*सफलता का अभिमान*
*दरोगा पत्नी ने बेरोज़गार पति को अपमानित किया 5 मिनट बाद SP आए और सैल्यूट किया पूरा थाना सन्न रह गया...!!*
*अहंकार की वर्दी और स्वाभिमान का सैल्यूट: एक अनकही दास्तान...!!*
*मधुपुर गाँव में सुबह की शुरुआत मिठाई की दुकान से उठने वाली इलायची और केसर की खुशबू से होती थी। राघव, एक साधारण कद-काठी का युवक, जिसके चेहरे पर हमेशा एक सौम्य मुस्कान रहती थी, अपने पिता मोहन साहब की मदद करता था। राघव केवल एक हलवाई का बेटा नहीं था, वह गाँव की उम्मीद था।* *यूपीएससी (UPSC) की तैयारी के लिए जब वह दिल्ली गया, तो उसके पास जेब में कम और आँखों में सपने ज्यादा थे...!!*
*दिल्ली के मुखर्जी नगर की एक छोटी सी कोठरी में राघव ने सात साल बिताए। वहीं उसकी मुलाकात अभिषेक से हुई। अभिषेक के पास प्रतिभा थी, लेकिन संसाधन नहीं। राघव अक्सर अपनी रातों की नींद और ट्यूशन के पैसे अभिषेक की फीस के लिए दे देता था। वह कहता, “दोस्त, आज तू पढ़ ले, कल जब तू अफसर बनेगा तो देश का भला होगा।” राघव का खुद का चयन नहीं हुआ, लेकिन उसने कभी हार नहीं मानी। वह मधुपुर लौटा ताकि अपने बूढ़े माता-पिता का सहारा बन सके...!!*
*गाँव लौटने के बाद राघव की शादी निधि से हुई। निधि एक महत्वाकांक्षी लड़की थी। शादी के ही दिन जब निधि के दरोगा बनने की खबर आई, तो राघव ने उसे अपनी जीत माना। उसने तय किया कि वह घर संभालेगा ताकि निधि अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा से कर सके....!!*
*निधि की पोस्टिंग शहर के एक प्रमुख थाने में हुई। राघव हर सुबह 4 बजे उठता, निधि के लिए नाश्ता बनाता, उसकी वर्दी प्रेस करता और दोपहर का गर्म खाना लेकर थाने पहुँचता। लेकिन धीरे-धीरे निधि के व्यवहार में जहर घुलने लगा। उसे अब राघव की सादगी “गँवारपन” लगने लगी। वह अपने सहकर्मियों के सामने राघव को अपना पति बताने में शर्म महसूस करने लगी...!!*
*एक दिन जब राघव टिफिन लेकर पहुँचा, तो निधि ने उसे कोने में ले जाकर फुसफुसाते हुए कहा, “अगली बार यहाँ आओ तो ये फटे पुराने कपड़े मत पहनना। और अगर कोई पूछे, तो कहना तुम घर के नौकर हो। एक दरोगा का पति बेरोजगार हो, यह मेरी प्रतिष्ठा के खिलाफ है।” राघव के पैर जैसे जमीन में धँस गए, लेकिन वह खामोश रहा...!!*
*पूरे जिले में चर्चा थी कि नए एसपी (Superintendent of Police) साहब अचानक किसी भी थाने का औचक निरीक्षण कर सकते हैं। निधि और पूरा थाना तनाव में था। उस दिन भारी बारिश हो रही थी। राघव ने सोचा कि निधि सुबह से भूखी होगी, वह छाता लेकर और टिफिन थामे थाने पहुँचा...!!*
*थाने के आंगन में जैसे ही राघव ने कदम रखा, निधि का पारा चढ़ गया। वह पहले से ही काम के बोझ से चिड़चिड़ी थी। उसने सबके सामने राघव का हाथ झटक दिया और चिल्लाकर बोली, “तू समझता क्यों नहीं? तेरी हैसियत क्या है जो बार-बार यहाँ चला आता है? तू मेरी वर्दी का अपमान है! निकल जा यहाँ से और फिर कभी अपनी ये मनहूस शक्ल मत दिखाना...!!*
*हवलदार और सिपाही ठहाके लगाने लगे। राघव की आँखों से आँसू छलक पड़े, लेकिन उसने एक शब्द भी नहीं कहा। उसने बस चुपचाप टिफिन बेंच पर रखा और मुड़ने ही वाला था कि तभी सायरन की आवाज से पूरा थाना गूँज उठा...!!*
*एसपी साहब का काफिला थाने के गेट पर आकर रुका।*निधि और सभी सिपाही एक कतार में खड़े होकर ‘सावधान’ की मुद्रा में आ गए। नई चमकती वर्दी में सजे एसपी साहब गाड़ी से उतरे। उनकी नजर अचानक बारिश में भीग रहे और टिफिन छोड़कर जा रहे राघव पर पड़ी...!!*
*एसपी साहब के कदम ठिठक गए। उन्होंने अपनी कैप ठीक की और पूरी ताकत से राघव की ओर दौड़े। पूरे थाने के सामने, जिले के सबसे बड़े पुलिस अधिकारी ने राघव के सामने रुककर एक शानदार सैल्यूट किया...!!*
*निधि की आँखें फटी की फटी रह गईं। एसपी साहब ने राघव को कसकर गले लगा लिया। वे और कोई नहीं, बल्कि राघव के पुराने दोस्त अभिषेक थे।*
*अभिषेक ने नम आँखों से सबकी ओर देखा और गरजते हुए बोले, “आज अगर मैं जिले का कप्तान हूँ, तो सिर्फ इस इंसान की वजह से। जब मेरे पास एक वक्त की रोटी के पैसे नहीं थे, तब इस ‘बेरोजगार’ कहे जाने वाले महान व्यक्ति ने अपना भविष्य दांव पर लगाकर मेरा भविष्य बनाया था। निधि जी, वर्दी पद देती है, लेकिन संस्कार और कृतज्ञता इंसान को महान बनाती है...!!*
*निधि के हाथों से उसकी फाइल गिर गई। उसे अहसास हुआ कि उसने जिस ‘पत्थर’ को ठोकर मारी थी, वह असल में पारस था। उसी शाम राघव के घर एक लिफाफा पहुँचा।* *यूपीएससी के परिणाम घोषित हुए थे और राघव का चयन ‘प्रशासनिक सेवा’ में हो चुका था...!!*
*राघव अब ‘साहब’ बन चुका था, लेकिन उसके स्वभाव में वही सादगी थी। निधि रोते हुए उसके पैरों में गिर गई। राघव ने उसे उठाया और शांति से कहा, “निधि, पद और पैसा आने-जाने वाली चीजें हैं। इंसान की असली पहचान इस बात से होती है कि वह अपने से कमजोर के साथ कैसा व्यवहार करता है। मैंने तुम्हें माफ किया, लेकिन याद रखना—किसी की गरीबी उसका चरित्र तय नहीं करती...!!*
*निष्कर्ष*
*यह कहानी हमें सिखाती है कि सफलता का अहंकार अक्सर हमें अंधा कर देता है। हमें उन लोगों का हाथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए जिन्होंने हमें गिरते वक्त संभाला था। राघव ने साबित कर दिया कि खामोशी में इतिहास रचने की ताकत होती है...!!!!*
*-जय शिव -* #किस्से-कहानी

