बिनोद कुमार शर्मा
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बिनोद कुमार शर्मा
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#जय महाकाल दर्शन।।
जय महाकाल दर्शन।। - जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज ३का सायंकालीन आरती श्रृंगार दर्शन* ः फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तिथि - दशमी, संवत् २०८२, दिन -बृहस्पतिवार, २६ फरवरी २०२६७ * ऊँ नमः शिवाय* श्री महाकालेश्वर संध्या आरती दर्शन % 43 63 जय श्री महाकाल *श्री महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का आज ३का सायंकालीन आरती श्रृंगार दर्शन* ः फाल्गुन, शुक्ल पक्ष, तिथि - दशमी, संवत् २०८२, दिन -बृहस्पतिवार, २६ फरवरी २०२६७ * ऊँ नमः शिवाय* श्री महाकालेश्वर संध्या आरती दर्शन % 43 63 - ShareChat
*सफलता का अभिमान* *दरोगा पत्नी ने बेरोज़गार पति को अपमानित किया 5 मिनट बाद SP आए और सैल्यूट किया पूरा थाना सन्न रह गया...!!* *अहंकार की वर्दी और स्वाभिमान का सैल्यूट: एक अनकही दास्तान...!!* *मधुपुर गाँव में सुबह की शुरुआत मिठाई की दुकान से उठने वाली इलायची और केसर की खुशबू से होती थी। राघव, एक साधारण कद-काठी का युवक, जिसके चेहरे पर हमेशा एक सौम्य मुस्कान रहती थी, अपने पिता मोहन साहब की मदद करता था। राघव केवल एक हलवाई का बेटा नहीं था, वह गाँव की उम्मीद था।* *यूपीएससी (UPSC) की तैयारी के लिए जब वह दिल्ली गया, तो उसके पास जेब में कम और आँखों में सपने ज्यादा थे...!!* *दिल्ली के मुखर्जी नगर की एक छोटी सी कोठरी में राघव ने सात साल बिताए। वहीं उसकी मुलाकात अभिषेक से हुई। अभिषेक के पास प्रतिभा थी, लेकिन संसाधन नहीं। राघव अक्सर अपनी रातों की नींद और ट्यूशन के पैसे अभिषेक की फीस के लिए दे देता था। वह कहता, “दोस्त, आज तू पढ़ ले, कल जब तू अफसर बनेगा तो देश का भला होगा।” राघव का खुद का चयन नहीं हुआ, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। वह मधुपुर लौटा ताकि अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बन सके...!!* *गाँव लौटने के बाद राघव की शादी निधि से हुई। निधि एक महत्वाकांक्षी लड़की थी। शादी के ही दिन जब निधि के दरोगा बनने की खबर आई, तो राघव ने उसे अपनी जीत माना। उसने तय किया कि वह घर संभालेगा ताकि निधि अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से कर सके....!!* *निधि की पोस्टिंग शहर के एक प्रमुख थाने में हुई। राघव हर सुबह 4 बजे उठता, निधि के लिए नाश्ता बनाता, उसकी वर्दी प्रेस करता और दोपहर का गर्म खाना लेकर थाने पहुँचता। लेकिन धीरे-धीरे निधि के व्यवहार में जहर घुलने लगा। उसे अब राघव की सादगी “गँवारपन” लगने लगी। वह अपने सहकर्मियों के सामने राघव को अपना पति बताने में शर्म महसूस करने लगी...!!* *एक दिन जब राघव टिफिन लेकर पहुँचा, तो निधि ने उसे कोने में ले जाकर फुसफुसाते हुए कहा, “अगली बार यहाँ आओ तो ये फटे पुराने कपड़े मत पहनना। और अगर कोई पूछे, तो कहना तुम घर के नौकर हो। एक दरोगा का पति बेरोजगार हो, यह मेरी प्रतिष्ठा के खिलाफ है।” राघव के पैर जैसे जमीन में धँस गए, लेकिन वह खामोश रहा...!!* *पूरे जिले में चर्चा थी कि नए एसपी (Superintendent of Police) साहब अचानक किसी भी थाने का औचक निरीक्षण कर सकते हैं। निधि और पूरा थाना तनाव में था। उस दिन भारी बारिश हो रही थी। राघव ने सोचा कि निधि सुबह से भूखी होगी, वह छाता लेकर और टिफिन थामे थाने पहुँचा...!!