हो गया और खेत में बैल की पूँछ पकड़ने की मुद्रा लेकर खडा हो गया। किसान ने खेत में स्थित घर का दरवाजा खोला। तभी एक बहुत ही बड़ा और खतरनाक बैल उसमें से निकला। नौजवान ने ऐसा बैल पहले कभी नहीं देखा था। अतः उससे डर कर नौजवान ने निर्णय लिया कि वह अगले बैल का इंतज़ार करेगा और वह एक तरफ हो गया जिससे बैल उसके पास से होकर निकल गया।* *दरवाजा फिर खुला, आश्चर्यजनक रूप से इस बार पहले से भी बड़ा और भयंकर बैल निकला। नौजवान ने सोचा कि इससे तो पहला वाला बैल ठीक था। फिर उसने एक ओर होकर बैल को निकल जाने दिया।* *दरवाजा तीसरी बार खुला, नौजवान के चहरे पर मुस्कान आ गई। इस बार एक छोटा और मरियल बैल निकला। जैसे ही बैल नौजवान के पास आने लगा, नौजवान ने उसकी पूँछ पकड़ने के लिए मुद्रा बना ली ताकि उसकी पूँछ सही समय पर पकड़ ले। पर यह क्या उस बैल की तो पूँछ ही नहीं थी।* *शिक्षा:-* *हर एक इंसान की जिन्दगी अवसरों से भरी हुई है। कुछ सरल हैं और कुछ कठिन। पर अगर एक बार अवसर गंवा दिया तो फिर वह अवसर दुबारा नहीं मिलेगा। अतः हमेशा प्रथम अवसर को हासिल करने का प्रयास करना चाहिए..!!* *-रामकृपा-*
#किस्से-कहानी
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बिनोद कुमार शर्मा
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#👌 अच्छी सोच👍
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🌹🌷🙏
#शुभ गुरुवार
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#श्री रामलला दर्शन अयोध्या
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#जय माँ विंध्यवासिनी🙏🏻🚩
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#जय महाकाल दर्शन।।
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बिनोद कुमार शर्मा
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*गुमशुदा शंख की कहानी* *भगवान विष्णु अपने शंख को अत्यंत प्रिय मानते थे और उसे कभी अपनी दृष्टि से दूर नहीं होने देते थे। एक दिन, वह रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। क्रोधित होकर विष्णु ने हर जगह खोजबीन की, अंततः कैलाश पर्वत पर उन्हें वही परिचित ध्वनि सुनाई दी।* *वहाँ नन्हे गणेश बड़ी प्रसन्नता से शंख बजा रहे थे। विष्णु ने उनसे शंख वापस मांगा, लेकिन गणेश ने मना कर दिया। यहाँ तक कि शिव ने भी कहा कि वे अपने पुत्र को विवश नहीं कर सकते। इसके बजाय, उन्होंने विष्णु को गणेश की पूजा करने की सलाह दी।* *अतः विष्णु ने पूर्ण श्रद्धा से पूजा की। पूजा से प्रसन्न होकर गणेश ने मुस्कुराते हुए शंख लौटा दिया।* *नैतिक शिक्षा: विनम्रता में बहुत शक्ति होती है। विष्णु ने भी आदर दिखाया, जिससे हमें याद दिलाया जाता है कि सच्चे मन से सिर झुकाने से कोई भी ऊपर नहीं है।* *-रामकृपा-*
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