* *थाने के आंगन में जैसे ही राघव ने कदम रखा, निधि का पारा चढ़ गया। वह पहले से ही काम के बोझ से चिड़चिड़ी थी। उसने सबके सामने राघव का हाथ झटक दिया और चिल्लाकर बोली, “तू समझता क्यों नहीं? तेरी हैसियत क्या है जो बार-बार यहाँ चला आता है? तू मेरी वर्दी का अपमान है! निकल जा यहाँ से और फिर कभी अपनी ये मनहूस शक्ल मत दिखाना...!!* *हवलदार और सिपाही ठहाके लगाने लगे। राघव की आँखों से आँसू छलक पड़े, लेकिन उसने एक शब्द भी नहीं कहा। उसने बस चुपचाप टिफिन बेंच पर रखा और मुड़ने ही वाला था कि तभी सायरन की आवाज से पूरा थाना गूँज उठा...!!* *एसपी साहब का काफिला थाने के गेट पर आकर रुका।*निधि और सभी सिपाही एक कतार में खड़े होकर ‘सावधान’ की मुद्रा में आ गए। नई चमकती वर्दी में सजे एसपी साहब गाड़ी से उतरे। उनकी नजर अचानक बारिश में भीग रहे और टिफिन छोड़कर जा रहे राघव पर पड़ी...!!* *एसपी साहब के कदम ठिठक गए। उन्होंने अपनी कैप ठीक की और पूरी ताकत से राघव की ओर दौड़े। पूरे थाने के सामने, जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी ने राघव के सामने रुककर एक शानदार सैल्यूट किया...!!* *निधि की आँखें फटी की फटी रह गईं। एसपी साहब ने राघव को कसकर गले लगा लिया। वे और कोई नहीं, बल्कि राघव के पुराने दोस्त अभिषेक थे।* *अभिषेक ने नम आँखों से सबकी ओर देखा और गरजते हुए बोले, “आज अगर मैं जिले का कप्तान हूँ, तो सिर्फ इस इंसान की वजह से। जब मेरे पास एक वक्त की रोटी के पैसे नहीं थे, तब इस ‘बेरोजगार’ कहे जाने वाले महान व्यक्ति ने अपना भविष्य दांव पर लगाकर मेरा भविष्य बनाया था। निधि जी, वर्दी पद देती है, लेकिन संस्कार और कृतज्ञता इंसान को महान बनाती है...!!* *निधि के हाथों से उसकी फाइल गिर गई। उसे अहसास हुआ कि उसने जिस ‘पत्थर’ को ठोकर मारी थी, वह असल में पारस था। उसी शाम राघव के घर एक लिफाफा पहुँचा।* *यूपीएससी के परिणाम घोषित हुए थे और राघव का चयन ‘प्रशासनिक सेवा’ में हो चुका था...!!* *राघव अब ‘साहब’ बन चुका था, लेकिन उसके स्वभाव में वही सादगी थी। निधि रोते हुए उसके पैरों में गिर गई। राघव ने उसे उठाया और शांति से कहा, “निधि, पद और पैसा आने-जाने वाली चीजें हैं। इंसान की असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपने से कमजोर के साथ कैसा व्यवहार करता है। मैंने तुम्हें माफ किया, लेकिन याद रखना—किसी की गरीबी उसका चरित्र तय नहीं करती...!!* *निष्कर्ष* *यह कहानी हमें सिखाती है कि सफलता का अहंकार अक्सर हमें अंधा कर देता है। हमें उन लोगों का हाथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए जिन्होंने हमें गिरते वक्त संभाला था। राघव ने साबित कर दिया कि खामोशी में इतिहास रचने की ताकत होती है...!!!!* *-जय शिव -* #किस्से-कहानी
*बाबा की महिमा*(सच्ची कहानी) तलाक के सालों बाद DM बनी पत्नी पहुंची बैद्यनाथ धाम, सामने भीख मांग रहा था अपाहिज पति; फिर जो हुआ...!! महादेव के दरबार में न्याय: जब DM पत्नी को सालों बाद मिला अपना अपाहिज पति प्रस्तावना: नियति का लेखा-जोखा कहते हैं कि बैद्यनाथ धाम में महादेव के दर्शन के लिए वही आता है जिसे बाबा बुलाते हैं। लेकिन कभी-कभी बाबा सिर्फ दर्शन देने के लिए नहीं, बल्कि कर्मों का हिसाब चुकता करने के लिए बुलाते हैं। यह कहानी है “शालिनी” और “राघव” की। 10 साल पहले एक गलतफहमी और गरीबी ने इन्हें अलग कर दिया था। आज शालिनी उस जिले की DM (District Magistrate) है, और राघव उसी मंदिर की चौखट पर एक ऐसी हालत में है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती...!! 10 साल पहले राघव और शालिनी एक छोटे से कस्बे में रहते थे। राघव एक फैक्ट्री में काम करता था और शालिनी का सपना प्रशासनिक अधिकारी बनने का था। राघव ने अपनी पूरी जमा-पूंजी और रातों की नींद शालिनी की पढ़ाई पर कुर्बान कर दी। लेकिन एक दिन फैक्ट्री में हुए एक भीषण हादसे में राघव ने अपने दोनों पैर खो दिए...!! अपाहिज होने के बाद राघव को लगा कि वह अब शालिनी के लिए सिर्फ एक बोझ बन जाएगा। उसी समय शालिनी के परिवार ने उस पर दबाव डाला कि वह एक ‘अपाहिज’ के साथ अपनी जिंदगी बर्बाद न करे। राघव ने एक कठोर फैसला लिया। उसने शालिनी से कहा कि वह अब उससे प्यार नहीं करता और उसे किसी अमीर लड़की के साथ रहना है। शालिनी ने राघव को पत्थर दिल समझा और नफरत के साथ घर छोड़ दिया। तलाक के बाद शालिनी ने खुद को पढ़ाई में झोंक दिया और अंततः DM बन गई...!! सावन का महीना था। बैद्यनाथ धाम (Deoghar) में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी थी। शालिनी, जो अब उस क्षेत्र की कद्दावर DM थी, सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेने के लिए मंदिर परिसर पहुँची। लाल बत्ती की गाड़ी, पुलिस का काफिला और चारों तरफ “मैडम साहिबा” के नारे। शालिनी का रुतबा देखकर कोई नहीं कह सकता था कि इस सख्त अधिकारी के अंदर एक टूटा हुआ दिल भी धड़कता है...!! शालिनी मंदिर की सीढ़ियों की तरफ बढ़ रही थी कि अचानक उसकी नजर मंदिर के एक कोने में पड़े एक शख्स पर पड़ी। वह शख्स एक पुरानी लकड़ी की रेहड़ी (skate-board) पर बैठा था और अपने हाथों के सहारे घिसट रहा था...!! शालिनी के कदम वहीं रुक गए। पुलिस वाले उसे आगे बढ़ने के लिए कह रहे थे, लेकिन शालिनी की नजरें उस ‘अपाहिज’ शख्स पर जमी थीं। वह शख्स फटे-पुराने कपड़ों में था, चेहरा धूल से भरा था, लेकिन उसकी आँखों में वही पुरानी चमक थी जो कभी शालिनी की दुनिया हुआ करती थी...!! वह राघव था। शालिनी का पूर्व पति। वह शख्स जिसने शालिनी को ऑफिसर बनाने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया था, आज मंदिर के बाहर भक्तों द्वारा फेंके गए सिक्कों को इकट्ठा कर रहा था...!! शालिनी के हाथ कांपने लगे। उसने अपना चश्मा हटाया और धीरे से पुकारा— “राघव?...?? राघव ने जैसे ही वह आवाज सुनी, उसका शरीर सुन्न हो गया। उसने सिर उठाकर देखा—सामने जिले की सबसे बड़ी अधिकारी खड़ी थी। राघव ने अपनी नजरें झुका लीं और अपनी रेहड़ी को तेजी से पीछे धकेलने लगा। वह नहीं चाहता था कि उसकी ‘अफसर’ पत्नी उसे इस हाल में देखे...!! शालिनी दौड़कर उसके पास गई और उसके सामने सड़क पर ही घुटनों के बल बैठ गई। “मैडम, आप नीचे मत बैठिए, कपड़े खराब हो जाएंगे,” राघव ने धीमी आवाज में कहा...!! शालिनी चीख पड़ी— “ये क्या हाल बना रखा है तुमने? और वह सब झूठ क्यों बोला था कि तुम किसी और के साथ रहना चाहते हो?...?? तभी पास ही खड़ा एक पुजारी बोला— “मैडम, आप इस गरीब को जानती हैं? ये पिछले 5 सालों से यहाँ है। जितना भी पैसा इसे भीख में मिलता है, वह सब ये चुपचाप उन लड़कियों की पढ़ाई के लिए दान कर देता है जिनके पास पैसे नहीं होते। ये कहता है कि इसकी पत्नी भी एक बहुत बड़ी अफसर है और उसे उस पर गर्व है...!! शालिनी को अपनी नफरत पर पछतावा होने लगा। उसे समझ आया कि राघव ने 10 साल पहले वह नाटक सिर्फ इसलिए किया था ताकि शालिनी एक अपाहिज पति की सेवा में अपनी जिंदगी बर्बाद न करे और अपना सपना पूरा कर सके। उसने अपनी खुशियाँ कुर्बान कर दीं ताकि शालिनी एक बड़ी अधिकारी बन सके...!! शालिनी ने वहीं महादेव के मंदिर के सामने सबके सामने राघव का हाथ पकड़ा। उसने अपने सुरक्षाकर्मियों से कहा— “गाड़ी लाओ...!! राघव ने मना किया— “शालिनी, तुम एक DM हो। तुम्हारा रुतबा, तुम्हारी इज्जत… समाज क्या कहेगा कि एक ऑफिसर का पति एक भिखारी है?...?? शालिनी ने पलट कर जवाब दिया— “समाज ने मुझे ऑफिसर नहीं बनाया, तुमने बनाया है। और आज से यह DM तुम्हारी पत्नी बाकी बाद में है, तुम्हारी कर्जदार पहले है...!! शालिनी राघव को अपनी सरकारी गाड़ी में बिठाकर अपने बंगले पर ले गई। उसने उसी दिन सबके सामने घोषणा की कि वह अपनी जिंदगी के सबसे बड़े नायक को वापस पा चुकी है। उसने राघव का इलाज करवाया और उसे वह सम्मान दिया जिसका वह हकदार था...!! गाँव के लोग और मंदिर के श्रद्धालु यह मंजर देखकर रो पड़े। लोगों को यकीन हो गया कि बैद्यनाथ धाम में सिर्फ बीमारियाँ ठीक नहीं होतीं, बल्कि टूटे हुए रिश्ते और बिखरी हुई जिंदगियाँ भी फिर से जुड़ जाती हैं...!! सच्चा प्यार और त्याग यह कहानी हमें सिखाती है कि: दिखावा और पद क्षणभंगुर हैं, लेकिन त्याग और प्रेम अमर हैं...!! किसी के खामोश फैसले के पीछे अक्सर बहुत बड़ा बलिदान छिपा होता है...!! सफलता का असली स्वाद तब आता है जब आप उस इंसान के साथ हों जिसने आपको उस मुकाम तक पहुँचाने के लिए खुद को मिटा दिया...!! आज बैद्यनाथ धाम की उन सीढ़ियों पर एक बोर्ड लगा है, जो लड़कियों की शिक्षा में मदद करता है। उस बोर्ड को शालिनी ने अपने पति राघव के नाम पर लगवाया है। इस प्रकार महादेव के दरबार में न्याय हुआ ...!! ‌🙏*-बोल बम-*🙏 #किस्से-कहानी
*🌳 बन्द मुठ्ठी लाख की 🌳* *एक समय एक राज्य में राजा ने घोषणा की कि वह राज्य के मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए अमुक दिन जाएगा।* *इतना सुनते ही मंदिर के पुजारी ने मंदिर की रंग रोगन और सजावट करना शुरू कर दिया, क्योंकि राजा आने वाले थे। इस खर्चे के लिए उसने ₹6000/- का कर्ज लिया।* *नियत तिथि पर राजा मंदिर में दर्शन, पूजा, अर्चना के लिए पहुंचे और पूजा अर्चना करने के बाद आरती की थाली में *चार आने दक्षिणा* *स्वरूप रखें और अपने महल में प्रस्थान कर गए!* *पूजा की थाली में चार आने देखकर पुजारी बड़ा नाराज हुआ, उसे लगा कि राजा जब मंदिर में आएंगे तो काफी दक्षिणा मिलेगी पर चार आने !!* *बहुत ही दुखी हुआ कि कर्ज कैसे चुका पाएगा, इसलिए उसने एक उपाय सोचा !!!* *गांव भर में ढिंढोरा पिटवाया की राजा की दी हुई वस्तु को वह नीलाम कर रहा है। नीलामी पर उसने अपनी मुट्ठी में चार आने रखे पर मुट्ठी बंद रखी और किसी को दिखाई नहीं।* *लोग समझे की राजा की दी हुई वस्तु बहुत अमूल्य होगी इसलिए बोली रु10,000/- से शुरू हुई।* *रु 10,000/- की बोली बढ़ते बढ़ते रु 50,000/- तक पहुंची और पुजारी ने वो वस्तु फिर भी देने से इनकार कर दिया। यह बात राजा के कानों तक पहुंची।* *राजा ने अपने सैनिकों से पुजारी को बुलवाया और पुजारी से निवेदन किया कि वह मेरी वस्तु को नीलाम ना करें मैं तुम्हें रु50,000/-की बजाय *सवा लाख रुपए* *देता हूं और इस प्रकार राजा ने *सवा लाख रुपए देकर अपनी प्रजा के सामने अपनी इज्जत को बचाया !* *तब से यह कहावत बनी *बंद मुट्ठी सवा लाख की खुल गई तो खाक की !!* *यह मुहावरा आज भी प्रचलन में है।* *-जय शिव -* #किस्से-कहानी